युवा पृथ्वी चैम्पियन: स्वच्छ ऊर्जा की चाह पूरी करने के वाहक, विद्युत मोहन

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने, भारत के एक युवा इंजीनियर विद्युत मोहन को, एक ऐसी अदभुत तकनीक ईजाद करने के लिये पुरस्कृत किया है, जिससे ना केवल ऊर्जा पैदा होती है, बल्कि हवा को भी साफ़-सुथरा रखने में मदद मिलती है और अन्ततः जलवायु परिवर्तन में भी कमी होती है.

द्युत मोहन ने एक ऐसी सचल मशीन बनाई है जो खेतीबाड़ी के कूड़े-कचरे को इस तरह जलाती है कि उससे ना तो वातावरण में हानिकारक ग्रीनहाउस गैसें फैलती हैं, बल्कि वो ऐसे चारकोल और खाद में तब्दील हो जाता है जिसे किसान बाद में इस्तेमाल कर सकते हैं.
भारत में, किसान, आमतौर पर अपने खेतों में फ़सलों की उपज लेने के बाद बचे कूड़े, मसलन धान और गेहूँ की उपज के बाद बची पुआल को वहीं पर जलाते रहे हैं.
इससे ना केवल वातावरण में ख़तरनाक प्रदूषण फैलता है, जिससे अस्थमा और दिल की बीमारियाँ जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा होती हैं, बल्कि उस आग से वातावरण में काले कार्बन के छोटे-छोटे कण भी फैलते हैं जिनसे अन्ततः जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है.
पिछले कई वर्षों के दौरान, भारत की राजधानी दिल्ली के आसपास के प्रान्तों में, किसानों द्वारा इसी तरह से कूड़ा-कचरा अपने खेतों में जलाए जाने के कारण, दिल्ली में सर्दियों में गहरा और विषैला कोहरा छा जाने से आबादी को बहुत सी स्वास्थ्य परेशानियाँ होती रही हैं.
भारत के विद्युत मोहन, विश्व भर से उन 7 अन्वेषकों में से एक हैं जिन्हें पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में असाधारण काम करने के लिये चैम्पियन के रूप में सम्मानित किया गया है. 
मंगलवार को, यूएन पर्यावरण कार्यक्रम के – Young Champions of the Earth for 2020 में, संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण चैम्पियनों के रूप में ये मान्यता या पुरस्कार घोषित किये गए.  
टाकाचार
विद्युत मोहन टाकाचार सामाजिक उद्यम के सह-संस्थापक हैं जिसका मक़सद किसानों को अपनी फ़सलों के अपशिष्टों और पुआल जैसे बचे-खुचे हिस्से को वहीं जला देने के बजाय, उन्हें फ़ायदे वाले उत्पादों में तब्दील करना है. 
उनकी इस परियोजना के बारे में और ज़्यादा जानकारी यहाँ उपलब्ध है.
 , संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने, भारत के एक युवा इंजीनियर विद्युत मोहन को, एक ऐसी अदभुत तकनीक ईजाद करने के लिये पुरस्कृत किया है, जिससे ना केवल ऊर्जा पैदा होती है, बल्कि हवा को भी साफ़-सुथरा रखने में मदद मिलती है और अन्ततः जलवायु परिवर्तन में भी कमी होती है.

द्युत मोहन ने एक ऐसी सचल मशीन बनाई है जो खेतीबाड़ी के कूड़े-कचरे को इस तरह जलाती है कि उससे ना तो वातावरण में हानिकारक ग्रीनहाउस गैसें फैलती हैं, बल्कि वो ऐसे चारकोल और खाद में तब्दील हो जाता है जिसे किसान बाद में इस्तेमाल कर सकते हैं.

भारत में, किसान, आमतौर पर अपने खेतों में फ़सलों की उपज लेने के बाद बचे कूड़े, मसलन धान और गेहूँ की उपज के बाद बची पुआल को वहीं पर जलाते रहे हैं.

इससे ना केवल वातावरण में ख़तरनाक प्रदूषण फैलता है, जिससे अस्थमा और दिल की बीमारियाँ जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा होती हैं, बल्कि उस आग से वातावरण में काले कार्बन के छोटे-छोटे कण भी फैलते हैं जिनसे अन्ततः जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है.

पिछले कई वर्षों के दौरान, भारत की राजधानी दिल्ली के आसपास के प्रान्तों में, किसानों द्वारा इसी तरह से कूड़ा-कचरा अपने खेतों में जलाए जाने के कारण, दिल्ली में सर्दियों में गहरा और विषैला कोहरा छा जाने से आबादी को बहुत सी स्वास्थ्य परेशानियाँ होती रही हैं.

भारत के विद्युत मोहन, विश्व भर से उन 7 अन्वेषकों में से एक हैं जिन्हें पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में असाधारण काम करने के लिये चैम्पियन के रूप में सम्मानित किया गया है. 

मंगलवार को, यूएन पर्यावरण कार्यक्रम के – Young Champions of the Earth for 2020 में, संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण चैम्पियनों के रूप में ये मान्यता या पुरस्कार घोषित किये गए.  

टाकाचार

विद्युत मोहन टाकाचार सामाजिक उद्यम के सह-संस्थापक हैं जिसका मक़सद किसानों को अपनी फ़सलों के अपशिष्टों और पुआल जैसे बचे-खुचे हिस्से को वहीं जला देने के बजाय, उन्हें फ़ायदे वाले उत्पादों में तब्दील करना है. 

उनकी इस परियोजना के बारे में और ज़्यादा जानकारी यहाँ उपलब्ध है.
 

,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *