वैश्विक महामारी को एक साल पूरा – अंधेरी सुरंग के बाद नज़र आई ‘रौशनी’

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोरोनावायरस संकट ने पूरी दुनिया को, दुख और पीड़ा की सूनामी की चपेट में ले लिया था, लेकिन टीकाकरण की शुरुआत, एक अंधेरी सुरंग के बाद रौशनी दिखाई देने लगी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 मार्च 2020 को, कोविड-19 को वैश्विक महामारी के रूप में परिभाषित किया था. इसके एक वर्ष पूरा होने पर जारी अपने सन्देश में महासचिव ने महामारी से उबरने और अर्थव्यवस्थाओं को संवारने के लिये एकजुटता पर ज़ोर दिया है.

महासचिव गुटेरेश ने कहा, “इतनी सारी ज़िन्दगियाँ ख़त्म हो गई हैं, अर्थव्यवस्थाएँ उलट-पुलट हुई हैं, और समाज कराह रहे हैं. सबसे निर्बलों ने सबसे अधिक पीड़ा झेली है.”
“जो पीछे छूट गए थे, उन्हें और पीछे छोड़ा जा रहा है.”
महासचिव गुटेरेश ने चुनौतीपूर्ण हालात के मद्देनज़र, ज़रूरतों के अनुरूप ख़ुद को ढालने और नए तरीक़ों से जीवन जीने के लिये दुनिया भर में लोगों की सराहना की है.
उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों का सम्मान करते हुए ध्यान दिलाया कि उनके व अन्य अहम सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के समर्पण व बलिदान के फलस्वरूप ही समाज में जीवन जारी रह सका.
“मैं उन सभी का अभिवादन करता हूँ जो नकारने वाले और भ्रामक सूचनाओं को फैलाने वालों के ख़िलाफ़ खड़े हुए, और जिन्होंने विज्ञान व सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया है.”
“आपने ज़िन्दगियाँ बचाने में मदद की है.”
एंतोनियो गुटेरेश ने भरोसा दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र, न्यायसंगत वैक्सीन वितरण के उद्देश्य से स्थापित ‘कोवैक्स’ पहल के वादे को पूरा करने के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को संगठित करने के प्रयास जारी रखेगा.
साथ ही, इसे सर्वजन के लिये किफ़ायती और उपलब्ध बनाने, बेहतर ढँग से उबरने और अनेक स्तरों पर इस संकट का बोझ सहने वाले लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये विशेष ध्यान दिया जाएगा.
इनमें महिला, अल्पसंख्यक, वृद्धजन, विकलाँग, शरणार्थी, प्रवासी और आदिवासी हैं.
यूएन प्रमुख के अनुसार विश्व के अनेक देशों में वैक्सीन को विकसित करने के लिये अभूतपूर्व प्रयास हुए हैं, जिनके परिणामस्वरूप, एक लम्बी सुरंग के बाद कुछ रौशनी नज़र आने लगी है. महासचिव ने कोवैक्स पहल के तहत, निम्न आय वाले देशों में ऐतिहासिक टीकाकरण की शुरुआत की सराहना की है.
लेकिन उन्होंने वैक्सीन राष्ट्रवाद के उभरने, देशों द्वारा टीकों की होड़ में शामिल होने और वैक्सीन निर्माता कम्पनियों के साथ गुपचुप समझौत करने के प्रति भी आगाह किया.
“मुझे गहरी चिन्ता है कि अनेक निम्न आय वाले देशों को अभी एक भी ख़ुराक नहीं मिल पाई है, जबकि अन्य धनी देश अपनी पूर्ण आबादी के टीकाकरण की दिशा में बढ़ रहे हैं.”
नैतिकता का परीक्षण
महासचिव गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि कोविड-19 की रोकथाम के लिये, वैश्विक टीकाकरण मुहिम हमारे समय की सबसे बड़ी नैतिक परीक्षा है.
“वैश्विक अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू करना, और समाजों में तालाबन्दी से वायरस की तालाबन्दी की ओर बढ़ने में दुनिया की मदद करना भी अहम है.”
“कोविड-19 वैक्सीनों को वैश्विक कल्याण के रूप मे देखा जाना होगा. दुनिया को वैक्सीन के उत्पादन और सर्वजन के लिये पर्याप्त वितरण के लिये एक साथ आने की ज़रूरत है.”
“इसका अर्थ, विनिर्माण क्षमता को दुनिया भर में कम से कम दोगुना करना है.”
यूएन प्रमुख के अनुसार इस प्रयास को अभी शुरू करना होगा, और साथ मिलकर ही इस महामारी का अन्त और इससे उबरा जा सकता है.
संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने, इस क्रम एकजुटता को अहम बताते हुए एक वास्तविक एकजुट मोर्चे के गठन की अपील की है.
उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि एक साथ मिलकर ही अर्थव्यस्थाओं में प्राण फूँके जा सकते हैं, और उन सभी चीज़ों की ओर लौटा जा सकता है, जिनसे हम प्यार करते हैं., संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोरोनावायरस संकट ने पूरी दुनिया को, दुख और पीड़ा की सूनामी की चपेट में ले लिया था, लेकिन टीकाकरण की शुरुआत, एक अंधेरी सुरंग के बाद रौशनी दिखाई देने लगी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 मार्च 2020 को, कोविड-19 को वैश्विक महामारी के रूप में परिभाषित किया था. इसके एक वर्ष पूरा होने पर जारी अपने सन्देश में महासचिव ने महामारी से उबरने और अर्थव्यवस्थाओं को संवारने के लिये एकजुटता पर ज़ोर दिया है.

