Online News Channel

News

रमजान कुरान का महीना: उपवास से आत्मा शुद्ध होती है

रमजान कुरान का महीना: उपवास से आत्मा शुद्ध होती है
May 07
10:03 2019

इनसाईट  ऑनलाइन न्यूज

रमजान का मुकद्दस (पवित्र) महीना आज से शुरू हो गया। आज पहला रोजा है। रमजान के पाक महीने में खुदा के बंदे उसकी इबादत करते हैं। मस्जिदों और घरों से कुरान शरीफ की तिलावत की आवाज आनी शुरू हो जाती है।

जिस तरह नमाज पढ़ना हर मुसलमान के लिए फर्ज है उसी तरह रोजे रखना भी खुदा ने फर्ज करार दिया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है। इस पाक महीने को रहमतों का महीना कहा जाता है।

इस्लामी चाँद कैलेंडर के नौवें महीने रमजान के दौरान उपवास इस्लाम के पाँच खंबों में से एक है। इस्लाम धर्म को मानने वाले हर वयस्क और स्वस्थ्य स्त्री-पुरुष के लिए रमजान के दौरान उपवास रखना जरूरी है।  प्यास की शिद्दत, भूख की तड़प, गर्मी की तपिश होने के बाद भी एक रोजेदार खुदा का शुक्रिया अदा करता है। रोजेदार के सामने दुनिया की सारी अच्छी चीजें रखी हों पर वो खुदा की बिना इजाजत के उसे हाथ तक नहीं लगाता। यही सब चीजें एक रोजेदार को खुदा के नजदीक लाती हैं।

रूह को पाक करके अल्लाह के करीब जाने का मौका देने वाला रमजान का मुकद्दस महीना हर इंसान को अपनी जिंदगी को सही राह पर लाने का पैगाम देता है। भूख-प्यास की तड़प के बीच जबान से रूह तक पहुंचने वाली खुदा की इबादत हर मोमिन को उसका खास बना देती है।आम दिनों में बंदे को एक नेकी के बदले में 10 नेकी मिलती हैं लेकिन रमजान के पाक महीने में खुदा अपने रोजेदार बंदों को एक के  बदले 70 नेकियां अता फरमाता है। रमजान का मकसद खुद को गलत काम करने से रोकने की ताकत पैदा करना या उसे फिरसे जिंदा करना है।

खुद को गलत कामों से रोकने की ताकत को शरीअत में तकवा कहा गया है जिसमें इंसान खुद को रोक लेता है। रोजेदार को सख्त प्यास लगी होती है लेकिन वो खुद को रोक लेता है। गलत बात होने के बावजूद खुद को गुस्सा होने से रोकता है। झूठ बोलने और बदनिगाही से परहेज करता है।
इंसान से जिंदगी में सारे गुनाह इसीलिए होते हैं, क्योंकि वो खुद को गलत काम करने से नहीं रोक पाता। जिस तरह बारिश के मौसम में आसमान से गिरने वाली बूंदें तमाम गंदगी और कूड़े-करकट को किनारे लगा देती हैं, वैसे ही रमजान के महीने में अल्लाह की रहमतें अपने प्यारें बंदों को पाक-साफ कर देती हैं।

रमजान कुरान का महीना: उपवास से आत्मा शुद्ध होती है

इस दौरान मुसलमानों को रमजान के दौरान एक प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाता है कि वे साल भर उपवास की आत्मा को अनुसार जीवन गुजार सकें। कुरान के अनुसार उपवास के दो उद्देश्य हैं- जीवन में सावधान रहना और अल्लाह के प्रति शुक्रगुजार होना।

