लीबिया में शान्ति की दिशा में ठोस प्रगति, महिलाओं की भूमिका अहम

दशकों की राजनैतिक अस्थिरता और हिंसक संघर्ष के बाद लीबिया शान्ति पथ की ओर क़दम बढ़ा रहा है और इस प्रक्रिया में अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी भूमिका निभानी होगी. यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास इन्टरव्यू में लीबिया में यूएन महासचिव की कार्यवाहक विशेष प्रतिनिधि ने राष्ट्रीय सहमति वाली सरकार और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच हाल ही में ट्यूनीशिया में पहले दौर की वार्ता की सराहना की है.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के फलस्वरूप लीबिया में युद्धरत पक्षों में एक ऐतिहासिक युद्धविराम समझौते पर सहमति बनी थी.   
लीबिया में यूएन मिशन प्रमुख स्टेफ़नी विलियम्स ने यूएन न्यूज़ (अरबी) की मे याकूब को बताया कि लीबिया में ज़मीनी स्तर पर शान्ति है और युद्धविराम समझौते का व्यापक तौर पर स्वागत किया गया है. 
लीबियावासियों के लिये अपने सैन्य अधिकारियों को राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी निभाते और राजनैतिक प्रक्रिया की शुरुआत के लिये रास्ता तैयार करते हुए देखना सुकून भरा अनुभव था.
लीबिया में राजनैतिक सम्वाद के पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद विशेष प्रतिनिधि ने बताया कि दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी चल रही है. ट्यूनीशिया में हुई वार्ता में 75 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया जिनमें से अनेक वर्ष 2011 के बाद पहली बार साथ आये थे. 
“कुछ बेहद गहनता भरे दिन थे, और बातचीत बड़ी लम्बी खिंची. उन्होंने बहुत कुछ हासिल किया है और 24 दिसम्बर 2021 को राष्ट्रीय चुनाव कराने का निर्णय लिया है जोकि लीबिया की स्वाधीनता की 70वीं वर्षगाँठ है.”
इन चुनावों को आयोजित कराने में लीबिया में यूएन मिशन उच्चतर राष्ट्रीय चुनाव आयोग को ज़रूरी सहायता मुहैया करायेगा और राष्ट्रीय समझौते वाली सरकार के साथ मिलकर चुनावों के धनराशि का इन्तज़ाम किया जायेगा.
महिलाओं का योगदान
मिशन प्रमुख ने ख़ुशी जताई कि 75 प्रतिनिधियों में महिला प्रतिभागी ने भी अहम भूमिका निभाई. उन्होंने एक समूह के तौर पर राजनैतिक प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को बेहतर बनाने क लिये सिलसिलेवार सिफ़ारिशें भी पेश की हैं.
महिला प्रतिनिधियों की माँग है कि नेतृत्व के पदों और कार्यकारी प्रशासन में महिलाओं की कम से कम 30 फ़ीसदी हिस्सेदारी रखनी होगी. यह दर्शाता है कि महिलाएँ राजनैतिक सम्वाद में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं.

OCHA/Giles Clarkeलीबिया के बेनग़ाज़ी शहर में ध्वस्त इमारतों के मलबे के बीच से गुज़रते बच्चे.

