मैडागास्कर की युवा कार्यकर्ता का नज़रिया – युवा ख़ामोश नहीं बैठेंगे

मैडागास्कर की एक युवा कार्यकर्ता मैरी क्रिस्टीना कोलो का कहना है कि दुनिया भर के युवजन, अब वैश्विक जलवायु संकट के बारे में ख़ामोश नहीं बैठेंगे.

मैरी क्रिस्टीना कोलो, ख़ुद को एक जलवायु कार्यकर्ता, पर्यावरण-महिलावादी और सामाजिक उद्यमी बताती हैं.
मैरी, उन दो युवा कार्यकर्ताओं में में से एक हैं जिन्होंने 22 अप्रैल को मनाए गए अन्तरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस के अवसर पर, यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश से बातचीत की है.
मैरी क्रिस्टीना कोलो ने, हिन्द महासागर के द्वीप देश मैडागास्कर पर, कोविड-19 महामारी और मौजूदा जलवायु संकट की दोहरी मार के बारे में अपनी चिन्ताएँ व्यक्त की हैं.
“जलवायु परिवर्तन कोविड-19 की वजह से रुका नहीं, और ये बात मेरे देश – मेडागास्कर के बारे में भी सच है. मौजूदा महामारी ने हमें बहुत से सबक़ सिखाए हैं.”
वैश्विक सहयोग
पहला सबक़ ये है कि वैश्विक व्यापार के लिये वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है. मेडागास्कर जैसे विकासशील देशों में, हमें अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से काफ़ी बड़ा समर्थन और दान राशि मिल सकी. ये हम सबके लिये एक बार फिर नया अवसर था – हमारी परम्परागत एकजुटता और देशों के बीच एकजुटता साबित करने का.
मगर, अब हमारे सामने सवाल ये है कि क्या हम स्वच्छ जल व स्वच्छता जैसी स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देते रह सकते हैं, जोकि वायरस का मुक़ाबला करने में महत्वपूर्ण साधन व औज़ार हैं. मेडागास्कर में, 4 में से 3 लोगों को, स्वच्छ जल और स्वच्छता सेवाएँ तक पहुँच नहीं हैं.
इन कार्यक्रमों को कैसे प्रोत्साहन दिया जा सकता है, जबकि सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ हालात को और ज़्यादा कठिन बनाती हैं, और ये जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हुई हैं.
इसलिये, हमें ऐसी जलवायु कार्रवाइयों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा जिनके ज़रिये पानी की उपलब्धता बढ़ सके, मसलन आद्र क्षेत्रों की पुनर्बहाली किया जाना.
जलवायु होशियारी
हमें ये सीखना होगा कि जलवायु – स्मार्ट खेतीबाड़ी पर कैसे ध्यान केन्द्रित किया जाए. हमें ये सीखना होगा कि खाद्य उत्पादन में किस तरह आत्मनिर्भर बना जाए, ताकि पर्यटन और व्यापार निर्भरता को कम किया जा सके.
मेरे लिये, दूसरा सबक़ भी महत्वपूर्ण है. जब हम सहायता व समर्थन के बारे में सोचते हैं, तो हमें, जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन व सहनशीलता बढ़ाने की ज़रूरत है. अनुकूलन के लिये, स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, इसलिये ये बिल्कुल सही समय है कि स्वास्थ्य ढाँचे और मानव संसाधनों में निवेश किया जाए.
कोविड-19 ने भी आपूर्ती श्रृंखला बाधित की है, इसलिये मेरे जैसे देशों के लिये, ये एक अन्य क्षेत्र है – संसाधन निवेश का.
और अन्त में ये भी, कोविड-19 से राहत व पुनर्बहाली के लिये किये जाने वाले निवेश में, महिलाओं व उन लोगों की आबादी की समस्याओं व कठिनाइयों को भी ध्यान में रखा जाए जिन पर अनुपात से ज़्यादा असर पड़ा है.
जैव-विविधता
मेरा ख़याल है कि मेरे देश की जैव-विविधता, महामारी के दौरान, जोखिम में डाल दी गई है क्योंकि, जैसाकि आप जानते हैं, इस सन्दर्भ में, लोग निर्धनता से पीड़ित हैं, वो आजीविका का कोई साधन तलाश करने के लिये जंगलों का रुख़ करते हैं.
यहाँ, अधिकतर निर्धनतम लोग, प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर; मेडागास्कर की 80 प्रतिशत आबादी, ग्रामीण क्षेत्रों में बसती है.
ये लोग, केवल अपने दैनिक जीवन की ज़रूरतों के बारे में सोचते हैं; कि वो जंगलों, अपने परिवारों के लिये भोजन का प्रबन्ध कर सकते हैं. इसलिये, जब महामारी के दौर में जैव-विविधता की बात की जाती है तो, हम अपने प्राकृतिक पर्यावास की संरक्षा के सन्दर्भ में एक संकट को देख रहे हैं.
संकट के इस दौर में, हमारे लिये ख़ुद को सक्रिय रखना एक चुनौती है, कि लोगों में ये जागरूकता किस तरह फैलाई जाए कि प्राकृतिक संसाधानों को सहेजे जाने की कितनी ज़रूरत है. ये भी कि हमें अपनी आजीविकाओं और प्राकृतिक दुनिया की संरक्षा के बीच सन्तुलन रखने का रास्ता निकालना है.
‘हमारी भी आवाज़ है’
मैं लगातार ये कहती रहती हूँ कि मैं एक आशावादी हूँ क्योंकि लगातार ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में युवजन, हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं, और ये साबित करने में भी लगे हैं, कि हमें प्राकृतिक संसाधनों का बहुत ज़्यादा दोहन करने की ज़रूरत नहीं है.
मैं ये कहना चाहती हूँ कि युवजन अब ख़ामोश न ही बैठेंगे, हमारी भी एक आवाज़ है, और हमारी बात सुनी जाएगी और, ये भी कि हमें निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में शामिल करना होगा. हमें, पहले यह राष्ट्रीय स्तर पर करने की आवश्यकता है. हम एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं, हम आदर्श कामकाज एक दूसरे के साथ साझा कर सकते हैं.
इसलिये, मैं इस मौक़े पर, दुनिया भर के तमाम युवा आन्दोलनों का आहवान करती हूँ कि वो बदलाव लाने के लिये, एक साथ मिलकर काम करें., मैडागास्कर की एक युवा कार्यकर्ता मैरी क्रिस्टीना कोलो का कहना है कि दुनिया भर के युवजन, अब वैश्विक जलवायु संकट के बारे में ख़ामोश नहीं बैठेंगे.