रमजान के दौरान जब मुसलमान रोजा रखते हैं तो अपने कार्यों में काफी पवित्रता बरतते हैं और हर काम में कुछ खास हो जाते हैं। कब खाना है, कब नहीं खाना है या क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए आदि बातों की परवाह रखते हैं। इसके अलावा वे इबादत पर ज्यादा समय गुजारते हैं। रमजान के दौरान दिन भर उपवास करने के बाद जब शाम को इस्लाम को मानने वाले लोग रोजा तोड़ते हैं, तब उन्हें भोजन-पानी का महत्व मालूम होता है। ऐसे में अल्लाह के प्रति वे खुद-ब-खुद शुक्रगुजार हो जाते हैं। इफ्तार के वक्त यानी रोजा तोड़ने के समय पैगंबर मुहम्मद साहब अल्लाह की खूब प्रशंसा किया करते थे और शुक्रिया अदा करते थे।

उनका कहना है- श्अल्लाह का शुक्र है कि उसने रोजा रखने में मेरी मदद की और इस तरह देखभाल की कि शाम में हम रोजा तोड़ सके। अल्लाह का शुक्र है कि मुझे प्यास नहीं लगी और मेरे शरीर की सिराएँ नहीं सूखीं। अल्लाह की कृपा से हमें इनाम मिलना निश्चित है।

पैगंबर की अनेक बातों में इफ्तार का जिक्र अगली जिंदगी के एक चिह्न के रूप में आता है। उदाहरण के लिए- श्जो रोजा रखते हैं उन्हें दो खुशियाँ निश्चित रूप से मिलती हैं- पहली बार इफ्तार के समय और दूसरी बार जब वे अल्लाह से मिलते हैं।श् जैसे जिंदगी में हमारे लिए अच्छा होना जरूरी है, उसी तरह अनेक नेमतों और आशीर्वाद के एवज में रोज-रोज के जीवन में भी अल्लाह के प्रति शुक्रगुजार होना हमारे लिए जरूरी है।

इबादत के दूसरे तरीकों की तरह उपवास का भी एक बाहरी भौतिक रूप है जिसे हम जानते हैं। लेकिन हमें इसके आंतरिक आध्यात्मिक अर्थ को भी नहीं भूलना चाहिए। जो रोजा रखते हैं लेकिन गलत काम करते हैं वे रमजान के दौरान रोजा रखने का महत्व नहीं समझते। जाहिर है कि उनका संबंध सिर्फ रोजा के बाहरी यथार्थ से है।

मुहम्मद साहब ने स्पष्ट कहा है कि इस ऐसा करने वालों को सिर्फ भूख और प्यास ही मिलते हैं। रोजा में हम अपनी बुरी आदतों पर नियंत्रण कर जीवन भर गलत नहीं करने की तैयारी करते हैं।
रोजा हमें अल्लाह के नजदीक ले जाने का साधन है। कुरान में स्पष्ट कहा गया है कि पवित्रता के साथ रोजा रखने वाला स्वाभाविक रूप से अल्लाह के निकट पहुँच जाता है। पैगंबर कहते हैं कि रोजा बुराइयों से बचाने वाला एक कवच है। इस्लाम में रमजान सबसे पवित्र महीना माना जाता है क्योंकि इसी महीने में कुरान का इलहाम हुआ था। यही कारण है कि रमजान को कुरान का महीना भी कहा जाता है। रमजान और कुरान इस्लाम की एक बहुत बड़ी इनायत है।

एजेंसी

Akash
Swastik Tiles
Reshika Boutique
Paul Opticals
New Anjan Engineering Works
The Raymond Shop
Metro Glass
Puma
Krsna Restaurant
VanHuesen
W Store
Motilal Oswal
Chotanagpur Handloom
S_MART
Home Essentials
Abhushan
Raymond

About Author

admin_news

admin_news

Related Articles

0 Comments

No Comments Yet!

There are no comments at the moment, do you want to add one?

Write a comment

Write a Comment

Poll

Will India Win Cricket World Cup in 2019 ?

LATEST ARTICLES

    India has only two castes, rich and poor: Goa CM

India has only two castes, rich and poor: Goa CM

0 comment Read Full Article

Subscribe to Our Newsletter