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वकीलों के बीच तीखी बहस के बाद फैसल फारुख की जमानत पर लगी रोक हटी

July 02
20:12 2020
Delhi High court

नई दिल्ली, 02 जुलाई । दिल्ली हाई कोर्ट में आज फिर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों से जुड़े शिव विहार के राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारुख को मिली जमानत के खिलाफ दिल्ली पुलिस की याचिका सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील और केंद्र सरकार के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई। उसके बाद जस्टिस सुरेश कैत की बेंच ने फैसल फारुख की जमानत पर लगी रोक हटा दिया है। कोर्ट ने दिल्ली केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वो पुलिस का प्रतिनिधित्व कौन करेगा इसे लेकर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करें। मामले पर अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।

आज सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से एएसजी अमन लेखी ने कहा कि उप-राज्यपाल ने उन्हें पेश होने की स्वीकृति दी है। कोर्ट ने पूछा कि स्वीकृति का पत्र कहां है तब लेखी ने कहा कि वो फाइल में है। कोर्ट ने पूछा कि राहुल मेहरा कह रहे हैं कि यह फैसला बिना दिल्ली सरकार के मंत्रिपरिषद की सलाह के लिया गया है। इसे लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहले फैसला भी कर चुका है। तब लेखी ने कहा कि कोर्ट को सही सूचना नहीं दी गई है। अमन लेखी ने कहा कि 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार नहीं बनाया जा सकता है क्योंकि उसमें लॉ अफसर की नियुक्ति पर कोई बात नहीं है। उस फैसले में ट्रायल चलाने को लेकर फैसला दिया गया है जबकि ये मामला जमानत निरस्त करने का है। उन्होंने कहा कि अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 432 के तहत केंद्र को उन मामलों में अपनी पसंद का वकील चुनने का अधिकार है जिसमें उसके हित जुड़े हुए हैं।
लेखी की दलील का विरोध करते हुए दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि 2019 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले को भी कवर करता है। उन्होंने कहा कि 2018 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला और 2019 का डिवीजन बेंच का फैसला साफ कहता है कि उप-राज्यपाल को दिल्ली सरकार के मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना वकील नियुक्त करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ताकत अधिकार नहीं हो सकता है। मेहरा ने कहा कि अगर केंद्र की दलील को स्वीकार किया जाता है तो पूरी अपराध प्रक्रिया संहिता का कोई मतलब नहीं रह जाएगा और संघीय ढांचा तबाह हो जाएगा। मेहरा ने कहा कि लेखी को ये हलफनामा देना चाहिए कि दिल्ली दंगों के मामलों में केंद्र सरकार का कौन सा हित जुड़ा हुआ है।
पिछले 1 जुलाई को केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील को निर्देश दिया कि वो उप-राज्यपाल का वह पत्र लाएं कि कौन दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व करेगा। पिछले 23 जून को हाई कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की याचिका पर फैसल फारुख को जवाब देने के लिए समय दिया था। फैसल फारुख की ओर से पेश वकील रमेश गुप्ता ने कहा था कि फैसल फारुख को कल यानि 22 जून को हिंसा के एक दूसरे मामले में हिरासत में ले लिया गया है। रमेश गुप्ता ने पुलिस की ओर से दायर याचिका पर जवाब देने के लिए समय की मांग की । जिसके बाद कोर्ट ने 1 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
दिल्ली पुलिस की ओर से एएसजी अमन लेखी ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट की ओर से जमानत देने का फैसला सही नहीं है। इसलिए उस आदेश को निरस्त किया जाना चाहिए। पिछले 22 जून को कोर्ट ने फैसल फारुख को नोटिस जारी किया था। सुनवाई के दौरान जब दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए थे तो दिल्ली पुलिस की क्राईम की ओर से हमेशा पेश होने वाले वकील राहुल मेहरा ने उनका विरोध किया था। इसके बाद तुषार मेहता ने इस केस से अपना नाम वापस ले लिया। उसके बाद एएसजी अमन लेखी और स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर अमित चड्ढा पेश हुए और इस मामले पर सुनवाई स्थगित करने की मांग की ताकि दिल्ली पुलिस की ओर से कौन पेश हो ये मामला सुलझाया जा सके।
पिछले 20 जून को कड़कड़डूमा कोर्ट ने फैसल फारुख को जमानत दे दिया था। एडिशनल सेशंस जज विनोद यादव ने फैसल को जमानत देते हुए कहा था कि चार्जशीट से ये कहीं प्रमाणित नहीं होता है कि आरोपी के पोपुलर फ्रंट, पिंजरा तोड़ या दूसरे मुस्लिम धर्मगुरुओं के संपर्क में था। कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया ये कहीं से प्रमाणित नहीं होता है कि आरोपी घटना के वक्त घटनास्थल पर मौजूद था। कोर्ट ने कहा था कि गवाहों के बयानों में काफी विरोधाभास है। जांच अधिकारी ने इस मामले में पूरक चार्जशीट दाखिल करने की कोशिश की है ताकि कमियों को छिपाया जा सके। कोर्ट ने कहा था कि गवाह का पहला बयान 8 मार्च को दर्ज किया गया था। उस बयान में उसने कहा था कि उसने फैसल को घटना वाले दिन राजधानी स्कूल के गेट पर दिन में डेढ़ बजे के करीब देखा था।
पिछले 3 जून को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फैसल फारुख के खिलाफ कड़कड़डूमा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया था। चार्जशीट में दंगा फैलाने, आपराधिक साजिश, डकैती, समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने और आर्म्स ऐक्ट की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। चार्जशीट में फारुख के खिलाफ स्कूल और स्कूल के आसपास दंगे का साजिश रचने और उसे भड़काने का आरोप लगाया गया है। चार्जशीट में कहा गया है कि फारुख के निर्देश पर ही भीड़ ने राजधानी स्कूल के बगल वाले और विरोधी डीआरपी स्कूल के अलावा अनिल स्वीट्स के पार्किंग स्थल को जानबूझकर नष्ट किया गया। इस तथ्य के समर्थन में डीआरपी स्कूल के गार्ड के अलावा खुद राजधानी स्कूल के गार्ड ने भी अपने बयान दर्ज कराए हैं।

(हि.स.)

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Bhusan kumar

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