विशेष दूत का इसराइलियों व फ़लस्तीनियों से सार्थक बातचीत के रास्ते पर लौटने का आग्रह

मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के दूत निकोलय म्लैदेनॉफ़ ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए, इसराइलियों और फ़लस्तीनियों, क्षेत्र के देशों और वृहद अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से, सम्बद्ध पक्षों को शान्ति प्रक्रिया में फिर से शिरकत कराने के लिये व्यावहारिक क़दम उठाने का आग्रह किया है. 

मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत या संयोजक के रूप में निकोलय म्लैदेनॉफ़ का सुरक्षा परिषद को ये अन्तिम सम्बोधन था. 

A severe funding crisis is threatening #PalestineRefugeesAtRisk. Frontline doctors, nurses and sanitation workers may not be able to feed their families. Children may not have access to education. Families may not be able to put food on the table. pic.twitter.com/jvhjVEtKrX— UNRWA (@UNRWA) December 21, 2020

इस सम्बोधन में उन्होंने कहा, “मध्य पूर्व के चार पक्ष, अरब साझीदार – और इसराइली व फ़लस्तीनी नेतृत्व, सभी को सार्थक बातचीत के रास्ते पर फिर से लौटने के लिये काम करना होगा.”
ऐतिहासिक संघर्ष
यूएन विशेष दूत ने कहा, “इसराइली और फ़लस्तीनी, यहूदी और अरब, बहुत लम्बे समय से संघर्ष के दौर में रहते आए हैं. नुक़सान, तबाही और विस्थापन, पीढ़ियों से, हर एक घर व परिवार के निजी अतीत का हिस्सा हैं.”
उन्होंने इस तकलीफ़ भरे माहौल की तस्वीर पेश करते हुए कहा कि फ़लस्तीनियों को अपने घरों से बेदख़ल होकर क्षेत्र में अनेक स्थानों पर शरणार्थी बनना पड़ा है, जबकि यहूदियों को भी क्षेत्र में अनेक स्थानों से बेदखल होना पड़ा है और इसराइल में शरण लेनी पड़ी है.
म्लैदेनॉफ़ ने याद दिलाते हुए कहा कि ये संघर्ष केवल ज़मीन या इतिहास का नहीं है, ये संघर्ष ऐसे दो राष्ट्रों के वजूद और सह-अस्तित्व का है.
धन की कमी
इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किये हुए फ़लस्तीनी इलाक़ों में बुनियादी व ज़रूरी सेवाएँ अधर में लटकी हुई हैं क्योंकि फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिये संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसी (UNRWA) के पास धन की भारी क़िल्लत हो गई है और उसे कम से कम 8 करोड़ 80 लाख डॉलर की रक़म की तुरन्त आवश्यकता है.
इसमें से लगभग 2 करोड़ 20 लाख डॉलर की रक़म की ज़रूरत, क़रीब 30 हज़ार अग्रिम मोर्चों पर काम करने वाले शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक और अन्य क्षेत्र के कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करने के लिये है जो फ़लस्तीनी शरणार्थियों की मदद करने में जुटे हुए हैं.
निकोलय म्लैदेनॉफ़ ने कहा कि ये एजेंसी लाखों फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिये ना केवल जीवन-रक्षक सहारा है, और ये कोविड-19 महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई भी बहुत अहम सहायता मुहैया करा रही, बल्कि, ये क्षेत्रीय स्थिरता के लिये भी बहुत अहम काम कर रही है.
“इस एजेंसी को समुचित धन की सख़्त ज़रूरत है ताकि ये अपना काम जारी रख सके, और मैं इस एजेंसी को समर्थन देने की अपनी अपील फिर दोहराता हूँ.”
यहूदी बस्तियों पर रोक लगे
विशेष दूत निकोलय म्लैदेनॉफ़ ने कहा कि इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किये हुए फ़लस्तीनी इलाक़ों में यहूदी बस्तियों के विस्तार सम्बन्धी गतिविधियाँ अब भी जारी हैं, और पश्चिमी तट व पूर्वी येरूशलम में भी यहूदी बस्तियों का विस्तार हो रहा है.
इन यहूदी बस्तियों के विस्तार से, फ़लस्तीनी इलाक़ों पर इसराइली क़ब्ज़े का दायरा और ज़्यादा बढ़ता है, और इससे, दो राष्ट्रों के समाधान की सम्भानाओं को नुक़सान पहुँचता है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “यहूदी बस्तियों के विस्तार सम्बन्धी तमाम गतिविधियाँ तुरन्त बन्द होनी चाहिये,” क्योंकि इनसे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन भी होता है.
विशेष दूत ने फ़लस्तीनी मानवीय परियोजनाओं और स्कूलों को बन्द किये जाने और उन्हें ध्वस्त किये जाने के चलने को भी गम्भीर रूप से चिन्ताजनक क़रार दिया.
उन्होंने कहा, “मैं इसराइली अधिकारियों का आहवान करता हूँ कि वो फ़लस्तीनी सम्पत्ति, ढाँचों व घरों को ढहाना, फ़लस्तीनी लोगों को बेदखल करना और उन्हें उनके घरों से निकलाना बन्द करें.”
शान्ति सम्भव है
अपने सम्बोधन के अन्त में उन्होंने याद करते हुए कहा कि जिन भी फ़लस्तीनियों से उन्होंने मुलाक़ात की है, उनका मानना है कि बातचीत तो और ज़्यादा ज़मीन हथियाने के लिये एक बहाना है, जबकि हर एक इसराइली का ये मानना है कि बातचीत का नतीजा केवल और ज़्यादा” हिंसा और आतंकवाद” के रूप में होगा.
विशेष दूत ने कहा, “दुनिया, इस स्थिति को इसी तरह नहीं छोड़ सकती,” तमाम यूएन प्रस्ताव, द्विपक्षीय समझौते और मध्य पूर्व के लिये चौकड़ी के प्रयास, सभी इस संघर्ष का समाधान करने पर केन्द्रित हैं.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “अन्तरारष्ट्रीय समुदाय में, कहीं से भी इस बुनियादी प्रावधान पर कोई सवाल नहीं है कि कोई भी समाधान… दो राष्ट्रों की स्थापना के रूप में हो” और उसके लिये सम्बद्ध पक्षों की बातचीत में शिरकत के रास्ते से ज़रूरी है, नाकि हिंसा के रास्ते से. 
दोनों ही पक्षों को अपने भीतर झाँकना होगा, दोनों पक्षों को ही, टिकाऊ शान्ति के लक्ष्य को हासिल करने के लिये, ये काम आपसी तालमेल और निजी रूप में भी करना होगा.
विशेष दूत ने कहा, “मेरा पक्का विश्वास है कि इसारइलियों व फ़लस्तीनियों के बीच एक न्यायसंगत व टिकाऊ शान्ति स्थापना का लक्ष्य बातचीत के ज़रिए हासिल किया जा सकता है, जिसकी मध्यस्थता मध्य पूर्व चौकड़ी व अरब साझीदारों द्वारा की जा सकती है.”
निकोलय म्लैदेनॉफ़ ने ये भी सूचित किया कि जनवरी, 2021 में टोर वैनेसलैण्ड, उनका स्थान लेंगे. उन्होंने अपने उत्तराधिकारी टोर वैनेसलैण्ड को बहुत सक्षम राजनयिक क़रार दिया.
“मैं, आने वाले वर्षों में, उनके लिये व्यापक सफलता की कामना करता हूँ, और आशा करता हूँ कि आप सभी उन्हें भी अपना पूरा समर्थन देंगे, जैसाकि आपने मुझे अपना समर्थन दिया है.”, मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के दूत निकोलय म्लैदेनॉफ़ ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए, इसराइलियों और फ़लस्तीनियों, क्षेत्र के देशों और वृहद अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से, सम्बद्ध पक्षों को शान्ति प्रक्रिया में फिर से शिरकत कराने के लिये व्यावहारिक क़दम उठाने का आग्रह किया है. 

मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत या संयोजक के रूप में निकोलय म्लैदेनॉफ़ का सुरक्षा परिषद को ये अन्तिम सम्बोधन था. 

इस सम्बोधन में उन्होंने कहा, “मध्य पूर्व के चार पक्ष, अरब साझीदार – और इसराइली व फ़लस्तीनी नेतृत्व, सभी को सार्थक बातचीत के रास्ते पर फिर से लौटने के लिये काम करना होगा.”

ऐतिहासिक संघर्ष

यूएन विशेष दूत ने कहा, “इसराइली और फ़लस्तीनी, यहूदी और अरब, बहुत लम्बे समय से संघर्ष के दौर में रहते आए हैं. नुक़सान, तबाही और विस्थापन, पीढ़ियों से, हर एक घर व परिवार के निजी अतीत का हिस्सा हैं.”

उन्होंने इस तकलीफ़ भरे माहौल की तस्वीर पेश करते हुए कहा कि फ़लस्तीनियों को अपने घरों से बेदख़ल होकर क्षेत्र में अनेक स्थानों पर शरणार्थी बनना पड़ा है, जबकि यहूदियों को भी क्षेत्र में अनेक स्थानों से बेदखल होना पड़ा है और इसराइल में शरण लेनी पड़ी है.

म्लैदेनॉफ़ ने याद दिलाते हुए कहा कि ये संघर्ष केवल ज़मीन या इतिहास का नहीं है, ये संघर्ष ऐसे दो राष्ट्रों के वजूद और सह-अस्तित्व का है.

धन की कमी

इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किये हुए फ़लस्तीनी इलाक़ों में बुनियादी व ज़रूरी सेवाएँ अधर में लटकी हुई हैं क्योंकि फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिये संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसी (UNRWA) के पास धन की भारी क़िल्लत हो गई है और उसे कम से कम 8 करोड़ 80 लाख डॉलर की रक़म की तुरन्त आवश्यकता है.

