लीबिया: सुरक्षित व समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर, मगर चुनौतियाँ बरक़रार

लीबिया में संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अधिकारी ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद को देश में मौजूदा हालात से अवगत कराते हुए कहा है कि वर्षों की राजनैतिक अस्थिरता और हिंसक संघर्ष के बाद देश शान्ति पथ पर ठोस प्रगति की ओर अग्रसर है.

यूएन महासचिव की कार्यवाहक विशेष प्रतिनिधि और लीबिया में यूएन मिशन की प्रमुख स्टेफ़नी विलियम्स ने हाल की घटनाओं का ब्यौरा देते हुए बताया कि अक्टूबर में राष्ट्रव्यापी युद्धविराम पर सहमति बनी और पिछले सप्ताह पड़ोसी देश ट्यूनीशिया में हुई एक बैठक के ज़रिये राजनैतिक सम्वाद शुरू हुआ है.  

Remarks by Acting Special Representative of the Secretary-General for #Libya Stephanie Williams to the Security Council19 November 2020 https://t.co/lh4owyqwnp— UNSMIL (@UNSMILibya) November 19, 2020

विशेष प्रतिनिधि विलियम्स ने गुरुवार को वीडियो लिंक के ज़रिये सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा, “कई वर्षों से जारी दमन, विभाजन, अराजकता, पीड़ा और हिंसक संघर्ष के बाद, लीबियाई नागरिक, अपने देश, अपने बच्चों और नाती-पोतों की भलाई के लिये एक साथ आ रहे हैं, ताकि लीबिया के लिये नए भविष्य के रास्ते पर आगे बढ़ा जा सके.”
उन्होंने कहा कि यह देश की एकता की रक्षा करने और उसकी सम्प्रभुता को फिर से पुष्ट करने का एक अवसर है. 
स्टेफ़नी विलियम्स ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि 23 अक्टूबर को जिनीवा में युद्धरत पक्षों के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ.
संयुक्त सैन्य कमीशन में पश्चिमी हिस्से पर नियन्त्रण वाली अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार और पूर्व के इलाक़ों पर नियन्त्रण वाली लीबियाई नेशनल आर्मी के प्रतिनिधि शामिल हुए.
इस बैठक में दोनों पक्षों ने महासचिव गुटेरेश की युद्धविराम की अपील के अनुरूप अपने मतभेदों को दूर करते हुए देशभक्ति की भावना का परिचय दिया. 
इस समझौते के तहत अग्रिम मोर्चों से सभी सैन्य बलों व हथियारबन्द गुटों की वापसी पर सहमति हुई है. इसके अलावा 90 दिनों के भीतर भाड़े के सैनिकों और विदेशी लड़ाकों को लीबिया छोड़कर जाना होगा. 
बताया गया है कि युद्धविराम का पालन किया जा रहा है और इस बीच यूएन मिशन ने दोनों पक्षों के बीच सम्वाद को सम्भव बनाया है. 
संयुक्त सैन्य कमीशन ने युद्धविराम की निगरानी के लिये शर्तें व प्रक्रियात्मक ढाँचा तैयार किया है और परिवहन व यात्राओं के लिये एक तटीय सड़क खोली गई है. साथ ही बन्दियों की अदला-बदली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है.
चुनावों का रास्ता
लीबिया में, महीनों से चली आ रही नाकेबन्दी हटने के बाद अब फिर से तेल उत्पादन शुरू किया गया है. इसके अतिरिक्त देश में पैट्रोलियम केन्द्रों को एकजुट व फिर से संगठित करने की परियोजना पर भी काम चल रहा है. 
विशेष प्रतिनिधि ने पिछले सप्ताह ट्यूनीशिया में सभी पक्षों की बैठक बुलाई थी जिससे राजनैतिक सम्वाद की शुरुआत हुई. 
इस वार्ता में 75 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया जिनमें 16 महिलाएँ थी. इस बैठक के फलस्वरूप एक राजनैतिक रोडमैप पर सहमति बनी है जिसके तहत 24 दिसम्बर 20201 को देश में चुनाव कराए जाएँगे जोकि लीबिया की स्वाधानीता की 70वीं वर्षगाँठ भी है. 
लेकिन देश में यूएन की शीर्ष अधिकारी ने सचेत किया है कि हालात अब भी नाज़ुक हैं और यह बेफ़िक्र होने का समय नहीं है. 
संयुक्त सैन्य कमीशन युद्धविराम समझौते को लागू करने के लिये प्रयासरत है लेकिन अभी पक्षों ने अपने सुरक्षा बल पीछे नहीं हटाए हैं. 
इसके अतिरिक्त तेल राजस्व के वितरण का प्रबन्ध भी राजनैतिक पथ पर होने वाली प्रगति पर निर्भर करता है.
यूएन मिशन प्रमुख ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से दोनों पक्षों के बीच हुए समझौतों का पूर्ण सम्मान किये जाने और उन्हें समर्थन देने का आग्रह किया है. , लीबिया में संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अधिकारी ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद को देश में मौजूदा हालात से अवगत कराते हुए कहा है कि वर्षों की राजनैतिक अस्थिरता और हिंसक संघर्ष के बाद देश शान्ति पथ पर ठोस प्रगति की ओर अग्रसर है.

