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सावन की पहली सोमवारी पर ढाई लाख श्रद्धालुओं ने किया बाबा बैद्यनाथ पर जलाभिषेक

सावन की पहली सोमवारी पर ढाई लाख श्रद्धालुओं ने किया बाबा बैद्यनाथ पर जलाभिषेक
July 22
17:12 2019

– बोलबम और हर-हर महादेव के नारों से गूंजायमान रही बाबा नगरीसुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था
– रविवार रात से ही लाइन में लग गये कांवरियेसोमवार को 15 किमी लंबी हो गई लाइन

राजीव मिश्रा
रांची, 22 जुलाई (हि.स.)। सावन की पहली सोमवारी पर जलार्पण के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा और उसमें भक्त आस्था को गोते लगाते रहे। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वाधिक महिमामंडित कामनालिंग बाबा वैद्यनाथ पर पहली सोमवारी को करीब ढाई लाख श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। इस दौरान पूरी बाबा नगरी बोलबम और हर-हर महादेव के नारों से गूंजायमान रही। सोमवार को कांवरियों की ज्यादा भीड़ को देखते हुए रात 10 बजे तक जलाभिषेक की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके बाद बाबा की श्रृंगार पूजा होगी।

बाबा दरबार में रविवार रात से ही कांवरिये लाइन में लग गये। सोमवार को यह लाइन 15 किलोमीटर से अधिक लंबी हो गई। कांवरियों की कतार बेलाबगान कालीबाड़ी से कुमेथा स्टेडियम की ओर मोड़ दी गई। इसके बाद कांवरिये शिवगंगा, मनसिंघी, जलसार, पीडी रोड, उपायुक्त कार्यालय, श्रीकांत रोड बेलाबगान, कालीबाड़ी, नंदन पहाड़ फिल्टर प्लांट, सिंघवा, चमारीडी के रास्ते कुमेथा स्टेडियम होकर वापस नंदन पहाड़, बरमसिया, ठण्म्क कॉलेज, तिवारी चौक से गुजरते हुए नेहरू पार्क तक पहुंची। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स लगायी गयी है। बम स्कॉयड भी जांच करता दिखा।

कांवर यात्रा पुरातन काल से भोले की भक्ति का बड़ा जरिया है। सोमवार को बाबा बैद्यनाथ पर जलाभिषेक की विशेष मान्यता है। बाबा वैद्यनाथ कामना लिंग पर जालाभिषेक के लिए हर साल भक्तों में बढ़ोतरी हो रही है। बिहार के  सुल्तानगंज से झारखंड की बाबा नगरी (देवघर) तक की 105 किलोमीटर लंबी कांवर यात्रा में नियमों का पालन इच्छा शक्ति को अनुशासित करता है। सुल्तानगंज की उत्तर वाहिनी गंगा में डूबकी लगाने के बाद कांवरिये दो पात्रों में गंगा जल भरकर संकल्प के साथ कंधे पर कांवर वरण कर ‘बोलबम’ के महामंत्र का जाप करते हुए यात्रा पर निकल पड़ते हैं। एक पात्र का जल देवघर में बाबा वैद्यनाथ को अर्पित होता और दूसरे का बासुकीनाथ में फौजदारी बाबा पर।

कांवर यात्रा में दो बार संकल्प की अनोखी परंपरा है। वैद्यनाथ धाम के पुजारी पंडित उदय शंकर तिवारी नंदीवाले (शांति पंडा) बताते हैं कि सुल्तानगंज में संकल्प यात्रा निर्विघ्न पूरी होने के लिए कराया जाता है और देवघर में कराया गया संकल्प मनोकामना और सुख-समृद्धि के लिए। बाबा बैद्यनाथ धाम में स्थित शिवलिंग पर श्रृंगार पूजा में सजने वाला ‘पुष्प नाग मुकुट’ देवघर जेल में ही तैयार किया जाता है। पूरी शुद्धता और स्वच्छता से उपवास रखकर कैदी बाबा कक्ष में नाग मुकुट बनाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि देवघर के कामना ज्योतिर्लिग पर जलाभिषेक करने वालों की पूजा बासुकीनाथ (नागेश) की पूजा बिना अधूरी मानी जाती है। यही कारण है कि वैद्यनाथ धाम आने वाले कांवरिये नागेश ज्योतिर्लिग के नाम से विख्यात बासुकीनाथ मंदिर में जलाभिषेक करना नहीं भूलते।

