Online News Channel

News

राफेल पर घिरते जा रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी

राफेल पर घिरते जा रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी
February 12
16:17 2019

राफेल सौदे के बारे में अनिल अंबानी को पहले से कैसे पता था-राहुल गांधी

राफेल पर घिरते जा रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी
युद्धक विमान राफेल से संबंधित सौदा अगले दो महीने बाद लोकसभा चुनाव का सामना करने जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके भाजपानीत सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के गले की फांस बनते जा रहा है.
इस मामले में ‘चैकीदार चोर है’ के नारे के जरिए प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ लगातार आक्रामक होते जा रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज मंगलवार को प्रधानमंत्री पर राफेल से संबंधित ‘टाॅप सीक्रेट’ को अनिल अंबानी से साझा करने का गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें देश द्रोह के आरोप में जेल भेजे जाने की मांग की है.

राफेल पर घिरते जा रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी

राहुल गांधी के राजनीतिक हमलों और अब अस्सी के दशक के अंतिम वर्षों में बोफोर्स तोप सौदों की खरीद में ली गई कथित दलाली का रहस्योद्घाटन करनेवाले अखबारों ‘दि हिन्दू’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के ताजा खुलासों ने प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा के आला नेताओं और इसके रणनीतिकारों की नींद हराम कर दी है.
राफेल विमानों की खरीद में दिवालिएपन की कगार पर पहुंच चुके उद्योगपति अनिल अंबानी को लाभ पहुंचाने से संबंधित कथित घोटाले के बहाने सीधे प्रधानमंत्री मोदी को कठघरे में खड़ा करने में लगे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को ‘झूठा’ करार देने और इस मामले पर सीएजी की कथित रिपोर्ट के जरिए लीपापोती के प्रयास सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं.

सीएजी यानी नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक राजीव महर्षि

सीएजी यानी नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक राजीव महर्षि की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर विपक्ष ने सीएजी की रिपोर्ट पर ही प्रश्नपिन्ह लगा दिया है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के अनुसार रफेल विमान सौदों पर हस्ताक्षर के समय श्री महर्षि वित सचिव थे और उनकी देखरेख में ही सौदा संपन्न हुआ था लिहाजा उनकी अध्यक्षता में सीएजी की रिपोर्ट की तटस्थता और निष्पक्षता की उम्मीद बेमानी है.
कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष अभी भी इस तथाकथित रक्षा खरीद घोटाले की जांच संसद की संयुक्त जांच समिति यानी जपेीसी से कराने की मांग पर अड़ा है.
इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ई मेल के आधार पर इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी पर एक और बड़ा राजनीतिक बम फोड़ा है.
उन्होंने मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में इस ईमेल के हवाले से गंभीर आरोप लगाया कि राफेल डील पर हस्ताक्षर से 10 दिन पहले, मार्च के अंतिम सप्ताह में, अनिल अंबानी ने पेरिस में फ्रांस के रक्षा मंत्री जीन यीव्स ली ड्राएन और राफेल विमानों की निमार्ता कंपनी दसाॅ के प्रबंधन से मिलकर कहा था कि पीएम आएंगे तो एक एमओयू (राफेल डील) साइन होगा, जिसमें उनका नाम होगा. प्रधानमंत्री मोदी 9 से 11 अप्रैल को फ्रांस की राजधानी पेरिस में थे.
ईमेल में क्या लिखा है?
‘‘आपकी जानकारी के लिए, अभी फोन पर सी. सालोमन (सालोमन जेवाई ले ड्रायन के सलाहकार हैं, जो सोमवार को हुई मीटिंग में मौजूद थे) से बात हुई. ए. अंबानी इस हफ्ते मंत्री के ऑफिस आए थे. मीटिंग में उन्होंने बताया कि वह कॉमर्शियल हेलोस पर पहले एएच के साथ काम करना चाहते हैं और बाद में डिफेंस सेक्टर में. उन्होंने बताया कि एक एमओयू तैयार किया जा रहा है, जिस पर प्रधानमंत्री के दौरे के समय दस्तखत किए जाएंगे.’’
यह ईमेल एयरबस के तत्कालीन सीईओ गुलियाम फौरी की ओर से कंपनी के एशिया सेल्स हेड मॉन्टेक्स और फिलिप को लिखा गया था. इसकी कॉपी श्ली, क्लाइव, मॉडेट, डोमिनिक, चॉम्सी और निकोलस को भेजी गई थी.
राहुल गांधी का आरोप: अनिल अंबानी के लिए मिडिलमैन थे प्रधानमंत्री? 
कांग्रेस अध्यक्ष श्री गांधी ने ईमेल का हवाला देते हुए कहा, ‘‘एयरबस कंपनी के एग्जक्यूटिव ने ईमेल में लिखा कि फ्रांस के रक्षा मंत्री के ऑफिस में अनिल अंबानी गए थे. मीटिंग में अंबानी ने कहा था कि जब पीएम आएंगे तो एक एमओयू साइन होगा, जिसमें अनिल अंबानी का नाम होगा.’’ उन्होंने कहा कि डील पर दस्तखत होने से पहले राफेल डील के बारे में न तो भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री को मालूम था, न ही एचएएल को न ही विदेश मंत्री को.
लेकिन राफेल डील से 10 दिन पहले अनिल अंबानी को इस डील के बारे में मालूम था. इसका मतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी अनिल अंबानी के ‘मिडिलमैन’ की तरह काम कर रहे थे. श्री गांधी के अनुसार, यह देशद्रोह का मामला है. देश के टॉप सीक्रेट को किसी निजी क्षेत्र के व्यक्ति के साथ शेयर करने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए. उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए.

