मानवता, पृथ्वी व समृद्धि के लिये वन संरक्षण ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सरकारों और लोगों का आहवान किया है कि वनों की रक्षा करने और वन समुदायों को समर्थन देने के लिये प्रयास तेज़ किये जाने होंगे. यूएन प्रमुख ने, बुधवार, 3 मार्च, को विश्व वन्यजीवन दिवस (World Wildlife Day) के अवसर पर अपने सन्देश में, वन संसाधनों के अरक्षणीय प्रयोग और वन्यजीवों की तस्करी से उपजते ख़तरों के प्रति भी आगाह किया है.  

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि वनों की रक्षा के उपाय सुनिश्चित करने से टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी मदद मिलेगी. 

Forests are home to 80% of all terrestrial wildlife.The ecosystems they sustain are essential to global biodiversity, human livelihoods & the broader needs of societies & economies globally.Learn more ahead of tomorrow’s #WorldWildlifeDay: https://t.co/K6RLxm6z11#ForNature pic.twitter.com/ms04zJLKoY— UN Environment Programme (@UNEP) March 2, 2021

यूएन प्रमुख ने वनों से मिलने वाले लाभों को रेखांकित करते हुए कहा कि दुनिया में कुल जंगली प्रजातियों का 80 प्रतिशत हिस्सा, वनों में पाया जाती है. 
“उनसे जलवायु को नियमित करने और लाखों-करोड़ों लोगों की आजीविका को सहारा देने में मदद मिलती है.”
वन संसाधन, अनेक प्रकार से, विश्व में लगभग 90 प्रतिशत निर्धन जनता को सम्बल प्रदान करते हैं. उनका योगदान, आदिवासी समुदायों के लिये विशेष रूप से अहम है, जोकि वनों में या उनके समीप रहते हैं. 
“वे आजीविका और सांस्कृतिक पहचान प्रदान करते हैं.” मगर, वनों, के अरक्षणीय दोहन ने इन समुदायों को नुक़सान पहुँचाया है, जैवविविधता ख़त्म हुई है और जलवायु व्यवधान भी उत्पन्न हुआ है. 
हर वर्ष दुनिया में 47 लाख हैक्टेयर वनों की कटाई होती है, और यह क्षेत्रफल, डेनमार्क के आकार से भी बड़ा है.
वन भूमि सिमटने की वजह अरक्षणीय कृषि, लकड़ी की तस्करी, संगठित अपराध, और जंगली पशु प्रजातियों की ग़ैरक़ानूनी तस्करी बताई गई है. 
अवैध तस्करी से इबोला और कोविड-19 जैसी घातक, पशुजनित बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है.
यूएन प्रमुख ने कहा, “इसलिये, इस वर्ष विश्व वन्यजीवन दिवस पर, मैं हर स्थान पर, सरकारों, व्यवसायों और लोगों का आहवान करता हूँ कि वनों व वन प्रजातियों के संरक्षण के लिये प्रयास बढ़ाए जाएँ, और वन समुदायों की आवाज़ें सुनी जाएँ व उन्हें समर्थन दिया जाए.”
2021 में कार्यक्रम 
इस वर्ष, विश्व वन्यजीवन दिवस की विषयवस्तु, “वन एवँ आजीविका: मानव व पृथ्वी का पोषण” (Forests and Livelihoods: Sustaining People and Planet) रखी गई है.
इसके ज़रिये, दुनिया भर में करोड़ों लोगों की आजीविकाओं में वनों, वन प्रजातियों और पारिस्थितिकी तन्त्रों की केन्द्रीय भूमिका को दर्शाया जा रहा है. 
साथ ही, इस दिवस के ज़रिये वन-आधारित आजीविकाओं की अहमियत को पहचानने और वन व वन वन्यजीवन प्रबन्धन के ऐसे तरीक़ों को बढ़ावा दिया जाता है जिसमें मानव कल्याण व वन संरक्षण का ख़याल रखा जा सके.
इन कार्यक्रमों के तहत, एक फ़िल्मोत्सव और वैश्विक युवा कला प्रतिस्पर्धा का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ युवा कलाकार ऐसे वैश्विक पर्यावरणीय संकटों को रेखांकित करेंगे, जिनका सामना वनों के पारिस्थितिकी तन्त्रों, वन्यजीवों और मानवता को करना पड़ रहा है. 
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2013 में, हर साल, 3 मार्च को विश्व वन्यजीवन दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी. इस दिवस का उद्देश्य, जीवन में वनस्पति और जीवों की अहमियत को रेखांकित करना है. 
वर्ष 1973 में इसी दिन, जंगली वनस्पति व जीवों की लुप्तप्राय प्रजातियों की अन्तरराष्ट्रीय व्यापार पर सन्धि (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora CITES) भी पारित की गई थी. , संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सरकारों और लोगों का आहवान किया है कि वनों की रक्षा करने और वन समुदायों को समर्थन देने के लिये प्रयास तेज़ किये जाने होंगे. यूएन प्रमुख ने, बुधवार, 3 मार्च, को विश्व वन्यजीवन दिवस (World Wildlife Day) के अवसर पर अपने सन्देश में, वन संसाधनों के अरक्षणीय प्रयोग और वन्यजीवों की तस्करी से उपजते ख़तरों के प्रति भी आगाह किया है.  