जो 24 घंटे में यात्रा पूरी करेवह डाक बम

शिव भक्त सुल्तानगंज से उत्तर वाहिनी गंगा से  कांवर में जलभर कर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर यहां पहुंचते हैं और भगवान का जलाभिषेक करते हैं। कांवर चढ़ाने वाले इन भक्तों को ‘साधारण बम’ कहा जाता है। जो इस यात्रा को 24 घंटे के अंदर पूरा करते हैं उन्हें ‘डाक बम’ कहा जाता है। हालांकि डाक बम को दी जाने वाली विशेष सुविधा समाप्त कर दी गई।

भगवान राम ने पहली बार चढ़ाया था कांवर

सावन महीने में शिव को गंगाजल अर्पित करने का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, मां गंगा के इसी तट से भगवान श्रीराम ने पहली बार भोलेनाथ को कांवर भरकर गंगा जल अर्पित किया था। यही वजह है कि महीने भर तक चलने वाले देवघर (झारखंड) के विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में पूरा कांवरिया पथ ‘बोलबम’ के महामंत्र से गुंजायमान रहता है।

बाबा वैद्यनाथ मंदिर में जड़ित है ‘चंद्रकांत मणि

12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वाधिक महिमामंडित बाबा वैद्यनाथ कामना लिंग से कई रहस्य जुड़े हैं। इन्हीं रहस्यों में एक है बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शिखर पर भीतरी भाग में बने चतुष्कोण आकार के अष्टदल कमल के बीच में लगा ‘चंद्रकांत मणि’। कहा जाता है कि मणि से हर एक मिनट पर एक बूंद जल ज्योतिर्लिंग पर गिरता रहता है। अन्य किसी भी ज्योतिर्लिंग में चंद्रकांत मणि होने का सबूत नहीं मिला है।  रात को होने वाली श्रृंगार पूजा में शिवलिंग पर जो चंदन का लेप किया जाता है, उसके ऊपर रात भर चंद्रकांत मणि से बूंदें टपकती रहती हैं। यही कारण है कि सुबह इस चंदन को लेने के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगती है।

शक्तिपीठः मां के हृदय पर विराजते हैं बाबा 

देव नगरी बाबा वैद्यनाथ धाम मंदिर परिसर अद्भुत है। 12 ज्योतिर्लिंग में एकमात्र बाबा वैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग शक्तिपीठ भी है। यहां मां के हृदय पर विराजमान हैं बाबा। पंडित उदय शंकर तिवारी नंदीवाले (शांति पंडा) बताते हैं कि बैद्यनाथ धाम को ‘हार्दपीठ’ भी कहा जाता है और उसकी मान्यता शक्तिपीठ के रूप में है।

पंचशूल के दर्शन मात्र से ही हो जाती है मनोकामना पूरी

भगवान विश्वकर्मा के बनाये हुए भव्य 72 फीट ऊंचे बाबा वैद्यनाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसके शीर्ष पर त्रिशूल नहीं, ‘पंचशूल’ है। इसे सुरक्षा कवच माना गया है। मान्यता है कि पंचशूल के दर्शन मात्र से ही भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। इसके अलावा के अलावा प्रांगण में अन्य 22 मंदिर हैं। सभी के गुंबद पर पंचशुल लगे हुए हैं। मंदिर प्रांगण में एक घंटा, एक चंद्रकूप और विशाल सिंह दरवाजा बना हुआ है।

हिन्दुस्थान समाचार

 

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