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विश्व के इतिहास में स्वतः सिंहासन छोड़ने वाले पहले सम्राट बने जापान के अकिहितो

विश्व के इतिहास में स्वतः सिंहासन छोड़ने वाले पहले सम्राट बने जापान के अकिहितो
May 04
13:07 2019

युवराज नारूहितो बने नये सम्राट

इनसाईट ऑनलाइन न्यूज

जापान के 85 वर्षीय सम्राट अकिहितो ने बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों से गत 30 अप्रैल को स्वेच्छा पूर्वक राज सिंहासन छोड़ दिया। जापान के 200 वर्ष के इतिहास में यह प्रथम अवसर है जब सम्राट ने स्वयं सिंहासन त्याग करने की इच्छा प्रकट की और समय पर त्याग भी कर दिया।

निवर्तमान सम्राट अकिहितो ने अपने 30 वर्ष के शासन के पश्चात् राज सिंहासन को अपने अधिकृत पारिवारिक उत्तराधिकारी बड़े पुत्र नारूहितो को सौंप दिया। इस अवसर पर एक मई को राजमहल में एक संक्षिप्त आयोजन हुआ, जिसमें सम्राट अकिहितो द्वारा सिंहासन त्याग की प्रक्रिया पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुई। नए सम्राट नारूहितो ने उसी दिन एक अलग समारोह में सम्राट-पद ग्रहण कर लिया। नए सम्राट नारूहितो का कार्यकाल एक नए युग ‘रिवा-एरा’ के नाम से जाना जाएगा, जिसका अर्थ – सुन्दर संगति होता है। समारोहों में पूर्व राजा अकिहितों के साथ महारानी मिशिको भी शाही महल में उपस्थित रहीं।

यह उल्लेखनीय है कि 2016 में हीं सम्राट अकिहितो ने राज सिंहासन छोड़ देने का संकेत दे दिया था, जिसका कारण अपनी बढ़ती उम्र और खराब सेहत बताया था। अकिहितो 1989 में जापान के राज सिंहासन पर बैठै थे। वह अपने शासनकाल में सदैव संवेदनशील बने रहे। उनके पिता सम्राट हिरोहितो की छवि एक सैन्यवादी की थी। सम्राट अकिहितो ने जापानी राजघराने की 1500 वर्ष पुरानी परंपरा से परे जाकर एक साधारण महिला से विवाह किया था।

सम्राट अकिहितो ने अपने अंतिम विदाई भाषण में जापानी जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं उनलोगों को धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने राज्य के प्रतीक के रूप में मेरी भूमिका को स्वीकार किया और सराहना की।

गौरतलब है कि सम्राट अकिहितो की गद्दी छोड़ने की अग्रिम घोषणा के बाद जापान की संसद ने 2017 में कानून बना कर उन्हें राजगद्दी छोड़ने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। जापान के नए राजा नारूहितो की पढ़ाई आॅक्सफोर्ड में हुई है। 28 वर्ष की उम्र में वह युवराज घोषित किए गए थे। उनके जीवन का सर्वाधिक दिलचस्प तथ्य यह है कि 1986 में एक चाय पार्टी में उनकी मुलाकात प्रिंसेज मसाको ओवाडा से हुई थी जो 1993 में उनकी सहधर्मिणी बनी। नारूहितो और मसाको की एक 18 वर्षीय बेटी है, जिसका प्यारा नाम प्रिंसेज आइको है। जापान के कानून के अनुसार महिलाओं को राजगद्दी नहीं सौंपी जाती है। इसलिए प्रिंसेस आइको अगली वारिस नहीं हो सकती। इसी कारण वर्तमान सम्राट नारूहितो के भाई राजकुमार फुमिहितो अगले वारिस होंगे। दुनिया में जापान का यह राजघराना ऐसा है, जो पिछले छब्बीस सौ साल से जापान पर शासन करता चला आ रहा है। जापान के सम्राट को भगवान समझा जाता है, लेकिन अकिहितो के पिता सम्राट हीरोहितो ने दूसरे विश्वयुद्ध में जापान की हार के बाद सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उनके पास कोई दैविक शक्ति नहीं है।

जापान में कैसे हो रहा नए राजा का स्वागत

जापान में इस समय एक सप्ताह की सालाना छुट्टी मनाई जाती है. लेकिन सम्राट के राजगद्दी छोड़ने और नए राजा के राज्याभिषेक के कारण इस छुट्टी को बढ़ाकर दस दिनों की कर दी गई है.
लोग इसे एक त्यौहार की तरह मना रहे हैं. 30 साल पहले मौजूदा सम्राट अकिहितो जब गद्दी पर बैठे थे तब पूरे जापान में शोक मनाया जा रहा था क्योंकि उस समय अकिहितो के पिता और तत्कालीन सम्राट की मौत हुई थी.

लेकिन इस बार लोग खुशियां मना रहे हैं. छुट्टी पर जा रहे हैं, सिनेमाघरों और बाजारों में भारी भीड़ देखी जा रही है. राजगद्दी छोड़ने से जुड़े समारोह को लाइव प्रसारित किया जा रहा है तो लोग घरों में या फिर बाजार में रहकर टीवी पर देख रहे हैं.


राजगद्दी छोड़ने के बाद अकिहितो को ‘जोको’ का खिताब दिया जाएगा जिसका अर्थ होता है ‘चक्रवर्ती महाराज’.

59 वर्षीय नये सम्राट नारूहितो जापान के 126वें सम्राट होंगे।

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