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राजीव गांधी छुट्टियां मनाने के लिए आईएनएस विराट युद्धपोत को बना दिया था प्राइवेट टैक्सी

राजीव गांधी छुट्टियां मनाने के लिए आईएनएस विराट युद्धपोत को बना दिया था प्राइवेट टैक्सी
May 09
08:13 2019

राजीव और सोनिया अपने निकट संबंधियों एवं परिवार के साथ 30 दिसंबर 1987 को 10 दिनों की छुट्टी मनाने लक्षद्वीप के पास स्थित एक बेहद खूबसूरत आईलैंड है, जिसका नाम बंगाराम है

सिनेमा जगत के जानेमाने बहुत सम्मानित कलाकार अमिताभ बच्चन उस अवकाश उत्सव में शामिल थे

इनसाईट ऑनलाईन न्यूज

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने विमान वाहक पोत आईएनएस विराट और इसके कर्मियों का इस्तेमाल निजी छुट्टियां मनाने के लिए किया था जिस दौरान उनके विदेशी ससुरालवाले उनके साथ थे।

राष्ट्रीय राजधानी में मोदी ने अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में आयोजित एक चुनावी रैली में यह बात कही। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के इन आरोपों के जवाब में यह बात कही कि रक्षा बलों का भाजपा राजनैतिकरण कर रही है।

राजीव गांधी छुट्टियां मनाने के लिए आईएनएस विराट को बना दिया था प्राइवेट टैक्सी

पीएम मोदी ने गांधी परिवार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि 1987 में राजीव गांधी जिस समय प्रधानमंत्री थे, उस समय वे 10 दिन की छुट्टी मनाने के लिए एक खास द्वीप पर गए थे। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि गांधी परिवार ने छुट्टी मनाने के लिए युद्धपोत आईएनएस विराट का इस्तेमाल किया था।

कांग्रेस नेताओं ने पाकिस्तान के आतंकी कैंप पर एयर स्ट्राइक के बाद भाजपा नेताओं के ’मोदी की सेना’ के बयानों के हवाले से यह मुद्दा उठाया है।
मोदी ने कहा, “किसने रक्षा बलों के साथ निजी संपत्ति जैसा व्यवहार किया है? क्या आपने कभी सुना है कि कोई परिवार छुट्टी मनाने के लिए युद्धपोत से गया हो? ऐसा हमारे देश में हुआ है। नामदार परिवार ने आईएनएस विराट का इस्तेमाल निजी संपत्ति की तरह से किया था। उन्होंने इसका अपमान किया।“

राजीव गांधी छुट्टियां मनाने के लिए आईएनएस विराट को बना दिया था प्राइवेट टैक्सी

मोदी ने आरोप लगाया कि आईएनएस विराट को उसकी तैनाती वाली जगह से हटाकर राजीव गांधी के ससुराल के लोगों को लाने के लिए भेजा गया और उन्हें इसी युद्धपोत से एक द्वीप पर भेजा गया। द्वीप पर इनकी आवभगत करने वाला कोई नहीं था, इसलिए सारा इंतजाम युद्धपोत के कर्मियों ने किया।

उन्होंने कहा कि यह छुट्टी कोई एक दिन में नहीं खत्म हुई बल्कि दस दिन तक चली। इस दौरान युद्धपोत वहीं खड़ा रहा। मोदी ने कहा कि ’क्या युद्धपोत पर विदेशियों की मौजूदगी देश की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं है? या फिर इसकी इजाजत बस इसलिए दे दी गई कि वह राजीव गांधी थे?’

उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस के शासनकाल में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी उठाया।

कैसा है वो द्वीप, जहां गांधी फैमिली ने बिताई छुट्टी

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1987 में नए साल का जश्न मनाने के लिए अपने पूरे परिवार और खास मित्रों के साथ एक बेहद खूबसूरत द्वीप गए थे। राजीव गांधी के मित्रों में अमिताभ बच्चन और उनका परिवार भी शामिल था।पहले इस द्वीप के बारे में जान लीजिए।

दक्षिण भारत में कोचीन से 465 किलोमीटर पश्चिम की ओर लक्षद्वीप के पास स्थित एक बेहद खूबसूरत आईलैंड है, जिसका नाम बंगाराम है। यह पूरा द्वीप निर्जन है। 0.5 स्क्वायर किलोमीटर एरिया में फैले इस द्वीप का चयन भी सोच-समझकर किया गया था।

राजीव गांधी छुट्टियां मनाने के लिए आईएनएस विराट को बना दिया था प्राइवेट टैक्सी

यहां विदेशी नागरिकों के आने पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है। लक्षद्वीप के तत्कालीन पुलिस चीफ पीएन अग्रवाल का कहना था कि ये बंगाराम द्वीप बेहद सुरक्षित और दुनिया से एक तरह से कटा हुआ इलाका है। इस इलाके की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह बेहद सुरक्षित है।

मीडिया से छिपाने की भरसक कोशिश, फिर भी भनक लग गई

गांधी परिवार के इस नितांत गोपनीय दौरे को मीडिया से छिपाने की भरसक कोशिश की गई थी। फिर भी मीडिया को 26 को ही इसकी भनक लग गई, जब राहुल गांधी ने अपने चार दोस्तों के साथ लक्षद्वीप प्रशासन के नारंगी और सफेद रंग के एक हेलिकॉप्टर से उड़ान भरी थी।

राजीव गांधी छुट्टियां मनाने के लिए आईएनएस विराट को बना दिया था प्राइवेट टैक्सी

छुट्टी पर अलग-अलग कई समूहों में लोग इस द्वीप पर पहुंचे थे, जिनमें राहुल गांधी का ग्रुप पहला था। सरकार ने उस समय राजीव गांधी के इस दौरे को पूरी तरह छिपाने की कोशिश की थी। मीडिया को इससे दूर रखने की नाकाम कोशिश की गई थी। सरकार ने इस राजीव गांधी की छुट्टी की प्राइवेसी को पूरी तरह बनाए रखने के लिए समुद्री और हवाई दोनों ही मार्गों से निगरानी की थी।

बच्चन फैमिली समेत कौन-कौन था आलीशान पार्टी में शामिल

लेकिन इस छुट्टी में जो लोग शामिल थे, वे सभी खुद इतने हाईप्रोफाइल थे कि यह खबर दब न सकी। राहुल और प्रियंका के चार दोस्त, सोनिया गांधी की बहन, बहनोई और उनकी बेटी, सोनिया की मां आर माइनो, उनके भाई और मामा शामिल थे।

ये तो थे गांधी परिवार के रिश्तेदार। इस दौरे में राजीव गांधी के बेहद खास दोस्त अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया बच्चन और 3 बच्चे शामिल थे। तीन बच्चों में अमिताभ के भाई अजिताभ की बेटी भी शामिल थीं, अजिताभ खुद फॉरेन एक्सचेंज रेग्यूलेशन एक्ट (थ्म्त्।) का उल्लंघन करने के मामले में फंसे थे।

इसके अलावा एक और परिवार इस टूर में शामिल था, जिनका नाम बिजेंद्र सिंह था। बिजेंद्र सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण सिंह के भाई थे। इसके अलावा दो विदेशी मेहमान भी इस आलीशान पार्टी में शामिल थे।

30 दिसंबर को पहुंचे थे राजीव और सोनिया गांधी

राजीव और सोनिया 30 दिसंबर की दोपहर में ही इस खूबसूरत द्वीप पर छुट्टी मनाने पहुंच गए थे, जबकि अमिताभ बच्चन एक दिन के बाद यहां कोचीन-कावारत्ती हेलिकॉप्टर से पहुंचे थे। जया बच्चन चार दिन पहले प्रियंका और अपने बच्चों के साथ पहुंची थीं।

