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सीबीआई विवाद में हस्तक्षेप आवश्यक था:केन्द्र

सीबीआई विवाद में हस्तक्षेप आवश्यक था:केन्द्र
December 05
19:05 2018

नयी दिल्ली : सरकार ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच छिड़ी जंग में हस्तपेक्ष करने के कदम को आवश्यक ठहतराते हुए बुधवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि अधिकारियों की लड़ाई से एजेंसी की छवि धूमिल हो रही थी इसलिए यह कार्रवाई करनी पड़ी।

केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल (महान्यायवादी) के के वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष अपना पक्ष रहते हुए कहा कि एजेंसी के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी में हस्तक्षेप आवश्यक था क्योंकि इनके झगड़े की वजह से देश की प्रतिष्ठित जांच एजेन्सी की स्थिति बेहद हास्यास्पद हो गई थी।

अटार्नी जनरल ने कहा,“ दोनों अधिकारी बिल्लियों की तरह आपस में लड़ रहे थे। सरकार ने इन शीर्ष अधिकारियों पर नजर बनाये हुयी थी। सख्त कदम उठाना हमारी विवशता थी। उस समय निदेशक और विशेष निदेशक के कई फैसले और कदम ऐसे थे जो देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की छवि को धूमिल कर रहे थे। आम जनता उनकी आलोचना कर रही थी। ऐसे में एजेंसी की साख बचाए रखने के लिए हमने निदेशक को छुट्टी पर भेज दिया।”

अटार्नी जनरल ने कहा ,“ हमने श्री वर्मा को केवल छुट्टी पर भेजा है। गाड़ी, बंगला, भत्ते, वेतन और यहां तक कि पदनाम भी पहले की तरह ही उनके पास है। आज की तारीख में सीबीआई के निदेशक वही हैं। ”

दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय को यह तय करना है कि छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई निदेशक ड्यूटी पर लौटेंगे या आगे उन्हें जांच का सामना करना होगा। श्री वर्मा ने उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के सरकार के फैसले को चुनौती दी है।

केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बहस की। उन्होंने कहा कि कानून कहता है कि सीवीसी सीबीआई के क्षमतापूर्ण कामकाज के प्रति जिम्मेदार है। किसी सार्वजनिक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर केन्द्र सरकार सीवीसी को जांच के लिए कह सकती है। सीवीसी स्वयं भी जांच कर सकती है या किसी को नियुक्त कर सकती है। उन्होंने कहा कि सीबीआई पर निगरानी रखना हमारे कानूनी अधिकारों के दायरे में है। हमारी स्वायत्तता के इन विशेषाधिकारों को कोई वापस नहीं ले सकता।

श्री वर्मा ने 29 नवंबर को मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि उनकी नियुक्ति दो साल के निश्चित कार्यकाल के लिए हुई थी और इस दौरान उनका तबादला तक नहीं किया जा सकता।

मामले की सुनवाई गुरुवार सुबह साढ़े दस बजे इस पीठ के समक्ष जारी रहेगी।

 

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