रमदान: वैश्विक महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावितों की मदद करने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने रमदान का पवित्र महीना शुरू होने के अवसर पर उन लाखों शरणार्थियों और अपने देशों के भीतर ही विस्थापित हुए लोगों को और ज़्यादा सहायता व समर्थन दिये जाने का आग्रह किया है जो कोविड-19 महामारी से, सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं.

यूएन शरणार्थी एजेंसी ने कहा है कि जिन लोगों को अपने घर छोड़ने के लिये मजबूर होना पड़ा है, उन्हें वैश्विक टीकाकरण कार्यक्रमों व महामारी से उबरने की आर्थिक योजनाओं में भी समान भागीदारी के साथ शामिल किया जाए.

Every few seconds, someone is forced to flee their home.This #Ramadan, you can make a difference. #EverySecondCounts https://t.co/W8szTaCmy2 pic.twitter.com/9K6RqhHkT3— UNHCR, the UN Refugee Agency (@Refugees) April 12, 2021

इन लोगों की शैक्षिक ज़रूरतें, मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक कल्याण, बाल संरक्षण को जोखिम, और लैंगिक हिंसा की रोकथाम व उसका सामना करने की ज़रूरतों पर भी ध्यान देना होगा.
यूएन शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैण्डी ने कहा है, “गहन आत्म चिन्तन और दयालुता की इस घड़ी में, दुनिया के जबरन विस्थापित लोगों के साथ एकजुटता की आवश्यकता, पहले से कहीं ज़्यादा है.”
“पवित्र रमदान महीने के दौरान एकजुटता की भावना के साथ, मैं कमज़ोर हालात वाले लोगों के लिये कहीं ज़्यादा समर्थन व सहायता की अपील करता हूँ.”
एजेंसी का कहना है कि दुनिया भर के कुल शरणार्थियों की लगभग 85 प्रतिशत संख्या निम्न व मध्यम आय वाले देशों में हैं जो वित्तीय चुनौतियाँ का सामना तो कर ही रहे हैं, वहाँ अक्सर स्वास्थ्य प्रणालियाँ भी कमज़ोर हैं. 
महामारी के परिणामस्वरूप, शरणार्थियों और विस्थापितों की आजीविकाएँ ख़त्म हो गई हैं और वो अत्यधिक निर्धनता में धकेल दिये गए हैं, जिसके विनाशकारी और दूरगामी परिणाम होंगे.
यूएन शरणार्थी एजेंसी का अनुमान है कि दुनिया भर में, हर चार में से तीन शरणार्थी, अपनी बुनियादी ज़रूरतों के केवल आधे या उससे भी कम हिस्से की पूर्ति कर पाते हैं.
परिवारों को अपनी खाद्य ज़रूरतों में कटौती करने के लिये मजबूर होना पड़ा है, बहुत से परिवार अपने मकानों का किराया अदा करने की स्थिति में नहीं हैं, उन पर क़र्ज़ का भारी बोझ चढ़ गया है, या जहाँ स्कूल खुले भी हैं, वहाँ बहुत से परिवारों को, अपने बच्चों को स्कूली शिक्षा के लिये भेजने से रोकना पड़ा है.
यूएन शरणार्थी एजेंसी ने रमदान के पवित्र महीने के मौक़े पर, दान एकत्र करने का वैश्विक अभियान जारी किया है जिसका नाम है – Every Second Counts यानि हर क्षण महत्वपूर्ण है.
एजेंसी का कहना है कि मुसलमानों द्वारा दिये जाने वाले ज़कात और सदक़ाह नामक दान या फिर सामान्य दान के ज़रिये इकत्र होने वाली रक़म से, उन विस्थापित परिवारों की कुछ तकलीफ़ें आसान हो सकती हैं जिन्हें अपने घरों और प्रियजनों से बिछड़ना पड़ा है.
शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैण्डी का कहना है, “एक साथ मिलकर हम सभी, शरणार्थियों और देशों के भीतर ही विस्थापित लोगों को, उनके सिरों के ऊपर, छत मुहैया कराने में मदद कर सकते हैं, उन्हें इफ़्तार के लिये ताज़ा भोजन और स्वच्छ पानी मुहैया करा सकते हैं, एक बेहतर और ज़्यादा सुरक्षित भविष्य की उम्मीद भी जगा सकते हैं.”
एजेंसी ने कहा है कि बेहद कमज़ोर हालात वाले परिवारों, यतीमों, अकेली माताओं और वृद्धजन को, जीवनरक्षक सहायता मुहैया कराने के लिये तुरन्त वित्तीय सहायता की ज़रूरत है.
यूएन शरणार्थी एजेंसी के अभियान के दौरान एजेंसी के नियमित कार्यक्रमों और कोविड-19 महामारी के कारण बेतहाशा बढ़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिये भी धनराशि मुहैया कराई जाएगी., संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने रमदान का पवित्र महीना शुरू होने के अवसर पर उन लाखों शरणार्थियों और अपने देशों के भीतर ही विस्थापित हुए लोगों को और ज़्यादा सहायता व समर्थन दिये जाने का आग्रह किया है जो कोविड-19 महामारी से, सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं.

