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मौसम में घर-घर का राजा है आम

मौसम में घर-घर का राजा है आम
April 26
10:48 2019

सम्राट अकबर ने दरभंगा में लगवाया था एक लाख आम के पेड़ों का बाग

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ 

सर्वाधिक लोकप्रिय और बहु प्रतीक्षित फलों में किसी एक फल के पक्ष में हाथ उठाने के लिए प्रतियोगिता हो तो निश्चित रूप से जिस फल के पक्ष में शत्-प्रतिशत हाथ उठेंगे, उस फल का नाम ‘आम’ है। इसीलिए आम को ‘फलों का राजा’ कहा जाता है। यह मौसम में घर-घर में खाया जाता है।

गुणकारी आम से प्रभावित मुगल बादशाह सम्राट अकबर ने बिहार के दरभंगा में एक लाख आम के पेड़ों का विशाल बागीचा लगवाया था। जिसमें आम के एक लाख पेड़ रोपे गये थे। इसलिए उस बागीचे को लोग लखा बाग के नाम से जानने लगे थे।

मौसम में घर-घर का राजा है आम

आम के पेड़ों पर मंजर आने से लेकर टिकोरे लगने, बड़े होने और पकने की अवस्था तक आम के बाजार से लेकर आम खाने के शौकीन परिवार तक जैसी हलचल मची रहती है वह इस फल की लोकप्रियता का ही परिचायक है।

प्रतिवर्ष आम के बगीचों में आम के पेड़ों पर विभिन्न किस्मों एवं प्रजातियोें के आमों के लदे फलों के सफल उत्पादन की उम्मीद पर बाजार और घर में भी उत्साह बना रहता है। दुनिया भर में आम की लगभग चार सौ प्रजातियां पायी जाती है।

यहां एक तथ्य निराशाजनक और उदास करनेवाला है कि विगत् तीन-चार दशक में गांव-गिरान में भरेपूरे आम के बागीचे जितनी तेजी से विनष्ट हुए हैं उसपर किसी भी स्तर पर नियंत्रण की कोशिश नहीं हुई है। पहले तो खेतों की मेड़ पर भी किसी किसान का एक ही सही, लेकिन आम का अपना पेड़ होता ही था। वह अब गायब होता जा रहा है।

मौसम में घर-घर का राजा है आम

वैसे हम गर्व कर सकते हैं कि रसीले फल आम, जिसे भारत में फलों का राजा बोलते हैं, इसकी मूल प्रजाति को ‘भारतीय आम’ कहते हैं, जिसका वानस्पतिक नाम ‘मेंगी फेरा इंडिका’ है। यह जानकारी जरूरी है कि आमों की प्रजाति को मेंगीफेरा कहा जाता है। इस फल की प्रजाति केवल भारतीय उपमहाद्वीप में ही उपलब्ध थी। कालांतर में अन्य देशों में पहुंची।

आम का सर्वाधिक उत्पादन भारत में ही होता है। संस्कृत में आम को ‘आम्र’ कहा जाता है। वैदिक काल से अब तक आम्र-वृक्ष सम्पूर्ण रूप से एक पवित्र वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित माना जाता रहा है। समस्त आध्यात्मिक-धार्मिक और विवाह आदि आनुष्ठानिक कार्यों में आम की पŸाी, आम की लकड़ी, आम के फल आदि का हवन-तर्पण, देवमूर्ति पर चढ़ावा आदि में उपयोग होता है।

आम की लकड़ी के ईधन से बनाया गया भोजन और पकवान पूर्ण पवित्र माना जाता है। आम के पेड़ की नव-विवाहितों द्वारा पूजा की जाती है।

मौसम में घर-घर का राजा है आम

केरल से मसाला के व्यापार के दौरान 1498 ई के आसपास आम और इसके नाम को पुर्तगाली अपने साथ अपने देश ले गये। वहां इसे ‘मांगा’ बोला जाता है। आम के नाम की विविधता की खोज में आगे बढ़ने पर पता चलता है कि यूरोपीय भाषाओं में इसका नाम 1510 ई0 में पहली बार इटली में लिया गया।

वहीं से अनुवाद के क्रम में यह फ्रांसीसी भाषा में आया और फिर अंग्रेजी में ‘मैंगो’ कहाया। उपलब्ध आंकड़े के अनुसार आम के उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। अभी देश में 2,309 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती हो रही है जिससे 12750 हजार मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है।

अब तो संकर किस्म के आमों की अत्यधिक खेती होने से आम के उत्पादन में अगुणित वृद्धि हुई है। हर मौसम में संकर किस्म के आम फलने लगे हैं। इससे किसान अधिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। गुणात्मक बात यह है कि संकर किस्म के बागीचों में आम के पौधे शीघ्र ही फल देने लगते हैं। पेड़ का फैलाव भी कम होता है और फल भी नियमित रूप से आते हैं। जबकि पुरानी किस्मों के परंपरागत पेड़ों में अमूमन तीसरे वर्ष फल आते हैं।

मौसम में घर-घर का राजा है आम

आम के उत्पादक किसानों, कृषि विशेषज्ञों एवं कृषि विश्वविद्यालयों से उपलब्ध जानकारी के अनुसार आम की संकर किस्मों में ‘आम्रपाली’ एक बहुचर्चित किस्म है। एक हेक्टेयर में इसके डेढ़ हजार से भी अधिक पौधे लगाये जा सकते हैं। इस किस्म को लोग अपनी निजी वाटिका में भी उत्साह पूर्वक लगाते हैं और फल चखते हैं।

