साइप्रस के सभी नागरिकों के लिये कोशिशें जारी रखने का संकल्प

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को संकल्प ज़ाहिर किया है कि भविष्य में होने वाली वार्ताओं में भी, वो साइप्रस के सभी नागरिकों के हितों का प्रतिनिधित्व जारी रखेंगे. भूमध्यसागर के इस विभाजित द्वीप पर जारी गतिरोध को तोड़ने और तनाव दूर करने के उददेश्य से आयोजित ताज़ा बैठक, साझा ज़मीन पर सहमति के बग़ैर ही समाप्त हो गई.

ग्रीक-साइप्रस प्रतिनिधियों और तुर्क-साइप्रस प्रतिनिधियों के बीच, हाल के दिनों में जिनीवा में बैठक हुई, जिसके बाद महासचिव गुटेरेश ने गुरुवार को पत्रकारों को सम्बोधित किया.
“सच्चाई यह है कि हमारे प्रयासों के बावजूद, हम अभी पर्याप्त साझा ज़मीन की जलाश नहीं कर पाए हैं ताकि साइप्रस समस्या के निपटारे के सम्बन्ध में औपचारिक वार्ता को फिर से शुरू किया जा सके.”

Read the full transcript of Press Conference by the @UN Secretary-General @antonioguterres on the Informal 5+ 1 Meeting on #Cyprus. https://t.co/c5LmBlZZuE— UN Cyprus (@UN_CYPRUS) April 29, 2021