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि वनों की रक्षा के उपाय सुनिश्चित करने से टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी मदद मिलेगी. 

यूएन प्रमुख ने वनों से मिलने वाले लाभों को रेखांकित करते हुए कहा कि दुनिया में कुल जंगली प्रजातियों का 80 प्रतिशत हिस्सा, वनों में पाया जाती है. 

“उनसे जलवायु को नियमित करने और लाखों-करोड़ों लोगों की आजीविका को सहारा देने में मदद मिलती है.”

वन संसाधन, अनेक प्रकार से, विश्व में लगभग 90 प्रतिशत निर्धन जनता को सम्बल प्रदान करते हैं. उनका योगदान, आदिवासी समुदायों के लिये विशेष रूप से अहम है, जोकि वनों में या उनके समीप रहते हैं. 

“वे आजीविका और सांस्कृतिक पहचान प्रदान करते हैं.” मगर, वनों, के अरक्षणीय दोहन ने इन समुदायों को नुक़सान पहुँचाया है, जैवविविधता ख़त्म हुई है और जलवायु व्यवधान भी उत्पन्न हुआ है. 

हर वर्ष दुनिया में 47 लाख हैक्टेयर वनों की कटाई होती है, और यह क्षेत्रफल, डेनमार्क के आकार से भी बड़ा है.

वन भूमि सिमटने की वजह अरक्षणीय कृषि, लकड़ी की तस्करी, संगठित अपराध, और जंगली पशु प्रजातियों की ग़ैरक़ानूनी तस्करी बताई गई है. 

अवैध तस्करी से इबोला और कोविड-19 जैसी घातक, पशुजनित बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है.

यूएन प्रमुख ने कहा, “इसलिये, इस वर्ष विश्व वन्यजीवन दिवस पर, मैं हर स्थान पर, सरकारों, व्यवसायों और लोगों का आहवान करता हूँ कि वनों व वन प्रजातियों के संरक्षण के लिये प्रयास बढ़ाए जाएँ, और वन समुदायों की आवाज़ें सुनी जाएँ व उन्हें समर्थन दिया जाए.”

2021 में कार्यक्रम 

इस वर्ष, विश्व वन्यजीवन दिवस की विषयवस्तु, “वन एवँ आजीविका: मानव व पृथ्वी का पोषण” (Forests and Livelihoods: Sustaining People and Planet) रखी गई है.

इसके ज़रिये, दुनिया भर में करोड़ों लोगों की आजीविकाओं में वनों, वन प्रजातियों और पारिस्थितिकी तन्त्रों की केन्द्रीय भूमिका को दर्शाया जा रहा है. 

साथ ही, इस दिवस के ज़रिये वन-आधारित आजीविकाओं की अहमियत को पहचानने और वन व वन वन्यजीवन प्रबन्धन के ऐसे तरीक़ों को बढ़ावा दिया जाता है जिसमें मानव कल्याण व वन संरक्षण का ख़याल रखा जा सके.

इन कार्यक्रमों के तहत, एक फ़िल्मोत्सव और वैश्विक युवा कला प्रतिस्पर्धा का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ युवा कलाकार ऐसे वैश्विक पर्यावरणीय संकटों को रेखांकित करेंगे, जिनका सामना वनों के पारिस्थितिकी तन्त्रों, वन्यजीवों और मानवता को करना पड़ रहा है. 

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2013 में, हर साल, 3 मार्च को विश्व वन्यजीवन दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी. इस दिवस का उद्देश्य, जीवन में वनस्पति और जीवों की अहमियत को रेखांकित करना है. 

वर्ष 1973 में इसी दिन, जंगली वनस्पति व जीवों की लुप्तप्राय प्रजातियों की अन्तरराष्ट्रीय व्यापार पर सन्धि (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora CITES) भी पारित की गई थी. 

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