शान्तिरक्षकों के साहस व समर्पण को श्रृद्धांजलि – युवजन की भूमिका पर बल

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को न्यूयॉर्क मुख्यालय में चार हज़ार से अधिक, उन सभी शान्तिरक्षकों को श्रृद्धांजलि अर्पित की है, जिन्होंने वर्ष 1948 से, यूएन के झण्डे तले, वैश्विक शान्ति व सुरक्षा के लिए अपने प्राण निछावर किए हैं. यूएन प्रमुख ने शनिवार, 29 मई, को अन्तरराष्ट्रीय यूएन शान्तिरक्षक दिवस से पहले आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा, युवाओं की सक्रिय भागीदारी के बग़ैर शान्ति को हासिल नहीं किया जा सकता.

यूएन प्रमुख ने शान्तिरक्षकों को श्रृद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि पिछले वर्ष, द्वेषपूर्ण कृत्यों, दुर्घटनाओं और कोविड-19 सहित अन्य घातक बीमारियों का वर्दीधारी और असैनिक शान्तिरक्षकों पर एक बड़ा असर हुआ है.
महासचिव ने पीड़ितों के परिजनों और मित्रों के प्रति अपनी गहरी सम्वेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि, “हम हमेशा उनके ऋणी रहेंगे” और उनके बलिदान को कभी नहीं भुलाया जाएगा.

More than 4,000 peacekeepers have lost their lives since 1948 while serving under the @UN flag.Today we honour them for paying the ultimate sacrifice. They will not be forgotten. pic.twitter.com/TjkhkCGiLK— António Guterres (@antonioguterres) May 27, 2021

इस वर्ष, अन्तरराष्ट्रीय यूएन शान्तिरक्षक दिवस के अवसर पर, स्थाई शान्ति व सुरक्षा की स्थापना में, युवजन की भूमिका को रेखांकित किया जा रहा है.
यूएन महासचिव ने कहा कि मध्य अफ़्रीका गणराज्य से लेकर काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य और लेबनान तक, यूएन शान्तिरक्षक हिंसा में कमी लाने और शान्ति क़ायम रखने के लिये युवाओं के साथ मिलकर काम करते हैं.
यूएन प्रमुख ने कहा कि युवा शान्तिरक्षक अपने साथ यूएन अभियानों में, नए विचारों, उम्मीदों व ऊर्जा को साथ लाते हैं, और स्थानीय आबादियों के साथ असरदार ढँग से सम्पर्क व सम्वाद स्थापित करते हैं.
इससे मैण्डेट के तहत प्रदर्शन को बेहतर बनाने और लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलती है.
“हम अपने सभी शान्तिरक्षकों के समर्पण व साहस को सलाम करते हैं – महिलाएँ व पुरुष, युवा और वृद्धजन – और हम उनकी सेवाओं व त्याग के लिये हमेशा आभारी हैं.”
“वे हमारे पूर्ण समर्थन के हक़दार हैं, और हमें साथ मिलकर काम करना जारी रखना होगा, ताकि उनके बचाव व सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिये हम हरसम्भव काम कर सकें, और उनकी सफलता के लिये हर औज़ार दे सकें.”
शान्तिरक्षकों का सम्मान
यूएन प्रमुख ने ‘डैग हैमर्शहोल्ड’ मेडल वितरण समारोह में, पिछले वर्ष और इस साल जनवरी तक सेवारत रहे, 129 शान्तिरक्षकों को मरणोपरान्त सम्मानित किया.
उन्होंने कहा कि शान्तिरक्षकों के समक्ष विशाल चुनौतियाँ व ख़तरे हैं, मगर व दुनिया के सबसे निर्बलों की रक्षा करने के लिये हर दिन काम कर रहे हैं.
ऐसे समय जब उन्हें हिंसा के साथ-साथ वैश्विक महामारी, दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
इस अवसर पर केनया की संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षक स्टैपलिन न्याबोगा को लैंगिक अधिकारों की पैरोकारी के लिये, वर्ष 2020 के संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार (UN Military Gender Advocate of the Year) से सम्मानित किया गया.
32 वर्षीया केनयाई शान्तिरक्षक ने हाल ही में सूडान के दार्फ़ूर में यूएन मिशन (UNAMID) में अपना कार्यकाल पूरा किया है, जहाँ लैंगिक मुद्दों पर उत्कृष्ट योगदान देने के लिये उन्हें चुना गया है.
इस पुरस्कार की शुरुआत 2016 में हुई जिसका उद्देश्य महिलाएँ, शान्ति व सुरक्षा मामलों पर, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव (1325) के सिद्धान्तों को बढ़ावा देने के प्रयासों को सम्मानित करना है.
संयुक्त राष्ट्र का पहला मिशन 29 मई 1948 में मध्य पूर्व में स्थापित किया गया था, जिसके बाद से अब तक 10 लाख महिलाओं व पुरुषों ने 72 शान्तिरक्षा अभियानों में अपनी सेवाएँ प्रदान की हैं.
मौजूदा समय में, 12 शान्तिरक्षा मिशनों में 89 हज़ार से ज़्यादा सैन्य, पुलिस और असैनिक कर्मचारी तैनात हैं., संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को न्यूयॉर्क मुख्यालय में चार हज़ार से अधिक, उन सभी शान्तिरक्षकों को श्रृद्धांजलि अर्पित की है, जिन्होंने वर्ष 1948 से, यूएन के झण्डे तले, वैश्विक शान्ति व सुरक्षा के लिए अपने प्राण निछावर किए हैं. यूएन प्रमुख ने शनिवार, 29 मई, को अन्तरराष्ट्रीय यूएन शान्तिरक्षक दिवस से पहले आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा, युवाओं की सक्रिय भागीदारी के बग़ैर शान्ति को हासिल नहीं किया जा सकता.

