यूनीसेफ़ की चेतावनी – संकटग्रस्त क्षेत्रों में लाखों बच्चे, अकाल के निकट

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि वर्ष 2021 के दौरान, काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य, नाइजीरिया के पूर्वोत्तर इलाक़े, मध्य सहेल, दक्षिण सूडान और यमन में एक करोड़ से भी अधिक बच्चे अत्यन्त गम्भीर कुपोषण से जूझ रहे होंगे. यूनीसेफ़ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर तत्काल ठोस क़दम नहीं उठाए गए तो ये संख्या और भी बढ़ सकती है.

यूएन एजेंसी के अनुसार इन सभी देशों और क्षेत्रों में, गम्भीर मानवीय संकट के हालात हैं और खाद्य असुरक्षा, कोरोनावायरस महामारी की स्थिति भी और ज़्यादा गम्भीर हो रही है, और मध्य सहेल के अलावा, अन्य देशों और क्षेत्रों में अकाल बिल्कुल मुँह बाए  खड़ा है. 
यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर ने कहा है, “संघर्षों, लड़ाई-झगड़ों, आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जूझने वाले देशों के लिये, कोविड-19 ने, एक कुपोषण संकट को, तत्काल आपदा में तब्दील कर दिया है.”
उन्होंने कहा, “बहुत से परिवार, जो पहले से ही, अपने बच्चों और ख़ुद को भरपेट भोजन देने में कठिनाइयाँ महसूस कर रहे थे, अब वो अकाल के निकट पहुँच चुके हैं. हमें उन्हें वर्ष 2020 के पीड़ित के रूप में भुलाकर नहीं छोड़ सकते.”
चौंकाने वाली संख्या
नाइजीरिया में, 8 लाख से भी ज़्यादा बच्चे गम्भीर कुपोषण के शिकार हैं, उनमें लगभग 3 लाख ऐसे बच्चे भी हैं जो अत्यन्त गम्भीर कुपोषण का सामना कर रहे हैं, और उनके, किसी भी समय, मौत के मुँह में चले जाने का जोखिम है.
नाइजीरिया के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में, हालात विशेष रूप से बहुत चिन्ताजनक हैं. ये क्षेत्र बोको हराम की हिंसा से प्रभावित है.
काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य (डीआरसी) में गम्भीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों की संख्या लगभग 33 लाख तक है, जिनमें से लगभग 10 लाख बच्चे अत्यन्त गम्भीर कुपोषण के शिकार हैं.

WFP/Tsiory Andriantsoaranaमेडागास्कर में एक बच्चे की पोषण जाँच होते हुए

वहीं दक्षिण सूडान में गम्भीर कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या लगभग 14 लाख है, जिनमें से लगभग 3 लाख 13 हज़ार बच्चे अत्यन्त गम्भीर कुपोषण का सामना कर रहे हैं. 
मध्य सहेल क्षेत्र में, बुर्किना फ़ासो, माली और मिजेर जैसे देशों में, बिगड़ते संघर्षों, विस्थापन और जलवायु परिवर्तन के झटकों के कारण, कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या 29 लाख तक हो सकती है.
इनमें क़रीब 8 लाख 90 हज़ार बच्चे अत्यन्त गम्भीर कुपोषण से पीड़ित हैं.
युद्धग्रस्त देश यमन में, 5 वर्ष से कम उम्र के लगभग 20 लाख बच्चे गम्भीर कुपोषण के शिकार हैं, जिनमें लगभग 3 लाख 58 हज़ार बच्चे अत्यन्त गम्भीर कुपोषण से पीड़ित हैं. यूनेस्को ने इस संख्या के बढ़ने की आशंका जताई है.
अत्यन्त गम्भीर कुपोषण एक ऐसी अवस्था है जिसमें बच्चों में स्वस्थ से बहुत कम पोषण होता है. इस अवस्था से पीड़ित बच्चों का वज़न, उनकी ऊँचाई की तुलना में बहुत कम होता है और उनकी माँस पेशियाँ भी बहुत कमज़ोर होती हैं.
अत्यन्त गम्भीर कुपोषण, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण है. इसकी रोकथाम और इसके पीड़ित बच्चों का समुचित इलाज, बच्चों के जीवित बचने और उनके विकास और वृद्धि के लिये बहुत आवश्यक है.
तत्काल सहायता की आवश्यकता
वर्ष 2020 के दौरान, कोविड-19 से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, यूनीसेफ़ और उसके साझीदारों ने, दुर्लभ क्षेत्रों में, बहुत ही कमज़ोर हालात का सामना कर रहे बच्चों और उनके परिवारों तक, जीवनरक्षक सहायता पहुँचाना जारी रखा.
मौजूदा कार्यक्रमों को जारी रखने में कुछ समायोजन करके, बढ़ी हुई माँगों को पूरा किया गया.
यूएन एजेंसी ने वर्ष 2021 के दौरान हालात कुछ और अधिक ख़राब होने की आशंका व्यक्त करते हुए, उन क्षेत्रों में मौजूद मानवीय सहायता एजेंसियों, देशों और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से, पोषण के लिये तुरन्त सहायता व समर्थन दिया जाने की पुकार लगाई है.
इनमें बच्चों व परिवारों के लिये स्वास्थ्य, जल, स्वच्छता सेवाएँ मुहैया कराना शामिल हैं.
यूनीसेफ़ ने, वर्ष 2021 के दौरान, मानवीय संकटों से प्रभावित देशों में, बच्चों की सहायता के लिये चलाए जाने वाले अपने जीवनरक्षक पोषण कार्यक्रमों के लिये 1 अरब डॉलर से ज़्यादा रक़म जुटाने का आहवान किया है. , संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि वर्ष 2021 के दौरान, काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य, नाइजीरिया के पूर्वोत्तर इलाक़े, मध्य सहेल, दक्षिण सूडान और यमन में एक करोड़ से भी अधिक बच्चे अत्यन्त गम्भीर कुपोषण से जूझ रहे होंगे. यूनीसेफ़ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर तत्काल ठोस क़दम नहीं उठाए गए तो ये संख्या और भी बढ़ सकती है.