ईंधन भराने के लिए दूसरे द्वीप पर उतरा था अमिताभ का हेलिकॉप्टर

बंगाराम द्वीप पर अमिताभ बच्चन के आने की खबर को भी छिपाने की कोशिश की गई थी। लेकिन 31 दिसंबर को बंगाराम से कुछ दूरी पर स्थित एक अन्य आईलैंड कावारत्ती पर अमिताभ के हेलिकॉप्टर को ईंधन भराने के लिए उतरना पड़ा।

इसमें 50 मिनट लगे। इसके बाद ये बात जगजाहिर हो गई। छुट्टियां मनाकर वापस लौटते वक्त अमिताभ बच्चन को इंडियन एक्सप्रेस के फोटोग्राफर ने कैप्चर कर लिया। इस पर अमिताभ नाराज हो गए। उन्होंने फोटोग्राफर को चेतावनी भी दी, लेकिन फोटोग्राफर तब तक अपना काम कर चुका था।

अमिताभ के भाई की चल रही थी थ्म्त्। में जांच

राजीव गांधी का यह टूर अपने इटली के रिश्तेदारों और बच्चन परिवार की मौजूदगी के चलते खासी सुर्खियों में रहा था। राजीव की मुश्किलें इसलिए और बढ़ गई थीं क्योंकि थ्म्त्। की जांच के दायरे में आए अमिताभ बच्चन के भाई अजिताभ की बेटी भी इस छुट्टी में घुमने गई।

उस समय विपक्ष का सवाल था कि ऐसा करके राजीव गांधी उन अधिकारियों को क्या संदेश देना चाह रहे थे जो अमिताभ के भाई अजिताभ बच्चन की स्विट्जरलैंड की संपत्ति की जांच कर रहे थे।

स्वीमिंग, सनबाथ से लेकर फिशिंग तक, हर सुविधा मौजूद

लेकिन इस पूरे आलीशान सप्ताह के दौरान आलोचनाओं को अनसुना कर दिया गया। छुट्टी मना रहे सभी लोग इसे पूरी तरह एंजॉय कर रहे थे। स्वीमिंग, सनबाथ से लेकर फिशिंग तक, सभी इस शानदार द्वीप पर अपना पूरा समय बेहद इत्मिनान के साथ और लुत्फ उठाते हुए बिता रहे थे।

पिकनिक मनाने के लिए पास ही मौजूद दो और द्वीप थिन्नकारा और पारिल में भी ये लोग गए थे। राजीव, राहुल और प्रियंका जहां बेहद साफ नीले पानी का आनंद उठा रहे थे, वहीं सोनिया गांधी अस्थमा के डर से अपनी मां और जया बच्चन के साथ नारियल के पेड़ की छांव में बातें करती थीं।

1985 में भी आए थे राजीव गांधी

राजीव गांधी इस द्वीप से पहले से वाकिफ थे। उन्होंने यहां एक डाल्फिन को बचाने के लिए पानी में छलांग लगा दी थी। नवंबर 1985 में राजीव गांधी यहां एक दिन के लिए रुके थे। तभी उन्हें ये बेहद पसंद आ गया था।

बच्चों की पार्टी का बिल 18 हजार राजीव ने चुकाया था

लक्षद्वीप के प्रशासक वजाहत हबीबुल्लाह जो कि उस समय राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री सचिवालय में थे, उन्होंने बताया कि राजीव गांधी को यहां बहुत अच्छा लगा था। पिछले सितंबर में भी राहुल और प्रियंका अपने चार दोस्तों के साथ लक्षद्वीप में छुट्टियां बिताईं थीं। राजीव गांधी ने बाद में उनके 18 हजार रुपये के बिल का भुगतान किया था।

गांधी फैमिली का कुक गया था

लक्षद्वीप प्रशासन की ओर से सभी के लिए खाने का इंतजाम किया गया था। बंगाराम द्वीप पर दो रसोइयों समेत पांच लोग रुके थे। गांधी परिवार के खाने की पसंद का ख्याल रखने के लिए दिल्ली से उनका पर्सनल कुक भी गया था, जो दिशा-निर्देश दे रहा था।