आम्रपाली के अतिरिक्त अन्य संकर किस्मों में ‘मल्लिका’ का भी नाम है जिसे दक्षिणी भारत में अधिक लगाया जाता है। इस किस्म के फलों का निर्यात अमेरिका तथा खाड़ी देशों में अधिक होता है। इसके साथ ही ‘पूसा अरूणिमा’, ‘पूसा लालिमा’, ‘पूसा प्रतिमा’, ‘पूसा श्रेष्ठ’, ‘पूसा सूर्या’, ‘पूसा पीताम्बर’, को भी संकर किस्म के आम की किस्मों में बहुत मुनाफेवाला और गुणकारी माना गया है। इन किस्मों का विकास भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने किया है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरू द्वारा विकसित संकट किस्मों में ‘अर्का अरूणा’, ‘अर्का अनमोल’, ‘अर्का नील किरण’, ‘अर्का पुनीत’ तथा ‘अरूणिका’, ‘अंबिका’ और ‘सी.ई.एस.एच.एम. 2 किस्मों का विकास केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ, उत्तरप्रदेश द्वारा किया गया है।

मौसम में घर-घर का राजा है आम

कांेकण कृषि विद्यापीठ, महाराष्ट्र द्वारा भी कुछ किस्मों का विकास किया गया है जिनमें ‘सिन्धु’ और ‘रत्ना’ का नाम प्रसिद्ध हो रहा है। आम के व्यवसायिक उत्पादन के लिए पौधों के रोपण से फल देने तक के वर्षों में पौधों को प्रकृति की मार से लेकर कीड़ों और रोगों से बचाने के लिए वैज्ञानिक और रासायनिक संरक्षण करना पड़ता है। संकर किस्म की प्रजातियों का विकास राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार की मांग को ध्यान में रखकर किया गया है। परंपरागत आम की किस्मों में अनेक प्रसिद्ध नामवाले आम के फलों की चाहत ग्राहकों में आज भी बरकरार है।

इनके नाम ही इनके स्वाद और गुणवत्ता के लिए काफी है। आम की ऐसी वार्षिक किस्मों में-बंबइया, मालदह, पैरी, सफ्दर पसंद, सुवर्णरेखा, सुन्दरी, लंगड़ा और राजापुरी कानाम एक महाराजा की तरह प्रसिद्ध है। उसी तरह मध्य ऋतु की किस्मों में अलफोंसो, बादामी, गुंदू, अप्पस, खडेर, बंगलोरा, तोटपुरी, अलपुर बनोशन आदि बाजार में उपलब्ध रहते हैं।

दशहरी, गुलाबखास, जर्दालु, आम्रपाली, चैसा आदि भी मिलते हैं। मौसम खत्म होने पर ‘फजली’, ‘सफेदा लखनऊ’, तो ‘मुलगोआ’ और ‘नीलम’ भी कभी कभार मिल जाते हैं। आम का फल अपने गुणों में लाभकारी होता है। इसमें एन्टी-आॅक्सीडेन्ट गुण होते हैं। स्वास्थ्य के लिए लाभकारी आम के एन्टी आॅक्सीडेन्ट गुण कोलन कैंसर, स्तन कैंसर और ल्यूकेमिया से बचाते हैं। इसमें अनेक पोषक तत्व, फाइबर, प्रोटीन और विटामिन सी होता है।

मौसम में घर-घर का राजा है आम

इसके सेवन से बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल कम होता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है तथा इसके सेवन से आंखों की रोशनी बढ़ती है और सूखापन दूर होता है। आम के फल में पोटेशियम और मैग्नेशियम होता है। आम में विटामिन के साथ कई तरह के इंजाइम भी मौजूद रहते हैं। यह जीवनी शक्ति बढ़ाता है।

आम के मौसम में आम का सेवन करने वालों की यौन शक्ति बढ़ जाती है। वजन भी बढ़ जाता है। शरीर गठीला हो जाता है और चेहरे पर लावण्य छा जाता है। आम का पन्ना पीने से लू नहीं लगती है। पका आम फल अनिद्रा रोग को दूर करता है। इसके खाने से शरीर में खून की कमी अर्थात् एनीमिया में फायदा हो जाता है।

आम के पत्तों का चूर्ण पानी में फूलाकार-उबालकर पीने से शुगर जैसी बीमारी नियंत्रित रहती है। आम की गुठली के भीतर की गिरी का चूर्ण भी लाभकारी है। इसके सेवन से यौन शक्ति में वृद्धि होती है। हम कह सकते हैं कि इस तरह ‘आम का आम, गुठली का दाम’ वाला मुहावरा चरितार्थ होता है।

मौसम में घर-घर का राजा है आम

दूध के साथ आम का रस सेवन करने से भूलने की बीमारी अच्छी होती है। आम त्वचा का रंग भी साफ करता है। चेहरा चमक उठता है। कील-मुंहासे ठीक हो जाते हैं। आम के पत्तों को छाया में सुखाकर और फिर उनका चूर्ण बनाकर पानी में फुलाकर रोज सेवन किया जाए तो गुर्दे की पथरी चूर-चूर होकर पेशाब के साथ निकल जाती है।

इसी प्रयोग से बालों का झड़ना भी रूक जाता है। आम की गुठली की गिरी और आंवले के मिश्रित चूर्ण को पुनः आंवले के तेल में मिलाकर बालों में लगाने से बालों का झड़ना रूक जाता है। बाल लंबे और काले बने रहते हैं। रूसी भी नष्ट होती है।

आम के फल से अनेक अन्य पकवान और सालों-साल के लिए उपयोग खाद्य पदार्थ भी तैयार किए जाते हैं।  इस तरह फलों में श्रेष्ठ ‘फलों का राजा’ आम अपने स्वाद और लाभकारी गुणों के कारण विश्व भर में लोकप्रिय और चर्चित तो है ही, उपयोगी भी है।  इधर व्यवसायिक लाभ के लिए आम को भेजा जा रहा है। ऐसा फल स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है।

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