महासचिव गुटेरेश ने कहा, “इतनी सारी ज़िन्दगियाँ ख़त्म हो गई हैं, अर्थव्यवस्थाएँ उलट-पुलट हुई हैं, और समाज कराह रहे हैं. सबसे निर्बलों ने सबसे अधिक पीड़ा झेली है.”

“जो पीछे छूट गए थे, उन्हें और पीछे छोड़ा जा रहा है.”

महासचिव गुटेरेश ने चुनौतीपूर्ण हालात के मद्देनज़र, ज़रूरतों के अनुरूप ख़ुद को ढालने और नए तरीक़ों से जीवन जीने के लिये दुनिया भर में लोगों की सराहना की है.

उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों का सम्मान करते हुए ध्यान दिलाया कि उनके व अन्य अहम सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के समर्पण व बलिदान के फलस्वरूप ही समाज में जीवन जारी रह सका.

“मैं उन सभी का अभिवादन करता हूँ जो नकारने वाले और भ्रामक सूचनाओं को फैलाने वालों के ख़िलाफ़ खड़े हुए, और जिन्होंने विज्ञान व सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया है.”

“आपने ज़िन्दगियाँ बचाने में मदद की है.”

एंतोनियो गुटेरेश ने भरोसा दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र, न्यायसंगत वैक्सीन वितरण के उद्देश्य से स्थापित ‘कोवैक्स’ पहल के वादे को पूरा करने के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को संगठित करने के प्रयास जारी रखेगा.

साथ ही, इसे सर्वजन के लिये किफ़ायती और उपलब्ध बनाने, बेहतर ढँग से उबरने और अनेक स्तरों पर इस संकट का बोझ सहने वाले लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये विशेष ध्यान दिया जाएगा.

इनमें महिला, अल्पसंख्यक, वृद्धजन, विकलाँग, शरणार्थी, प्रवासी और आदिवासी हैं.

यूएन प्रमुख के अनुसार विश्व के अनेक देशों में वैक्सीन को विकसित करने के लिये अभूतपूर्व प्रयास हुए हैं, जिनके परिणामस्वरूप, एक लम्बी सुरंग के बाद कुछ रौशनी नज़र आने लगी है. महासचिव ने कोवैक्स पहल के तहत, निम्न आय वाले देशों में ऐतिहासिक टीकाकरण की शुरुआत की सराहना की है.

लेकिन उन्होंने वैक्सीन राष्ट्रवाद के उभरने, देशों द्वारा टीकों की होड़ में शामिल होने और वैक्सीन निर्माता कम्पनियों के साथ गुपचुप समझौत करने के प्रति भी आगाह किया.

“मुझे गहरी चिन्ता है कि अनेक निम्न आय वाले देशों को अभी एक भी ख़ुराक नहीं मिल पाई है, जबकि अन्य धनी देश अपनी पूर्ण आबादी के टीकाकरण की दिशा में बढ़ रहे हैं.”

नैतिकता का परीक्षण

महासचिव गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि कोविड-19 की रोकथाम के लिये, वैश्विक टीकाकरण मुहिम हमारे समय की सबसे बड़ी नैतिक परीक्षा है.

“वैश्विक अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू करना, और समाजों में तालाबन्दी से वायरस की तालाबन्दी की ओर बढ़ने में दुनिया की मदद करना भी अहम है.”

“कोविड-19 वैक्सीनों को वैश्विक कल्याण के रूप मे देखा जाना होगा. दुनिया को वैक्सीन के उत्पादन और सर्वजन के लिये पर्याप्त वितरण के लिये एक साथ आने की ज़रूरत है.”

“इसका अर्थ, विनिर्माण क्षमता को दुनिया भर में कम से कम दोगुना करना है.”

यूएन प्रमुख के अनुसार इस प्रयास को अभी शुरू करना होगा, और साथ मिलकर ही इस महामारी का अन्त और इससे उबरा जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने, इस क्रम एकजुटता को अहम बताते हुए एक वास्तविक एकजुट मोर्चे के गठन की अपील की है.

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि एक साथ मिलकर ही अर्थव्यस्थाओं में प्राण फूँके जा सकते हैं, और उन सभी चीज़ों की ओर लौटा जा सकता है, जिनसे हम प्यार करते हैं.

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