महासागर से मिलने वाले लाभों पर मानवीय गतिविधियों का नकारात्मक असर

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से बेहतर ढँग से उबरने और टिकाऊ विकास व जलवायु कार्रवाई पर सहमत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये महासागरों के प्रति समझ का दायरा बढ़ाना बेहद अहम है. यूएन प्रमुख ने महासागरों को पृथ्वी की जीवनरक्षक प्रणाली क़रार देते हुए बुधवार को इस विषय में एक नई रिपोर्ट को जारी किया है, जो दर्शाती है कि मानवीय गतिविधियों के कारण महासागर को नुक़सान पहुँच रहा है.

विश्व महासागर मूल्याँकन (WOA II) का दूसरे संस्करण को विश्व भर के सैकड़ों वैज्ञानिकों के सहयोग से तैयार किया गया है. इससे पहले वर्ष 2015 में शुरुआती रिपोर्ट को प्रकाशित किया गया था.
अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि महासागरों से मिलने वाले अनेक लाभ, मानवीय गतिविधियों के कारण कमज़ोर हो रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस असर पर अपने वीडियो मौजूदा हालात को चिन्ताजनक बताते हुए कहा कि मानवीय गतिविधियों के दबाव से महासागरों का क्षरण जारी है. मूँगा चट्टानों और खारे पाने में उगने वाले पेड या झाडियाँ (Mangroves) जैसे अहम पर्यावास तबाह हो रहे हैं.
इससे जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने की उनकी क्षमता प्रभावित हो रही है.
“मानवीय गतिविधियों से ये दबाब भूमि व तटीय इलाक़ों पर भी आते हैं, जिससे ख़तरनाक प्रदूषक महासागर तक आते हैं, जिनमें प्लास्टिक कचरा भी है.”
महासचिव ने बताया कि वातावरण में उत्सर्जित होने वाली कार्बन से महासागरों का तापमान व अम्लीकरण बढ़ रहा है, जिससे जैवविविधता को भारी नुक़सान हुआ है.
समुद्री जल स्तर में बढ़ोत्तरी दुनिया में तटीय इलाक़ों को ख़तरे में डाल रही है.
‘मृत ज़ोन’ में उभार
यूएन प्रमुख के मुताबिक महासागरों में मृत ज़ोन (Dead zone) की संख्या बढ़ रही है और लगभग दोगुनी हो चुकी है – ये वो इलाक़े हैं जहाँ ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम है और समुद्री जीवन की सम्भावना कम है.

UN Environment Programmeभारत के मुंबई शहर के समुद्री किनारों पर प्लास्टिक कचरा बिखरा पड़ा है जो वन्यजीवों के लिए बेहद नुक़सानदेह है.

वर्ष 2008 में विश्व भर में यह 400 से 2019 में बढकर यह 700 हो चुकी है.
“विशेषज्ञ इसकी वजह तटों व महासागरों के एकीकृत टिकाऊ प्रबन्धन को हासिल करने में हमारी मोटे तौर पर विफलता को बताते हैं.”
“मैं सभी पक्षकारों से इस बात और अन्य चेतावनियों पर ध्यान देने का आग्रह करता हूँ. महासागरों के प्रति बेहतर समझ बेहद महत्वपूर्ण है.”
यूएन प्रमुख ने कहा कि महामारी ने दर्शाया है कि मानव स्वास्थ्य और पृथ्वी का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा है.
महासचिव गुटेरेश ने बेहतर ढँग से उबरने, टिकाऊ विकास को हासिल करने और पेरिस समझौते के तहत वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये प्रकृति के साथ रिश्ते को पूरी तरह बदलने को अहम बताया है.
बेहतर पुनर्बहाली
महासचिव ने अध्ययन के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि महासागरों का टिकाऊपन सामूहिक प्रयासों पर निर्भर करता है. साझा शोध, क्षमता विकास, आँकड़ों, सूचना व टैक्नॉलॉजी को साझा किया जाना.
“हमें वैज्ञानिक ज्ञान और नीतिनिर्माण को बेहतर ढँग से एकीकृत करने की भी आवश्यकता है.”
इस वर्ष, टिकाऊ विकास के लिये महासागर विज्ञान के यूएन दशक की शुरुआत हुई है. यूएन प्रमुख के मुताबिक यह दशक इस लक्ष्य को हासिल करने के लिये सामूहिक कार्रवाई का फ्रेमवर्क प्रदान करता है.
उन्होंने कहा कि इस समीक्षा के निष्कर्ष, इस वर्ष जैवविविधता, जलवायु और अन्य उच्चस्तरीय बैठकों व आयोजनों में महत्वाकाँक्षी नतीजों की तात्कालिक ज़रूरत को रेखांकित करते हैं.
यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि एक साथ मिलकर, कोविड-19 से हम ना सिर्फ़ एक हरित बल्कि महासागर अनुकूल (Blue recovery) पुनर्बहाली को साकार किया जा सकता है.
इससे दीर्घकाल में महासागरों के साथ एक सुदृढ़ और टिकाऊ सम्बन्ध को सुनिश्चित किया जा सकेगा., संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से बेहतर ढँग से उबरने और टिकाऊ विकास व जलवायु कार्रवाई पर सहमत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये महासागरों के प्रति समझ का दायरा बढ़ाना बेहद अहम है. यूएन प्रमुख ने महासागरों को पृथ्वी की जीवनरक्षक प्रणाली क़रार देते हुए बुधवार को इस विषय में एक नई रिपोर्ट को जारी किया है, जो दर्शाती है कि मानवीय गतिविधियों के कारण महासागर को नुक़सान पहुँच रहा है.

