शान्तिरक्षा और हिंसक संघर्ष की रोकथाम में यूएन पुलिस की अहम भूमिका

संयुक्त राष्ट्र पुलिस अनेक देशों में यूएन के शान्तिरक्षा अभियानों, हिंसक संघर्षों की रोकथाम और शान्ति-निर्माण के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, हैती, माली और दक्षिण सूडान में सेवारत संयुक्त राष्ट्र पुलिस आयुक्तों ने बुधवार को सुरक्षा परिषद के सदस्यों को इन प्रयासों के फलस्वरूप आ रहे बदलावों और ज़मीनी चुनौतियों से अवगत कराया है.

संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियानों के विभाग में सहायक महासचिव अलेक्जेण्डर जुएव ने देशों का आहवान करते हुए शान्तिरक्षा के लिये कार्रवाई/Action for Peacekeeping (A4P) पहल को और समर्थन दिये जाने की बात कही है. 
उन्होंने कहा कि हिंसक संघर्ष की रोकथाम और विश्व भर में लाखों-करोड़ों निर्बलों के लिये सतत शान्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह एक बेहद अहम बहुपक्षीय औज़ार है.   
यूएन अधिकारी ने A4P पहल की प्राथमिकताओं के रूप में ज़मीनी अभियानों को आगे बढ़ाना, प्रस्तावों को लागू करना और कोविड-19 संकट सहित अन्य चुनौतियों पर पार पाना  बताया. 
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र पुलिस सेवा शान्तिरक्षा अभियानों को ज़्यादा प्रभावी व मज़बूत बनाने के लिये संकल्पित है.
“A4P के ज़रिये हम आज शान्ति व सुरक्षा की चुनौतियों का बेहतर ढँग से सामना करने में सक्षम हैं, और उन लोगों की ज़िन्दगियों को बेहतर बनाने में जिनके लिये हम सेवारत हैं.”
ज़मीनी स्तर पर प्रयासरत 
प्रदर्शन व जवाबदेही के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यूएन पुलिस सदस्य देशों व अन्य साझीदार संगठनों के साथ नज़दीकी रूप से काम करती है. 
उसकी ज़िम्मेदारी नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े सभी आयामों में एक अहम भूमिका है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र पुलिस यौन उत्पीड़न व दुर्व्यवहार के मामलों में शून्य सहिष्णुता बरतती है और इसके मद्देनज़र पुलिसकर्मियों की तैनाती से पहले और मिशन में तैनाती के दौरान उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता है. 
साथ ही यूएन पुलिस की गतिविधियों से पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव को कम करने के लिये भी प्रयास किये जा रहे हैं.   
दक्षिण सूडान में यूएन मिशन (UNMISS) में पुलिस आयुक्त उनाइसी वुनीवाक़ा ने बताया कि मौजूदा युद्धविराम से रक्षा ज़िम्मेदारियों को फिर से व्यवस्थित करने का अवसर मिला है. विशेष रूप से संरक्षा प्राप्त इलाक़ों में और उसके बाहर रह रहे विस्थापितों के लिये. 
ये भी पढ़ें – डॉरीन मलाम्बो: 2020 यूएन महिला पुलिस अधिकारी पुरस्कार विजेता 
महामारी से निपटने की कार्रवाई के तहत उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर भ्रामक सूचनाओं पर रोक लगाई जा रही है, विस्थापितों का विशेष देखभाल प्रदान की जा रही है और कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिये सख़्त क्वॉरन्टीन सहित अन्य उपायों को अपनाया गया है.
मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में यूएन मिशन (MINUSCA) में अधिकारी पास्कल चैम्पियन ने बताया कि देश में राजनैतिक शान्ति समझौते को समर्थन देने में सफलता मिली है.
इसके तहत मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ नियमित सम्पर्क रखा गया और शान्तिपूर्ण ढँग से चुनाव सम्पन्न कराये गये जोकि अनपेक्षित था. 
पुलिस आयुक्त पास्कल चैम्पियन ने बताया कि मिशन में लैंगिक परिप्रेक्ष्यों को समाहित करने में यूएन मिशन काफ़ी आगे है. साथ ही उन्होंने कोरोनावायरस के फैलाव की रोकथाम के लिये उठाये गये क़दमों के बारे में भी जानकारी मुहैया कराई.
माली में संयुक्त राष्ट्र मिशन (MINUSMA) में अधिकारी इसुफ़ू याकूब ने बताया कि देश में शान्ति व आपसी मेल-मिलाप समझौते और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2382 को लागू करने में पुलिस को पूर्ण भूमिका निभानी होगी.
इसके लिये उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का स्तर बढ़ाये जाने की बात कही है. , संयुक्त राष्ट्र पुलिस अनेक देशों में यूएन के शान्तिरक्षा अभियानों, हिंसक संघर्षों की रोकथाम और शान्ति-निर्माण के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, हैती, माली और दक्षिण सूडान में सेवारत संयुक्त राष्ट्र पुलिस आयुक्तों ने बुधवार को सुरक्षा परिषद के सदस्यों को इन प्रयासों के फलस्वरूप आ रहे बदलावों और ज़मीनी चुनौतियों से अवगत कराया है.

संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियानों के विभाग में सहायक महासचिव अलेक्जेण्डर जुएव ने देशों का आहवान करते हुए शान्तिरक्षा के लिये कार्रवाई/Action for Peacekeeping (A4P) पहल को और समर्थन दिये जाने की बात कही है. 

उन्होंने कहा कि हिंसक संघर्ष की रोकथाम और विश्व भर में लाखों-करोड़ों निर्बलों के लिये सतत शान्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह एक बेहद अहम बहुपक्षीय औज़ार है.   

यूएन अधिकारी ने A4P पहल की प्राथमिकताओं के रूप में ज़मीनी अभियानों को आगे बढ़ाना, प्रस्तावों को लागू करना और कोविड-19 संकट सहित अन्य चुनौतियों पर पार पाना  बताया. 

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र पुलिस सेवा शान्तिरक्षा अभियानों को ज़्यादा प्रभावी व मज़बूत बनाने के लिये संकल्पित है.

“A4P के ज़रिये हम आज शान्ति व सुरक्षा की चुनौतियों का बेहतर ढँग से सामना करने में सक्षम हैं, और उन लोगों की ज़िन्दगियों को बेहतर बनाने में जिनके लिये हम सेवारत हैं.”

ज़मीनी स्तर पर प्रयासरत 

प्रदर्शन व जवाबदेही के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यूएन पुलिस सदस्य देशों व अन्य साझीदार संगठनों के साथ नज़दीकी रूप से काम करती है. 

उसकी ज़िम्मेदारी नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े सभी आयामों में एक अहम भूमिका है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र पुलिस यौन उत्पीड़न व दुर्व्यवहार के मामलों में शून्य सहिष्णुता बरतती है और इसके मद्देनज़र पुलिसकर्मियों की तैनाती से पहले और मिशन में तैनाती के दौरान उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता है. 

साथ ही यूएन पुलिस की गतिविधियों से पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव को कम करने के लिये भी प्रयास किये जा रहे हैं.   

दक्षिण सूडान में यूएन मिशन (UNMISS) में पुलिस आयुक्त उनाइसी वुनीवाक़ा ने बताया कि मौजूदा युद्धविराम से रक्षा ज़िम्मेदारियों को फिर से व्यवस्थित करने का अवसर मिला है. विशेष रूप से संरक्षा प्राप्त इलाक़ों में और उसके बाहर रह रहे विस्थापितों के लिये. 

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महामारी से निपटने की कार्रवाई के तहत उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर भ्रामक सूचनाओं पर रोक लगाई जा रही है, विस्थापितों का विशेष देखभाल प्रदान की जा रही है और कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिये सख़्त क्वॉरन्टीन सहित अन्य उपायों को अपनाया गया है.

मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में यूएन मिशन (MINUSCA) में अधिकारी पास्कल चैम्पियन ने बताया कि देश में राजनैतिक शान्ति समझौते को समर्थन देने में सफलता मिली है.

इसके तहत मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ नियमित सम्पर्क रखा गया और शान्तिपूर्ण ढँग से चुनाव सम्पन्न कराये गये जोकि अनपेक्षित था. 

पुलिस आयुक्त पास्कल चैम्पियन ने बताया कि मिशन में लैंगिक परिप्रेक्ष्यों को समाहित करने में यूएन मिशन काफ़ी आगे है. साथ ही उन्होंने कोरोनावायरस के फैलाव की रोकथाम के लिये उठाये गये क़दमों के बारे में भी जानकारी मुहैया कराई.

माली में संयुक्त राष्ट्र मिशन (MINUSMA) में अधिकारी इसुफ़ू याकूब ने बताया कि देश में शान्ति व आपसी मेल-मिलाप समझौते और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2382 को लागू करने में पुलिस को पूर्ण भूमिका निभानी होगी.

इसके लिये उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का स्तर बढ़ाये जाने की बात कही है. 

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