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साजिशन बदनाम करने का प्रयास कर रही है उत्तर प्रदेश पुलिस: विहिप

साजिशन बदनाम करने का प्रयास कर रही है उत्तर प्रदेश पुलिस: विहिप
December 05
19:19 2018

नयी दिल्ली : विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में दो दिन पहले हुई घटना में पुलिस अधिकारी सहित दो लोगों की मौत पर दुख व्यक्त किया है और प्रदेश पुलिस पर अपनी गलतियों एवं नाकामी को छिपाने के लिए झूठी कहानियां गढ़ने का आरोप लगाया है।

विहिप के संयुक्त महासचिव डाॅ. सुरेन्द्र जैन ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में उत्तर प्रदेश पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में गो हत्यारों को बचाने एवं विहिप को साजिशन बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस घटना की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) पर भरोसा जताते हुए कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट से दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि तीन दिसंबर को हुई दुर्घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इंस्पेक्टर सुबोध और गांव के एक युवक सुमित की जिन परिस्थितियों में हत्या हुई उस पर विहिप को बहुत खेद है। विहिप का मानना है कि लोकतंत्र में हत्या का कोई स्थान नहीं हो सकता लेकिन मीडिया के एक वर्ग ने इस दुर्घटना का ठीकरा एक विचारधारा विशेष पर फोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि तथ्यों को जांचने पर यह पाया गया कि सत्य इन से कहीं अलग है। विहिप किसी निहित स्वार्थों के द्वारा प्रेरित इस षडयंत्र की घोर निंदा करती है।

डॉ. जैन ने कहा कि एक गांव में कुछ लोगों को गायों को मारते हुए और कटी गायों के अवशेष देखने से आक्रोशित कुछ युवकों ने गायों के हत्यारों को पकड़ने की मांग को लेकर धरना दिया था जो विहिप या अन्य किसी हिन्दू संगठन के सदस्य नहीं थे। कई लोग विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थक थे लेकिन गायों की हत्या को लेकर एकजुट थे। उन्होंने कहा कि गायों को इज्तिमा के आयोजन पर लाखों मुसलमानों की भीड़ के स्वागत के लिए काटा गया था जिससे कानून व्यवस्था खराब हुई। आक्रोश इसलिए भी था कि वहां पर और भी कई अवैध बूचड़खानों में गायें काटी जाती हैं।

उन्होंने कहा कि आक्रोश प्रदर्शन के साथ-साथ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने के लिए एक युवक योगेश राज अपने कुछ साथियों के साथ जाता है और थाने से लगभग सवा एक बजे मुकदमा दर्ज करा कर वापस जाता है जबकि 1:35 बजे इंस्पेक्टर सुबोध की दुर्भाग्यजनक परिस्थितियों में हत्या हो जाती है। मीडिया का एक वर्ग बिना किसी तहकीकात किए उस हत्या का दोष एक संगठन विशेष पर लगाने का षडयंत्र करता है। उन्होंने कहा कि जिस समय मामले को शांत कराने का प्रयास किया जाता है तब एक पुलिस अधिकारी के सिर पर पत्थर लगता है। वह अधिकारी यह समझता है कि वहां खड़े एक युवक सुमित ने उसे पत्थर मारा तो वह अपनी पिस्तौल निकालकर उसकी छाती में गोली मार देता है। उसके बाद ही गांव के लोग आक्रोशित होते हैं और पुलिस अधिकारी की जान ले लेते हैं।

उन्होंने कहा कि बिना किसी जांच के, किसी संगठन या व्यक्ति को दोष देना, कदापि उचित नहीं है। किसी एसआईटी की जांच नहीं हुई और उसके बिना हिंदू संगठनों का नाम लेने के पीछे कोई एजेंडा होगा। प्रश्न यह है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 87 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज होता है जबकि केवल चार लोगों को ही इन संगठनों से जुड़ा हुआ बताया जाता है। इस घटना के बाद जिस तरह से गांव में पुलिसिया हिंसा का तांडव होता है वह भी घोर निंदनीय है। आज उस गांव में चारों तरफ मौत का सन्नाटा छा गया है। बिना जांच के इस तरह के पुलिस अत्याचार से ऐसा लगता है जैसे वे अपने किसी पाप को छुपाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि बुलंदशहर पुलिस पिछले दिनों गो हत्या रोकने और चंद ग्रामीणों की भीड़ को संभालने में विफल रही और एक पुलिस अधिकारी द्वारा अपनी गलतियों व नाकामियों को छिपाने के लिए जानबूझकर गोली मारी गई। पुलिस अब अत्याचार कर रही है और झूठी कहानियां गढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विहिप को राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी पर पूर्ण विश्वास है और उसकी रिपोर्ट आने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

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