यूएन एजेंसी के अनुसार इन सभी देशों और क्षेत्रों में, गम्भीर मानवीय संकट के हालात हैं और खाद्य असुरक्षा, कोरोनावायरस महामारी की स्थिति भी और ज़्यादा गम्भीर हो रही है, और मध्य सहेल के अलावा, अन्य देशों और क्षेत्रों में अकाल बिल्कुल मुँह बाए  खड़ा है. 

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर ने कहा है, “संघर्षों, लड़ाई-झगड़ों, आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जूझने वाले देशों के लिये, कोविड-19 ने, एक कुपोषण संकट को, तत्काल आपदा में तब्दील कर दिया है.”

उन्होंने कहा, “बहुत से परिवार, जो पहले से ही, अपने बच्चों और ख़ुद को भरपेट भोजन देने में कठिनाइयाँ महसूस कर रहे थे, अब वो अकाल के निकट पहुँच चुके हैं. हमें उन्हें वर्ष 2020 के पीड़ित के रूप में भुलाकर नहीं छोड़ सकते.”

चौंकाने वाली संख्या

नाइजीरिया में, 8 लाख से भी ज़्यादा बच्चे गम्भीर कुपोषण के शिकार हैं, उनमें लगभग 3 लाख ऐसे बच्चे भी हैं जो अत्यन्त गम्भीर कुपोषण का सामना कर रहे हैं, और उनके, किसी भी समय, मौत के मुँह में चले जाने का जोखिम है.

नाइजीरिया के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में, हालात विशेष रूप से बहुत चिन्ताजनक हैं. ये क्षेत्र बोको हराम की हिंसा से प्रभावित है.

काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य (डीआरसी) में गम्भीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों की संख्या लगभग 33 लाख तक है, जिनमें से लगभग 10 लाख बच्चे अत्यन्त गम्भीर कुपोषण के शिकार हैं.


WFP/Tsiory Andriantsoarana
मेडागास्कर में एक बच्चे की पोषण जाँच होते हुए

वहीं दक्षिण सूडान में गम्भीर कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या लगभग 14 लाख है, जिनमें से लगभग 3 लाख 13 हज़ार बच्चे अत्यन्त गम्भीर कुपोषण का सामना कर रहे हैं. 

मध्य सहेल क्षेत्र में, बुर्किना फ़ासो, माली और मिजेर जैसे देशों में, बिगड़ते संघर्षों, विस्थापन और जलवायु परिवर्तन के झटकों के कारण, कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या 29 लाख तक हो सकती है.

इनमें क़रीब 8 लाख 90 हज़ार बच्चे अत्यन्त गम्भीर कुपोषण से पीड़ित हैं.

युद्धग्रस्त देश यमन में, 5 वर्ष से कम उम्र के लगभग 20 लाख बच्चे गम्भीर कुपोषण के शिकार हैं, जिनमें लगभग 3 लाख 58 हज़ार बच्चे अत्यन्त गम्भीर कुपोषण से पीड़ित हैं. यूनेस्को ने इस संख्या के बढ़ने की आशंका जताई है.

अत्यन्त गम्भीर कुपोषण एक ऐसी अवस्था है जिसमें बच्चों में स्वस्थ से बहुत कम पोषण होता है. इस अवस्था से पीड़ित बच्चों का वज़न, उनकी ऊँचाई की तुलना में बहुत कम होता है और उनकी माँस पेशियाँ भी बहुत कमज़ोर होती हैं.

अत्यन्त गम्भीर कुपोषण, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण है. इसकी रोकथाम और इसके पीड़ित बच्चों का समुचित इलाज, बच्चों के जीवित बचने और उनके विकास और वृद्धि के लिये बहुत आवश्यक है.

तत्काल सहायता की आवश्यकता

वर्ष 2020 के दौरान, कोविड-19 से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, यूनीसेफ़ और उसके साझीदारों ने, दुर्लभ क्षेत्रों में, बहुत ही कमज़ोर हालात का सामना कर रहे बच्चों और उनके परिवारों तक, जीवनरक्षक सहायता पहुँचाना जारी रखा.

मौजूदा कार्यक्रमों को जारी रखने में कुछ समायोजन करके, बढ़ी हुई माँगों को पूरा किया गया.

यूएन एजेंसी ने वर्ष 2021 के दौरान हालात कुछ और अधिक ख़राब होने की आशंका व्यक्त करते हुए, उन क्षेत्रों में मौजूद मानवीय सहायता एजेंसियों, देशों और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से, पोषण के लिये तुरन्त सहायता व समर्थन दिया जाने की पुकार लगाई है.

इनमें बच्चों व परिवारों के लिये स्वास्थ्य, जल, स्वच्छता सेवाएँ मुहैया कराना शामिल हैं.

यूनीसेफ़ ने, वर्ष 2021 के दौरान, मानवीय संकटों से प्रभावित देशों में, बच्चों की सहायता के लिये चलाए जाने वाले अपने जीवनरक्षक पोषण कार्यक्रमों के लिये 1 अरब डॉलर से ज़्यादा रक़म जुटाने का आहवान किया है. 

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