यूएन महासचिव की कार्यवाहक विशेष प्रतिनिधि और लीबिया में यूएन मिशन की प्रमुख स्टेफ़नी विलियम्स ने हाल की घटनाओं का ब्यौरा देते हुए बताया कि अक्टूबर में राष्ट्रव्यापी युद्धविराम पर सहमति बनी और पिछले सप्ताह पड़ोसी देश ट्यूनीशिया में हुई एक बैठक के ज़रिये राजनैतिक सम्वाद शुरू हुआ है.  

विशेष प्रतिनिधि विलियम्स ने गुरुवार को वीडियो लिंक के ज़रिये सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा, “कई वर्षों से जारी दमन, विभाजन, अराजकता, पीड़ा और हिंसक संघर्ष के बाद, लीबियाई नागरिक, अपने देश, अपने बच्चों और नाती-पोतों की भलाई के लिये एक साथ आ रहे हैं, ताकि लीबिया के लिये नए भविष्य के रास्ते पर आगे बढ़ा जा सके.”

उन्होंने कहा कि यह देश की एकता की रक्षा करने और उसकी सम्प्रभुता को फिर से पुष्ट करने का एक अवसर है. 

स्टेफ़नी विलियम्स ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि 23 अक्टूबर को जिनीवा में युद्धरत पक्षों के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ.

संयुक्त सैन्य कमीशन में पश्चिमी हिस्से पर नियन्त्रण वाली अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार और पूर्व के इलाक़ों पर नियन्त्रण वाली लीबियाई नेशनल आर्मी के प्रतिनिधि शामिल हुए.

इस बैठक में दोनों पक्षों ने महासचिव गुटेरेश की युद्धविराम की अपील के अनुरूप अपने मतभेदों को दूर करते हुए देशभक्ति की भावना का परिचय दिया. 

इस समझौते के तहत अग्रिम मोर्चों से सभी सैन्य बलों व हथियारबन्द गुटों की वापसी पर सहमति हुई है. इसके अलावा 90 दिनों के भीतर भाड़े के सैनिकों और विदेशी लड़ाकों को लीबिया छोड़कर जाना होगा. 

बताया गया है कि युद्धविराम का पालन किया जा रहा है और इस बीच यूएन मिशन ने दोनों पक्षों के बीच सम्वाद को सम्भव बनाया है. 

संयुक्त सैन्य कमीशन ने युद्धविराम की निगरानी के लिये शर्तें व प्रक्रियात्मक ढाँचा तैयार किया है और परिवहन व यात्राओं के लिये एक तटीय सड़क खोली गई है. साथ ही बन्दियों की अदला-बदली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है.

चुनावों का रास्ता

लीबिया में, महीनों से चली आ रही नाकेबन्दी हटने के बाद अब फिर से तेल उत्पादन शुरू किया गया है. इसके अतिरिक्त देश में पैट्रोलियम केन्द्रों को एकजुट व फिर से संगठित करने की परियोजना पर भी काम चल रहा है. 

विशेष प्रतिनिधि ने पिछले सप्ताह ट्यूनीशिया में सभी पक्षों की बैठक बुलाई थी जिससे राजनैतिक सम्वाद की शुरुआत हुई. 

इस वार्ता में 75 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया जिनमें 16 महिलाएँ थी. इस बैठक के फलस्वरूप एक राजनैतिक रोडमैप पर सहमति बनी है जिसके तहत 24 दिसम्बर 20201 को देश में चुनाव कराए जाएँगे जोकि लीबिया की स्वाधानीता की 70वीं वर्षगाँठ भी है. 

लेकिन देश में यूएन की शीर्ष अधिकारी ने सचेत किया है कि हालात अब भी नाज़ुक हैं और यह बेफ़िक्र होने का समय नहीं है. 

संयुक्त सैन्य कमीशन युद्धविराम समझौते को लागू करने के लिये प्रयासरत है लेकिन अभी पक्षों ने अपने सुरक्षा बल पीछे नहीं हटाए हैं. 

इसके अतिरिक्त तेल राजस्व के वितरण का प्रबन्ध भी राजनैतिक पथ पर होने वाली प्रगति पर निर्भर करता है.

यूएन मिशन प्रमुख ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से दोनों पक्षों के बीच हुए समझौतों का पूर्ण सम्मान किये जाने और उन्हें समर्थन देने का आग्रह किया है. 

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