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मोदी सरकार की देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी कार्रवाई

मोदी सरकार की देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी कार्रवाई
July 11
10:03 2019

भ्रष्टाचार पर सीबीआई का शिकंजा: झारखंड सहित देशभर के 110 ठिकानों पर छापामारी

इनसाईट ऑनलाइन न्यूज

भ्रष्टाचार मुक्त भारत की तरफ पहल करते हुये मोदी सरकार के बढ़ते कदम की आम लोगों द्वारा सराहना की जा रही है। ऐसे कदमों से बड़े आइएएस एवं अन्य नौकरशाह बेनकाब हो रहे हैं।

बहुसंख्यक नौकरशाह सरकार की आंख में धूल झोंककर तथाकथित भ्रष्टाचार में लिप्त राजनीतिज्ञों की मिली भगत से जनता के विकास के कार्यों की राशि का भरपूर दोहन भारी मात्रा पूर्व में करते रहे हैं। सीबीआई की बड़ी कार्रवाई जिसमें देश भर में 110 ठिकानों पर छापामारी की गई है तथा यूपी में एक पूर्व मंत्री की गिरफतारी और बड़े आईएएस अधिकरियों के यहां भी छापमारी हुई है।

भ्रष्ट नौकरशाहों एवं राजनीतिज्ञों के लिए यह एक सबक है कि देश के विकास की दिशा को कहीं से भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश उनके लिए खतरे की घंटी बनी रहेगी। यही दहशत देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। आमजनों में एक विश्वास पैदा हो रहा है कि देश भ्रष्टाचार से मुक्त होगा।

भ्रष्टाचार पर सीबीआई का शिकंजा: झारखंड सहित देशभर के 110 ठिकानों पर छापेमारी

भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने देशभर के 110 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। सीबीआई ने भ्रष्टाचार, आपराधिक मिसकंडक्ट और हथियारों की अवैध तस्करी वगैरह के खिलाफ 30 ताजा मामले दर्ज किए हैं। बताया जा रहा है कि देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों में छापेमारी हो रही है। बता दें कि सीबीआई इन दिनों बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चला रही है। मंगलवार को दिल्ली के अलावा यूपी, उत्तराखंड, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और बिहार में छापेमारी हुई है।

इसमें दिल्ली, भरतपुर, मुंबई, चंडीगढ़, जम्मू, श्रीनगर, पुणे, जयपुर, गोवा, कानपुर, रायपुर, हैदराबाद, मदुरै, कोलकाता, रांची, बोकारो और लखनऊ और अन्य शहर शामिल हैं। इससे पहले सीबीआई ने 2 जुलाई को भी 18 शहरों में 50 जगहों पर छापे मारे थे।

इससे पहले 6 जुलाई को सीबीआई ने बर्खास्त आयकर आयुक्त संजय कुमार श्रीवास्तव के नोएडा स्थित आवास और कार्यालय पर छापेमारी की थी। हाल में सरकार ने अनुचित लाभ हासिल करने के लिए संजय को कथित तौर पर पिछली तारीख में अपील आदेश पारित करने के लिए बर्खास्त कर दिया था।

छापेमारी अभियान शुक्रवार की सुबह को शुरू हुआ और शनिवार तक दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में 13 स्थानों पर छापेमारी हुई थी जिसमें संजय के पंडारा रोड स्थित आवास और नोएडा कार्यालय भी शामिल है।

एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि ठगी, धोखाधड़ी और अनुचित लाभ हासिल करने के आरोप में श्रीवास्तव के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद छापेमारी की गई थी। सीबीआई ने 2 जुलाई को देश भर में कथित बैंक धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया था, जिसके तहत 640 करोड़ रुपये के घपले के संबंध में 14 अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे।

अधिकारियों ने बताया था कि देश के 12 राज्यों में विभिन्न मामलों में कंपनियों के प्रवर्तकों और निदेशकों के खिलाफ एक समन्वित कार्रवाई के तहत एजेंसी के दलों ने 18 शहरों में 50 स्थानों पर छापे मारे। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि देशभर में बैंक धोखाधड़ी घोटालोंध्मामलों में सीबीआई विशेष अभियान चला रही है।

झारखंड के नौकरशाहों की हकीकत: क्या सीबीआई इन पर कसेगी शिकंजा?

झारखंड में प्रशासनिक अधिकारी भ्रष्टाचार के लिए बदनाम रहे हैं। कहा जाता है कि राजनेता हों या नौकरशाह सबने इस गरीब प्रदेश को जमकर लूटा है। राज्य में भ्रष्टाचार का मामला जांच का विषय है, पिछले दिनों डीओपीटी की वेबसाइट पर अफसरों की ओर से जारी किया गया अपनी संपत्ति का ब्यौरा हैरान करने वाला है।

सवाल उठता है कि जिस राज्य में भूख के चलते कई लोगों की जान जा चुकी है, उस राज्य के आला अफसरों के पास इतनी संपत्ति कहां से आई। वैसे तो आमजनों और सरकार को भी मालूम है कि किन-किन आईएएस अफसरों ने झारखंड को राज्य बनने के बाद बेदर्दी से लूटने का काम किया है।

जानकार सूत्रों के अनुसार पूर्व आईएएस पदाधिकारी डाॅ. प्रदीप कुमार दवा घोटाले में जेल में हैं और एक पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक गोयल का मामला झारखंड निगरानी विभाग में चल रहा है।

जहां उनके बचाने की कोशिश की जायेगी ये मामला भी और ऐसे अन्य मामलें जो निगरानी विभाग में चल रहे हैं उसे केंद्र सरकार के द्वारा सीबीआई को दिया जाना चाहिए ताकि झारखण्ड  में लूट का क्रम खत्म हो।

इस कड़ी में कई पूर्व मंत्री भी है जैसे कि भानू प्रताप शाही, एनोस एक्का, मधु कोड़ा, कमलेश सिंह, बंधु तिर्की और हरिनारायण राय सहित कई अन्य नेताओं के नाम प्रमुख है। ज्ञातव्य हो कि संयुक्त बिहार के समय में भी झारखंड की धरती से पशुपालन के नाम पर भारी मात्रा में सरकारी खजाने की लूट हुई है जिसमें लालू प्रसाद यादव, मो. सईद एवं इनके परिवार के साथ-साथ भारी संख्या में अफसर भी शामिल रहे हैं।

पशुपालन की लूट के मामले में कार्रवाई होने के बावजूद मामला देश में या बिहार-झारखंड में थमता नजर नहीं आया। अब लगता है कि वर्तमान कार्रवाई यह संदेश देती है कि अब सरकारी खजाने से संबंधित लूट का मामला रूकेगा। मोदी सरकार की कार्रवाई देश को उन्नती के पथ पर ले जायेगी।

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