शेख़ा लतीफ़ा के सम्बन्ध में ठोस जानकारी दिये जाने की माँग

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से शेख़ा लतीफ़ा मोहम्मद अल मख़तूम के बारे में अर्थपूर्ण जानकारी मुहैया कराए जाने की माँग की है. साथ ही ये भी माँग की गई है कि शेख़ा लतीफ़ा की सुरक्षा व कल्याण के बारे में, बिना देरी के आश्वासन दिये जाएँ. 

ख़बरों के अनुसार, शेख़ा लतीफ़ा, दुबई के अमीर और यूएई के प्रधानमन्त्री मोहम्मद बिन राशिद अल मख़तूम की बेटी हैं, और ख़बरों के अनुसार, उन्हें वर्ष 2018 में उस समय अग़वा किया गया था जब वो देश से बाहर जाने की कोशिश कर रही थीं.
इस वर्ष, फ़रवरी महीने में एक वीडियो सामने आई थी जो दर्शाती है कि शेख़ा लतीफ़ा को उनकी रज़ामन्दी के बग़ैर रखा गया है और उन्हें आज़ादी हासिल नहीं है.
महिलाओं के विरुद्ध हिंसा पर यूएन के विशेष रैपोर्टेयर सहित, संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चिन्ता जताई है कि फ़रवरी में उस वीडियो के सामने के बाद, स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने मंगलवार को जारी अपने वक्तव्य में शेख़ा लतीफ़ा की सुरक्षा और सलामती के बारे में, बिना देरी भरोसेमन्द जानकारी मुहैया कराए जाने का आग्रह किया है.
शेख़ा लतीफ़ा को जिन परिस्थितियों में रखा गया है, उनके बारे में जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से पहले भी आधिकारिक स्तर पर अनुरोध किया जा चुका है.
“अमीरात प्रशासन की ओर से जारी किया गया बयान, केवल यही बताता है कि उनका घर पर ख़याल रखा जा रहा है, इस समय पर्याप्त नहीं है.”
विशेष रैपोर्टेयरों ने ज़ोर देकर कहा है कि शेख़ा लतीफ़ा के मानवाधिकारों का उल्लंघन किये जाने के आरोपों और उनके जीवन पर सम्भावित ख़तरे से वे बेहद चिन्तित हैं.
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, शेख़ा लतीफ़ा अपनी आज़ादी से वंचित हैं, उनका बाहरी दुनिया से कोई सम्पर्क नहीं है.
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा कि बिना किसी सम्पर्क के हिरासत में रखे जाने के नुक़सानदेह शारीरिक व मनोवैज्ञानिक दुष्परिणाम हो सकते हैं.
उनके मुताबिक़ इस बर्ताव को क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार की श्रेणी में रखा जा सकता है.
इसके मद्देनज़र, यूएन विशेषज्ञों ने कहा है कि शेख़ा लतीफ़ा के जीवित होने और उनकी कुशलता के बारे में जानकारी तत्काल उपलब्ध कराई जानी होगी.
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने उन परिस्थितियों के स्वतन्त्र रूप से सत्यापन अपील की है जिनमें शेख़ा लतीफ़ा को रखा गया है, और साथ ही उनकी तात्कालिक रिहाई की पुकार लगाई है.
स्पेशल रैपोर्टेयर और वर्किंग ग्रुप संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया का हिस्सा हैं. ये विशेष प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार व्यवस्था में सबसे बड़ी स्वतन्त्र संस्था है. ये दरअसल परिषद की स्वतन्त्र जाँच निगरानी प्रणाली है जो किसी ख़ास देश में किसी विशेष स्थिति या दुनिया भर में कुछ प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करती है. स्पेशल रैपोर्टेयर स्वैच्छिक रूप से काम करते हैं; वो संयक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें उनके काम के लिये कोई वेतन नहीं मिलता है. ये रैपोर्टेयर किसी सरकार या संगठन से स्वतन्त्र होते हैं और वो अपनी निजी हैसियत में काम करते हैं, संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से शेख़ा लतीफ़ा मोहम्मद अल मख़तूम के बारे में अर्थपूर्ण जानकारी मुहैया कराए जाने की माँग की है. साथ ही ये भी माँग की गई है कि शेख़ा लतीफ़ा की सुरक्षा व कल्याण के बारे में, बिना देरी के आश्वासन दिये जाएँ. 

