म्याँमार संकट: तख़्तापलट के ज़िम्मेदारों के विरुद्ध, कड़ी कार्रवाई की माँग

संयुक्त राष्ट्र की उप मानवाधिकार उच्चायुक्त नादा अल नाशीफ़ और म्याँमार पर स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़ ने, देश में, पिछले सप्ताह ‘सत्ता का तख़्तापलट’ करने वाली हस्तियों के विरुद्ध लक्षित प्रतिबन्ध लगाने का आहवान किया है. इस बीच म्याँमार में जारिस्थिति पर चर्चा करने के लिये, शुक्रवार को, यूएन मानवाधिकार परिषद का विशेष सत्र  आयोजित किया गया.

उप मानवाधिकार उच्चायुक्त नादा अल नाशीफ़ और विशेष रैपोर्टेयर थॉमस एण्ड्रयूज़ ने साथ ही ये भी कहा कि तख़्तापलट के ज़िम्मेदार लोगो के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई, म्याँमार के कमज़ोर समुदायों को किसी तरह का नुक़सान नहीं पहुँचाए. और ये भी सुनिश्चित करना होगा कि कोरोनावायरस का मुक़ाबवला करने के लिये मदद और मानवीय सहायता जारी रहे. 

🇲🇲 #Myanmar crisis was born of impunity. More violence against Myanmar’s people will only compound the illegitimacy of the coup, and the culpability of its leaders. Learn more 👉 https://t.co/OezLt9Po4S pic.twitter.com/reMtbkPSac— UN Human Rights (@UNHumanRights) February 12, 2021

दुनिया देख रही है
म्याँमार पर स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़ ने ने 1 फ़रवरी को, वहाँ सेना द्वारा देश की सत्ता पर क़ब्ज़ा किये जाने की, विस्तृत ब्यौरा पेश करते हुए, उन हालात का भी ज़िक्र किया जिनमें असैनिक सरकार का तख़्तापलट किया गया, लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही, और “सैन्य नेतृत्व ने क्या दमनकारी कार्रवाइयाँ कीं”.
विशेष रैपोर्टेयर ने अपनी बात, यह ज़ोर देते हुए शुरू की कि मानवाधिकार परिषद का विशेष सत्र आयोजित किया जाना ही, स्थिति की गम्भीरता को दिखाता है जिसमें, परिषद के विचार के अनुसार, म्याँमार में जो कुछ हुआ, “उसे शर्मनाक और ग़ैर-क़ानूनी कार्रवाई क़रार दिया जा सकता है – वैधानिक तरीक़े से चुनी हुई एक सरकार और उसके निर्वाचित नेताओं का तख़्तापलट किया जाना”.
उन्होंने कहा, “दिन के बाद, हर दिन, म्याँमार के लोगों, और दुनिया भर के लोगों ने, देश के रास्तों पर होती क्रूरता की दिल दहला देने वाली तस्वीरें और वीडियो देखी हैं.”
“इनमें नज़र आता है कि पूरी तरह से चाक-चौबन्द सुरक्षा बलों ने, शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को घेरा हुआ है, और लगातार बढ़ती भीड़ पर, पानी की प्रबल बौछार की गई है, कुछ प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ भी चलाई गई हैं, इनमें एक ऐसी युवा महिला भी है जिसे उस समय गोली मारी गई, जब वो निहत्थी और बिना कोई ख़तरा पैदा किये, केवल सामान्य रूप से खड़ी थी. वो भी राजधानी नाय प्यी थाव में अन्य शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का हिस्सा थी.”
प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ अत्यधिक बल प्रयोग व जानलेवा गोलियाँ दागे जाने की भी ख़बरें मिली हैं. साथ ही लोगों को मनमाने तरीक़े से बन्दी बनाने, उन्हें डराने-धमकाए जाने, मीडिया को धमकियाँ दिये जाने, और ऐसे नियम व क़ानून लागू किये जाने की भी ख़बरें हैं जिनके तहत, व्यवस्थित तरीक़े से, लोगों के अधिकार छीन लिये जाते हैं, उन्हें सूचना प्राप्ति से रोका जाता है और उनकी निजता का भी उल्लंघन किया जाता है.
विशेष रैपोर्टेयर ने ख़बरों का हवाला देते हुए बताया कि म्याँमार में, 220 सरकार आधिकारियों और सिविल सोसायटी सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया है, जिनमें देश की काउंसलर आँग सान सू ची, राष्ट्रपति विन म्यिन्त और संघीय चुनाव आयोग के कुछ सदस्य भी हैं. इनमें से अधिकतर को सादी वर्दी में पुलिस ने, रात के अन्धेरे में हिरासत में लिया.
अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की कार्रवाई 
स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़ ने म्याँमार में एक ऐसे मानवाधिकार से मिला सन्देश मानवाधिकार परिषद को पढ़कर सुनाया जिसे वहाँ सुरक्षा ख़तरों के कारण छुपना पड़ रहा है. उन्होंने साथ ही, परिषद से कार्रवाई किये जाने का भी आहवान किया.
“कार्यकर्ता ने, ये सटीक शब्द, सम्मानपूर्ण इस संस्था तक पहुँचाने के लिये कहा: ‘हमें, केवल किसी काग़ज़ पर लिखे वक्तव्य से कहीं अधिक की ज़रूरत है; हमें, संयुक्त राष्ट्र से असल कार्रवाई की दरकार है.’”
मानवाधिकार विशेषज्ञ ने यूएन मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) का आहवान किया कि वो सुरक्षा परिषद से, उन सभी विकल्पों पर विचार करने का अनुरोध करे जो उसने, बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन होने की स्थिति से निपटने के लिये, प्रयोग किये हैं, जिनमें प्रतिबन्ध, शस्त्र नियन्त्रण (पाबन्दियाँ) और यात्राओं पर प्रतिबन्ध शामिल हैं.
इनके अलावा, अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) या किसी अस्थायी ट्राइब्यूनल में भी न्यायिक कार्यवाही शुरू किये जाने की भी पुकार लगाई गई है.
…जारी…, संयुक्त राष्ट्र की उप मानवाधिकार उच्चायुक्त नादा अल नाशीफ़ और म्याँमार पर स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़ ने, देश में, पिछले सप्ताह ‘सत्ता का तख़्तापलट’ करने वाली हस्तियों के विरुद्ध लक्षित प्रतिबन्ध लगाने का आहवान किया है. इस बीच म्याँमार में जारिस्थिति पर चर्चा करने के लिये, शुक्रवार को, यूएन मानवाधिकार परिषद का विशेष सत्र  आयोजित किया गया.

उप मानवाधिकार उच्चायुक्त नादा अल नाशीफ़ और विशेष रैपोर्टेयर थॉमस एण्ड्रयूज़ ने साथ ही ये भी कहा कि तख़्तापलट के ज़िम्मेदार लोगो के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई, म्याँमार के कमज़ोर समुदायों को किसी तरह का नुक़सान नहीं पहुँचाए. और ये भी सुनिश्चित करना होगा कि कोरोनावायरस का मुक़ाबवला करने के लिये मदद और मानवीय सहायता जारी रहे. 

दुनिया देख रही है

म्याँमार पर स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़ ने ने 1 फ़रवरी को, वहाँ सेना द्वारा देश की सत्ता पर क़ब्ज़ा किये जाने की, विस्तृत ब्यौरा पेश करते हुए, उन हालात का भी ज़िक्र किया जिनमें असैनिक सरकार का तख़्तापलट किया गया, लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही, और “सैन्य नेतृत्व ने क्या दमनकारी कार्रवाइयाँ कीं”.

विशेष रैपोर्टेयर ने अपनी बात, यह ज़ोर देते हुए शुरू की कि मानवाधिकार परिषद का विशेष सत्र आयोजित किया जाना ही, स्थिति की गम्भीरता को दिखाता है जिसमें, परिषद के विचार के अनुसार, म्याँमार में जो कुछ हुआ, “उसे शर्मनाक और ग़ैर-क़ानूनी कार्रवाई क़रार दिया जा सकता है – वैधानिक तरीक़े से चुनी हुई एक सरकार और उसके निर्वाचित नेताओं का तख़्तापलट किया जाना”.

उन्होंने कहा, “दिन के बाद, हर दिन, म्याँमार के लोगों, और दुनिया भर के लोगों ने, देश के रास्तों पर होती क्रूरता की दिल दहला देने वाली तस्वीरें और वीडियो देखी हैं.”

“इनमें नज़र आता है कि पूरी तरह से चाक-चौबन्द सुरक्षा बलों ने, शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को घेरा हुआ है, और लगातार बढ़ती भीड़ पर, पानी की प्रबल बौछार की गई है, कुछ प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ भी चलाई गई हैं, इनमें एक ऐसी युवा महिला भी है जिसे उस समय गोली मारी गई, जब वो निहत्थी और बिना कोई ख़तरा पैदा किये, केवल सामान्य रूप से खड़ी थी. वो भी राजधानी नाय प्यी थाव में अन्य शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का हिस्सा थी.”

प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ अत्यधिक बल प्रयोग व जानलेवा गोलियाँ दागे जाने की भी ख़बरें मिली हैं. साथ ही लोगों को मनमाने तरीक़े से बन्दी बनाने, उन्हें डराने-धमकाए जाने, मीडिया को धमकियाँ दिये जाने, और ऐसे नियम व क़ानून लागू किये जाने की भी ख़बरें हैं जिनके तहत, व्यवस्थित तरीक़े से, लोगों के अधिकार छीन लिये जाते हैं, उन्हें सूचना प्राप्ति से रोका जाता है और उनकी निजता का भी उल्लंघन किया जाता है.

विशेष रैपोर्टेयर ने ख़बरों का हवाला देते हुए बताया कि म्याँमार में, 220 सरकार आधिकारियों और सिविल सोसायटी सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया है, जिनमें देश की काउंसलर आँग सान सू ची, राष्ट्रपति विन म्यिन्त और संघीय चुनाव आयोग के कुछ सदस्य भी हैं. इनमें से अधिकतर को सादी वर्दी में पुलिस ने, रात के अन्धेरे में हिरासत में लिया.

अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की कार्रवाई 

स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़ ने म्याँमार में एक ऐसे मानवाधिकार से मिला सन्देश मानवाधिकार परिषद को पढ़कर सुनाया जिसे वहाँ सुरक्षा ख़तरों के कारण छुपना पड़ रहा है. उन्होंने साथ ही, परिषद से कार्रवाई किये जाने का भी आहवान किया.

“कार्यकर्ता ने, ये सटीक शब्द, सम्मानपूर्ण इस संस्था तक पहुँचाने के लिये कहा: ‘हमें, केवल किसी काग़ज़ पर लिखे वक्तव्य से कहीं अधिक की ज़रूरत है; हमें, संयुक्त राष्ट्र से असल कार्रवाई की दरकार है.’”

मानवाधिकार विशेषज्ञ ने यूएन मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) का आहवान किया कि वो सुरक्षा परिषद से, उन सभी विकल्पों पर विचार करने का अनुरोध करे जो उसने, बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन होने की स्थिति से निपटने के लिये, प्रयोग किये हैं, जिनमें प्रतिबन्ध, शस्त्र नियन्त्रण (पाबन्दियाँ) और यात्राओं पर प्रतिबन्ध शामिल हैं.

इनके अलावा, अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) या किसी अस्थायी ट्राइब्यूनल में भी न्यायिक कार्यवाही शुरू किये जाने की भी पुकार लगाई गई है.

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