यूएन शरणार्थी एजेंसी ने कहा है कि जिन लोगों को अपने घर छोड़ने के लिये मजबूर होना पड़ा है, उन्हें वैश्विक टीकाकरण कार्यक्रमों व महामारी से उबरने की आर्थिक योजनाओं में भी समान भागीदारी के साथ शामिल किया जाए.

इन लोगों की शैक्षिक ज़रूरतें, मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक कल्याण, बाल संरक्षण को जोखिम, और लैंगिक हिंसा की रोकथाम व उसका सामना करने की ज़रूरतों पर भी ध्यान देना होगा.

यूएन शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैण्डी ने कहा है, “गहन आत्म चिन्तन और दयालुता की इस घड़ी में, दुनिया के जबरन विस्थापित लोगों के साथ एकजुटता की आवश्यकता, पहले से कहीं ज़्यादा है.”

“पवित्र रमदान महीने के दौरान एकजुटता की भावना के साथ, मैं कमज़ोर हालात वाले लोगों के लिये कहीं ज़्यादा समर्थन व सहायता की अपील करता हूँ.”

एजेंसी का कहना है कि दुनिया भर के कुल शरणार्थियों की लगभग 85 प्रतिशत संख्या निम्न व मध्यम आय वाले देशों में हैं जो वित्तीय चुनौतियाँ का सामना तो कर ही रहे हैं, वहाँ अक्सर स्वास्थ्य प्रणालियाँ भी कमज़ोर हैं. 

महामारी के परिणामस्वरूप, शरणार्थियों और विस्थापितों की आजीविकाएँ ख़त्म हो गई हैं और वो अत्यधिक निर्धनता में धकेल दिये गए हैं, जिसके विनाशकारी और दूरगामी परिणाम होंगे.

यूएन शरणार्थी एजेंसी का अनुमान है कि दुनिया भर में, हर चार में से तीन शरणार्थी, अपनी बुनियादी ज़रूरतों के केवल आधे या उससे भी कम हिस्से की पूर्ति कर पाते हैं.

परिवारों को अपनी खाद्य ज़रूरतों में कटौती करने के लिये मजबूर होना पड़ा है, बहुत से परिवार अपने मकानों का किराया अदा करने की स्थिति में नहीं हैं, उन पर क़र्ज़ का भारी बोझ चढ़ गया है, या जहाँ स्कूल खुले भी हैं, वहाँ बहुत से परिवारों को, अपने बच्चों को स्कूली शिक्षा के लिये भेजने से रोकना पड़ा है.

यूएन शरणार्थी एजेंसी ने रमदान के पवित्र महीने के मौक़े पर, दान एकत्र करने का वैश्विक अभियान जारी किया है जिसका नाम है – Every Second Counts यानि हर क्षण महत्वपूर्ण है.

एजेंसी का कहना है कि मुसलमानों द्वारा दिये जाने वाले ज़कात और सदक़ाह नामक दान या फिर सामान्य दान के ज़रिये इकत्र होने वाली रक़म से, उन विस्थापित परिवारों की कुछ तकलीफ़ें आसान हो सकती हैं जिन्हें अपने घरों और प्रियजनों से बिछड़ना पड़ा है.

शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैण्डी का कहना है, “एक साथ मिलकर हम सभी, शरणार्थियों और देशों के भीतर ही विस्थापित लोगों को, उनके सिरों के ऊपर, छत मुहैया कराने में मदद कर सकते हैं, उन्हें इफ़्तार के लिये ताज़ा भोजन और स्वच्छ पानी मुहैया करा सकते हैं, एक बेहतर और ज़्यादा सुरक्षित भविष्य की उम्मीद भी जगा सकते हैं.”

एजेंसी ने कहा है कि बेहद कमज़ोर हालात वाले परिवारों, यतीमों, अकेली माताओं और वृद्धजन को, जीवनरक्षक सहायता मुहैया कराने के लिये तुरन्त वित्तीय सहायता की ज़रूरत है.

यूएन शरणार्थी एजेंसी के अभियान के दौरान एजेंसी के नियमित कार्यक्रमों और कोविड-19 महामारी के कारण बेतहाशा बढ़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिये भी धनराशि मुहैया कराई जाएगी.

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