ख़बरों के अनुसार, शेख़ा लतीफ़ा, दुबई के अमीर और यूएई के प्रधानमन्त्री मोहम्मद बिन राशिद अल मख़तूम की बेटी हैं, और ख़बरों के अनुसार, उन्हें वर्ष 2018 में उस समय अग़वा किया गया था जब वो देश से बाहर जाने की कोशिश कर रही थीं.

इस वर्ष, फ़रवरी महीने में एक वीडियो सामने आई थी जो दर्शाती है कि शेख़ा लतीफ़ा को उनकी रज़ामन्दी के बग़ैर रखा गया है और उन्हें आज़ादी हासिल नहीं है.

महिलाओं के विरुद्ध हिंसा पर यूएन के विशेष रैपोर्टेयर सहित, संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चिन्ता जताई है कि फ़रवरी में उस वीडियो के सामने के बाद, स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने मंगलवार को जारी अपने वक्तव्य में शेख़ा लतीफ़ा की सुरक्षा और सलामती के बारे में, बिना देरी भरोसेमन्द जानकारी मुहैया कराए जाने का आग्रह किया है.

शेख़ा लतीफ़ा को जिन परिस्थितियों में रखा गया है, उनके बारे में जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से पहले भी आधिकारिक स्तर पर अनुरोध किया जा चुका है.

“अमीरात प्रशासन की ओर से जारी किया गया बयान, केवल यही बताता है कि उनका घर पर ख़याल रखा जा रहा है, इस समय पर्याप्त नहीं है.”

विशेष रैपोर्टेयरों ने ज़ोर देकर कहा है कि शेख़ा लतीफ़ा के मानवाधिकारों का उल्लंघन किये जाने के आरोपों और उनके जीवन पर सम्भावित ख़तरे से वे बेहद चिन्तित हैं.

अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, शेख़ा लतीफ़ा अपनी आज़ादी से वंचित हैं, उनका बाहरी दुनिया से कोई सम्पर्क नहीं है.

मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा कि बिना किसी सम्पर्क के हिरासत में रखे जाने के नुक़सानदेह शारीरिक व मनोवैज्ञानिक दुष्परिणाम हो सकते हैं.

उनके मुताबिक़ इस बर्ताव को क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार की श्रेणी में रखा जा सकता है.

इसके मद्देनज़र, यूएन विशेषज्ञों ने कहा है कि शेख़ा लतीफ़ा के जीवित होने और उनकी कुशलता के बारे में जानकारी तत्काल उपलब्ध कराई जानी होगी.

मानवाधिकार विशेषज्ञों ने उन परिस्थितियों के स्वतन्त्र रूप से सत्यापन अपील की है जिनमें शेख़ा लतीफ़ा को रखा गया है, और साथ ही उनकी तात्कालिक रिहाई की पुकार लगाई है.

स्पेशल रैपोर्टेयर और वर्किंग ग्रुप संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया का हिस्सा हैं. ये विशेष प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार व्यवस्था में सबसे बड़ी स्वतन्त्र संस्था है. ये दरअसल परिषद की स्वतन्त्र जाँच निगरानी प्रणाली है जो किसी ख़ास देश में किसी विशेष स्थिति या दुनिया भर में कुछ प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करती है. स्पेशल रैपोर्टेयर स्वैच्छिक रूप से काम करते हैं; वो संयक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें उनके काम के लिये कोई वेतन नहीं मिलता है. ये रैपोर्टेयर किसी सरकार या संगठन से स्वतन्त्र होते हैं और वो अपनी निजी हैसियत में काम करते हैं

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