‘दि हिन्दू’ में वरिष्ठ पत्रकार, इस अखबार के प्रबंध निदेशक और ग्रुप एडिटर रहे एन राम

इससे पहले अंग्रेजी अखबार ‘दि हिन्दू’ में वरिष्ठ पत्रकार, इस अखबार के प्रबंध निदेशक और ग्रुप एडिटर रहे एन राम ने राफेल सौदे में प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल और फ्रांस सरकार तथा विमान निर्माता कंपनी से समानांतर बातचीत करने से संबंधित तत्कालीन रक्षा सचिव की टिप्पणी से संबंधित दस्तावेज उजागर कर देने से सरकार की मुश्किलें पहले ही बढ़ गई थीं. रक्षा सचिव ने 1 दिसंबर 2015 को संबंधित फाइल पर लिखा था, ‘आरएम (रक्षा मंत्री) कृपया इसे देखें.
अच्छा हो कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस तरह की बातचीत न करे क्योंकि इससे सौदा करने के मामले में हमारी स्थिति बहुत कमजोर हो जाती है.’
राहुल गांधी ने हिन्दू की इस रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए लोकसभा में इस आधार पर प्रधानमंत्री मोदी पर रक्षा मंत्रालय की आपत्तियों के बावजूद राफेल सौदे में समानांतर बातचीत चलाने का आरोप लगाया था.
इसके जवाब में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने एन राम पर रक्षामंत्रालय की फाइल से अधूरी रिपोर्ट पेश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके नीचे तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर की टिप्पणी का जिक्र नहीं किया गया है.
राफेल पर घिरते जा रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी
उन्होंने कहा था कि एन राम जैसे पत्रकार से इस तरह की अधूरी रिपोर्ट की उम्मीद नहीं थी. लेकिन श्रीमती सीतारमण पर पलटवार करते हुए एन राम ने कहा कि उन्हें अपनी पत्रकारिता के लिए निर्मला सीतारमण के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है.
उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस कथित घोटाले से संबंधित बहुत कुछ सामग्री जमा है जो समय समय पर सामने आएगी. उन्होंने निर्मला सीतारमण के लिए कहा कि उनका इस सौदे से कुछ भी लेना देना नहीं है तो वह क्यों उसका बचाव करने में लगी हैं जिसका बचाव संभव ही नहीं है.
समाचार एजेन्सी एएनआई ने अपने ट्विटर हैंडल पर रक्षा मंत्रालय की फाइल का वह हिस्सा अपलोड किया