यूएन प्रमुख ने उम्मीद जताई है कि निकट भविष्य में फिर से बैठक के लिये सहमति बनी है.
दशकों से साइप्रस में, उत्तर में तुर्क-साइप्रस और दक्षिण में ग्रीक साइप्रस के बीच तनाव है, और वर्ष 1974 से समुदाय विभाजित हैं.  
समझौते से दूर
चार वर्ष पहले, यूएन प्रमुख ने दोनों पक्षों, ग्रीक-साइप्रस प्रतिनिधियों और तुर्क-साइप्रस प्रतिनिधियों में सहमति बनाने के प्रयासों के तहत, स्विटज़रलैण्ड के क्राँ-मोन्ताना में बैठक का आयोजन किया.
हालांकि, विस्तार से चर्चा के बावजूद, वो बैठक भी बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी.
चर्चा के लिये छह अहम मुद्दों को शामिल किया गया, इनमें सुरक्षा, क्षेत्रीय सीमाएँ और सत्ता के बँटवारे सहित अन्य विषय थे.
साइप्रस मुद्दे के निपटारे के लिये इन ताज़ा प्रयासों से पहले, यूएन प्रमुख ने प्रगति की सम्भावनाओं पर यथार्थवादी रुख़ अपनाए जाने की बात कही थी.  
उन्होंने कहा कि तुर्क-साइप्रस प्रतिनिधिमण्डल ने बैठक से 24 घण्टे पहले अपने रुख़ को स्पष्ट किया था,
इसके मुताबिक साइप्रस मुद्दे के निपटारे के लिये, वर्षों से किये गए अनेक प्रयास विफल रहे हैं, जिनमें क्राँ-मोन्ताना में हुई पिछली बैठक भी शामिल है.
प्रतिनिधिमण्डल का मानना है कि द्वि-मण्डलीय (bi-zonal), द्वि-सामुदायिक (bi-communal) फ़ेडरेशन पर बातचीत की कोशिशें फलीभूत नहीं हो पाई हैं.
उधर, ग्रीक-साइप्रस पक्ष के अनुसार, बातचीत को वहीं से शुरू किया जाना होगा जहाँ क्राँ-मोन्ताना में बैठक समाप्त हुई थी.
इसमें, द्वि-मण्डलीय, द्वि-सामुदायिक फ़ेडरेशन पर आधारित समझौते के प्रयास किये जाने होंगे.
महासचिव गुटेरेश ने ग्रीक-साइप्रस और तुर्क-साइप्रस के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत और
तुर्की, ग्रीस व ब्रिटेन के विदेश मन्त्रियों के साथ बातचीत के बाद इस आशय की जानकारी दी है.
‘उम्मीद नहीं छोड़ी’
यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है, और उनका एजेण्डा बेहद सरल है:
साइप्रस मुद्दे के समाधान के लिये यूएन की ओर से इस बैठक के प्रयास, हाल के महीनों में अवर महासचिव जेन हॉल ल्यूट की तरफ़ से, पिछले कई महीनों की चर्चा के बाद, आगे बढ़ी है.
“सख़्ती से हर साइप्रस नागरिक की सुरक्षा व कल्याण के लिये लड़ना, ग्रीक-साइप्रस के लोगों और तुर्क-साइप्रस के लोगों के लिये, जो शान्ति व समृद्धि में एक साथ रहने के हक़दार हैं.”
द्वीपीय देश साइप्रस में सुरक्षा बनाए रखना, लम्बे समय से, संयुक्त राष्ट्र का शान्तिरक्षा मिशन रहा है: जिसका नाम है साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा बल (UNFICYP).
ये शान्तिरक्षा मिशन 1964 में गठित किया गया था जिसका मक़सद ग्रीक-साइप्रस और तुर्क-साइप्रस समुदायों के बीच, आगे किसी तरह की लड़ाई को रोकना और सामान्य हालात बहाल करना था. इस मिशन की ज़िम्मेदारियों का दायरा 1974 में बढ़ाया गया.
उससे पहले ग्रीस के साथ एकीकरण की हिमायत करने वाले तत्वों ने सत्ता पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश की थी. तत्पश्चात, तुर्की ने सैन्य हस्तक्षेप किया और द्वीप के उत्तरी हिस्से पर क़ब्ज़ा कर लिया था.
अगस्त 1974 में युद्धविराम लागू होने के बाद से, यूएन शान्तिरक्षा मिशन ने युद्धविराम रेखाओं की निगरानी की है, मानवीय सहायता मुहैया कराई है, और तुर्क-साइप्रस और ग्रीस-साइप्रस के बीच ‘बफ़र ज़ोन’ बनाए रखा है.
तुर्क-साइप्रस की सेनाएँ उत्तरी हिस्से में और ग्रीक-साइप्रस की सेनाएँ दक्षिणी हिस्से पर क़ाबिज़ हैं., संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को संकल्प ज़ाहिर किया है कि भविष्य में होने वाली वार्ताओं में भी, वो साइप्रस के सभी नागरिकों के हितों का प्रतिनिधित्व जारी रखेंगे. भूमध्यसागर के इस विभाजित द्वीप पर जारी गतिरोध को तोड़ने और तनाव दूर करने के उददेश्य से आयोजित ताज़ा बैठक, साझा ज़मीन पर सहमति के बग़ैर ही समाप्त हो गई.

ग्रीक-साइप्रस प्रतिनिधियों और तुर्क-साइप्रस प्रतिनिधियों के बीच, हाल के दिनों में जिनीवा में बैठक हुई, जिसके बाद महासचिव गुटेरेश ने गुरुवार को पत्रकारों को सम्बोधित किया.

“सच्चाई यह है कि हमारे प्रयासों के बावजूद, हम अभी पर्याप्त साझा ज़मीन की जलाश नहीं कर पाए हैं ताकि साइप्रस समस्या के निपटारे के सम्बन्ध में औपचारिक वार्ता को फिर से शुरू किया जा सके.”

यूएन प्रमुख ने उम्मीद जताई है कि निकट भविष्य में फिर से बैठक के लिये सहमति बनी है.

दशकों से साइप्रस में, उत्तर में तुर्क-साइप्रस और दक्षिण में ग्रीक साइप्रस के बीच तनाव है, और वर्ष 1974 से समुदाय विभाजित हैं.  

समझौते से दूर

चार वर्ष पहले, यूएन प्रमुख ने दोनों पक्षों, ग्रीक-साइप्रस प्रतिनिधियों और तुर्क-साइप्रस प्रतिनिधियों में सहमति बनाने के प्रयासों के तहत, स्विटज़रलैण्ड के क्राँ-मोन्ताना में बैठक का आयोजन किया.

