सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी – ‘हर किसी के लिये लाभप्रद’

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) मिशेल बाशेलेट ने ‘महिलाओं की स्थिति पर आयोग’ को सम्बोधित करते हुए कहा है कि महिलाओं व लड़कियों को सार्वजनिक जीवन में भागीदारी के लिये पूर्ण रूप से सशक्त बनाना, सही और बुद्धिमान चयन है. अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भी मंगलवार को महिला आयोग के सत्र को सम्बोधित किया, जिसे ऐतिहासिक माना जा रहा है. 

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने आयोग के 65वें सत्र को अपने सम्बोधन में कहा, “आवाज़ बुलन्द करना और निर्णय प्रक्रिया में योगदान देना, हर मनुष्य का अधिकार है – पुरुषों जितना हक़ महिलाओं का भी.”

Women and girls, you have the right torepresent your communities,participate in public life,take up space and be leaders.#CSW65 #GenerationEquality pic.twitter.com/gLVNjkL5hI— UN Women (@UN_Women) March 16, 2021

“यह हर किसी के लिये, बेहतर नीतियों के लिये एक बलशाली औज़ार भी है.”
उन्होंने तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि जिन देशों में महिलाओं का सरकार में समुचित प्रतिनिधित्व है, वहाँ सामाजिक संरक्षा में निवेश ज़्यादा हुए हैं, और न्यायोचित जलवायु कार्रवाई पर ध्यान केन्द्रित किया गया है.
साथ ही, महिलाओं की शान्ति वार्ता में भागीदारी और दीर्घकालीन समाधानों में सम्बन्ध को रेखांकित किया गया है, और स्पष्ट किया गया है कि निजी क्षेत्र में महिला नेतृत्व से अनेक मापदण्डों पर व्यवसायिक प्रदर्शन बेहतर होता है.
मिशेल बाशेलेट ने बताया कि महामारी के दौरान जिन देशों में बागडोर महिला नेताओं के हाथ में थी, वहाँ सार्वजनिक भलाई के लिये, वैज्ञानिक विशेषज्ञता के आधार पर प्रभावी नीतियाँ अपनाई गईं. 
“हम वास्तविकता को दरकिनार नहीं कर सकते: राजनैतिक जीवन में महिलाओं की बराबर भागीदारी के बढ़ने की रफ़्तार बेहद धीमी है.”
बताया गया है कि मौजूदा गति से, राष्ट्रीय संसदों में लैंगिक बराबरी, वर्ष 2063 से पहले हासिल नहीं की जा सकेगी. 
यूएन उच्चायुक्त ने सभी नेताओं का आहवान किया है कि मन्त्रिण्डलों में 50 फ़ीसदी महिलाओं की नियुक्ति की जानी होगी, विविधता व समावेशन को सुनिश्चित किया जाना होगा, और अस्थाई विशेष उपायों के इस्तेमाल को बेहतर बनाना होगा. 
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने ज़ोर देकर कहा कि उन महिलाओं के साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत है जोकि समानता व सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं. 
इनमें बहुत सी युवा कार्यकर्ता हैं, जिन्हें नागरिक समाज के लिये सीमित जगह में ही, जोखिमों के बीच काम करना पड़ता है.
उन्होंने ज़्यादा लचीले ढंग से वित्तीय संसाधन, समर्थन और अनुकूल माहौल मुहैया कराए जाने की पैरवी की है ताकि वे किसी पाबन्दी या बदले की कार्रवाई के भय के बिना अपना काम जारी रख सकें. 
यूएन अधिकारी ने याद दिलाया है कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम के लिये और ज़्यादा निवेश किया जाना होगा. 
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की पूर्ण व बराबर भागीदारी को तेज़ी से आगे बढ़ाना होगा. 
ऐतिहासिक सम्बोधन
अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने मंगलवार को यूएन महिला आयोग को अपने वीडियो सम्बोधन में सचेत किया कि महिलाओं का दर्जा, लोकतन्त्र का दर्जा है.
लोकतन्त्र मानवाधिकारों की रक्षा करता है, क़ानून के राज को सर्वोपरि बनाता है और साझा समृद्धि पाने का एक माध्यम व साधन है, जिसमें हर किसी की एक समान आवाज़ होगी. 
उन्होंने कहा कि यह एक लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है जिसके लिये लगातार बेहतरी लाना और सतर्कता बरता जाना अहम है. 
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने आगाह किया कि दुनिया भर में लोकतन्त्र पर ख़तरा मंडरा रहा है, और आज़ादी में व्यथित कर देने वाली गिरावट आई है. 
“एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट, और आर्थिक संकट से जूझते समय, यह अहम है कि हम लोकतन्त्र की रक्षा करना जारी रखें.” 
इस पृष्ठभूमि में उन्होंने बताया कि अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र व व्यापक बहुपक्षीय प्रणाली के साथ अपने सम्बन्धों को मज़बूती प्रदान कर रहा है. 
इस प्रक्रिया के तहत अमेरिका की मानवाधिकार परिषद में फिर से वापसी होनी है.
उपराष्ट्रपति हैरिस ने कहा कि लोकतन्त्र का दर्जा बुनियादी रूप से महिलाओं के सशक्तिकरण पर निर्भर है, और महिलाओं की भागीदारी, लोकतन्त्र को मज़बूत बनाती है. , संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) मिशेल बाशेलेट ने ‘महिलाओं की स्थिति पर आयोग’ को सम्बोधित करते हुए कहा है कि महिलाओं व लड़कियों को सार्वजनिक जीवन में भागीदारी के लिये पूर्ण रूप से सशक्त बनाना, सही और बुद्धिमान चयन है. अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भी मंगलवार को महिला आयोग के सत्र को सम्बोधित किया, जिसे ऐतिहासिक माना जा रहा है. 