विश्व महासागर मूल्याँकन (WOA II) का दूसरे संस्करण को विश्व भर के सैकड़ों वैज्ञानिकों के सहयोग से तैयार किया गया है. इससे पहले वर्ष 2015 में शुरुआती रिपोर्ट को प्रकाशित किया गया था.

अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि महासागरों से मिलने वाले अनेक लाभ, मानवीय गतिविधियों के कारण कमज़ोर हो रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस असर पर अपने वीडियो मौजूदा हालात को चिन्ताजनक बताते हुए कहा कि मानवीय गतिविधियों के दबाव से महासागरों का क्षरण जारी है. मूँगा चट्टानों और खारे पाने में उगने वाले पेड या झाडियाँ (Mangroves) जैसे अहम पर्यावास तबाह हो रहे हैं.

इससे जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने की उनकी क्षमता प्रभावित हो रही है.

“मानवीय गतिविधियों से ये दबाब भूमि व तटीय इलाक़ों पर भी आते हैं, जिससे ख़तरनाक प्रदूषक महासागर तक आते हैं, जिनमें प्लास्टिक कचरा भी है.”

महासचिव ने बताया कि वातावरण में उत्सर्जित होने वाली कार्बन से महासागरों का तापमान व अम्लीकरण बढ़ रहा है, जिससे जैवविविधता को भारी नुक़सान हुआ है.

समुद्री जल स्तर में बढ़ोत्तरी दुनिया में तटीय इलाक़ों को ख़तरे में डाल रही है.

‘मृत ज़ोन’ में उभार

यूएन प्रमुख के मुताबिक महासागरों में मृत ज़ोन (Dead zone) की संख्या बढ़ रही है और लगभग दोगुनी हो चुकी है – ये वो इलाक़े हैं जहाँ ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम है और समुद्री जीवन की सम्भावना कम है.


UN Environment Programme
भारत के मुंबई शहर के समुद्री किनारों पर प्लास्टिक कचरा बिखरा पड़ा है जो वन्यजीवों के लिए बेहद नुक़सानदेह है.

वर्ष 2008 में विश्व भर में यह 400 से 2019 में बढकर यह 700 हो चुकी है.

“विशेषज्ञ इसकी वजह तटों व महासागरों के एकीकृत टिकाऊ प्रबन्धन को हासिल करने में हमारी मोटे तौर पर विफलता को बताते हैं.”

“मैं सभी पक्षकारों से इस बात और अन्य चेतावनियों पर ध्यान देने का आग्रह करता हूँ. महासागरों के प्रति बेहतर समझ बेहद महत्वपूर्ण है.”

यूएन प्रमुख ने कहा कि महामारी ने दर्शाया है कि मानव स्वास्थ्य और पृथ्वी का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा है.

महासचिव गुटेरेश ने बेहतर ढँग से उबरने, टिकाऊ विकास को हासिल करने और पेरिस समझौते के तहत वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये प्रकृति के साथ रिश्ते को पूरी तरह बदलने को अहम बताया है.

बेहतर पुनर्बहाली

महासचिव ने अध्ययन के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि महासागरों का टिकाऊपन सामूहिक प्रयासों पर निर्भर करता है. साझा शोध, क्षमता विकास, आँकड़ों, सूचना व टैक्नॉलॉजी को साझा किया जाना.

“हमें वैज्ञानिक ज्ञान और नीतिनिर्माण को बेहतर ढँग से एकीकृत करने की भी आवश्यकता है.”

इस वर्ष, टिकाऊ विकास के लिये महासागर विज्ञान के यूएन दशक की शुरुआत हुई है. यूएन प्रमुख के मुताबिक यह दशक इस लक्ष्य को हासिल करने के लिये सामूहिक कार्रवाई का फ्रेमवर्क प्रदान करता है.

उन्होंने कहा कि इस समीक्षा के निष्कर्ष, इस वर्ष जैवविविधता, जलवायु और अन्य उच्चस्तरीय बैठकों व आयोजनों में महत्वाकाँक्षी नतीजों की तात्कालिक ज़रूरत को रेखांकित करते हैं.

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि एक साथ मिलकर, कोविड-19 से हम ना सिर्फ़ एक हरित बल्कि महासागर अनुकूल (Blue recovery) पुनर्बहाली को साकार किया जा सकता है.

इससे दीर्घकाल में महासागरों के साथ एक सुदृढ़ और टिकाऊ सम्बन्ध को सुनिश्चित किया जा सकेगा.

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