विज्ञान व प्रोद्योगिकी का फ़ायदा सभी को पहुँचाने के उपायों पर चर्चा

संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक व सामाजिक परिषद (ECOSOC) ने तमाम लोगों को विज्ञान व टैक्नॉलॉजी के भरपूर फ़ायदे पहुँचाने के मुद्दे पर ज़ोर देने के लिये, दो दिवसीय वर्चुअल बैठक का आयोजिन किया है जो मंगलवार को शुरू हुई. 

टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के लिये विज्ञान, टैक्नॉलॉजी और नवाचार पर, इस बहु-पक्षीय फ़ोरम का मक़सद, वर्ष 2030 तक एक ज़्यादा हरित विश्व का लक्ष्य हासिल करने के प्रयासों में भागीदारी को प्रोत्साहित करना और ख़ामियों की पहचान करना है.
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस फ़ोरम को दिये अपने सन्देश में ध्यान दिलाया है कि कोविड-19 महामारी ने, इनसानों की बेहतरी और वजूद के लिये, किस तरह, विज्ञान, टैक्नॉलॉजी और नवाचार की अहमियत को रेखांकित किया है. इस स्वास्थ्य संकट ने, ज़्यादा वैश्विक सहयोग की ज़रूरत को भी उजागर किया है.
यूएन प्रमुख का वक्तव्य, संगठन के आर्थिक व सामाजिक मामलों के विभाग (DESA) की अवर महासचिव मारिया फ्रांसेस्का स्पेतोलिसानो ने पढ़कर सुनाया.
महामारी के कारण नवाचार में वृद्धि
यूएन प्रमुख ने कहा कि महामारी का सामना करने के प्रयासों में, ना केवल रिकॉर्ड कम समय में वैक्सीन विकसित कर ली गई, बल्कि इस संकट ने औषधि और डिजिटल संचार टैक्नॉलॉजी के क्षेत्रों में भी नवाचार में वृद्धि की है.
साथ ही, वैज्ञानिक अनुसन्धान और सहयोग व साझेदारियों में बढ़ोत्तरी हुई है और सेवाएँ मुहैया कराने के नए तरीक़ों में इज़ाफ़ा हुआ है.
यूएन प्रमुख ने कहा कि इन क्षेत्रों में ये प्रगति होना, महामारी से भी आगे के समय व दुनिया में, सामूहिक चुनौतियों के लिये आशाएँ जगाता है.
इनमें जलवायु व्यवधान को सीमित करना, विषमताएँ कम करना और प्रकृति के ख़िलाफ़ हमारी लड़ाई को ख़त्म करने जैसी चुनौतियाँ शामिल हैं.
अरबों हैं वंचित

© UNICEF/Chansereypich Sengमार्च 2021 के शुरुआती दिनों में, यूनीसेफ़ और WHO के प्रतिनिधियों ने, कम्बोडिया की राजधानी नॉमपेन्ह में अस्पतालों का दौरा करके, कोवैक्स के ज़रिये, टीकाकरण प्रगति का जायज़ा लिया.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अलबत्ता ये भी कहा कि दुनिया भर में अब भी, अरबों लोग, सूचना व प्रोद्योगिकी क्षेत्र में हुए क्रान्तिकारी बदलावों के फ़ायदों से, बड़े पैमाने पर वंचित हैं. और महामारी ने, प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में मौजूद विषमताएँ और बढ़ाई हैं.
यूएन प्रमुख के वक्तव्य में कहा गया है, “ये बहुत ज़रूरी है कि हम सब साथ मिलकर काम करें – सीमाओं, क्षेत्रों और विषयों की परिधि से परे – विज्ञान व टैक्नॉलॉजी को सभी के लिये लाभदायक बनाने के लिये.”
“बहु-हितधारी सहयोग की अहमियत जारी रहेगी, इससे हमें, टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने, जैव-विविधता और प्रदूषण जैसे संकटों को समाप्त करने और हमारी अन्य साझा चुनौतियों का सामना करने में, मदद मिलेगी.”
विकास के लिये प्रोद्योगिकी
विज्ञान, टैक्नॉलॉजी और नवाचार (एसटीआई) फ़ोरम अब छठे वर्ष में है और ये संयुक्त राष्ट्र की टैक्नॉलॉजी सुविधा प्रणाली का एक हिस्सा है.
ये एक ऐसा ऑनलाइन मंच है जो देशों को, टिकाऊ विकास लक्ष्य, 2030 की समय सीमा तक हासिल करने में मदद करता है.
इस मंच के ज़रिये, यूएन एजेंसियाँ, सदस्य देश, सिविल सोसायटी, निजी क्षेत्र, वैज्ञानिक समुदाय और अन्य हितधारक, सूचनाएँ, अनुभव, आदर्श परम्पराएँ और नीति-परापर्ष साझा करते हैं.
यूएन महासचिव ने, जून 2020 में, डिजिटल सहयोग के लिये एक रोडमैप भी जारी किया था.
इसके आठ लक्ष्यों में वर्ष 2030 तक सार्वभौमिक स्तर पर इण्टरनेट जुड़ाव प्राप्ति भी शामिल है. ध्यान रहे कि दुनिया की लगभग आधी आबादी, यानि क़रीब 3 अरब लोग, इण्टरनेट जुड़ाव से वंचित है जिनमें ज़्यादा संख्या महिलाओं की है., संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक व सामाजिक परिषद (ECOSOC) ने तमाम लोगों को विज्ञान व टैक्नॉलॉजी के भरपूर फ़ायदे पहुँचाने के मुद्दे पर ज़ोर देने के लिये, दो दिवसीय वर्चुअल बैठक का आयोजिन किया है जो मंगलवार को शुरू हुई. 

टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के लिये विज्ञान, टैक्नॉलॉजी और नवाचार पर, इस बहु-पक्षीय फ़ोरम का मक़सद, वर्ष 2030 तक एक ज़्यादा हरित विश्व का लक्ष्य हासिल करने के प्रयासों में भागीदारी को प्रोत्साहित करना और ख़ामियों की पहचान करना है.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस फ़ोरम को दिये अपने सन्देश में ध्यान दिलाया है कि कोविड-19 महामारी ने, इनसानों की बेहतरी और वजूद के लिये, किस तरह, विज्ञान, टैक्नॉलॉजी और नवाचार की अहमियत को रेखांकित किया है. इस स्वास्थ्य संकट ने, ज़्यादा वैश्विक सहयोग की ज़रूरत को भी उजागर किया है.

यूएन प्रमुख का वक्तव्य, संगठन के आर्थिक व सामाजिक मामलों के विभाग (DESA) की अवर महासचिव मारिया फ्रांसेस्का स्पेतोलिसानो ने पढ़कर सुनाया.

महामारी के कारण नवाचार में वृद्धि

यूएन प्रमुख ने कहा कि महामारी का सामना करने के प्रयासों में, ना केवल रिकॉर्ड कम समय में वैक्सीन विकसित कर ली गई, बल्कि इस संकट ने औषधि और डिजिटल संचार टैक्नॉलॉजी के क्षेत्रों में भी नवाचार में वृद्धि की है.

साथ ही, वैज्ञानिक अनुसन्धान और सहयोग व साझेदारियों में बढ़ोत्तरी हुई है और सेवाएँ मुहैया कराने के नए तरीक़ों में इज़ाफ़ा हुआ है.

यूएन प्रमुख ने कहा कि इन क्षेत्रों में ये प्रगति होना, महामारी से भी आगे के समय व दुनिया में, सामूहिक चुनौतियों के लिये आशाएँ जगाता है.

इनमें जलवायु व्यवधान को सीमित करना, विषमताएँ कम करना और प्रकृति के ख़िलाफ़ हमारी लड़ाई को ख़त्म करने जैसी चुनौतियाँ शामिल हैं.

अरबों हैं वंचित


© UNICEF/Chansereypich Seng
मार्च 2021 के शुरुआती दिनों में, यूनीसेफ़ और WHO के प्रतिनिधियों ने, कम्बोडिया की राजधानी नॉमपेन्ह में अस्पतालों का दौरा करके, कोवैक्स के ज़रिये, टीकाकरण प्रगति का जायज़ा लिया.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अलबत्ता ये भी कहा कि दुनिया भर में अब भी, अरबों लोग, सूचना व प्रोद्योगिकी क्षेत्र में हुए क्रान्तिकारी बदलावों के फ़ायदों से, बड़े पैमाने पर वंचित हैं. और महामारी ने, प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में मौजूद विषमताएँ और बढ़ाई हैं.

यूएन प्रमुख के वक्तव्य में कहा गया है, “ये बहुत ज़रूरी है कि हम सब साथ मिलकर काम करें – सीमाओं, क्षेत्रों और विषयों की परिधि से परे – विज्ञान व टैक्नॉलॉजी को सभी के लिये लाभदायक बनाने के लिये.”

“बहु-हितधारी सहयोग की अहमियत जारी रहेगी, इससे हमें, टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने, जैव-विविधता और प्रदूषण जैसे संकटों को समाप्त करने और हमारी अन्य साझा चुनौतियों का सामना करने में, मदद मिलेगी.”

विकास के लिये प्रोद्योगिकी

विज्ञान, टैक्नॉलॉजी और नवाचार (एसटीआई) फ़ोरम अब छठे वर्ष में है और ये संयुक्त राष्ट्र की टैक्नॉलॉजी सुविधा प्रणाली का एक हिस्सा है.

ये एक ऐसा ऑनलाइन मंच है जो देशों को, टिकाऊ विकास लक्ष्य, 2030 की समय सीमा तक हासिल करने में मदद करता है.

इस मंच के ज़रिये, यूएन एजेंसियाँ, सदस्य देश, सिविल सोसायटी, निजी क्षेत्र, वैज्ञानिक समुदाय और अन्य हितधारक, सूचनाएँ, अनुभव, आदर्श परम्पराएँ और नीति-परापर्ष साझा करते हैं.

यूएन महासचिव ने, जून 2020 में, डिजिटल सहयोग के लिये एक रोडमैप भी जारी किया था.

इसके आठ लक्ष्यों में वर्ष 2030 तक सार्वभौमिक स्तर पर इण्टरनेट जुड़ाव प्राप्ति भी शामिल है. ध्यान रहे कि दुनिया की लगभग आधी आबादी, यानि क़रीब 3 अरब लोग, इण्टरनेट जुड़ाव से वंचित है जिनमें ज़्यादा संख्या महिलाओं की है.

,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *