यमन में हालात ‘नाटकीय ढँग से बिगड़ने’ की चेतावनी

यमन में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि हिंसक संघर्ष से पीड़ित देश में हाल के दिनों में परिस्थितियाँ नाटकीय ढँग से ख़राब हुई हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत, मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद को मौजूदा घटनाक्रम से अवगत कराते हुए बताया कि दुनिया के सबसे बदतर मानवीय संकट से जूझते यमन में हिंसा ने अनेक नए मोर्चों को अपनी चपेट में ले लिया है.  

विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स के मुताबिक युद्ध पूरी ताक़त से फिर लौट आया है, और अंसार अल्लाह गुट के लड़ाकों ने मारिब गवर्नरेट पर हमला जारी रखा है. 
देश की इस उत्तरी गवर्नरेट पर पहले लड़ाई की आँच का असर नहीं हुआ था, लेकिन अब युद्ध के सातवें वर्ष में प्रवेश करने के बाद दस लाख से ज़्यादा विस्थापितों और आम लोगों पर जोखिम बढ़ रहा है.

We have been warning for a long time now that Yemen is speeding towards a massive famine.Things are getting worse because of a shortage of resources.My latest update on humanitarian access, the economic situation, and progress towards peace.https://t.co/YojaliJlcM— Mark Lowcock (@UNReliefChief) March 16, 2021

“दोनों पक्षों में शामिल बलों को इस अनावश्यक लड़ाई में भारी नुक़सान उठाना पड़ा है.” 
“मैं स्तब्ध कर देने वाली रिपोर्टों को देखता हूँ, और निश्चित रूप से आप भी देखते हैं कि बच्चों को युद्ध में खींचा जा रहा है और उन्हें, उनके भविष्य से वंचित किया जा रहा है.” 
इस बीच, नए मोर्चों पर लड़ाई शुरू हो गई है, जबकि हज़ाह, ताइज़ और हुदायदाह में भीषण तेज़ी आई है. 
हाल के दिनों में सऊदी अरब में आम लोगों और वाणिज्यिक स्थलों पर सीमा-पार हमलों की संख्या बढ़ी है, जिसके बाद हूती के नियन्त्रण वाली राजधानी सना पर हवाई हमले किये गए हैं. 
बदतर आर्थिक हालात
विशेष दूत ने वर्चुअल बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि तेज़ होती हिंसा के बीच ईंधन की किल्लत बनी हुई है, जिससे बुनिदायी वस्तुओं की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है और अस्पतालों व अन्य सेवाओं पर भी असर हुआ है.  
मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने ज़ोर देकर कहा कि युद्ध और मानवीय संकट के बीच सम्बन्ध के मद्देनज़र, युद्धरत पक्षों के लिये लड़ाई को रोकना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है.  
उन्होंने कहा कि राष्ट्रव्यापी युद्धविराम के अलावा, सना हवाई अड्डे का रास्ता खोलना होगा, और ईंधन व अन्य वस्तुओं सहित अन्य मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति को हुदायदाह बंदरगाह के ज़रिये यमन के भीतर सुनिश्चित करना होगा.  
“इन उपायों के ज़रिये आम लोगों पर हिंसक संघर्ष के असर को कम किया जा सकेगा, जिससे यमनी लोगों की आवाजाही की आज़ादी के अधिकार को सहारा मिलेगा.”
इसके अतिरिक्त, यूएन दूत ने समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया को फिर से शुरू करने को अपनी प्राथमिकता बताया है, चूँकि सभी पक्ष अपने मतभेदों को वार्ता के ज़रिये ही हल कर सकते हैं. 
“हम जानते हैं कि इन मतभेदों का निपटारा किये बग़ैर, राजनैतिक समाधान के बिना, मानवीय समस्याओं को हमेशा के लिये नहीं हराया जा सकता.”
अकाल का जोखिम
संयुक्त राष्ट्र में मानवीय राहत समन्वयक मार्क लोकॉक ने सदस्य देशों को ध्यान दिलाते हुए कहा कि संसाधनों की कमी के कारण यमन तेज़ी से अकाल की दिशा में बढ़ रहा है. 
पिछले महीने एक दानदाता सम्मेलन के दौरान एक अरब 70 करोड़ की राशि को जुटा पाना सम्भव हुआ था लेकिन इस वर्ष के अभियान के लिये यह धनराशि आवश्यकता से कहीं कम है. 
मार्क लोकॉक ने कहा कि अस्थिरता की एक बड़ी वजह, आर्थिक बदहाली है जिसे रोकने के लिये तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है, विशेष रूप से राष्ट्रीय मुद्रा को मज़बूती प्रदान कर और वाणिज्यिक आयात की नाकेबंदी का हल निकाल कर.
उन्होंने बताया कि सरकार ने जनवरी से, हुदायदाह की ओर सभी वाणिज्यिक ईंधन आयातों को रोक दिया है. इस मार्ग के ज़रिये यमन के लिये 50 फ़ीसदी से ज़्यादा ईंधन का आयात होता रहा है.
“इस समय, हुदायदाह के बाहर 13 ईंधन लदे हुए जहाज़ हैं, जिसमें दो महीने के लिये पर्याप्त आपूर्ति है… औसतन, इन जहाज़ों को सरकार से अनुमति के लिये 80 दिन से ज़्यादा दिनों तक का इंतज़ार करना पड़ रहा है.” 
मार्क लोकॉक ने यूएन के विशेष दूत की माँग को समर्थन देते हुए कहा कि पिछले सप्ताह सना के एक हिरासत केन्द्र में घातक आगज़नी की घटना की स्वतन्त्र जाँच कराई जानी होगी. 
इस घटना में अनेक प्रवासियों की मौत हो गई थी, और 170 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे. , यमन में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि हिंसक संघर्ष से पीड़ित देश में हाल के दिनों में परिस्थितियाँ नाटकीय ढँग से ख़राब हुई हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत, मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद को मौजूदा घटनाक्रम से अवगत कराते हुए बताया कि दुनिया के सबसे बदतर मानवीय संकट से जूझते यमन में हिंसा ने अनेक नए मोर्चों को अपनी चपेट में ले लिया है.  

विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स के मुताबिक युद्ध पूरी ताक़त से फिर लौट आया है, और अंसार अल्लाह गुट के लड़ाकों ने मारिब गवर्नरेट पर हमला जारी रखा है. 

देश की इस उत्तरी गवर्नरेट पर पहले लड़ाई की आँच का असर नहीं हुआ था, लेकिन अब युद्ध के सातवें वर्ष में प्रवेश करने के बाद दस लाख से ज़्यादा विस्थापितों और आम लोगों पर जोखिम बढ़ रहा है.

“दोनों पक्षों में शामिल बलों को इस अनावश्यक लड़ाई में भारी नुक़सान उठाना पड़ा है.” 

“मैं स्तब्ध कर देने वाली रिपोर्टों को देखता हूँ, और निश्चित रूप से आप भी देखते हैं कि बच्चों को युद्ध में खींचा जा रहा है और उन्हें, उनके भविष्य से वंचित किया जा रहा है.” 

इस बीच, नए मोर्चों पर लड़ाई शुरू हो गई है, जबकि हज़ाह, ताइज़ और हुदायदाह में भीषण तेज़ी आई है. 

हाल के दिनों में सऊदी अरब में आम लोगों और वाणिज्यिक स्थलों पर सीमा-पार हमलों की संख्या बढ़ी है, जिसके बाद हूती के नियन्त्रण वाली राजधानी सना पर हवाई हमले किये गए हैं. 

बदतर आर्थिक हालात

विशेष दूत ने वर्चुअल बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि तेज़ होती हिंसा के बीच ईंधन की किल्लत बनी हुई है, जिससे बुनिदायी वस्तुओं की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है और अस्पतालों व अन्य सेवाओं पर भी असर हुआ है.  

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने ज़ोर देकर कहा कि युद्ध और मानवीय संकट के बीच सम्बन्ध के मद्देनज़र, युद्धरत पक्षों के लिये लड़ाई को रोकना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है.  

उन्होंने कहा कि राष्ट्रव्यापी युद्धविराम के अलावा, सना हवाई अड्डे का रास्ता खोलना होगा, और ईंधन व अन्य वस्तुओं सहित अन्य मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति को हुदायदाह बंदरगाह के ज़रिये यमन के भीतर सुनिश्चित करना होगा.  

“इन उपायों के ज़रिये आम लोगों पर हिंसक संघर्ष के असर को कम किया जा सकेगा, जिससे यमनी लोगों की आवाजाही की आज़ादी के अधिकार को सहारा मिलेगा.”

इसके अतिरिक्त, यूएन दूत ने समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया को फिर से शुरू करने को अपनी प्राथमिकता बताया है, चूँकि सभी पक्ष अपने मतभेदों को वार्ता के ज़रिये ही हल कर सकते हैं. 

“हम जानते हैं कि इन मतभेदों का निपटारा किये बग़ैर, राजनैतिक समाधान के बिना, मानवीय समस्याओं को हमेशा के लिये नहीं हराया जा सकता.”

अकाल का जोखिम

संयुक्त राष्ट्र में मानवीय राहत समन्वयक मार्क लोकॉक ने सदस्य देशों को ध्यान दिलाते हुए कहा कि संसाधनों की कमी के कारण यमन तेज़ी से अकाल की दिशा में बढ़ रहा है. 

पिछले महीने एक दानदाता सम्मेलन के दौरान एक अरब 70 करोड़ की राशि को जुटा पाना सम्भव हुआ था लेकिन इस वर्ष के अभियान के लिये यह धनराशि आवश्यकता से कहीं कम है. 

मार्क लोकॉक ने कहा कि अस्थिरता की एक बड़ी वजह, आर्थिक बदहाली है जिसे रोकने के लिये तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है, विशेष रूप से राष्ट्रीय मुद्रा को मज़बूती प्रदान कर और वाणिज्यिक आयात की नाकेबंदी का हल निकाल कर.

उन्होंने बताया कि सरकार ने जनवरी से, हुदायदाह की ओर सभी वाणिज्यिक ईंधन आयातों को रोक दिया है. इस मार्ग के ज़रिये यमन के लिये 50 फ़ीसदी से ज़्यादा ईंधन का आयात होता रहा है.

“इस समय, हुदायदाह के बाहर 13 ईंधन लदे हुए जहाज़ हैं, जिसमें दो महीने के लिये पर्याप्त आपूर्ति है… औसतन, इन जहाज़ों को सरकार से अनुमति के लिये 80 दिन से ज़्यादा दिनों तक का इंतज़ार करना पड़ रहा है.” 

मार्क लोकॉक ने यूएन के विशेष दूत की माँग को समर्थन देते हुए कहा कि पिछले सप्ताह सना के एक हिरासत केन्द्र में घातक आगज़नी की घटना की स्वतन्त्र जाँच कराई जानी होगी. 

इस घटना में अनेक प्रवासियों की मौत हो गई थी, और 170 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे. 

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