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रुंगटा ग्रुप: झारखंड में तीन दशक से उलझा है 12.50 एकड़ जमीन का मामला

February 05
09:38 2020

रामगढ़ । रामगढ़ जिले में रुंगटा ग्रुप के हेहल स्थित प्लांट में तीन दशक से 12.50 एकड़ जमीन का मामला उलझा हुआ है। यह मामला कई बार अधिकारियों के बीच पहुंचा। पीड़ित परिवारों ने न्याय की गुहार भी लगाई। प्लांट के परिसर में पंचायत भी लगी लेकिन कभी भी इसका हल नहीं निकल पाया। 31 एकड़ में निर्मित रुंगटा ग्रुप के मां छिन्नमस्तिका स्टील एंड स्पोंज आयरन प्लांट में मल्हार और बिरहोर जाति के दर्जनों परिवार कैदियों की तरह रहने को मजबूर हैं।

तीन दशक की लंबी लड़ाई के बाद इन परिवारों को प्लांट परिसर में ही किनारे में कुछ मकान बनाने की इजाजत तो दी गई लेकिन वे अपनी जर्जर झोपड़ियों की मरम्मत भी नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि जब तक इनका मामला सुलझ नहीं जाता है फैक्ट्री प्रबंधन ने उनके लिए सारे रास्ते बंद कर दिए हैं।

31 एकड़ में चारों तरफ से की गई बाउंड्री और बड़े गेट से उन्हें निकलने का आदेश नहीं है। उनके आने-जाने के लिए महज हाधे फीट की जगह दी गई है। इस मसले को हल करने के लिए वर्ष 2009 में फैक्ट्री प्रबंधन ने मल्हार और बिरहोर जाति के लोगों के साथ बैठक की थी। उन्हें पुनर्वासित करने के लिए विस्थापित लोगों की सूची भी तैयार की गई थी। बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 2011 से लेकर 2016 तक कई बैठकें हुईं। लेकिन कोई हल नहीं सामने आया। 2016 में तत्कालीन एसडीओ किरण कुमारी पासी ने इस मुद्दे पर एक अहम बैठक की।

उन्होंने मल्हार और बिरहोर जाति के लोगों को न्याय दिलाने के लिए स्पष्ट आदेश जारी किया। उन्होंने 26 फरवरी 2016 को फैक्ट्री प्रबंधन को कहा कि मल्हार और बिरहोर जाति के लोगों की जमीन प्लांट परिसर में शामिल है। इस वजह से उन लोगों को पुनर्वासित करने की जिम्मेवारी फैक्ट्री प्रबंधन की है। उन्होंने कहा कि सभी परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पुनर्वासित करें।

जहां भी पुनर्वास की व्यवस्था होगी वहां बिजली, पानी, शौचालय, शिक्षा और इलाज की व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने तत्कालीन पतरातू बीडीओ को इस बात की जिम्मेवारी सौंपी थी कि वे मल्हार टोला में जाएं और वहां रह रहे परिवारों की सूची बनाएं। लेकिन पतरातू बीडीओ ने पिछले 4 वर्षों में ना तो कोई ऐसी सूची सौंपी और ना ही उन्होंने इस मसले का हल निकालने के लिए दोबारा कोई प्रयास किया। बाद में अधिकारियों के तबादले होते गए और मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला गया।

मां छिन्नमस्तिका स्टील एंड स्पंज आयरन प्लांट के एचआर हेड दुर्गा पासवान ने बताया कि इस प्लांट को प्रदीप बेलथरिया नामक उद्योगपति द्वारा स्थापित किया गया था। जब रुंगटा ग्रुप ने इस प्लांट को उनसे खरीदा था तो उस वक्त पूरे 31 एकड़ जमीन की सेल डीड उन्हें उपलब्ध कराई गई। रुंगटा ग्रुप की ओर से सभी दस्तावेज की जांच की गई थी। यहां तक कि उन सभी दस्तावेजों का म्यूटेशन और रसीद अभी भी प्रबंधन के पास उपलब्ध है। इसके बावजूद यह मसला अभी तक सुलझ नहीं पाया है। कई बार अधिकारियों को यहां बुलाया गया। यहां तक कि कई बार पीड़ित परिवारों को 4 डिसमिल के हिसाब से जमीन देने के लिए प्रबंधन ने तैयारी भी की। लेकिन पीड़ित परिवार खुद ही इसे लेने से इनकार करते चले गए।

रामगढ़ के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लगाई गुहार, रूंगटा ग्रुप ने हड़प ली मल्हारों की जमीन