मैरी क्रिस्टीना कोलो, ख़ुद को एक जलवायु कार्यकर्ता, पर्यावरण-महिलावादी और सामाजिक उद्यमी बताती हैं.

मैरी, उन दो युवा कार्यकर्ताओं में में से एक हैं जिन्होंने 22 अप्रैल को मनाए गए अन्तरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस के अवसर पर, यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश से बातचीत की है.

मैरी क्रिस्टीना कोलो ने, हिन्द महासागर के द्वीप देश मैडागास्कर पर, कोविड-19 महामारी और मौजूदा जलवायु संकट की दोहरी मार के बारे में अपनी चिन्ताएँ व्यक्त की हैं.

“जलवायु परिवर्तन कोविड-19 की वजह से रुका नहीं, और ये बात मेरे देश – मेडागास्कर के बारे में भी सच है. मौजूदा महामारी ने हमें बहुत से सबक़ सिखाए हैं.”

वैश्विक सहयोग

पहला सबक़ ये है कि वैश्विक व्यापार के लिये वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है. मेडागास्कर जैसे विकासशील देशों में, हमें अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से काफ़ी बड़ा समर्थन और दान राशि मिल सकी. ये हम सबके लिये एक बार फिर नया अवसर था – हमारी परम्परागत एकजुटता और देशों के बीच एकजुटता साबित करने का.

मगर, अब हमारे सामने सवाल ये है कि क्या हम स्वच्छ जल व स्वच्छता जैसी स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देते रह सकते हैं, जोकि वायरस का मुक़ाबला करने में महत्वपूर्ण साधन व औज़ार हैं. मेडागास्कर में, 4 में से 3 लोगों को, स्वच्छ जल और स्वच्छता सेवाएँ तक पहुँच नहीं हैं.

