म्याँमार में आर्थिक हालात ढहने के कगार पर – यूएन रिपोर्ट

म्याँमार में सैन्य तख़्तापलट के बाद राजनैतिक उठापठक और कोविड-19 महामारी के असर की वजह से लगभग ढाई करोड़ लोग, यानि देश की लगभग आधी आबादी, अगले वर्ष की शुरुआत तक निर्धनता में रहने के लिये मजबूर हो सकती है. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने शुक्रवार को जारी एक नई रिपोर्ट में यह बात कही है.

‘COVID-19, Coup d’état and Poverty: Compounding Negative Shocks and their Impact on Human Development in Myanmar’ नामक रिपोर्ट बताती है कि देश में दरिद्रता के यह स्तर वर्ष 2005 के बाद से देखा नहीं गया है.

According to @UNDP_Myanmar new report, up to 25 million people in Myanmar could be living below the national poverty line by early 2022, a level of impoverishment not seen since 2005, due to the combined effects of #COVID19 and the political crisis. https://t.co/eqG6CGmf3O— UNDP Asia Pacific (@UNDPasiapac) April 30, 2021

म्याँमार की अर्थव्यवस्था, मौजूदा समय में ढहने के जोखिम का सामना कर रही है.
यूएनडीपी प्रशासक एखिम श्टाइनर ने कहा, “12 वर्षों के दौरान, वर्ष 2005 से 2017 तक, म्याँमार को, निर्धनता में रह रहे लोगों की संख्या आधी करने में सफलता हासिल हुई थी.”
“मगर, मुश्किल से हासिल की गई इन प्रगतियों पर, पिछले 12 महीनों की चुनौतियों की वजह से जोखिम है.”
रिपोर्ट दर्शाती है कि म्याँमार में आर्थिक, स्वास्थ्य और राजनैतिक संकट, व्यक्तियों व समुदायों को भिन्न-भिन्न रूपों में प्रभावित कर रहा है.
निर्बल समुदायों पर इसका सबसे ज़्यादा असर होने की आशंका है, विशेष रूप से घरेलू विस्थापितों और जातीय अल्पसंख्यकों पर, जिनमें रोहिंज्या समुदाय भी है.
रिपोर्ट के मुताबिक़ वर्ष 2020 के अन्त तक, म्याँमार के 83 फ़ीसदी घरों में औसत आय में, महामारी के कारण पचास फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी.
इसके परिणामस्वरूप, ग़रीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों की संख्या में, 11 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है.
1 फ़रवरी को सैन्य तख़्तापलट के बाद, सुरक्षा और मानवाधिकार संकट के कारण हालात और बदतर हो गए हैं.
पिछले तीन महीनों में, लोकतन्त्र के समर्थन में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की दमनात्मक कार्रवाई में 750 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है, जिनमें बच्चे भी हैं.
बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और हज़ारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है.
म्याँमार में सुरक्षा बलों और क्षेत्रीय सशस्त्र गुटों के बीच झड़पें शुरू होने की वजह से अनेक हिस्सों में ताज़ा विस्थापन हुआ है, और लोगों को सीमा-पार शरण की कोशिशें करनी पड़ रही हैं.
शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक़, महिलाओं और बच्चों पर इस संकट का सबसे ज़्यादा असर पड़ने की आशंका है.
देश में, अगले एक वर्ष के भीतर, आधे से ज़्यादा बच्चों को निर्धनता में रहना पड़ सकता है.
देश की मुद्रा पर दबाव बढ़ा है जिससे ऊर्जा व आयात की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि देश की बैंकिंग व्यवस्था भी संकट के दौर से गुज़र रही है.
रिपोर्ट बताती है कि आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और मानवाधिकार संरक्षण के लिये जल्द क़दम उठाए जाने होंगे, अन्यथा टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा पर प्रगति मुश्किल में पड़ सकती है., म्याँमार में सैन्य तख़्तापलट के बाद राजनैतिक उठापठक और कोविड-19 महामारी के असर की वजह से लगभग ढाई करोड़ लोग, यानि देश की लगभग आधी आबादी, अगले वर्ष की शुरुआत तक निर्धनता में रहने के लिये मजबूर हो सकती है. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने शुक्रवार को जारी एक नई रिपोर्ट में यह बात कही है.

COVID-19, Coup d’état and Poverty: Compounding Negative Shocks and their Impact on Human Development in Myanmar’ नामक रिपोर्ट बताती है कि देश में दरिद्रता के यह स्तर वर्ष 2005 के बाद से देखा नहीं गया है.

म्याँमार की अर्थव्यवस्था, मौजूदा समय में ढहने के जोखिम का सामना कर रही है.

यूएनडीपी प्रशासक एखिम श्टाइनर ने कहा, “12 वर्षों के दौरान, वर्ष 2005 से 2017 तक, म्याँमार को, निर्धनता में रह रहे लोगों की संख्या आधी करने में सफलता हासिल हुई थी.”

“मगर, मुश्किल से हासिल की गई इन प्रगतियों पर, पिछले 12 महीनों की चुनौतियों की वजह से जोखिम है.”

रिपोर्ट दर्शाती है कि म्याँमार में आर्थिक, स्वास्थ्य और राजनैतिक संकट, व्यक्तियों व समुदायों को भिन्न-भिन्न रूपों में प्रभावित कर रहा है.

निर्बल समुदायों पर इसका सबसे ज़्यादा असर होने की आशंका है, विशेष रूप से घरेलू विस्थापितों और जातीय अल्पसंख्यकों पर, जिनमें रोहिंज्या समुदाय भी है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ वर्ष 2020 के अन्त तक, म्याँमार के 83 फ़ीसदी घरों में औसत आय में, महामारी के कारण पचास फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी.

इसके परिणामस्वरूप, ग़रीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों की संख्या में, 11 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है.

1 फ़रवरी को सैन्य तख़्तापलट के बाद, सुरक्षा और मानवाधिकार संकट के कारण हालात और बदतर हो गए हैं.

पिछले तीन महीनों में, लोकतन्त्र के समर्थन में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की दमनात्मक कार्रवाई में 750 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है, जिनमें बच्चे भी हैं.

बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और हज़ारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है.

म्याँमार में सुरक्षा बलों और क्षेत्रीय सशस्त्र गुटों के बीच झड़पें शुरू होने की वजह से अनेक हिस्सों में ताज़ा विस्थापन हुआ है, और लोगों को सीमा-पार शरण की कोशिशें करनी पड़ रही हैं.

शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक़, महिलाओं और बच्चों पर इस संकट का सबसे ज़्यादा असर पड़ने की आशंका है.

देश में, अगले एक वर्ष के भीतर, आधे से ज़्यादा बच्चों को निर्धनता में रहना पड़ सकता है.

देश की मुद्रा पर दबाव बढ़ा है जिससे ऊर्जा व आयात की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि देश की बैंकिंग व्यवस्था भी संकट के दौर से गुज़र रही है.

रिपोर्ट बताती है कि आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और मानवाधिकार संरक्षण के लिये जल्द क़दम उठाए जाने होंगे, अन्यथा टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा पर प्रगति मुश्किल में पड़ सकती है.

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