प्लांट की आड़ में रूंगटा ग्रुप ने सैकड़ों मल्हारों की जमीन हड़प ली है। यह मामला पिछले दो दशकों से चल रहा है। अब बरकाकाना ओपी क्षेत्र के मल्हार बस्ती के लोग बर्बादी के कगार पर पहुंच गए हैं।

यह पूरा मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में है। हेमंत सोरेन से मिलकर बस्ती के लोगों ने उन्हें अपनी बर्बादी का हाल बताया। इस पर मुख्यमंत्री ने गंभीरता से संज्ञान लिया है।
उन्होंने रामगढ़ डीसी के नाम एक पत्र भेजा है, जिसमें तत्काल मल्हार बस्ती में गलत तरीके से कब्जा किए गए जमीन को मुक्त कराने का आदेश दिया गया है।

जिले के बड़े उद्योगपतियों में शामिल रामचंद्र रुंगटा के द्वारा किए गए इस कब्जे को लेकर प्रशासन ने भी अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री से मिलने गए मुनिया देवी, मीना देवी, नंदकिशोर मल्हार सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि बरकाकाना ओपी क्षेत्र के हेहल में मां छिन्नमस्तिका स्टील एंड स्पंज आयरन प्लांट हजारों एकड़ जमीन में फैला हुआ है।

इस प्लांट के निर्माण के दौरान मल्हार बस्ती के सैकड़ों लोगों की जमीन प्लांट मालिक ने यह कह कर लिया था कि उसके बदले में उन्हें दूसरे स्थान पर जमीन दिया जाएगा। लेकिन यह सिर्फ आश्वासन ही रहा।

अब प्लांट के मालिक रामचंद्र रूंगटा इस मुद्दे पर न तो ध्यान देते हैं और ना ही जमीन उपलब्ध कराने के लिए उनसे बात ही करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि जमीन की लड़ाई लड़ते हुए उनके बाप दादाओं का जीवन खत्म हो गया।

अब इनकी जिंदगी दांव पर लगी हुई है। इस पर मुख्यमंत्री ने रामगढ़ डीसी संदीप सिंह को तत्काल पहल करते हुए मल्हार जाति के लोगों को जमीन दिलाने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री का पत्र लेकर मल्हार जाति के लोग मंगलवार को रामगढ़ डीसी से मिले। डीसी संदीप सिंह ने इस पूरे मामले पर जांच बिठाई है। उन्होंने पतरातू अंचल अधिकारी को इस मामले में जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने गई मुनिया देवी को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री जरूर कुछ पहल करेंगे। उसने बताया कि मैं अपने छोटे बच्चे को लेकर सीएम के पास गई थी।
मैंने बताया कि मेरे बच्चे की तबीयत खराब है, तो उन्होंने अपनी जेब से 1000 निकाल कर दवा के लिए दिया। यह उनका बड़प्पन है। मुझे उम्मीद है कि हमारी बस्ती की समस्या को वे जरूर दूर करेंगे।

  • अवैध कोयला व्यापारी रूंगटा ब्रदर्श का संक्षिप्त इतिहास
  • झारखंड के उपेक्षित शोषित जनता का शोषण कर बने अरबपति

अवैध कारोबार से रूंगटा ब्रदर्स बने अरबपति, रामगढ़ से बनारस तक साम्राज्य

कोल ब्लॉक आवंटन मामले में सजा पाए रूंगटा बंधुओं का रामगढ़ से गहरा नाता है। कोयला किंग के रूप में प्रसिद्ध चार भाइयों वाले रूंगटा ब्रदर्स 1972 में जब रामगढ़ पहुंचे, तो राजदूत मोटरसाइकिल से घूमा करते थे। कोयले की कालिख में रुपए की गर्माहट को इन्होंने जल्द ही भांप लिया।

बनारस उस समय कोयले की बड़ी मंडी बन चुका था। रूंगटा ब्रदर्स ने यहां का कोयला बनारस की मंडी तक पहुंचाना शुरू कर दिया। व्यवसाय के विस्तार को लेकर बड़े भाई नंदलाल बनारस ही शिफ्ट कर गए। मुगलसराय की काेयला मंडी में ट्रांसपोर्ट खोला। आरसी रूंगटा रामगढ़ से काेयला भेजने लगे और बनारस में नंदलाल उस कोयले को बेचने में लग गए।

