म्याँमार: सैन्य नेतृत्व के विरुद्ध प्रतिबन्धों का स्वागत, अन्य देशों से कार्रवाई का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने इस सप्ताह, चँद देशों की सरकारों द्वारा, म्याँमार में सैन्य नेतृत्व के विरुद्ध समन्वित प्रतिबन्ध लगाये जाने की घोषणा का स्वागत किया है. यूएन के विशेष रैपोर्टेयर टॉम एण्ड्रयूज़ ने गुरुवार को जारी अपने वक्तव्य में अन्य देशों से अमेरिका, ब्रिटेन और कैनेडा की राह पर चलने का आहवान किया है.

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर नज़र रख रहे मानवाधिकार विशेषज्ञ टॉम एण्ड्रयूज़ ने कहा, “यह अनिवार्य है कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय अब प्रतिबन्धों का दायरा व स्तर बढ़ाए, जब सैन्य शासक, म्याँमार की जनता के दमन में तेज़ी ला रहे हों.”

🇲🇲 @RapporteurUn welcomes announcement of new set of sanctions against #Myanmar’s junta by US, UK and Canada: “It is imperative that the int’l community ramp up size and scope of sanctions as the junta ramps up its repression of the people of Myanmar”.👉 https://t.co/bPov3KEFqR pic.twitter.com/WUMeyJf7A2— UN Special Procedures (@UN_SPExperts) May 20, 2021

म्याँमार में सैन्य नेताओं को ‘राज्यसत्ता प्रशासनिक परिषद’ (State Administrative Council/SAC) के तौर पर जाना जाता है. सेना ने फ़रवरी 2021 में देश की सत्ता हथियाते हुए लोकतांत्रिक ढँग से निर्वाचित सरकार को हटा दिया था और उसके बाद से ही लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर दमनात्मक कार्रवाई जारी है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अनेक मर्तबा सैन्य नेतृत्व से जनता की इच्छाओं का सम्मान करने की अपील की है.
यूएन प्रमुख की विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेनर बर्गनर ने क्षेत्र में अहम पक्षकारों के साथ सम्वाद को जारी रखा है.
विशेष रैपोर्टेयर ने विशेष रूप से अमेरिका के फ़ैसले का उल्लेख किया जिसमें सैन्य नेतृत्व और 16 व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई है. उनकी सम्पत्तियों को ज़ब्त कर दिया गया है और अमेरिका नागरिकों द्वारा सैन्य नेतृत्व को धन, सामान या सेवाएँ मुहैया कराए जाने पर रोक लगा दी गई है.
उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले से सैन्य शासकों के वित्तीय संसाधनों को झटका लगा है और यह सही दिशा में लिया गया एक ठोस क़दम है.
नींद से जगाने वाली घण्टी
टॉम एण्ड्रयूज़ के मुताबिक प्रशासनिक परिषद को चिन्हित किये जाने से उन व्यक्तियों व संस्थाओं को भी चिन्हित किये जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिन्होंने परिषद को किसी भी प्रकार की मदद मुहैया कराई हो.
“यह उन सभी के लिये एक चेतावनी है जो पहले की तरह सैन्य नेतृत्व के साथ व्यवसाय के लिये इच्छुक हैं.”
“जिन्होंने भी इस हत्यारे उपक्रम को मदद और बढ़ावा देना जारी रखा है, चाहे फिर वे अन्तरराष्ट्रीय व्यवसाय, बैन्क, हथियार तस्कर, या वित्तीय, टैक्नॉलॉजी या अन्य समर्थन मुहैया करा रही सरकारी संस्थाएँ हों, उनके लिये नोटिस है कि उन्हें ख़ुद भी प्रतिबन्धों का सामना करना पड़ सकता है.”
उन्होंने आशा जताई कि यह कार्रवाई नींद से जगाने वाली एक घण्टी का काम करेगी.
विशेष रैपोर्टेयर के मुताबिक सैन्य नेतृत्व के साथ कारोबार करना ना सिर्फ़ नैतिक नज़रिये से ग़लत है बल्कि इसका परिणाम अब अमेरिका की वित्तीय प्रणाली से अलग-थलग होने और वहाँ दण्ड मिलने के रूप में भी सामने आ सकता है.
विशेष रैपोर्टेयर ने सोमवार को ब्रिटेन और कैनेडा द्वारा लगाए गए प्रतिबन्धों का भी स्वागत किया है – इनका मक़सद सेना को शहतीर व रत्न के व्यापार से हासिल होने वाले मुनाफ़े को रोकना है.
उन्होंने अन्य देशों से भी व्यवस्थागत क्रूरता और मानवाधिकार हनन को रोकने के लिये कार्रवाई की पुकार लगाई है.

स्पेशल रैपोर्टेयर और वर्किंग ग्रुप संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया का हिस्सा हैं. ये विशेष प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार व्यवस्था में सबसे बड़ी स्वतन्त्र संस्था है. ये दरअसल परिषद की स्वतन्त्र जाँच निगरानी प्रणाली है जो किसी ख़ास देश में किसी विशेष स्थिति या दुनिया भर में कुछ प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करती है. स्पेशल रैपोर्टेयर स्वैच्छिक रूप से काम करते हैं; वो संयक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें उनके काम के लिये कोई वेतन नहीं मिलता है. ये रैपोर्टेयर किसी सरकार या संगठन से स्वतन्त्र होते हैं और वो अपनी निजी हैसियत में काम करते हैं.

 , संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने इस सप्ताह, चँद देशों की सरकारों द्वारा, म्याँमार में सैन्य नेतृत्व के विरुद्ध समन्वित प्रतिबन्ध लगाये जाने की घोषणा का स्वागत किया है. यूएन के विशेष रैपोर्टेयर टॉम एण्ड्रयूज़ ने गुरुवार को जारी अपने वक्तव्य में अन्य देशों से अमेरिका, ब्रिटेन और कैनेडा की राह पर चलने का आहवान किया है.

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर नज़र रख रहे मानवाधिकार विशेषज्ञ टॉम एण्ड्रयूज़ ने कहा, “यह अनिवार्य है कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय अब प्रतिबन्धों का दायरा व स्तर बढ़ाए, जब सैन्य शासक, म्याँमार की जनता के दमन में तेज़ी ला रहे हों.”

🇲🇲 @RapporteurUn welcomes announcement of new set of sanctions against #Myanmar’s junta by US, UK and Canada: “It is imperative that the int’l community ramp up size and scope of sanctions as the junta ramps up its repression of the people of Myanmar”.
👉 https://t.co/bPov3KEFqR pic.twitter.com/WUMeyJf7A2

— UN Special Procedures (@UN_SPExperts) May 20, 2021

म्याँमार में सैन्य नेताओं को ‘राज्यसत्ता प्रशासनिक परिषद’ (State Administrative Council/SAC) के तौर पर जाना जाता है. सेना ने फ़रवरी 2021 में देश की सत्ता हथियाते हुए लोकतांत्रिक ढँग से निर्वाचित सरकार को हटा दिया था और उसके बाद से ही लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर दमनात्मक कार्रवाई जारी है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अनेक मर्तबा सैन्य नेतृत्व से जनता की इच्छाओं का सम्मान करने की अपील की है.

यूएन प्रमुख की विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेनर बर्गनर ने क्षेत्र में अहम पक्षकारों के साथ सम्वाद को जारी रखा है.

विशेष रैपोर्टेयर ने विशेष रूप से अमेरिका के फ़ैसले का उल्लेख किया जिसमें सैन्य नेतृत्व और 16 व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई है. उनकी सम्पत्तियों को ज़ब्त कर दिया गया है और अमेरिका नागरिकों द्वारा सैन्य नेतृत्व को धन, सामान या सेवाएँ मुहैया कराए जाने पर रोक लगा दी गई है.

उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले से सैन्य शासकों के वित्तीय संसाधनों को झटका लगा है और यह सही दिशा में लिया गया एक ठोस क़दम है.

नींद से जगाने वाली घण्टी

टॉम एण्ड्रयूज़ के मुताबिक प्रशासनिक परिषद को चिन्हित किये जाने से उन व्यक्तियों व संस्थाओं को भी चिन्हित किये जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिन्होंने परिषद को किसी भी प्रकार की मदद मुहैया कराई हो.

“यह उन सभी के लिये एक चेतावनी है जो पहले की तरह सैन्य नेतृत्व के साथ व्यवसाय के लिये इच्छुक हैं.”

“जिन्होंने भी इस हत्यारे उपक्रम को मदद और बढ़ावा देना जारी रखा है, चाहे फिर वे अन्तरराष्ट्रीय व्यवसाय, बैन्क, हथियार तस्कर, या वित्तीय, टैक्नॉलॉजी या अन्य समर्थन मुहैया करा रही सरकारी संस्थाएँ हों, उनके लिये नोटिस है कि उन्हें ख़ुद भी प्रतिबन्धों का सामना करना पड़ सकता है.”

उन्होंने आशा जताई कि यह कार्रवाई नींद से जगाने वाली एक घण्टी का काम करेगी.

विशेष रैपोर्टेयर के मुताबिक सैन्य नेतृत्व के साथ कारोबार करना ना सिर्फ़ नैतिक नज़रिये से ग़लत है बल्कि इसका परिणाम अब अमेरिका की वित्तीय प्रणाली से अलग-थलग होने और वहाँ दण्ड मिलने के रूप में भी सामने आ सकता है.

विशेष रैपोर्टेयर ने सोमवार को ब्रिटेन और कैनेडा द्वारा लगाए गए प्रतिबन्धों का भी स्वागत किया है – इनका मक़सद सेना को शहतीर व रत्न के व्यापार से हासिल होने वाले मुनाफ़े को रोकना है.

उन्होंने अन्य देशों से भी व्यवस्थागत क्रूरता और मानवाधिकार हनन को रोकने के लिये कार्रवाई की पुकार लगाई है.

स्पेशल रैपोर्टेयर और वर्किंग ग्रुप संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया का हिस्सा हैं. ये विशेष प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार व्यवस्था में सबसे बड़ी स्वतन्त्र संस्था है. ये दरअसल परिषद की स्वतन्त्र जाँच निगरानी प्रणाली है जो किसी ख़ास देश में किसी विशेष स्थिति या दुनिया भर में कुछ प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करती है. स्पेशल रैपोर्टेयर स्वैच्छिक रूप से काम करते हैं; वो संयक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें उनके काम के लिये कोई वेतन नहीं मिलता है. ये रैपोर्टेयर किसी सरकार या संगठन से स्वतन्त्र होते हैं और वो अपनी निजी हैसियत में काम करते हैं.
 

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