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दिल्ली से गई थी शराब, पास के द्वीप से आया था चिकन

इतना ही नहीं, नई दिल्ली से शराब भी ले जाई गई थी। पास में मौजूद एक अन्य द्वीप में 100 चिकन की भी व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा लक्षद्वीप से ताजे फल जिनमें पपीता, सपोता, केले और अमरूद भेजे गए थे। कावारत्ती से 100 ब्रेड और बटर मंगाए गए थे।

इसके अलावा कोचीन से कैडबरी की चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स की 40 क्रेट, मिनरल वाटर की 300 बोतल, अमूल चीज, काजू, 20 किलो आटा, 105 किलो चावल और कुछ ताजी सब्जियां मंगाई गई थीं। इन सामानों की पहली खेप 23 दिसंबर को, दूसरी खेप तीन दिन के बाद और फिर 1 जनवरी को कुछ सामान भेजा गया।

खेल अधिकारियों के मुताबिक प्रशासन को सभी बिलों का भुगतान करने को कह दिया गया था, ताकि बाद में राजीव गांधी पैसा दे सकें। लक्षद्वीप के कलेक्टर केके शर्मा के मुताबिक उन्होंने वीआईपी हॉलीडे के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किया था। वहीं हबीबुल्लाह भी कह चुके थे कि उनकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री को बंगाराम द्वीप तक पहुंचाने भर की थी। उसके बाद वे वहां स्वच्छंद रहना चाहते थे।

10 दिन अरब सागर में खड़ा रहा प्छै विराट

इस दौरान भारत के प्रमुख युद्धपोत प्छै विराट के गांधी परिवार को ले जाने के लिए इस्तेमाल किए जाने की खबरें रहीं, जिस पर सवाल उठे। प्छै विराट को पूरे 10 दिनों के लिए अरब सागर में तैनात किया गया। कुछ रक्षा विशेषज्ञों ने राजीव गांधी की छुट्टियों में नौसेना के इस्तेमाल करने पर सवाल भी उठाया था। बताया जाता है कि पूरी छुट्टियों के दौरान अगत्ती में स्पेशल सेटेलाइट का सेटअप भी लगाया गया था।

लक्षद्वीप के पर्यटन को मिला फायदा

लक्षद्वीप के सांसद पीएम सईद ने तब कहा था कि इस हॉलीडे का लक्षद्वीप को बहुत फायदा होगा, जो कि पूरे भारत में संदरतम स्थानों में से एक है।

गांधी परिवार की छुट्टी के बाद फौरन इसका असर भी दिखाई दिया। 8 जनवरी को इस पर्यटन स्थल के बारे में आमदिनों के मुकाबले पांच गुना ज्यादा पूछताछ की गई।

सबसे पहले प्रियंका और आखिरी में गईं थीं सोनिया

6 जनवरी को गांधी परिवार की यह आलीशान छुट्टी खत्म हुई थी। वहां से रवाना होने वाली मेहमानों की पहली खेप में प्रियंका थीं, जो अपने दोस्तों के साथ गोवा चली गईं। उसके बाद विदेशी मेहमान रवाना हुए और फिर अमिताभ बच्चन और उनका परिवार रवाना हुआ।

उसी दिन राजीव गांधी राहुल के साथ नेवी के हेलिकॉप्टर से एमिनी आइलैंड गए, जहां उनका नए साल 1988 में पहला आधिकारिक कार्यक्रम होने वाला था। राहुल गांधी को प्छै विराट में ही छोड़ दिया गया था, ताकि वे बाद में राजीव के साथ मंगलौर जा सकें। बंगाराम द्वीप से सबसे अंत में निकलने वालों में सोनिया गांधी और उनके रिश्तेदार थे।

एजेंसी/एक ब्लॉग से साभार 

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