राजनैतिक सम्वाद में महिलाओं की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिये यूएन मिशन ने भी प्रयास किये हैं और उन्हें आर्थिक सम्वाद में भी शामिल किया गया है.
इसके अतिरिक्त लैंगिक मुद्दों व उनके समावेशन को ध्यान में रखकर लीबिया संसद में क़ानून तैयार किये जाने पर काम चल रहा है जिससे महिला उम्मीदवारों के आगे आने और संसदीय, स्थानीय और निकाय चुनाव लड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा ताकि सरकार के हर स्तर पर लोग अपने प्रतिनिधि को चुन सकें. 
स्टेफ़नी विलियम्स के मुताबिक शान्तिनिर्माण प्रक्रियाओं के दौरान महिलाओं को वार्ता की मेज़ पर विशेष रूप से मददगार है क्योंकि वे शान्तिवार्ताओं में अहम भूमिका निभाती हैं.   
लीबियाई आवाम के लिये सन्देश
कार्यवाहक विशेष प्रतिनिधि ने लीबियाई नागरिकों के नाम एक सन्देश जारी करते हुए कहा देश एक नये पड़ाव पर पहुँच गया है जहाँ सालों से पनप रही हताशा, गतिरोध और बदतर होते हालात का अन्त किया जा सकता है. 
उन्होंने लीबियाई नागरिकों से झूठी ख़बरों और अफ़वाहों पर ध्यान ना देने की अपील करते हुए कहा है कि लड़ाई से पीड़ा का शिकार उन्हें ही होना पड़ता है और इसलिये अपने भविष्य के लिये निर्णय भी उन्हें ख़ुद लेना होगा. 
स्टेफ़नी विलियम्स ने भरोसा दिलाया कि इस प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र तब तक उनके साथ है जब तक स्थानीय जनता को देश की पूर्ण सम्प्रभुता हासिल नहीं हो जाती.
कार्यवाहक विशेष प्रतिनिधि का मानना है कि पिछले दो महीनों में हुई प्रगति को आगे भी जारी रखने के लिये राजनैतिक स्तर पर प्रतिबद्धता है.
लेकिन उन्होंने माना कि यह आशा भी नहीं की जानी चाहिये कि एक सप्ताह की वार्ता के बाद सभी समस्याओं को सुलझा लिया जायेगा.
ट्यूनिस को उन्होंने एक ठोस उपलब्धि बताते हुए कहा है कि युद्धविराम समझौता और लीबियाई नागरिकों का एक साथ आने के लिये तैयार होना अच्छा संकेत है.
उन्होंने कहा कि सालों के दमन और हिंसा के बाद लोग अब शान्ति, चुनाव और अपनी संस्थाओं में एकता चाहते हैं और इस यात्रा में अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को लीबियाई नागरिकों का साथ देना होगा.
इस सम्बन्ध में स्टेफ़नी विलियम्स ने सुरक्षा परिषद और बर्लिन प्रक्रिया के प्रतिभागियों से मिले समर्थन को रेखांकित किया है. , दशकों की राजनैतिक अस्थिरता और हिंसक संघर्ष के बाद लीबिया शान्ति पथ की ओर क़दम बढ़ा रहा है और इस प्रक्रिया में अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी भूमिका निभानी होगी. यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास इन्टरव्यू में लीबिया में यूएन महासचिव की कार्यवाहक विशेष प्रतिनिधि ने राष्ट्रीय सहमति वाली सरकार और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच हाल ही में ट्यूनीशिया में पहले दौर की वार्ता की सराहना की है.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के फलस्वरूप लीबिया में युद्धरत पक्षों में एक ऐतिहासिक युद्धविराम समझौते पर सहमति बनी थी.

लीबिया में यूएन मिशन प्रमुख स्टेफ़नी विलियम्स ने यूएन न्यूज़ (अरबी) की मे याकूब को बताया कि लीबिया में ज़मीनी स्तर पर शान्ति है और युद्धविराम समझौते का व्यापक तौर पर स्वागत किया गया है.

लीबियावासियों के लिये अपने सैन्य अधिकारियों को राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी निभाते और राजनैतिक प्रक्रिया की शुरुआत के लिये रास्ता तैयार करते हुए देखना सुकून भरा अनुभव था.

लीबिया में राजनैतिक सम्वाद के पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद विशेष प्रतिनिधि ने बताया कि दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी चल रही है. ट्यूनीशिया में हुई वार्ता में 75 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया जिनमें से अनेक वर्ष 2011 के बाद पहली बार साथ आये थे.

“कुछ बेहद गहनता भरे दिन थे, और बातचीत बड़ी लम्बी खिंची. उन्होंने बहुत कुछ हासिल किया है और 24 दिसम्बर 2021 को राष्ट्रीय चुनाव कराने का निर्णय लिया है जोकि लीबिया की स्वाधीनता की 70वीं वर्षगाँठ है.”

इन चुनावों को आयोजित कराने में लीबिया में यूएन मिशन उच्चतर राष्ट्रीय चुनाव आयोग को ज़रूरी सहायता मुहैया करायेगा और राष्ट्रीय समझौते वाली सरकार के साथ मिलकर चुनावों के धनराशि का इन्तज़ाम किया जायेगा.

महिलाओं का योगदान

मिशन प्रमुख ने ख़ुशी जताई कि 75 प्रतिनिधियों में महिला प्रतिभागी ने भी अहम भूमिका निभाई. उन्होंने एक समूह के तौर पर राजनैतिक प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को बेहतर बनाने क लिये सिलसिलेवार सिफ़ारिशें भी पेश की हैं.

महिला प्रतिनिधियों की माँग है कि नेतृत्व के पदों और कार्यकारी प्रशासन में महिलाओं की कम से कम 30 फ़ीसदी हिस्सेदारी रखनी होगी. यह दर्शाता है कि महिलाएँ राजनैतिक सम्वाद में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं.


OCHA/Giles Clarke
लीबिया के बेनग़ाज़ी शहर में ध्वस्त इमारतों के मलबे के बीच से गुज़रते बच्चे.

राजनैतिक सम्वाद में महिलाओं की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिये यूएन मिशन ने भी प्रयास किये हैं और उन्हें आर्थिक सम्वाद में भी शामिल किया गया है.

इसके अतिरिक्त लैंगिक मुद्दों व उनके समावेशन को ध्यान में रखकर लीबिया संसद में क़ानून तैयार किये जाने पर काम चल रहा है जिससे महिला उम्मीदवारों के आगे आने और संसदीय, स्थानीय और निकाय चुनाव लड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा ताकि सरकार के हर स्तर पर लोग अपने प्रतिनिधि को चुन सकें.

स्टेफ़नी विलियम्स के मुताबिक शान्तिनिर्माण प्रक्रियाओं के दौरान महिलाओं को वार्ता की मेज़ पर विशेष रूप से मददगार है क्योंकि वे शान्तिवार्ताओं में अहम भूमिका निभाती हैं.

लीबियाई आवाम के लिये सन्देश

कार्यवाहक विशेष प्रतिनिधि ने लीबियाई नागरिकों के नाम एक सन्देश जारी करते हुए कहा देश एक नये पड़ाव पर पहुँच गया है जहाँ सालों से पनप रही हताशा, गतिरोध और बदतर होते हालात का अन्त किया जा सकता है.

उन्होंने लीबियाई नागरिकों से झूठी ख़बरों और अफ़वाहों पर ध्यान ना देने की अपील करते हुए कहा है कि लड़ाई से पीड़ा का शिकार उन्हें ही होना पड़ता है और इसलिये अपने भविष्य के लिये निर्णय भी उन्हें ख़ुद लेना होगा.

स्टेफ़नी विलियम्स ने भरोसा दिलाया कि इस प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र तब तक उनके साथ है जब तक स्थानीय जनता को देश की पूर्ण सम्प्रभुता हासिल नहीं हो जाती.

कार्यवाहक विशेष प्रतिनिधि का मानना है कि पिछले दो महीनों में हुई प्रगति को आगे भी जारी रखने के लिये राजनैतिक स्तर पर प्रतिबद्धता है.

लेकिन उन्होंने माना कि यह आशा भी नहीं की जानी चाहिये कि एक सप्ताह की वार्ता के बाद सभी समस्याओं को सुलझा लिया जायेगा.

ट्यूनिस को उन्होंने एक ठोस उपलब्धि बताते हुए कहा है कि युद्धविराम समझौता और लीबियाई नागरिकों का एक साथ आने के लिये तैयार होना अच्छा संकेत है.
उन्होंने कहा कि सालों के दमन और हिंसा के बाद लोग अब शान्ति, चुनाव और अपनी संस्थाओं में एकता चाहते हैं और इस यात्रा में अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को लीबियाई नागरिकों का साथ देना होगा.

इस सम्बन्ध में स्टेफ़नी विलियम्स ने सुरक्षा परिषद और बर्लिन प्रक्रिया के प्रतिभागियों से मिले समर्थन को रेखांकित किया है.

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