समाचार एजेन्सी एएनआई ने अपने ट्विटर हैंडल पर रक्षा मंत्रालय की फाइल का वह हिस्सा अपलोड किया

दि हिन्दू के एन राम और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के बीच आरोप प्रत्यारोप के बीच समाचार एजेन्सी एएनआई ने अपने ट्विटर हैंडल पर रक्षा मंत्रालय की फाइल का वह हिस्सा अपलोड किया,
जिसमें पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की टिप्पणी नजर आती है, जो उन्होंने रक्षा सचिव की टिप्पणी पर की थी.
तकरीबन 40 दिनों के बाद यानी 11 जनवरी 2016 को तत्कालीन रक्षा मंत्री पर्रिकर ने अपनी इस टिप्पणी में लिखा,
‘‘शिखर बैठक के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय और फ्ररांस के राष्ट्रपति का कार्यालय पूरे मामले की प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए है.’
उन्होंने लिखा कि ‘पैरा 5 में जरूरत से अधिक प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है. रक्षा सचिव प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव से बातचीत कर मामले को सुलझाएं.’’
गौरतलब है कि फाइल के पैरा 5 में रक्षा उपसचिव ने लिखा था, ‘‘यह साफ है कि पीएमओ की समानान्तर बातचीत ने रक्षा मंत्रालय और भारत की तरफ से बात कर रही टीम की बातचीत को कमजोर किया है. हम प्रधानमंत्री कार्यालय को यह सलाह देते हैं कि जो लोग भारत की तरफ से बातचीत करने वाली टीम के सदस्य नहीं हैं, वे फ्रांसीसी सरकार के अफसरों से समानान्तर बातचीत करने से बचें. अगर पीएमओ रक्षा मंत्रालय की ओर से बातचीत करने वाली टीम से संतुष्ट नहीं है तो प्रधानमंत्री कार्यालय खुद बातचीत के लिए नई प्रक्रिया तय कर दंे.’’
रक्षा मंत्रालय के इस नोट से साफ है कि उसके अफसर पीएमओ के सीधे बातचीत करने से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने यह भी कहा था कि अगर पीएमओ को उन पर भरोसा नहीं है, तो रक्षा मंत्रालय इस बातचीत से हट सकता है. रक्षा सचिव की टिप्पणी से साफ है कि रक्षा मंत्रालय इस मसले पर काफी गंभीर था और वह चाहता था कि रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर इस मामले में दखल दें.
लेकिन पर्रिकर ने सीधे दखल देने के बजाय पूरे मामले से किनारा करने की कोशिश की. उन्होंने रक्षा सचिव की चिंता को दरकिनार कर उन्हीं के ऊपर यह जिम्मेदारी डाल दी कि वह पीएमओ से बात कर इस मामले को सुलझाएं. कायदे से रक्षा मंत्री के तौर पर पर्रिकर को खुद प्रधानमंत्री मोदी से बात कर समाधान खोजना चाहिए था.
Reshika Boutique
Paul Opticals
New Anjan Engineering Works
Akash
Metro Glass
Puma
Krsna Restaurant
VanHuesen
W Store
Ad Impact
Chotanagpur Handloom
Bhatia Sports
Home Essentials
Abhushan
Raymond

About Author

admin_news

admin_news

Related Articles

0 Comments

No Comments Yet!

There are no comments at the moment, do you want to add one?

Write a comment

Write a Comment

Poll

Economic performance compared to previous government ?

LATEST ARTICLES

    7 out of 10 women cheat on spouses in India: Survey

7 out of 10 women cheat on spouses in India: Survey

0 comment Read Full Article

Subscribe to Our Newsletter