हालांकि, विस्तार से चर्चा के बावजूद, वो बैठक भी बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी.

चर्चा के लिये छह अहम मुद्दों को शामिल किया गया, इनमें सुरक्षा, क्षेत्रीय सीमाएँ और सत्ता के बँटवारे सहित अन्य विषय थे.

साइप्रस मुद्दे के निपटारे के लिये इन ताज़ा प्रयासों से पहले, यूएन प्रमुख ने प्रगति की सम्भावनाओं पर यथार्थवादी रुख़ अपनाए जाने की बात कही थी.  

उन्होंने कहा कि तुर्क-साइप्रस प्रतिनिधिमण्डल ने बैठक से 24 घण्टे पहले अपने रुख़ को स्पष्ट किया था,

इसके मुताबिक साइप्रस मुद्दे के निपटारे के लिये, वर्षों से किये गए अनेक प्रयास विफल रहे हैं, जिनमें क्राँ-मोन्ताना में हुई पिछली बैठक भी शामिल है.

प्रतिनिधिमण्डल का मानना है कि द्वि-मण्डलीय (bi-zonal), द्वि-सामुदायिक (bi-communal) फ़ेडरेशन पर बातचीत की कोशिशें फलीभूत नहीं हो पाई हैं.

उधर, ग्रीक-साइप्रस पक्ष के अनुसार, बातचीत को वहीं से शुरू किया जाना होगा जहाँ क्राँ-मोन्ताना में बैठक समाप्त हुई थी.

इसमें, द्वि-मण्डलीय, द्वि-सामुदायिक फ़ेडरेशन पर आधारित समझौते के प्रयास किये जाने होंगे.

महासचिव गुटेरेश ने ग्रीक-साइप्रस और तुर्क-साइप्रस के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत और
तुर्की, ग्रीस व ब्रिटेन के विदेश मन्त्रियों के साथ बातचीत के बाद इस आशय की जानकारी दी है.

‘उम्मीद नहीं छोड़ी’

यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है, और उनका एजेण्डा बेहद सरल है:

साइप्रस मुद्दे के समाधान के लिये यूएन की ओर से इस बैठक के प्रयास, हाल के महीनों में अवर महासचिव जेन हॉल ल्यूट की तरफ़ से, पिछले कई महीनों की चर्चा के बाद, आगे बढ़ी है.

“सख़्ती से हर साइप्रस नागरिक की सुरक्षा व कल्याण के लिये लड़ना, ग्रीक-साइप्रस के लोगों और तुर्क-साइप्रस के लोगों के लिये, जो शान्ति व समृद्धि में एक साथ रहने के हक़दार हैं.”

द्वीपीय देश साइप्रस में सुरक्षा बनाए रखना, लम्बे समय से, संयुक्त राष्ट्र का शान्तिरक्षा मिशन रहा है: जिसका नाम है साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा बल (UNFICYP).

ये शान्तिरक्षा मिशन 1964 में गठित किया गया था जिसका मक़सद ग्रीक-साइप्रस और तुर्क-साइप्रस समुदायों के बीच, आगे किसी तरह की लड़ाई को रोकना और सामान्य हालात बहाल करना था. इस मिशन की ज़िम्मेदारियों का दायरा 1974 में बढ़ाया गया.

उससे पहले ग्रीस के साथ एकीकरण की हिमायत करने वाले तत्वों ने सत्ता पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश की थी. तत्पश्चात, तुर्की ने सैन्य हस्तक्षेप किया और द्वीप के उत्तरी हिस्से पर क़ब्ज़ा कर लिया था.

अगस्त 1974 में युद्धविराम लागू होने के बाद से, यूएन शान्तिरक्षा मिशन ने युद्धविराम रेखाओं की निगरानी की है, मानवीय सहायता मुहैया कराई है, और तुर्क-साइप्रस और ग्रीस-साइप्रस के बीच ‘बफ़र ज़ोन’ बनाए रखा है.

तुर्क-साइप्रस की सेनाएँ उत्तरी हिस्से में और ग्रीक-साइप्रस की सेनाएँ दक्षिणी हिस्से पर क़ाबिज़ हैं.

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