वर्ष 2026 तक लैंगिक समानता की रफ़्तार तेज़ करने के लिये अहम संकल्प

पेरिस में ऐतिहासिक पीढ़ी समानता फ़ोरम शुक्रवार को, संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था – यूएन वीमैन की अध्यक्षा की इस घोषणा के साथ सम्पन्न हुआ कि जब पुरुष किसी कमरे के भीतर बैठकर शान्ति वार्ताएँ करते हैं तो महिलाएँ भी वहीं नज़दीक गलियारों में बैठी होती हैं. लैंगिक विषमताओं और अन्य तरह के अन्यायों से निपटने का संकल्प भी, इस फ़ोरम में लिया गया.

अगले पाँच वर्षों के दौरान यानि वर्ष 2026 तक लैंगिक समानता सही मायनों में बढ़ाने के लिये, इस फ़ोरम में, सरकारों, सिविल सोसायटी और अन्य क्षेत्रों से महत्वाकाँक्षी योजनाएँ और कार्यक्रमों के लिये संकल्प और लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश के वादे किये गए हैं.

“We can only get better from here. I am most grateful for the support we’ve received from everyone who have contributed.” – ED, @phumzileunwomen at the Closing Ceremony of the #GenerationEquality Forum in Paris.#ActForEqual recap: https://t.co/DiEpeeGSuT pic.twitter.com/symEw2m8UT— UN Women (@UN_Women) July 2, 2021

यूएन वीमैन संस्था की कार्यकारी निदेशक पुमज़िले म्लाम्बो-न्गुका ने कहा, “पीढ़ी समानता फ़ोरम में, सत्ता और नज़रिये में एक ऐतिहासिक बदलाव दर्ज किया गया है.”
ये फ़ोरम एक ऐसे महत्वपूर्ण दौर में आयोजित किया गया जब पूरी दुनिया, महिलाओं और लड़कियों पर कोविड-19 महामारी के ग़ैर-आनुपातिक और भीषण तबाही वाले प्रभाव का आकलन कर रही है.
लैंगिक समानता के पैरोकारों ने इस फ़ोरम को, लैंगिक समानता को ध्यान में रखने वाले ऐसी पुनर्बहाली योजनाओं पर ज़ोर देने के लिये एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया जिनमें महिलाओं और लड़कियों को पुनर्बहाली उपायों में पीछे ना छोड़ दिया जाए.
समयबद्ध प्रतिबद्धताएँ
महिलाओं के कल्याण के लिये काम करने वाली संस्था – यूएन वीमैन के अनुसार, 40 अरब डॉलर का निवेश, महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के लिये संसाधन मुहैया कराने की दिशा में एक बहुत बड़ा क़दम है.
क्योंकि लैंगिक समानता की दिशा में बढ़त हासिल करने और 1995 के बीजिंग सम्मेलन के अनुसार महिलाधिकार एजेण्डा अपनाए जाने के मामले में वित्तीय अभाव एक प्रमुख कारण रहा है.
सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों ने लैंगिक समानता के निवेश के लिये 21 अरब डॉलर की रक़म ख़र्च करने की प्रतिबद्धता जताई है.
इनके अलावा निजी क्षेत्र ने 13 अरब डॉलर और सामाजिक भलाई के लिये सक्रिय संगठनों ने साढ़े चार अरब डॉलर का धन ख़र्च करने का वादा किया है.
संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं, अन्तरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों ने सामूहिक रूप से लगभग एक अरब 30 करोड़ डॉलर की रक़म ख़र्च करने का संकल्प व्यक्त किया है.
बहुपक्षवादी रुख़
अनेक संगठनों ने मज़बूत नीति और कार्यक्रम सम्बन्धित संकल्प व्यक्त किये हैं जिनमें 440 सिविल सोसायटी संगठन और 94 युवाओं के नेतृत्व वाले संगठन शामिल हैं.
फ्रांस के राजदूत और इस फ़ोरम के महासचिव डेलफ़ीन ओ ने इस मंच की मेज़बानी करते हुए कहा कि इस सम्मेलन ने लैंगिक समानता के मुद्दे को अन्तरराष्ट्रीय एजेण्डा पर एक प्राथमिकता बना दिया है जोकि बहुत लम्बे समय से नज़रअन्दाज़ किया जाता रहा है.
उन्होंने कहा कि फ्रांस, लैंगिक समानता के क्षेत्र में रफ़्तार बढ़ाने के लिये अग्रिम मोर्चे पर सक्रिय रहेगा.
लैंगिक न्याय को तेज़ी से आगे बढ़ाने के इरादे से आयोजित और तीन दिन तक चले इस फ़ोरम में लगभग 50 हज़ार लोगों ने मुख्य रूप से वर्चुअल माध्यमों से शिरकत की., पेरिस में ऐतिहासिक पीढ़ी समानता फ़ोरम शुक्रवार को, संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था – यूएन वीमैन की अध्यक्षा की इस घोषणा के साथ सम्पन्न हुआ कि जब पुरुष किसी कमरे के भीतर बैठकर शान्ति वार्ताएँ करते हैं तो महिलाएँ भी वहीं नज़दीक गलियारों में बैठी होती हैं. लैंगिक विषमताओं और अन्य तरह के अन्यायों से निपटने का संकल्प भी, इस फ़ोरम में लिया गया.

