रोहिंज्या शरणार्थियों के पंजीकरण के दौरान स्पष्ट प्रक्रिया का पालन हुआ – UNHCR

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा है कि दुनिया भर में, शरणार्थियों के पंजीकरण के दौरान एकत्र जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित किये जाने के लिये उसके पास स्पष्ट नीतियाँ हैं, और रोहिंज्या शरणार्थियों के पंजीकरण के दौरान उनका पालन किया गया. यूएन एजेंसी की ओर से यह बयान, उन ख़बरों के बाद आया है जिनमें बांग्लादेश में शरण लेने वाले रोहिंज्या शरणार्थियों के डेटा को उनकी सहमति के बग़ैर एकत्र व साझा किये जाने की बात कही गई है. 

रिपोर्टों के अनुसार, रोहिंज्या शरणार्थियों से जुड़ी जानकारी को बांग्लादेश सरकार के साथ साझा किया गया, जिसने बाद में डेटा को म्याँमार के साथ साझा किया.
मगर, यूएन एजेंसी ने ज़ोर देकर कहा है कि पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान शरणार्थियों को उनकी भाषा में जानकारी उपलब्ध कराई गई और ज़रूरी सहमति के बाद ही उनसे सम्बन्धित जानकारी को एकत्र व साझा किया गया. 

UNHCR News comment: Statement on refugee registration and data collection in Bangladeshhttps://t.co/4Dge1ssyYS— UNHCR in Bangladesh (@UNHCR_BGD) June 15, 2021

बांग्लादेश में इस समय आठ लाख 80 हज़ार से अधिक शरणार्थी विभिन्न शिविरों में रह रहे है.
शरणार्थियों को ज़रूरी सहायता और संरक्षा उपायों की सुलभता सुनिश्चित करने के लिये, उनका पंजीकरण किया जाना अहम है. 
इसके ज़रिये, विशिष्ट आवश्यकताओं व निर्बलताओं वाले शरणार्थियों की शिनाख़्त कर पाना और उपयुक्त सेवाओं व सहायता का उपलब्द करा पाना सम्भव हो पाता है. 
पंजीकरण की मदद से परिवारों को एक साथ रखना और एक दूसरे से अलग होने की स्थिति में उन्हें फिर से साथ लाने में मदद मिलती है. 
बड़ी संख्या में विस्थापित हुए लोगों की समस्याओं से निपटने में यह विशेष रूप से सहायक है.
सहमति पत्र
जनवरी 2018 में बांग्लादेश सरकार और यूएन शरणार्थी एजेंसी ने शरणार्थियों के डेटा के आदान प्रदान के लिये, एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये थे. 
इसके बाद, संयुक्त रूप से रोहिंज्या शरणार्थियों के लिये पंजीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और सम्भावित जोखिमों से निपटने के लिये उपाय भी किये गए.
इन उपायों के तहत, निजी डेटा के नष्ट हो जाने, किसी दुर्घटना के परिणामस्वरूप खो जाने, अनधिकृत ढंग से इस्तेमाल किये जाने या बदलने का प्रावधान है. 
यूएन एजेंसी के मुताबिक हर शरणार्थी परिवार को साझा पंजीकरण प्रक्रिया के उद्देश्य को समझाया गया, जिसका लक्ष्य संरक्षा प्रदान करना, दस्तावेज़ीकरण करना और रोहिंज्या शरणार्थियों को मदद उपलब्ध कराना था.
यूएन एजेंसी का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान, सभी शरणार्थियों को उनकी भाषा में जानकारी दी गई और सहायता सेवाओं के लिये, उनके डेटा को साझीदार संगठनों के साथ साझा किये जाने के सम्बन्ध में उनकी सहमति ली गई.
इसके समानान्तर, इस प्रक्रिया का इस्तेमाल यह साबित करने के लिये भी किया गया कि रोहिंज्या शरणार्थियों का पूर्व निवास स्थान म्याँमार में है और उनके पास वहाँ लौटने का अधिकार है. 
शरणार्थियों की ‘अनुमति’
इस क्रम में रोहिंज्या शरणार्थियों से, उनकी जानकारी को म्याँमार सरकार के साथ साझा किये जाने के लिये भी अनुमति ली गई. 
शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक, शरणार्थियों को यह स्पष्ट कर दिया गया था कि दोनों प्रक्रियाएँ एक दूसरे से सम्बद्ध नहीं है और जानकारी साझा की अनुमति ना देने से, सेवाएँ व मदद प्रभावित नहीं होंगी. 
जिन शरणार्थी परिवारों ने अपने डेटा को, म्याँमार सरकार के साथ साझा करने की अनुमति नहीं दी, उनका पंजीकरण किया गया और उनके लिये सेवाओं की उपलब्धता या पात्रता पर कोई असर नहीं हुआ. 
UNHCR ने ज़ोर देकर कहा कि म्याँमार वापिस लौटने का फ़ैसला, परिस्थितियों के अनुसार, शरणार्थियों द्वारा निजी और स्वैच्छिक रूप से लिया गया फ़ैसला होगा.
एजेंसी के मुताबिक बहुत से शरणार्थियों ने वापिस लौटने की इच्छा ज़ाहिर की है और सुरक्षित व अनुकूल माहौल में वापसी के लिये यूएन एजेंसी उनकी मदद करेगी, मगर फ़िलहाल इसके लिये उचित परिस्थितियाँ नहीं हैं. , संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा है कि दुनिया भर में, शरणार्थियों के पंजीकरण के दौरान एकत्र जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित किये जाने के लिये उसके पास स्पष्ट नीतियाँ हैं, और रोहिंज्या शरणार्थियों के पंजीकरण के दौरान उनका पालन किया गया. यूएन एजेंसी की ओर से यह बयान, उन ख़बरों के बाद आया है जिनमें बांग्लादेश में शरण लेने वाले रोहिंज्या शरणार्थियों के डेटा को उनकी सहमति के बग़ैर एकत्र व साझा किये जाने की बात कही गई है. 

