माली: राजनैतिक, सुरक्षा, मानवाधिकार व मानवीय चुनौतियों की भयावहता का शिकार

संयुक्त राष्ट्र के शान्तिरक्षा मामलों के प्रमुख ज्याँ पियर लैक्रोआ ने सुरक्षा परिषद को बताया है कि माली के मध्य और उत्तरी इलाक़ों में सुरक्षा स्थिति तेज़ी से ख़राब हो रही है. ऐसे में, संयुक्त राष्ट्र के शान्तिरक्षकों, माली की रक्षा सेनाओं व सुरक्षा बलों को लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है जिससे उन्हें भारी नुक़सान भी उठाना पड़ रहा है. कुछ बड़े क़स्बे भी, सशस्त्र गुटों से लगातार ख़तरों के साए में रहने को मजबूर हैं.

संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियानों के मुखिया ज्याँ पियर लैक्रोआ ने याद करते हुए बताया कि गत शुक्रवार को भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने माली में यूएन स्थिरता मिशन के किदाल क्षेत्र में स्थिर शिविर पर हमला किया था जिसमें चाड के 4 शान्तिरक्षकों की मौत हो गई थी और 34 अन्य घायल हुए थे.

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उन्होंने कहा कि वो हमला एक त्रासदी थी, लेकिन उसके ज़रिये, माली के लोगों की मदद करने में, यूएन शान्तरिक्षकों की बहादुरी और संकल्प भी झलकता है.
ज्याँ पियर लैक्रोआ ने आतंकवादी ख़तरे के अलावा, मिलिशिया की लगातार होने वाली अस्थिरता गतिविधियों पर भी चिन्ता व्यक्त की, जोकि मध्य क्षेत्र में नस्लीय आधार पर हो रही हैं.
उन्होंने, देश में मिलिशिया और सशस्त्र गुटों द्वारा हथियार डालकर, उन्हें सम्वाद प्रक्रिया में शामिल किये जाने के प्रयासों के बीच, संक्रमणकालीन सरकार का भी आहवान किया कि वो आम लोगों की सुरक्षा पुख़्ता करके, समानान्तर रूप में सुरक्षा स्थिति को बेहतर बनाने के लिये प्रयास करे, जिसमें राजसत्ता के प्राधिकार व बुनियादी सामाजिक सेवाएँ बहाल किया जाना भी शामिल है.
राजनैतिक निर्णयात्मकता
यूएन शान्तिरक्षा अभियानों के प्रमुख ने कहा कि माली की दीर्घकालीन सुरक्षा, उसके नाज़ुक राजनैतिक बदलाव से जुड़ी हुई है.
माली सरकार, 2012 में मिली कुछ झटकों के बाद, देश में स्थिरता बहाली व पुनर्निर्माण के प्रयासों में जुटी है. 
उन झटकों में सैन्य तख़्तापलट की कोशिश, सरकारी बलों और तौरेग विद्रोहियों के बीच फिर से लड़ाई भड़कना, और विद्रोही अतिवादियों द्वारा देश के उत्तरी क्षेत्र पर क़ब्ज़ा किया जाना शामिल था. 
माली में यूएन स्थिरता मिशन, 2015 में हुए शान्ति समझौते को लागू करने में मदद कर रहा है और ये मिशन, दुनिया भर में बेहद ख़तरनाक परिस्थितियों में काम करना वाला यूएन मिशन समझा जाता है.
उस शान्ति समझौते पर सरकार व दो सशस्त्र गुटों के गठबन्धन ने हस्ताक्षर किये थे.
संकल्पों को शान्ति में बदलना होगा
यूएन शान्तिरक्षा मिशन के मुखिया ने कहा कि शान्ति समझौते का क्रियान्वयन कुछ धीमा रहा है, मगर हाल के सप्ताहों के दौरान, एक सकारात्मक तेज़ी देखी गई है, साथ ही माली के विभिन्न पक्षों के बीच, आपसी विश्वास की एक नई भावना भी नज़र आई है.
उन्होंने हाल ही में हुई दो बैठकों की तरफ़ ध्यान आकर्षित किया जिनका काफ़ी बड़ा सांकेतिक महत्व है, और जो माली में राजनैतिक प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाने की तरफ़ अहम क़दम हैं. 
उन्होंने इन क़दमों को, शान्ति समझौते के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण कारक बताया.
यूएन शान्तिरक्षा अभियानों के प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि माली में राष्ट्रीय हितधारकों को अपने संकल्पों पर अमल करते रहने के लिये, अन्तरराष्ट्रीय सहायता व समर्थन बहुत महत्वपूर्ण है जिसमें सुरक्षा परिषद का समर्थन भी शामिल है., संयुक्त राष्ट्र के शान्तिरक्षा मामलों के प्रमुख ज्याँ पियर लैक्रोआ ने सुरक्षा परिषद को बताया है कि माली के मध्य और उत्तरी इलाक़ों में सुरक्षा स्थिति तेज़ी से ख़राब हो रही है. ऐसे में, संयुक्त राष्ट्र के शान्तिरक्षकों, माली की रक्षा सेनाओं व सुरक्षा बलों को लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है जिससे उन्हें भारी नुक़सान भी उठाना पड़ रहा है. कुछ बड़े क़स्बे भी, सशस्त्र गुटों से लगातार ख़तरों के साए में रहने को मजबूर हैं.

संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियानों के मुखिया ज्याँ पियर लैक्रोआ ने याद करते हुए बताया कि गत शुक्रवार को भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने माली में यूएन स्थिरता मिशन के किदाल क्षेत्र में स्थिर शिविर पर हमला किया था जिसमें चाड के 4 शान्तिरक्षकों की मौत हो गई थी और 34 अन्य घायल हुए थे.

उन्होंने कहा कि वो हमला एक त्रासदी थी, लेकिन उसके ज़रिये, माली के लोगों की मदद करने में, यूएन शान्तरिक्षकों की बहादुरी और संकल्प भी झलकता है.

ज्याँ पियर लैक्रोआ ने आतंकवादी ख़तरे के अलावा, मिलिशिया की लगातार होने वाली अस्थिरता गतिविधियों पर भी चिन्ता व्यक्त की, जोकि मध्य क्षेत्र में नस्लीय आधार पर हो रही हैं.

उन्होंने, देश में मिलिशिया और सशस्त्र गुटों द्वारा हथियार डालकर, उन्हें सम्वाद प्रक्रिया में शामिल किये जाने के प्रयासों के बीच, संक्रमणकालीन सरकार का भी आहवान किया कि वो आम लोगों की सुरक्षा पुख़्ता करके, समानान्तर रूप में सुरक्षा स्थिति को बेहतर बनाने के लिये प्रयास करे, जिसमें राजसत्ता के प्राधिकार व बुनियादी सामाजिक सेवाएँ बहाल किया जाना भी शामिल है.

राजनैतिक निर्णयात्मकता

यूएन शान्तिरक्षा अभियानों के प्रमुख ने कहा कि माली की दीर्घकालीन सुरक्षा, उसके नाज़ुक राजनैतिक बदलाव से जुड़ी हुई है.

माली सरकार, 2012 में मिली कुछ झटकों के बाद, देश में स्थिरता बहाली व पुनर्निर्माण के प्रयासों में जुटी है. 

उन झटकों में सैन्य तख़्तापलट की कोशिश, सरकारी बलों और तौरेग विद्रोहियों के बीच फिर से लड़ाई भड़कना, और विद्रोही अतिवादियों द्वारा देश के उत्तरी क्षेत्र पर क़ब्ज़ा किया जाना शामिल था. 

माली में यूएन स्थिरता मिशन, 2015 में हुए शान्ति समझौते को लागू करने में मदद कर रहा है और ये मिशन, दुनिया भर में बेहद ख़तरनाक परिस्थितियों में काम करना वाला यूएन मिशन समझा जाता है.

उस शान्ति समझौते पर सरकार व दो सशस्त्र गुटों के गठबन्धन ने हस्ताक्षर किये थे.

संकल्पों को शान्ति में बदलना होगा

यूएन शान्तिरक्षा मिशन के मुखिया ने कहा कि शान्ति समझौते का क्रियान्वयन कुछ धीमा रहा है, मगर हाल के सप्ताहों के दौरान, एक सकारात्मक तेज़ी देखी गई है, साथ ही माली के विभिन्न पक्षों के बीच, आपसी विश्वास की एक नई भावना भी नज़र आई है.

उन्होंने हाल ही में हुई दो बैठकों की तरफ़ ध्यान आकर्षित किया जिनका काफ़ी बड़ा सांकेतिक महत्व है, और जो माली में राजनैतिक प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाने की तरफ़ अहम क़दम हैं. 

उन्होंने इन क़दमों को, शान्ति समझौते के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण कारक बताया.

यूएन शान्तिरक्षा अभियानों के प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि माली में राष्ट्रीय हितधारकों को अपने संकल्पों पर अमल करते रहने के लिये, अन्तरराष्ट्रीय सहायता व समर्थन बहुत महत्वपूर्ण है जिसमें सुरक्षा परिषद का समर्थन भी शामिल है.

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