म्याँमार: देश पूर्ण व भीषण संघर्ष की तरफ़ बढ़ रहा है, मानवाधिकार प्रमुख की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष मानवाधिकार अधिकारी मिशेल बाशेलेट ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि म्याँमार में, प्रदर्शनों पर किया जाने वाला मौजूदा दमन, सीरिया की ही तरह, गम्भीर व पूर्ण संघर्ष का रूप भी ले सकता है. उन्होंने प्रभाव वाले देशों से, आम नागरिकों की “हत्याएँ” रोकने के लिये, तुरन्त और असरदार कार्रवाई किये जाने का आग्रह भी किया है.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने मंगलवार को कहा, “ये स्पष्ट है कि निन्दा करने वाले वक्तव्य जारी करना और सीमित लक्षित प्रतिबन्ध पर्याप्त नहीं हैं.” 
“प्रभाव वाले देशों को, म्याँमार की सेना पर, मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघन, और मानवता के विरुद्ध सम्भावित अपराधों को रोकने के लिये, तुरन्त ठोस दबाव डालना होगा.”

🇲🇲 #Myanmar: UN Human Rights Chief @mbachelet urges States to take immediate, decisive and impactful measures to push military leadership into halting its campaign of repression and slaughter of its people.Read 👉 https://t.co/Y57YtqePLx#StandUp4HumanRights pic.twitter.com/XEzG0C4Ekt— UN Human Rights (@UNHumanRights) April 13, 2021

मानवाधिकार उच्चायुक्त की ये अपील ऐसे समय में आई है जब म्याँमार में, बीते सप्ताहान्त सेना द्वारा बागो में एक “सुनियोजित रक्तपात” में, कम से कम 82 लोगों की मौत हो गई.
विश्वस्त ख़बरों के अनुसार, म्याँमार की सेना – तत्मादाव ने रॉकेटों से दागे जाने वाले गोलों और फटने वाले ग्रेनेडों व मोर्टारों का भी इस्तेमाल किया.
उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि म्याँमार की सेना, देश के लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा की निर्दयी नीति को और ज़्यादा सघन बनाने पर तुली हुई है, जिसमें सैन्य दर्जे के हथियारों का प्रयोग, अंधाधुंध तरीक़े से किया जा रहा है.”
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार ऐसी भी ख़बरें हैं कि सुरक्षा बलों ने, चिकित्साकर्मियों को घायलों का इलाज करने से भी रोका है, और मृतकों के शव हासिल करने की कोशिश करने वाले सम्बन्धियों से 90 डॉलर का जुर्माना वसूले जाने की भी ख़बरें हैं.
मानवाधिकार कार्यालय ने ये भी कहा कि कुछ लोग, आत्म सुरक्षा के लिये, अब स्थानीय तौर पर बनाए गए देसी हथियारों का भी सहारा ले रहे हैं.
मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने म्याँमार पर संयुक्त राष्ट्र के तथ्य जाँच दल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, म्याँमार के सैन्य नेतृत्व को शस्त्रों और धन की आपूर्ति बन्द करने की ज़रूरत को भी रेखांकित किया है, जिसके ज़रिये, वो मानवाधिकारों का गम्भीर हनन करते हैं.
सीरिया जैसे हालात
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने आगाह करते हुए कहा कि म्याँमार के हालात, वर्ष 2011 में सीरिया में भड़के हालात से बिल्कुल मिलते-जुलते हैं, और जिनके बाद सीरिया गृहयुद्ध में धँस गया.
सारी दुनिया ने देखा है कि पिछले लगभग दस वर्षों के दौरान, किस तरह सीरिया में लाखों लोगों की मौतें होने के साथ-साथ, कितनी भीषण तबाही हुई है.
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि सीरिया में भी हमने देखा था कि शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अनावश्यक व स्पष्ट रूप में, ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग किया गया था.
देश की सरकार द्वारा अपने ही देश के लोगों का क्रूर व लगातार दमन किये जाने से, नतीजा ये हुआ कि कुछ लोगों ने हथियार उठा लिये, जिसके बाद पूरे देश में, हिंसा और तबाही का ना रुकने वाला चक्र शुरू हो गया.
मिशेल बाशेलेट ने कहा कि उस समय के यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने आगाह किया था कि अगर अन्तरराष्ट्रीय समुदाय, ठोस समाधान व कार्रवाई करने में नाकाम रहता है तो उसके नतीजे सीरिया और उससे भी आगे, बहुत भीषण व विनाशकारी होंगे. 
उन्होंने कहा, “मुझे डर है कि म्याँमार में भी हालात, एक पूर्ण व गम्भीर संघर्ष की तरफ़ बढ़ रहे हैं. देशों को, सीरिया और अन्य स्थानों पर हुई इसी तरह की भूलों को, म्याँमार में भी दोहराने का मौक़ा नहीं देना चाहिये.”, संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष मानवाधिकार अधिकारी मिशेल बाशेलेट ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि म्याँमार में, प्रदर्शनों पर किया जाने वाला मौजूदा दमन, सीरिया की ही तरह, गम्भीर व पूर्ण संघर्ष का रूप भी ले सकता है. उन्होंने प्रभाव वाले देशों से, आम नागरिकों की “हत्याएँ” रोकने के लिये, तुरन्त और असरदार कार्रवाई किये जाने का आग्रह भी किया है.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने मंगलवार को कहा, “ये स्पष्ट है कि निन्दा करने वाले वक्तव्य जारी करना और सीमित लक्षित प्रतिबन्ध पर्याप्त नहीं हैं.” 