यूएन प्रमुख ने शान्तिरक्षकों को श्रृद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि पिछले वर्ष, द्वेषपूर्ण कृत्यों, दुर्घटनाओं और कोविड-19 सहित अन्य घातक बीमारियों का वर्दीधारी और असैनिक शान्तिरक्षकों पर एक बड़ा असर हुआ है.

महासचिव ने पीड़ितों के परिजनों और मित्रों के प्रति अपनी गहरी सम्वेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि, “हम हमेशा उनके ऋणी रहेंगे” और उनके बलिदान को कभी नहीं भुलाया जाएगा.

More than 4,000 peacekeepers have lost their lives since 1948 while serving under the @UN flag.

Today we honour them for paying the ultimate sacrifice. They will not be forgotten. pic.twitter.com/TjkhkCGiLK

— António Guterres (@antonioguterres) May 27, 2021

इस वर्ष, अन्तरराष्ट्रीय यूएन शान्तिरक्षक दिवस के अवसर पर, स्थाई शान्ति व सुरक्षा की स्थापना में, युवजन की भूमिका को रेखांकित किया जा रहा है.

यूएन महासचिव ने कहा कि मध्य अफ़्रीका गणराज्य से लेकर काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य और लेबनान तक, यूएन शान्तिरक्षक हिंसा में कमी लाने और शान्ति क़ायम रखने के लिये युवाओं के साथ मिलकर काम करते हैं.

यूएन प्रमुख ने कहा कि युवा शान्तिरक्षक अपने साथ यूएन अभियानों में, नए विचारों, उम्मीदों व ऊर्जा को साथ लाते हैं, और स्थानीय आबादियों के साथ असरदार ढँग से सम्पर्क व सम्वाद स्थापित करते हैं.

इससे मैण्डेट के तहत प्रदर्शन को बेहतर बनाने और लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलती है.

“हम अपने सभी शान्तिरक्षकों के समर्पण व साहस को सलाम करते हैं – महिलाएँ व पुरुष, युवा और वृद्धजन – और हम उनकी सेवाओं व त्याग के लिये हमेशा आभारी हैं.”

“वे हमारे पूर्ण समर्थन के हक़दार हैं, और हमें साथ मिलकर काम करना जारी रखना होगा, ताकि उनके बचाव व सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिये हम हरसम्भव काम कर सकें, और उनकी सफलता के लिये हर औज़ार दे सकें.”

शान्तिरक्षकों का सम्मान

यूएन प्रमुख ने ‘डैग हैमर्शहोल्ड’ मेडल वितरण समारोह में, पिछले वर्ष और इस साल जनवरी तक सेवारत रहे, 129 शान्तिरक्षकों को मरणोपरान्त सम्मानित किया.

उन्होंने कहा कि शान्तिरक्षकों के समक्ष विशाल चुनौतियाँ व ख़तरे हैं, मगर व दुनिया के सबसे निर्बलों की रक्षा करने के लिये हर दिन काम कर रहे हैं.

ऐसे समय जब उन्हें हिंसा के साथ-साथ वैश्विक महामारी, दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

इस अवसर पर केनया की संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षक स्टैपलिन न्याबोगा को लैंगिक अधिकारों की पैरोकारी के लिये, वर्ष 2020 के संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार (UN Military Gender Advocate of the Year) से सम्मानित किया गया.

32 वर्षीया केनयाई शान्तिरक्षक ने हाल ही में सूडान के दार्फ़ूर में यूएन मिशन (UNAMID) में अपना कार्यकाल पूरा किया है, जहाँ लैंगिक मुद्दों पर उत्कृष्ट योगदान देने के लिये उन्हें चुना गया है.

इस पुरस्कार की शुरुआत 2016 में हुई जिसका उद्देश्य महिलाएँ, शान्ति व सुरक्षा मामलों पर, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव (1325) के सिद्धान्तों को बढ़ावा देने के प्रयासों को सम्मानित करना है.

संयुक्त राष्ट्र का पहला मिशन 29 मई 1948 में मध्य पूर्व में स्थापित किया गया था, जिसके बाद से अब तक 10 लाख महिलाओं व पुरुषों ने 72 शान्तिरक्षा अभियानों में अपनी सेवाएँ प्रदान की हैं.

मौजूदा समय में, 12 शान्तिरक्षा मिशनों में 89 हज़ार से ज़्यादा सैन्य, पुलिस और असैनिक कर्मचारी तैनात हैं.

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