इसमें से लगभग 2 करोड़ 20 लाख डॉलर की रक़म की ज़रूरत, क़रीब 30 हज़ार अग्रिम मोर्चों पर काम करने वाले शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक और अन्य क्षेत्र के कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करने के लिये है जो फ़लस्तीनी शरणार्थियों की मदद करने में जुटे हुए हैं.

निकोलय म्लैदेनॉफ़ ने कहा कि ये एजेंसी लाखों फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिये ना केवल जीवन-रक्षक सहारा है, और ये कोविड-19 महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई भी बहुत अहम सहायता मुहैया करा रही, बल्कि, ये क्षेत्रीय स्थिरता के लिये भी बहुत अहम काम कर रही है.

“इस एजेंसी को समुचित धन की सख़्त ज़रूरत है ताकि ये अपना काम जारी रख सके, और मैं इस एजेंसी को समर्थन देने की अपनी अपील फिर दोहराता हूँ.”

यहूदी बस्तियों पर रोक लगे

विशेष दूत निकोलय म्लैदेनॉफ़ ने कहा कि इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किये हुए फ़लस्तीनी इलाक़ों में यहूदी बस्तियों के विस्तार सम्बन्धी गतिविधियाँ अब भी जारी हैं, और पश्चिमी तट व पूर्वी येरूशलम में भी यहूदी बस्तियों का विस्तार हो रहा है.

इन यहूदी बस्तियों के विस्तार से, फ़लस्तीनी इलाक़ों पर इसराइली क़ब्ज़े का दायरा और ज़्यादा बढ़ता है, और इससे, दो राष्ट्रों के समाधान की सम्भानाओं को नुक़सान पहुँचता है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “यहूदी बस्तियों के विस्तार सम्बन्धी तमाम गतिविधियाँ तुरन्त बन्द होनी चाहिये,” क्योंकि इनसे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन भी होता है.

विशेष दूत ने फ़लस्तीनी मानवीय परियोजनाओं और स्कूलों को बन्द किये जाने और उन्हें ध्वस्त किये जाने के चलने को भी गम्भीर रूप से चिन्ताजनक क़रार दिया.

उन्होंने कहा, “मैं इसराइली अधिकारियों का आहवान करता हूँ कि वो फ़लस्तीनी सम्पत्ति, ढाँचों व घरों को ढहाना, फ़लस्तीनी लोगों को बेदखल करना और उन्हें उनके घरों से निकलाना बन्द करें.”

शान्ति सम्भव है

अपने सम्बोधन के अन्त में उन्होंने याद करते हुए कहा कि जिन भी फ़लस्तीनियों से उन्होंने मुलाक़ात की है, उनका मानना है कि बातचीत तो और ज़्यादा ज़मीन हथियाने के लिये एक बहाना है, जबकि हर एक इसराइली का ये मानना है कि बातचीत का नतीजा केवल और ज़्यादा” हिंसा और आतंकवाद” के रूप में होगा.

विशेष दूत ने कहा, “दुनिया, इस स्थिति को इसी तरह नहीं छोड़ सकती,” तमाम यूएन प्रस्ताव, द्विपक्षीय समझौते और मध्य पूर्व के लिये चौकड़ी के प्रयास, सभी इस संघर्ष का समाधान करने पर केन्द्रित हैं.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “अन्तरारष्ट्रीय समुदाय में, कहीं से भी इस बुनियादी प्रावधान पर कोई सवाल नहीं है कि कोई भी समाधान… दो राष्ट्रों की स्थापना के रूप में हो” और उसके लिये सम्बद्ध पक्षों की बातचीत में शिरकत के रास्ते से ज़रूरी है, नाकि हिंसा के रास्ते से. 

दोनों ही पक्षों को अपने भीतर झाँकना होगा, दोनों पक्षों को ही, टिकाऊ शान्ति के लक्ष्य को हासिल करने के लिये, ये काम आपसी तालमेल और निजी रूप में भी करना होगा.

विशेष दूत ने कहा, “मेरा पक्का विश्वास है कि इसारइलियों व फ़लस्तीनियों के बीच एक न्यायसंगत व टिकाऊ शान्ति स्थापना का लक्ष्य बातचीत के ज़रिए हासिल किया जा सकता है, जिसकी मध्यस्थता मध्य पूर्व चौकड़ी व अरब साझीदारों द्वारा की जा सकती है.”

निकोलय म्लैदेनॉफ़ ने ये भी सूचित किया कि जनवरी, 2021 में टोर वैनेसलैण्ड, उनका स्थान लेंगे. उन्होंने अपने उत्तराधिकारी टोर वैनेसलैण्ड को बहुत सक्षम राजनयिक क़रार दिया.

“मैं, आने वाले वर्षों में, उनके लिये व्यापक सफलता की कामना करता हूँ, और आशा करता हूँ कि आप सभी उन्हें भी अपना पूरा समर्थन देंगे, जैसाकि आपने मुझे अपना समर्थन दिया है.”

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