म्याँमार: शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसा की कड़े शब्दों में निन्दा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने म्याँमार में शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हिंसा की कठोर शब्दों में निन्दा की है और चिकित्साकर्मियों, नागरिक समाज, श्रम संगठनों व पत्रकारों पर लगाई गई पाबन्दियों पर गहरी चिन्ता जताई है. फ़रवरी महीने में सेना द्वारा सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाने के बाद से ही म्याँमार में व्यापक स्तर पर देश के अनेक शहरों में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं.

मार्च महीने के लिये 15-सदस्यीय सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता सम्भाल रहे सदस्य देश, अमेरिका ने बुधवार को एक अध्यक्षीय वक्तव्य जारी किया, जिसमें मनमाने ढँग से हिरासत में लिये गए सभी लोगों को रिहा करने की अपील दोहराई गई है.
वक्तव्य में कहा गया है कि “सुरक्षा परिषद म्याँमार के लोकतन्त्र की दिशा में क़दम बढ़ाने का समर्थन करती है, और लोकतान्त्रिक संस्थाओं व प्रक्रियाओं को बरक़रार रखने, हिंसा से परहेज़ बरते जाने, मानवाधिकारों व बुनियादी स्वतन्त्रताओं का पूर्ण सम्मान करने और क़ानून के राज के सर्वोपरि रखने की अहमियत रेखांकित करती है.”
सुरक्षा परिषद ने म्याँमार की जनता की इच्छा व हितों के अनुरूप सृजनात्मक सम्वाद और आपसी मेलमिलाप को प्रोत्साहन दिये जाने की बात कही है.  
सुरक्षा परिषद ने म्याँमार में सैन्य नेतृत्व से अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया है और स्पष्ट किया है कि देश में घटनाक्रम पर करीब से नज़र रखी जा रही है.
सुरक्षा परिषद ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (ASEAN/आसियान) के प्रति अपना मज़बूत समर्थन व्यक्त करते हुए म्याँमार की सकारात्मक, शान्तिपूर्ण और रचनात्मक सहयोग प्रदान किये जाने की इच्छा ज़ाहिर की है. 
परिषद ने क्षेत्रीय संगठन द्वारा म्याँमार में सभी पक्षों के साथ सम्वाद स्थापित करने के प्रयासों की सराहना की है.
सुरक्षा परिषद ने म्याँमार के लिये यूएन महासचिव की विशेष दूत के लिये अपने समर्थन को दोहराते हुए, उनसे म्याँमार की यात्रा करने और सभी प्रासंगिक पक्षों के साथ बातचीत के प्रयासों को जारी रखने की बात कही है.

ILO Photo/Marcel Crozetम्याँमार में, 1 फ़रवरी को सेना द्वारा तख़्तापलट के बाद, देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा 
15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद ने सभी ज़रूरतमन्दों तक सुरक्षित और निर्बाध मानवीय राहत पहुँचाने की पुकार लगाई है. बताया गया है कि ताज़ा घटनाक्रम से राख़ीन प्रान्त और अन्य क्षेत्रों में पहले से मौजूद चुनौतियाँ और गहरा सकती हैं.
यूएन के आँकड़ों के अनुसार, राजनैतिक संकट से इतर, म्याँमार में लगभग दस लाख लोगों को सहायता व संरक्षा की आवश्यकता है.
मगर मुश्किल हालात के कारण और संचार, परिवहन, सप्लाई चेन में आए व्यवधान और नकदी की किल्लत के कारण मानवीय राहत अभियान में दिक्कतें पेश आ रही हैं.
सुरक्षा परिषद ने चिन्ता जताई है कि म्याँमार में राजनैतिक घटनाक्रम के कारण रोहिंज्या शरणार्थियों व घरेलू विस्थापितों की स्वैच्छिक, सुरक्षित, गरिमामय और स्थाई वापसी के लिये गम्भीर चुनौतियाँ पैदा हो गई हैं. 
“यह बेहद अहम है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की पूर्ण रक्षा की जाए.”
सुरक्षा परिषद की ओर से एक अध्यक्षीय वक्तव्य, सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष द्वारा जारी किया जाता है. इन वक्तव्यों को एक औपचारिक बैठक के दौरान पारित किया जाता है. 
ये वक्तव्य, अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा पर यूएन के सर्वोपरि अंग के आधिकारिक दस्तावेज के रूप में जारी किया जाता है. 
मौजूदा वक्तव्य को ‘म्याँमार में हालात’ पर सुरक्षा परिषद में विचार-विमर्श के क्रम में जारी किया गया है.  , संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने म्याँमार में शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हिंसा की कठोर शब्दों में निन्दा की है और चिकित्साकर्मियों, नागरिक समाज, श्रम संगठनों व पत्रकारों पर लगाई गई पाबन्दियों पर गहरी चिन्ता जताई है. फ़रवरी महीने में सेना द्वारा सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाने के बाद से ही म्याँमार में व्यापक स्तर पर देश के अनेक शहरों में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं.

मार्च महीने के लिये 15-सदस्यीय सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता सम्भाल रहे सदस्य देश, अमेरिका ने बुधवार को एक अध्यक्षीय वक्तव्य जारी किया, जिसमें मनमाने ढँग से हिरासत में लिये गए सभी लोगों को रिहा करने की अपील दोहराई गई है.

वक्तव्य में कहा गया है कि “सुरक्षा परिषद म्याँमार के लोकतन्त्र की दिशा में क़दम बढ़ाने का समर्थन करती है, और लोकतान्त्रिक संस्थाओं व प्रक्रियाओं को बरक़रार रखने, हिंसा से परहेज़ बरते जाने, मानवाधिकारों व बुनियादी स्वतन्त्रताओं का पूर्ण सम्मान करने और क़ानून के राज के सर्वोपरि रखने की अहमियत रेखांकित करती है.”

सुरक्षा परिषद ने म्याँमार की जनता की इच्छा व हितों के अनुरूप सृजनात्मक सम्वाद और आपसी मेलमिलाप को प्रोत्साहन दिये जाने की बात कही है.  

सुरक्षा परिषद ने म्याँमार में सैन्य नेतृत्व से अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया है और स्पष्ट किया है कि देश में घटनाक्रम पर करीब से नज़र रखी जा रही है.

सुरक्षा परिषद ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (ASEAN/आसियान) के प्रति अपना मज़बूत समर्थन व्यक्त करते हुए म्याँमार की सकारात्मक, शान्तिपूर्ण और रचनात्मक सहयोग प्रदान किये जाने की इच्छा ज़ाहिर की है. 

परिषद ने क्षेत्रीय संगठन द्वारा म्याँमार में सभी पक्षों के साथ सम्वाद स्थापित करने के प्रयासों की सराहना की है.

सुरक्षा परिषद ने म्याँमार के लिये यूएन महासचिव की विशेष दूत के लिये अपने समर्थन को दोहराते हुए, उनसे म्याँमार की यात्रा करने और सभी प्रासंगिक पक्षों के साथ बातचीत के प्रयासों को जारी रखने की बात कही है.


ILO Photo/Marcel Crozet
म्याँमार में, 1 फ़रवरी को सेना द्वारा तख़्तापलट के बाद, देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा 

15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद ने सभी ज़रूरतमन्दों तक सुरक्षित और निर्बाध मानवीय राहत पहुँचाने की पुकार लगाई है. बताया गया है कि ताज़ा घटनाक्रम से राख़ीन प्रान्त और अन्य क्षेत्रों में पहले से मौजूद चुनौतियाँ और गहरा सकती हैं.

यूएन के आँकड़ों के अनुसार, राजनैतिक संकट से इतर, म्याँमार में लगभग दस लाख लोगों को सहायता व संरक्षा की आवश्यकता है.

मगर मुश्किल हालात के कारण और संचार, परिवहन, सप्लाई चेन में आए व्यवधान और नकदी की किल्लत के कारण मानवीय राहत अभियान में दिक्कतें पेश आ रही हैं.

सुरक्षा परिषद ने चिन्ता जताई है कि म्याँमार में राजनैतिक घटनाक्रम के कारण रोहिंज्या शरणार्थियों व घरेलू विस्थापितों की स्वैच्छिक, सुरक्षित, गरिमामय और स्थाई वापसी के लिये गम्भीर चुनौतियाँ पैदा हो गई हैं. 

“यह बेहद अहम है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की पूर्ण रक्षा की जाए.”

सुरक्षा परिषद की ओर से एक अध्यक्षीय वक्तव्य, सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष द्वारा जारी किया जाता है. इन वक्तव्यों को एक औपचारिक बैठक के दौरान पारित किया जाता है. 

ये वक्तव्य, अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा पर यूएन के सर्वोपरि अंग के आधिकारिक दस्तावेज के रूप में जारी किया जाता है. 

मौजूदा वक्तव्य को ‘म्याँमार में हालात’ पर सुरक्षा परिषद में विचार-विमर्श के क्रम में जारी किया गया है.  

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