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने आयोग के 65वें सत्र को अपने सम्बोधन में कहा, “आवाज़ बुलन्द करना और निर्णय प्रक्रिया में योगदान देना, हर मनुष्य का अधिकार है – पुरुषों जितना हक़ महिलाओं का भी.”

“यह हर किसी के लिये, बेहतर नीतियों के लिये एक बलशाली औज़ार भी है.”

उन्होंने तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि जिन देशों में महिलाओं का सरकार में समुचित प्रतिनिधित्व है, वहाँ सामाजिक संरक्षा में निवेश ज़्यादा हुए हैं, और न्यायोचित जलवायु कार्रवाई पर ध्यान केन्द्रित किया गया है.

साथ ही, महिलाओं की शान्ति वार्ता में भागीदारी और दीर्घकालीन समाधानों में सम्बन्ध को रेखांकित किया गया है, और स्पष्ट किया गया है कि निजी क्षेत्र में महिला नेतृत्व से अनेक मापदण्डों पर व्यवसायिक प्रदर्शन बेहतर होता है.

मिशेल बाशेलेट ने बताया कि महामारी के दौरान जिन देशों में बागडोर महिला नेताओं के हाथ में थी, वहाँ सार्वजनिक भलाई के लिये, वैज्ञानिक विशेषज्ञता के आधार पर प्रभावी नीतियाँ अपनाई गईं. 

“हम वास्तविकता को दरकिनार नहीं कर सकते: राजनैतिक जीवन में महिलाओं की बराबर भागीदारी के बढ़ने की रफ़्तार बेहद धीमी है.”

बताया गया है कि मौजूदा गति से, राष्ट्रीय संसदों में लैंगिक बराबरी, वर्ष 2063 से पहले हासिल नहीं की जा सकेगी. 

यूएन उच्चायुक्त ने सभी नेताओं का आहवान किया है कि मन्त्रिण्डलों में 50 फ़ीसदी महिलाओं की नियुक्ति की जानी होगी, विविधता व समावेशन को सुनिश्चित किया जाना होगा, और अस्थाई विशेष उपायों के इस्तेमाल को बेहतर बनाना होगा. 

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने ज़ोर देकर कहा कि उन महिलाओं के साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत है जोकि समानता व सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं. 

इनमें बहुत सी युवा कार्यकर्ता हैं, जिन्हें नागरिक समाज के लिये सीमित जगह में ही, जोखिमों के बीच काम करना पड़ता है.

उन्होंने ज़्यादा लचीले ढंग से वित्तीय संसाधन, समर्थन और अनुकूल माहौल मुहैया कराए जाने की पैरवी की है ताकि वे किसी पाबन्दी या बदले की कार्रवाई के भय के बिना अपना काम जारी रख सकें. 

यूएन अधिकारी ने याद दिलाया है कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम के लिये और ज़्यादा निवेश किया जाना होगा. 

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की पूर्ण व बराबर भागीदारी को तेज़ी से आगे बढ़ाना होगा. 

ऐतिहासिक सम्बोधन

अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने मंगलवार को यूएन महिला आयोग को अपने वीडियो सम्बोधन में सचेत किया कि महिलाओं का दर्जा, लोकतन्त्र का दर्जा है.

लोकतन्त्र मानवाधिकारों की रक्षा करता है, क़ानून के राज को सर्वोपरि बनाता है और साझा समृद्धि पाने का एक माध्यम व साधन है, जिसमें हर किसी की एक समान आवाज़ होगी. 

उन्होंने कहा कि यह एक लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है जिसके लिये लगातार बेहतरी लाना और सतर्कता बरता जाना अहम है. 

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने आगाह किया कि दुनिया भर में लोकतन्त्र पर ख़तरा मंडरा रहा है, और आज़ादी में व्यथित कर देने वाली गिरावट आई है. 

“एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट, और आर्थिक संकट से जूझते समय, यह अहम है कि हम लोकतन्त्र की रक्षा करना जारी रखें.” 

इस पृष्ठभूमि में उन्होंने बताया कि अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र व व्यापक बहुपक्षीय प्रणाली के साथ अपने सम्बन्धों को मज़बूती प्रदान कर रहा है. 

इस प्रक्रिया के तहत अमेरिका की मानवाधिकार परिषद में फिर से वापसी होनी है.

उपराष्ट्रपति हैरिस ने कहा कि लोकतन्त्र का दर्जा बुनियादी रूप से महिलाओं के सशक्तिकरण पर निर्भर है, और महिलाओं की भागीदारी, लोकतन्त्र को मज़बूत बनाती है. 

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