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शाहीन बाग मामले पर सुप्रीम कोर्ट अब 23 मार्च को करेगा सुनवाई

शाहीन बाग मामले पर सुप्रीम कोर्ट अब 23 मार्च को करेगा सुनवाई
February 26
08:27 2020

नई दिल्ली, 26 फरवरी । सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग मामले की सुनवाई टाल दी है। कोर्ट ने इस मामले पर होली की छुट्टी के बाद 23 मार्च को सुनवाई करने का आदेश दिया है।

जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि माहौल अभी सुनवाई के लायक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले का दायरा बढ़ाना नहीं चाहते हैं जैसे कि दिल्ली में हुई हिंसा पर संज्ञान लेना।

सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा कि जो कुछ भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन हम सुनवाई का दायरा नहीं बढ़ाना चाहते हैं। हमारे पास सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति दी जानी चाहिए। उसके बाद क्या हुआ, हम इस पर सुनवाई नहीं करेंगे। इस पर हाई कोर्ट फैसला करेगा।

जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि हम अपना मत रखना चाहते हैं। तब सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कृपया ऐसा मत कीजिए। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि हमें करने दीजिए। अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो ये देश के प्रति अपना संवैधानिक दायित्व पूरा नहीं करने जैसा होगा। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि पुलिस में प्रोफेशनलिज्म का अभाव ही मुख्य समस्या है। आप देखें कि इंग्लैंड में पुलिस कैसा बर्ताव करती है। पुलिस लोगों को ऐसा करने कैसे दे रही है। अगर कानून का पालन होगा तो ऐसी बातें कभी नहीं होंगी।

पिछली 24 फरवरी को कोर्ट ने सुनवाई आज तक के लिए टाल दी थी। प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने के लिए समझाने के लिए भेजे गए वार्ताकारों संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने 24 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में एक रिपोर्ट सौंपी थी।जस्टिस संजय किशन कौल और केएम जोसेफ की बेंच ने कहा था कि हम रिपोर्ट देखकर आगे की सुनवाई करेंगे।

पिछली 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और वकील साधना रामचंद्रन को रास्ता रोककर बैठे लोगों से बात करने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि वे लोगों को वैकल्पिक जगह पर विरोध करने के लिए समझाएं। कोर्ट ने कहा था कि हर किसी को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन इसकी एक सीमा है। कोर्ट ने कहा था कि हमारी चिंता सीमित है। आज अगर एक वर्ग ऐसा कर रहा है तो कल दूसरा वर्ग दूसरे मसले पर ऐसा ही करेगा। हर व्यक्ति रोड पर आ जाएगा।

कोर्ट ने कहा था कि अगर हमारी पहल असफल होती है तो हम इसे स्थानीय प्रशासन पर छोड़ देंगे। हम उम्मीद करते हैं कि प्रदर्शनकारी बातों को समझेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सुझाव दिया था कि चाहें तो वे भी प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह का ऑफर दे सकते हैं। तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि ये मैसेज नहीं जाना चाहिए कि पुलिस प्रदर्शनकारियों के समक्ष घुटनों के बल खड़ी है। जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा था कि तब इस मामले के पहले ही आपको कोई कदम उठा लेना चाहिए था। तुषार मेहता ने कहा था कि शाहीन बाग में महिलाओं और बच्चों को ढाल बनाया गया है। हम उनसे मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पूरे शहर को बंधक बना लिया गया है।

पिछली 10 फरवरी को इस मामले पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विरोध का अधिकार है, लेकिन जगह ऐसी हो जहां दूसरों को परेशानी न हो। इस तरह अनिश्चित काल तक सार्वजनिक सड़क को ब्लॉक कर देना उचित नहीं। कोर्ट ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। उसी दिन सुनवाई के दौरान शाहीनबाग की तीन महिलाओं ने भी खुद का पक्ष रखने की मांग की थी। इन महिलाओं की ओर से कहा गया कि उनके बच्चे को स्कूल में पाकिस्तानी कहा जाता है।

चीफ जस्टिस एसए बोब्डे ने कहा था कि किसी बच्चे को स्कूल में पाकिस्तानी कहा गया, ये कोर्ट के समक्ष विषय नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा था कि क्या चार महीने का बच्चा प्रदर्शन करने गया था? चीफ जस्टिस ने कहा था कि हम इस समय नागरिकता संशोधन अधिनियम या किसी बच्चे को पाकिस्तानी कहा गया, इस बाबत सुनवाई नहीं कर रहे हैं।

(हि.स.)

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