रिपोर्टों के अनुसार, रोहिंज्या शरणार्थियों से जुड़ी जानकारी को बांग्लादेश सरकार के साथ साझा किया गया, जिसने बाद में डेटा को म्याँमार के साथ साझा किया.

मगर, यूएन एजेंसी ने ज़ोर देकर कहा है कि पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान शरणार्थियों को उनकी भाषा में जानकारी उपलब्ध कराई गई और ज़रूरी सहमति के बाद ही उनसे सम्बन्धित जानकारी को एकत्र व साझा किया गया. 

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— UNHCR in Bangladesh (@UNHCR_BGD) June 15, 2021

बांग्लादेश में इस समय आठ लाख 80 हज़ार से अधिक शरणार्थी विभिन्न शिविरों में रह रहे है.

शरणार्थियों को ज़रूरी सहायता और संरक्षा उपायों की सुलभता सुनिश्चित करने के लिये, उनका पंजीकरण किया जाना अहम है. 

इसके ज़रिये, विशिष्ट आवश्यकताओं व निर्बलताओं वाले शरणार्थियों की शिनाख़्त कर पाना और उपयुक्त सेवाओं व सहायता का उपलब्द करा पाना सम्भव हो पाता है. 

पंजीकरण की मदद से परिवारों को एक साथ रखना और एक दूसरे से अलग होने की स्थिति में उन्हें फिर से साथ लाने में मदद मिलती है. 

बड़ी संख्या में विस्थापित हुए लोगों की समस्याओं से निपटने में यह विशेष रूप से सहायक है.

सहमति पत्र

जनवरी 2018 में बांग्लादेश सरकार और यूएन शरणार्थी एजेंसी ने शरणार्थियों के डेटा के आदान प्रदान के लिये, एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये थे. 

इसके बाद, संयुक्त रूप से रोहिंज्या शरणार्थियों के लिये पंजीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और सम्भावित जोखिमों से निपटने के लिये उपाय भी किये गए.

इन उपायों के तहत, निजी डेटा के नष्ट हो जाने, किसी दुर्घटना के परिणामस्वरूप खो जाने, अनधिकृत ढंग से इस्तेमाल किये जाने या बदलने का प्रावधान है. 

यूएन एजेंसी के मुताबिक हर शरणार्थी परिवार को साझा पंजीकरण प्रक्रिया के उद्देश्य को समझाया गया, जिसका लक्ष्य संरक्षा प्रदान करना, दस्तावेज़ीकरण करना और रोहिंज्या शरणार्थियों को मदद उपलब्ध कराना था.

यूएन एजेंसी का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान, सभी शरणार्थियों को उनकी भाषा में जानकारी दी गई और सहायता सेवाओं के लिये, उनके डेटा को साझीदार संगठनों के साथ साझा किये जाने के सम्बन्ध में उनकी सहमति ली गई.

इसके समानान्तर, इस प्रक्रिया का इस्तेमाल यह साबित करने के लिये भी किया गया कि रोहिंज्या शरणार्थियों का पूर्व निवास स्थान म्याँमार में है और उनके पास वहाँ लौटने का अधिकार है. 

शरणार्थियों की ‘अनुमति’

इस क्रम में रोहिंज्या शरणार्थियों से, उनकी जानकारी को म्याँमार सरकार के साथ साझा किये जाने के लिये भी अनुमति ली गई. 

शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक, शरणार्थियों को यह स्पष्ट कर दिया गया था कि दोनों प्रक्रियाएँ एक दूसरे से सम्बद्ध नहीं है और जानकारी साझा की अनुमति ना देने से, सेवाएँ व मदद प्रभावित नहीं होंगी. 

जिन शरणार्थी परिवारों ने अपने डेटा को, म्याँमार सरकार के साथ साझा करने की अनुमति नहीं दी, उनका पंजीकरण किया गया और उनके लिये सेवाओं की उपलब्धता या पात्रता पर कोई असर नहीं हुआ. 

UNHCR ने ज़ोर देकर कहा कि म्याँमार वापिस लौटने का फ़ैसला, परिस्थितियों के अनुसार, शरणार्थियों द्वारा निजी और स्वैच्छिक रूप से लिया गया फ़ैसला होगा.

एजेंसी के मुताबिक बहुत से शरणार्थियों ने वापिस लौटने की इच्छा ज़ाहिर की है और सुरक्षित व अनुकूल माहौल में वापसी के लिये यूएन एजेंसी उनकी मदद करेगी, मगर फ़िलहाल इसके लिये उचित परिस्थितियाँ नहीं हैं. 

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