इन कार्यक्रमों को कैसे प्रोत्साहन दिया जा सकता है, जबकि सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ हालात को और ज़्यादा कठिन बनाती हैं, और ये जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हुई हैं.

इसलिये, हमें ऐसी जलवायु कार्रवाइयों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा जिनके ज़रिये पानी की उपलब्धता बढ़ सके, मसलन आद्र क्षेत्रों की पुनर्बहाली किया जाना.

जलवायु होशियारी

हमें ये सीखना होगा कि जलवायु – स्मार्ट खेतीबाड़ी पर कैसे ध्यान केन्द्रित किया जाए. हमें ये सीखना होगा कि खाद्य उत्पादन में किस तरह आत्मनिर्भर बना जाए, ताकि पर्यटन और व्यापार निर्भरता को कम किया जा सके.

मेरे लिये, दूसरा सबक़ भी महत्वपूर्ण है. जब हम सहायता व समर्थन के बारे में सोचते हैं, तो हमें, जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन व सहनशीलता बढ़ाने की ज़रूरत है. अनुकूलन के लिये, स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, इसलिये ये बिल्कुल सही समय है कि स्वास्थ्य ढाँचे और मानव संसाधनों में निवेश किया जाए.

कोविड-19 ने भी आपूर्ती श्रृंखला बाधित की है, इसलिये मेरे जैसे देशों के लिये, ये एक अन्य क्षेत्र है – संसाधन निवेश का.

और अन्त में ये भी, कोविड-19 से राहत व पुनर्बहाली के लिये किये जाने वाले निवेश में, महिलाओं व उन लोगों की आबादी की समस्याओं व कठिनाइयों को भी ध्यान में रखा जाए जिन पर अनुपात से ज़्यादा असर पड़ा है.

जैव-विविधता

मेरा ख़याल है कि मेरे देश की जैव-विविधता, महामारी के दौरान, जोखिम में डाल दी गई है क्योंकि, जैसाकि आप जानते हैं, इस सन्दर्भ में, लोग निर्धनता से पीड़ित हैं, वो आजीविका का कोई साधन तलाश करने के लिये जंगलों का रुख़ करते हैं.

यहाँ, अधिकतर निर्धनतम लोग, प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर; मेडागास्कर की 80 प्रतिशत आबादी, ग्रामीण क्षेत्रों में बसती है.

ये लोग, केवल अपने दैनिक जीवन की ज़रूरतों के बारे में सोचते हैं; कि वो जंगलों, अपने परिवारों के लिये भोजन का प्रबन्ध कर सकते हैं. इसलिये, जब महामारी के दौर में जैव-विविधता की बात की जाती है तो, हम अपने प्राकृतिक पर्यावास की संरक्षा के सन्दर्भ में एक संकट को देख रहे हैं.

संकट के इस दौर में, हमारे लिये ख़ुद को सक्रिय रखना एक चुनौती है, कि लोगों में ये जागरूकता किस तरह फैलाई जाए कि प्राकृतिक संसाधानों को सहेजे जाने की कितनी ज़रूरत है. ये भी कि हमें अपनी आजीविकाओं और प्राकृतिक दुनिया की संरक्षा के बीच सन्तुलन रखने का रास्ता निकालना है.

‘हमारी भी आवाज़ है’

मैं लगातार ये कहती रहती हूँ कि मैं एक आशावादी हूँ क्योंकि लगातार ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में युवजन, हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं, और ये साबित करने में भी लगे हैं, कि हमें प्राकृतिक संसाधनों का बहुत ज़्यादा दोहन करने की ज़रूरत नहीं है.

मैं ये कहना चाहती हूँ कि युवजन अब ख़ामोश न ही बैठेंगे, हमारी भी एक आवाज़ है, और हमारी बात सुनी जाएगी और, ये भी कि हमें निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में शामिल करना होगा. हमें, पहले यह राष्ट्रीय स्तर पर करने की आवश्यकता है. हम एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं, हम आदर्श कामकाज एक दूसरे के साथ साझा कर सकते हैं.

इसलिये, मैं इस मौक़े पर, दुनिया भर के तमाम युवा आन्दोलनों का आहवान करती हूँ कि वो बदलाव लाने के लिये, एक साथ मिलकर काम करें.

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