अगले पाँच वर्षों के दौरान यानि वर्ष 2026 तक लैंगिक समानता सही मायनों में बढ़ाने के लिये, इस फ़ोरम में, सरकारों, सिविल सोसायटी और अन्य क्षेत्रों से महत्वाकाँक्षी योजनाएँ और कार्यक्रमों के लिये संकल्प और लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश के वादे किये गए हैं.

“We can only get better from here. I am most grateful for the support we’ve received from everyone who have contributed.”

– ED, @phumzileunwomen at the Closing Ceremony of the #GenerationEquality Forum in Paris.#ActForEqual recap: https://t.co/DiEpeeGSuT pic.twitter.com/symEw2m8UT

— UN Women (@UN_Women) July 2, 2021

यूएन वीमैन संस्था की कार्यकारी निदेशक पुमज़िले म्लाम्बो-न्गुका ने कहा, “पीढ़ी समानता फ़ोरम में, सत्ता और नज़रिये में एक ऐतिहासिक बदलाव दर्ज किया गया है.”

ये फ़ोरम एक ऐसे महत्वपूर्ण दौर में आयोजित किया गया जब पूरी दुनिया, महिलाओं और लड़कियों पर कोविड-19 महामारी के ग़ैर-आनुपातिक और भीषण तबाही वाले प्रभाव का आकलन कर रही है.

लैंगिक समानता के पैरोकारों ने इस फ़ोरम को, लैंगिक समानता को ध्यान में रखने वाले ऐसी पुनर्बहाली योजनाओं पर ज़ोर देने के लिये एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया जिनमें महिलाओं और लड़कियों को पुनर्बहाली उपायों में पीछे ना छोड़ दिया जाए.

समयबद्ध प्रतिबद्धताएँ

महिलाओं के कल्याण के लिये काम करने वाली संस्था – यूएन वीमैन के अनुसार, 40 अरब डॉलर का निवेश, महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के लिये संसाधन मुहैया कराने की दिशा में एक बहुत बड़ा क़दम है.

क्योंकि लैंगिक समानता की दिशा में बढ़त हासिल करने और 1995 के बीजिंग सम्मेलन के अनुसार महिलाधिकार एजेण्डा अपनाए जाने के मामले में वित्तीय अभाव एक प्रमुख कारण रहा है.

सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों ने लैंगिक समानता के निवेश के लिये 21 अरब डॉलर की रक़म ख़र्च करने की प्रतिबद्धता जताई है.

इनके अलावा निजी क्षेत्र ने 13 अरब डॉलर और सामाजिक भलाई के लिये सक्रिय संगठनों ने साढ़े चार अरब डॉलर का धन ख़र्च करने का वादा किया है.

संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं, अन्तरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों ने सामूहिक रूप से लगभग एक अरब 30 करोड़ डॉलर की रक़म ख़र्च करने का संकल्प व्यक्त किया है.

बहुपक्षवादी रुख़

अनेक संगठनों ने मज़बूत नीति और कार्यक्रम सम्बन्धित संकल्प व्यक्त किये हैं जिनमें 440 सिविल सोसायटी संगठन और 94 युवाओं के नेतृत्व वाले संगठन शामिल हैं.

फ्रांस के राजदूत और इस फ़ोरम के महासचिव डेलफ़ीन ओ ने इस मंच की मेज़बानी करते हुए कहा कि इस सम्मेलन ने लैंगिक समानता के मुद्दे को अन्तरराष्ट्रीय एजेण्डा पर एक प्राथमिकता बना दिया है जोकि बहुत लम्बे समय से नज़रअन्दाज़ किया जाता रहा है.

उन्होंने कहा कि फ्रांस, लैंगिक समानता के क्षेत्र में रफ़्तार बढ़ाने के लिये अग्रिम मोर्चे पर सक्रिय रहेगा.

लैंगिक न्याय को तेज़ी से आगे बढ़ाने के इरादे से आयोजित और तीन दिन तक चले इस फ़ोरम में लगभग 50 हज़ार लोगों ने मुख्य रूप से वर्चुअल माध्यमों से शिरकत की.

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