आरसी रूंगटा 1975 के अंतराल में राजदूत बाइक से घूमा करते थे। कुजू मंडी से बनारस दो चार ट्रक कोयला भेजने का काम करते थे। धंधे की सभी बारीकियां सीख लेने के बाद लिंकेज के खेल में जुट गए। फर्जी फैक्ट्रियों के नाम पर कोयले का कागजात तैयार करवाते और फिर कोयले का अधिकांश अाॅफर खुद हथिया लेते थे। धीरे-धीरे इनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और कुजू में ट्रांसपोर्ट खोल लिया। वर्ष 2000 के बाद रूंगटा ब्रदर्स फैक्ट्रियां स्थापित करने लगे। आनंदिता स्पंज, आलाेक स्पंज, मां छिन्नमस्तिका स्पंज, झारखंड इस्पात, दुर्गा सीमेंट आदि कई फैक्ट्रियों के मालिक बन बैठे।

रूंगटा ब्रदर्स चार भाई हैं। सबसे बड़े नंदलाल रूंगटा, महावीर रूंगटा, राम स्वरूप रूंगटा व रामचंद्र रूंगटा हैं। बड़े भाई नंदलाल की हत्या बनारस में कर दी गई थी। बताया जाता है कि अवैध कोयले के लेन-देन को लेकर ही उनकी हत्या हुई थी। उनकी हत्या के बाद तीनों भाइयों ने कुछ समय तक सामूहिक कार्य करने के बाद आपस में धंधे का बंटवारा कर लिया।

चार भाई हैं। सबसे बड़े नंदलाल रूंगटा, महावीर रूंगटा, राम स्वरूप रूंगटा व रामचंद्र रूंगटा हैं। बड़े भाई नंदलाल की हत्या बनारस में कर दी गई थी। बताया जाता है कि अवैध कोयले के लेन-देन को लेकर ही उनकी हत्या हुई थी। उनकी हत्या के बाद तीनों भाइयों ने कुछ समय तक सामूहिक कार्य करने के बाद आपस में धंधे का बंटवारा कर लिया।

फैक्ट्रियों के नाम पर कोल लिंकेज के जरिए भी रूंगटा ब्रदर्स ने अच्छी खासी कमाई की। उस वक्त पूर्व सैनिकों को निर्धारित दर पर कोयला ढुलाई का काम दिया जाता था। कई पूर्व सैनिकों से संपर्क कर उन्हें मामूली रकम देकर उनके नाम से बड़े पैमाने पर कोयला ढोया। इस कार्य से भी रूंगटा ब्रदर्स ने खासी कमाई की।

रूंगटा ब्रदर्स पर रामगढ़ जिले के कई थानों में अवैध कोयले के धंधे से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। अवैध धंधा जब परवान चढ़ता है, तो ऊपर से प्रेशर भी आता है। उस स्थिति में पुलिस मामला तो दर्ज कर लेती है। चूंकि अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा पुलिस के पास भी पहुंचता है, इसलिए मामले पर गंभीर कार्रवाई नहीं होती। पूर्व में दैनिक भास्कर में प्रकाशित 30 मार्च 2016 रुंगटा बंधुओं की रिपोर्ट ।

पूर्व में कोयला घोटाला मामले में विशेष अदालत ने रूंगटा बार्डर्स के डायरेक्टर आरएस रूंगटा और आरसी रूंगटा को सुनाई थी चार वर्ष की सजा

कोयला घोटाला मामले में आज कोर्ट ने दोषी करार दिए गए जेआईपीएल के डायरेक्टर आरएस रूंगटा और आरसी रूंगटा को चार वर्ष कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा विशेष अदालत ने इन दोनों पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने सजा का एलान करते हुए आज झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड पर भी 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

जेआईपीएन के इन दोनों निदेशकों को कोर्ट ने 28 मार्च को हुई आखिरी सुनवाई के बाद दोषी करार दिया था। इसके बाद 31 मार्च को उन्हें सजा सुनाने का भी ऐलान किया था। लेकिन कोर्ट ने उस दिन फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीबीआई की तरफ से जेआईपीएएल और इसके दोनों डायरेक्टर्स आरएस रूंगटा व आरसी रूंगटा के खिलाफ सीबीआई ने अधिकतम सज़ा देने की मांग की है।

विशेष सीबीआई जज भरत पराशर के सामने बहस करते हुए सीबीआई के तरफ से कहा गया कि कोल ब्लॉक में दोषी जेआईपीएल और इसके दोनों डायरेक्टर्स ने जानबूझकर सुनियोजित तरीके से आर्थिक अपराध किए हैं। इसलिए ये अदालत से थोड़ी भी नरमी के हकदार नहीं है। सीबीआई ने इन्हें कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। पूर्व में दैनिक जागरण में 04 अप्रैल 2016 की प्रकाशित रिपोर्ट

(हि.स.)

हेमंत सोरेन का केंद्र को चुनौती, आरक्षण नहीं दिया तो हम कोयला, लोहा भी नहीं देंगे

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Prashant Kumar

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