“प्रभाव वाले देशों को, म्याँमार की सेना पर, मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघन, और मानवता के विरुद्ध सम्भावित अपराधों को रोकने के लिये, तुरन्त ठोस दबाव डालना होगा.”

मानवाधिकार उच्चायुक्त की ये अपील ऐसे समय में आई है जब म्याँमार में, बीते सप्ताहान्त सेना द्वारा बागो में एक “सुनियोजित रक्तपात” में, कम से कम 82 लोगों की मौत हो गई.

विश्वस्त ख़बरों के अनुसार, म्याँमार की सेना – तत्मादाव ने रॉकेटों से दागे जाने वाले गोलों और फटने वाले ग्रेनेडों व मोर्टारों का भी इस्तेमाल किया.

उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि म्याँमार की सेना, देश के लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा की निर्दयी नीति को और ज़्यादा सघन बनाने पर तुली हुई है, जिसमें सैन्य दर्जे के हथियारों का प्रयोग, अंधाधुंध तरीक़े से किया जा रहा है.”

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार ऐसी भी ख़बरें हैं कि सुरक्षा बलों ने, चिकित्साकर्मियों को घायलों का इलाज करने से भी रोका है, और मृतकों के शव हासिल करने की कोशिश करने वाले सम्बन्धियों से 90 डॉलर का जुर्माना वसूले जाने की भी ख़बरें हैं.

मानवाधिकार कार्यालय ने ये भी कहा कि कुछ लोग, आत्म सुरक्षा के लिये, अब स्थानीय तौर पर बनाए गए देसी हथियारों का भी सहारा ले रहे हैं.

मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने म्याँमार पर संयुक्त राष्ट्र के तथ्य जाँच दल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, म्याँमार के सैन्य नेतृत्व को शस्त्रों और धन की आपूर्ति बन्द करने की ज़रूरत को भी रेखांकित किया है, जिसके ज़रिये, वो मानवाधिकारों का गम्भीर हनन करते हैं.

सीरिया जैसे हालात

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने आगाह करते हुए कहा कि म्याँमार के हालात, वर्ष 2011 में सीरिया में भड़के हालात से बिल्कुल मिलते-जुलते हैं, और जिनके बाद सीरिया गृहयुद्ध में धँस गया.

सारी दुनिया ने देखा है कि पिछले लगभग दस वर्षों के दौरान, किस तरह सीरिया में लाखों लोगों की मौतें होने के साथ-साथ, कितनी भीषण तबाही हुई है.

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि सीरिया में भी हमने देखा था कि शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अनावश्यक व स्पष्ट रूप में, ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग किया गया था.

देश की सरकार द्वारा अपने ही देश के लोगों का क्रूर व लगातार दमन किये जाने से, नतीजा ये हुआ कि कुछ लोगों ने हथियार उठा लिये, जिसके बाद पूरे देश में, हिंसा और तबाही का ना रुकने वाला चक्र शुरू हो गया.

मिशेल बाशेलेट ने कहा कि उस समय के यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने आगाह किया था कि अगर अन्तरराष्ट्रीय समुदाय, ठोस समाधान व कार्रवाई करने में नाकाम रहता है तो उसके नतीजे सीरिया और उससे भी आगे, बहुत भीषण व विनाशकारी होंगे. 

उन्होंने कहा, “मुझे डर है कि म्याँमार में भी हालात, एक पूर्ण व गम्भीर संघर्ष की तरफ़ बढ़ रहे हैं. देशों को, सीरिया और अन्य स्थानों पर हुई इसी तरह की भूलों को, म्याँमार में भी दोहराने का मौक़ा नहीं देना चाहिये.”

,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *