म्याँमार: सुरक्षा परिषद में विशेष दूत, सामयिक समर्थन व कार्रवाई का आग्रह

म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की विशेष दूत क्रिस्टिना श्रेनर बर्गनर ने देश में मौजूदा संकट के मद्देनज़र, सुरक्षा परिषद से ज़रूरी समर्थन और समय रहते कार्रवाई का आग्रह किया है.

यूएन की विशेष दूत क्रिस्टिना श्रेनर बर्गनर ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद की बन्द दरवाज़ों में हुई बैठक के बाद पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए हालात को बेहद चिन्ताजनक और बहुत ख़राब बताया.
1 फ़रवरी को सेना द्वारा सत्ता हथिया लिये जाने के बाद से अब तक पांच महीनों में लगभग 600 लोगों की मौत हो चुकी है, छह हज़ार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
इनमें से पाँच हज़ार अब भी हिरासत में हैं, जबकि लगभग 100 लोग गुमशुदा हैं और उनके बार में कोई जानकारी नहीं है. 10 हज़ार से ज़्यादा शरणार्थियों ने भागकर भारत और थाईलैण्ड में शरण ली है.
यूएन की विशेष दूत ने कहा, “मैंने सुरक्षा परिषद से सामयिक समर्थन व कार्रवाई के लिये कहा है, यह बेहद महत्वपूर्ण है.”
“ज़मीनी स्तर पर सभी आम नागरिकों के लिये बेहद चिन्ताजनक हालात हैं, चूँकि स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और खाद्य सुरक्षा भी ख़तरे में है.”
“मैंने सुरक्षा से परिषद से एकजुट आवाज़ में, विशेष रूप से हिंसा के ख़िलाफ़ बोलने का आग्रह किया है. और ये भी कि राजनैतिक बन्दियों को जल्द से जल्द रिहा किया जाना होगा.”
उन्होंने बताया कि म्याँमार में हिंसा में तेज़ी आई है और अब यह उन क्षेत्रों में भी हो रही है जहाँ पहले हिंसा नहीं देखी गई थी.

Unsplash/Gayatri Malhotraम्याँमार में सैन्य तख़्ता पलट के विरोध में वॉशिन्गटन में व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन.

विचार-विमर्श व सम्वाद
क्रिस्टिना श्रेनर बर्गनर ने कहा कि उन जातीय सशस्त्र गुटों ने भी हिंसा को अंजाम दिया है, जिन पर सैन्य हवाई कार्रवाई के दौरान हमला हुआ था, या जो अन्य क्षेत्र के लोगों को अपने संरक्षण में रखते हैं.
इसके मद्देनज़र उन्होंने सभी हितधारकों के साथ समावेशी सम्वाद की आवश्यकता को रेखांकित किया है.
यूएन की विशेष दूत, संयुक्त राष्ट्र महासभा को भी देश में मौजूदा हालात से अवगत कराएँगी और इसके बाद क्षेत्र में अपने प्रयासों को जारी रखेंगी.
उन्होंने बताया कि हाल ही में इण्डोनेशिया की राजधानी जकार्ता में, उनकी सेना के कमाण्डर-इन-चीफ़ से खुली चर्चा हुई और बातचीत आगे भी जारी रहने की उम्मीद जताई गई है.
महासभा में प्रस्ताव
संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को एक प्रस्ताव पारित हुआ है जिसमें म्याँमार की सेना द्वारा, घातक बल प्रयोग और हिंसा के इस्तेमाल की निन्दा की गई है.
साथ ही, विशेष दूत और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के क्षेत्रीय संगठन (ASEAN) द्वारा किये जा रहे प्रयासों के लिये समर्थन जताया गया है.  
यूएन के 193 सदस्य देशों में 119 ने प्रस्ताव के पक्ष में जबकि बेलारूस ने इसके विपक्ष में मतदान किया. 36 सदस्य देश, मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे.
मतदान से पहले, यूएन महासभा के प्रमुख वोल्कान बोज़किर ने कहा कि सदस्य देशों ने म्याँमार में बदतर होते हालात को देखा है और यह आमजन के लिये सुरक्षित स्थान नहीं है.
“बदतर हो रही राजनैतिक परिस्थितियों के परिणामस्वरूप, मानवीय राहत आवश्यकताएँ भी बढ़ रही हैं.”
महासभा अध्यक्ष ने कहा कि इन हालात में, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को म्याँमार की जनता के समर्थन, और देश में शान्ति व स्थिरता के लिये एकजुटता दर्शानी होगी., म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की विशेष दूत क्रिस्टिना श्रेनर बर्गनर ने देश में मौजूदा संकट के मद्देनज़र, सुरक्षा परिषद से ज़रूरी समर्थन और समय रहते कार्रवाई का आग्रह किया है.

यूएन की विशेष दूत क्रिस्टिना श्रेनर बर्गनर ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद की बन्द दरवाज़ों में हुई बैठक के बाद पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए हालात को बेहद चिन्ताजनक और बहुत ख़राब बताया.

1 फ़रवरी को सेना द्वारा सत्ता हथिया लिये जाने के बाद से अब तक पांच महीनों में लगभग 600 लोगों की मौत हो चुकी है, छह हज़ार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

इनमें से पाँच हज़ार अब भी हिरासत में हैं, जबकि लगभग 100 लोग गुमशुदा हैं और उनके बार में कोई जानकारी नहीं है. 10 हज़ार से ज़्यादा शरणार्थियों ने भागकर भारत और थाईलैण्ड में शरण ली है.

यूएन की विशेष दूत ने कहा, “मैंने सुरक्षा परिषद से सामयिक समर्थन व कार्रवाई के लिये कहा है, यह बेहद महत्वपूर्ण है.”

“ज़मीनी स्तर पर सभी आम नागरिकों के लिये बेहद चिन्ताजनक हालात हैं, चूँकि स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और खाद्य सुरक्षा भी ख़तरे में है.”

“मैंने सुरक्षा से परिषद से एकजुट आवाज़ में, विशेष रूप से हिंसा के ख़िलाफ़ बोलने का आग्रह किया है. और ये भी कि राजनैतिक बन्दियों को जल्द से जल्द रिहा किया जाना होगा.”

उन्होंने बताया कि म्याँमार में हिंसा में तेज़ी आई है और अब यह उन क्षेत्रों में भी हो रही है जहाँ पहले हिंसा नहीं देखी गई थी.

Unsplash/Gayatri Malhotra
म्याँमार में सैन्य तख़्ता पलट के विरोध में वॉशिन्गटन में व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन.

विचार-विमर्श व सम्वाद

क्रिस्टिना श्रेनर बर्गनर ने कहा कि उन जातीय सशस्त्र गुटों ने भी हिंसा को अंजाम दिया है, जिन पर सैन्य हवाई कार्रवाई के दौरान हमला हुआ था, या जो अन्य क्षेत्र के लोगों को अपने संरक्षण में रखते हैं.

इसके मद्देनज़र उन्होंने सभी हितधारकों के साथ समावेशी सम्वाद की आवश्यकता को रेखांकित किया है.

यूएन की विशेष दूत, संयुक्त राष्ट्र महासभा को भी देश में मौजूदा हालात से अवगत कराएँगी और इसके बाद क्षेत्र में अपने प्रयासों को जारी रखेंगी.

उन्होंने बताया कि हाल ही में इण्डोनेशिया की राजधानी जकार्ता में, उनकी सेना के कमाण्डर-इन-चीफ़ से खुली चर्चा हुई और बातचीत आगे भी जारी रहने की उम्मीद जताई गई है.

महासभा में प्रस्ताव

संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को एक प्रस्ताव पारित हुआ है जिसमें म्याँमार की सेना द्वारा, घातक बल प्रयोग और हिंसा के इस्तेमाल की निन्दा की गई है.

साथ ही, विशेष दूत और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के क्षेत्रीय संगठन (ASEAN) द्वारा किये जा रहे प्रयासों के लिये समर्थन जताया गया है.  

यूएन के 193 सदस्य देशों में 119 ने प्रस्ताव के पक्ष में जबकि बेलारूस ने इसके विपक्ष में मतदान किया. 36 सदस्य देश, मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे.

मतदान से पहले, यूएन महासभा के प्रमुख वोल्कान बोज़किर ने कहा कि सदस्य देशों ने म्याँमार में बदतर होते हालात को देखा है और यह आमजन के लिये सुरक्षित स्थान नहीं है.

“बदतर हो रही राजनैतिक परिस्थितियों के परिणामस्वरूप, मानवीय राहत आवश्यकताएँ भी बढ़ रही हैं.”

महासभा अध्यक्ष ने कहा कि इन हालात में, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को म्याँमार की जनता के समर्थन, और देश में शान्ति व स्थिरता के लिये एकजुटता दर्शानी होगी.

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