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रसोई घर का वैद्य है अदरख

रसोई घर का वैद्य है अदरख
June 05
09:48 2019

जटिल रोगों के निदान में कारगर है अदरख

धर्मराज राय

भोजन में अदरख का उपयोग प्राचीन काल से ही होता रहा है यह भी एक उपयोगी कंद है। अदरख न केवल भोजन को स्वास्थ्यप्रद बनाता है बल्कि यह स्वयं आरोग्य-प्रदाता है। अदरख में लहसुन से अधिक लौह तत्व पाया जाता है, प्रायः दुगना। जबकि प्याज से चैगुना लौहतत्व अदरख में होता है। प्राकृतिक रूप से अदरख में उपलब्ध लौह तत्व को शरीर सहजता से ग्रहण कर लेता है। आहार विज्ञानी स्वीकार करते हैं कि बहुतायत रेशे (फाइबर) से भरपूर अदरख आंतों से कब्ज मिटाकर मल बाहर करने में लाभकारी है।


अदरख का औषधीय लाभ: वर्षाकाल में पाचन क्रिया बहुत अनियमित और कमजोर भी हो जाती है। इसका कारण है कि किसानों को छोड़कर आम आदमी का श्रम कम हो जाता है। दैनिक श्रम कम होने से बरसात में कब्ज और वायु विकार की समस्या से लोग पीड़ित हो जाते हैं। अधेड़ उम्र के लोग इस कष्ट से अत्यधिक ग्रस्त होते हैं। अनुभव बताता है कि अदरख और नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से उदर रोग का निदान होता है। अदरख और नींबू का रस मिलाकर पीने से यह योग अमृत-तुल्य होता है। अपच, अरूचि और वायु विकार में यह योग आजमा कर लाभ उठाया जा सकता है।


साइटिका एवं वात दर्दः कमर से लेकर एड़ी तक जानेवाली शियाटिका नामक स्नायु वात रोग में थोड़े से श्रम के कारण संकुचित होने लगती है। इसमें दर्द होता है जिसे शियाटिका का दर्द कहते हैं। थोड़ा विश्राम करने से आराम मिलता तो है लेकिन स्थाई निदान नहीं मिलता। यहां एक बात जानने की है कि कमर, घुटनों, एड़ी, पंजों एवं जोड़ों में दर्द या सूजन हो जाये तो यह वात रोग कहलाता है। यह बहुत कष्टकर होता है।

विशिष्ट प्राकृतिक चिकित्सा, आहार-विशेषज्ञ एवं आयुर्वेदाचार्यो का दावा है कि रोज प्रातःकाल खाली पेट एक चम्मच अदरख का रस और आधा चम्मच घी मिलाकर पीया जाये तो कुछ ही दिनों में आराम होने लगेगा।
कुकुर खांसी – यह एक आम बीमारी है जिससे बच्चे बहुत आक्रांत होते हैं। बच्चे खांसते-खांसते वमन भी कर देते हैं। इसके लक्षणों में खांसने पर कुत्ते भूकने जैसी आवाज आती है। एक चम्मच अदरख का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर तीन-तीन घंटे पर सेवन करने से आराम मिलने लगता है।


डायरिया-दस्त: मात्रानुसार उबलते पानी में एक चम्मच अदरख का रस डालकर चुल्हे से उतार कर ठंडा होने पर रोगी को 3-4 बार पिलाने से दस्त नियंत्रित हो जाता है। अदरख के टुकड़ों को चूसने से हिचकी थम जाती है। यही नहीं अदरख का रस और शहद लिाकर चाटने से जुकाम में और गला बैठने पर आराम मिलता है। अपच में भी अदरख का रस कारगर है।
कान दर्द: विशेषज्ञ दावा करते हैं कि कान में कैसा भी दर्द हो अदरख का गुनगुना दो बूंद रस डालने से तत्काल आराम मिल जाता है।

वमन: किसी भी कारण से उलटी होने पर एक चम्मच अदरख का रस और एक चम्मच प्याज का रस पिलाने से आराम मिलता है। थोड़े-थोड़े अंतराल पर यह योग देना होगा। खट्टी डकार आने पर भी यही योग आरामदायक है।
बार बार पेशाब: बार-बार पेशाब आने की शिकायत पुराने रोगों में शामिल है। पेशाब के बाद भी कुछ बंूदे अटकी हुई महसूस होती हैं। इस रोग में एक चम्मच अदरख के रस में थोड़ी सी मिश्री मिलाकर दिन भर में प्रतिदिन तीन खुराक पिलाने से पर्याप्त लाभ मिलने लगता है।


अदरख का आचार: अदरख के आचार बनाने के लिए शुद्धता से अदरख को छीलकर और पानी से धोकर पतला-पतला टुकड़ा कर लिया जाता है। अब इसे मर्तबान में रखकर इसके डूब जाने भर नींबू का रस डाल दिया जाता है। यदि स्वाद बनाना है तो ऊपर से नमक, हल्दी, जीरा और काली मिर्च भी डाल दिया जाता है। तेल के बदले इसमें शुद्ध घी डालना अधिक आरोग्यप्रद है।

विशेषज्ञों के अनुसार अदरख में 81 प्रतिशत जलीय अंश होता है। इसका 70 प्रतिशत अंश रस के रूप में निकाला जा सकता है। अदरख के एक चम्मच रस की मात्रा लगभग 5 ग्राम रस माना जाता है। अदरख के रस के सेवन के लिए यह हिदायत है कि रोग की स्थिति में भोजन से कम से कम एक घंटा पूर्व अदरख के रस का सेवन होना चाहिए।

विशेषज्ञ आहार विज्ञानी मानते हैं कि अदरख हो या अन्य कंद-मूल हों उनका उपयोग प्रातः से लेकर अपराह्न 3 बजे तक ही किया जाना चाहिए। संध्या 4 बजे के बाद तो लाख प्रलोभन के बावजूद कंद मूल का सेवन करना मना है।

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