म्याँमार: ‘लोकतन्त्र दरकिनार’, देश के राजदूत ने की तख़्तापलट की निन्दा

म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेंगेर बुर्गेनेर ने कहा है कि देश में, 1 फ़रवरी को सेना द्वारा सत्ता पर क़ब्ज़ा किये जाने के बाद, व्यापक स्तर पर प्रदर्शन, हिंसा और गिरफ़्तारियों का सिलसिला जारी है, देश की काउंसिलर आँग सान सू ची अब भी हिरासत में हैं, इन सभी हालात को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि “लोकतान्त्रिक प्रक्रियाएँ दरकिनार कर दी गई हैं.”  

विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेंगेर बुर्गेनेर ने, म्याँमार की स्थिति पर, यूएन महासभा की, शुक्रवार को हुई एक अनौपचारिक बैठक में कहा, “मैंने 2019 में कहा था कि ज़रूरत पड़ने पर मैं सतर्कता की घण्टी बजाउँगी… अब वो बात सच साबित हो रही है.”

I call on all states to take side for the people of #Myanmar pic.twitter.com/UdALZ0CArk— Special Envoy of UN Secretary-General on Myanmar (@SchranerBurgen1) February 26, 2021

नाज़ुक व भंगुर स्थिति
यूएन विशेष दूत ने कहा कि म्याँमार में स्थिति नाज़ुक व भंगुर है और उन्होंने इस स्थिति को, निहत्थे लोगों की लड़ाई क़रार दिया.
विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेंगेर बुर्गेनेर ने हाल में सेना द्वारा किये गए तख़्तापलट की कड़ी निन्दा की और महासभा की इस बैठक में मौजूद राजदूतों से आग्रह किया कि वो, लोकतन्त्र के समर्थन में सामूहिक स्पष्ट सन्देश भेजें.
उन्होंने देश में एक बहुलवाद पर आधारित लोकतन्त्र की बुनियाद मज़बूत करनें में मदद की तात्कालिकता पर ज़ोर दिया, जोकि देश में सिविल नेतृत्व की जटिल चुनौतियों से मेल खाती हो.
उन्होंने कहा, “मैंने जटिल स्थिति को सरल तरीक़े से बयान करने का बार-बार प्रयत्न किया है, जिसमें ये बताना भी शामिल है कि वास्तविक शक्ति सेना के पास है. एक वास्तविक लोकतन्त्र  में, सेना पर, एक सिविल (असैन्य) सरकार का नियन्त्रण ज़रूरी है.”
विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेंगेर बुर्गेनेर ने कहा कि सेना द्वारा तख़्तापलट किया जाना, स्थिरता वाली स्थिति नहीं रही है, इसलिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को, इस सैन्य सत्ता को ना तो कोई पहचान देनी होगी और ना ही कोई वैधता.” 
म्याँमार के दूत ने की तख़्तापलट निन्दा
संयुक्त राष्ट्र में म्याँमार के राजदूत क्याव मो टुन ने, विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेंगेर बुर्गेनेर के बयान की प्रतिक्रिया में, घोषणा की कि वो सैन्य नेतृत्व का नहीं, बल्कि नेशलन लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, इसलिये वो देश के लोकतान्त्रिक तरीक़े से चुने गए सांसदों के लिये अपनी आवाज़ सामने रख कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र में म्याँमार के दूत ने तख़्तापलट की निन्दा करते हुए कहा कि म्याँमार के लोगों के लिये लगातार और मज़बूत समर्थन बहुत आवश्यक है, और उन्होंने सदस्य देशों व संयुक्त राष्ट्र से तख़्तापलट की निन्दा करने की अपील की.
उन्होंने साथ ही, ये भी अपील की कि शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर, सुरक्षा बलों द्वारा दमनात्मक व हिंसक कार्रवाई को रोकने और तख़्तापलट को ख़त्म करने के लिये कड़े से कड़े उपाय किये जाएँ.
महासभा के हॉल में यह बात कहते हुए उनका गला भर आया, और उन्होंने तीन उंगलियों वाला अभिवादन प्रदर्शित किया जो म्याँमार में प्रदर्शनकारियों का प्रतीक चिन्ह बन रहा है.
म्याँमार के राजदूत ने कहा कि वो उन लोगों में शामिल रहेंगे जो “एक ऐसी सरकार के लिये संघर्षरत हैं जो लोगों की, लोगों द्वारा और लोगों के लिये हो.”, म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेंगेर बुर्गेनेर ने कहा है कि देश में, 1 फ़रवरी को सेना द्वारा सत्ता पर क़ब्ज़ा किये जाने के बाद, व्यापक स्तर पर प्रदर्शन, हिंसा और गिरफ़्तारियों का सिलसिला जारी है, देश की काउंसिलर आँग सान सू ची अब भी हिरासत में हैं, इन सभी हालात को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि “लोकतान्त्रिक प्रक्रियाएँ दरकिनार कर दी गई हैं.”  

विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेंगेर बुर्गेनेर ने, म्याँमार की स्थिति पर, यूएन महासभा की, शुक्रवार को हुई एक अनौपचारिक बैठक में कहा, “मैंने 2019 में कहा था कि ज़रूरत पड़ने पर मैं सतर्कता की घण्टी बजाउँगी… अब वो बात सच साबित हो रही है.”

नाज़ुक व भंगुर स्थिति

यूएन विशेष दूत ने कहा कि म्याँमार में स्थिति नाज़ुक व भंगुर है और उन्होंने इस स्थिति को, निहत्थे लोगों की लड़ाई क़रार दिया.

विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेंगेर बुर्गेनेर ने हाल में सेना द्वारा किये गए तख़्तापलट की कड़ी निन्दा की और महासभा की इस बैठक में मौजूद राजदूतों से आग्रह किया कि वो, लोकतन्त्र के समर्थन में सामूहिक स्पष्ट सन्देश भेजें.

उन्होंने देश में एक बहुलवाद पर आधारित लोकतन्त्र की बुनियाद मज़बूत करनें में मदद की तात्कालिकता पर ज़ोर दिया, जोकि देश में सिविल नेतृत्व की जटिल चुनौतियों से मेल खाती हो.

उन्होंने कहा, “मैंने जटिल स्थिति को सरल तरीक़े से बयान करने का बार-बार प्रयत्न किया है, जिसमें ये बताना भी शामिल है कि वास्तविक शक्ति सेना के पास है. एक वास्तविक लोकतन्त्र  में, सेना पर, एक सिविल (असैन्य) सरकार का नियन्त्रण ज़रूरी है.”

विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेंगेर बुर्गेनेर ने कहा कि सेना द्वारा तख़्तापलट किया जाना, स्थिरता वाली स्थिति नहीं रही है, इसलिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को, इस सैन्य सत्ता को ना तो कोई पहचान देनी होगी और ना ही कोई वैधता.” 

म्याँमार के दूत ने की तख़्तापलट निन्दा

संयुक्त राष्ट्र में म्याँमार के राजदूत क्याव मो टुन ने, विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेंगेर बुर्गेनेर के बयान की प्रतिक्रिया में, घोषणा की कि वो सैन्य नेतृत्व का नहीं, बल्कि नेशलन लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, इसलिये वो देश के लोकतान्त्रिक तरीक़े से चुने गए सांसदों के लिये अपनी आवाज़ सामने रख कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र में म्याँमार के दूत ने तख़्तापलट की निन्दा करते हुए कहा कि म्याँमार के लोगों के लिये लगातार और मज़बूत समर्थन बहुत आवश्यक है, और उन्होंने सदस्य देशों व संयुक्त राष्ट्र से तख़्तापलट की निन्दा करने की अपील की.

उन्होंने साथ ही, ये भी अपील की कि शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर, सुरक्षा बलों द्वारा दमनात्मक व हिंसक कार्रवाई को रोकने और तख़्तापलट को ख़त्म करने के लिये कड़े से कड़े उपाय किये जाएँ.

महासभा के हॉल में यह बात कहते हुए उनका गला भर आया, और उन्होंने तीन उंगलियों वाला अभिवादन प्रदर्शित किया जो म्याँमार में प्रदर्शनकारियों का प्रतीक चिन्ह बन रहा है.

म्याँमार के राजदूत ने कहा कि वो उन लोगों में शामिल रहेंगे जो “एक ऐसी सरकार के लिये संघर्षरत हैं जो लोगों की, लोगों द्वारा और लोगों के लिये हो.”

,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *