सीरिया: शान्ति प्रक्रिया की पुनर्बहाली, स्थिरता और नए संविधान की दरकार

सीरिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेयर पैडरसन ने चेतावनी जारी की है कि पिछले एक वर्ष में अपेक्षाकृत शान्ति के बावजूद, यह महीना दर्शाता है कि हालात कितनी तेज़ी से ख़राब हो सकते हैं. यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीरिया में हिंसा, आतंकवाद, विस्थापन, अस्थिरता, निराश्रयता और कोविड-19 की पृष्ठभूमि में बुधवार को सुरक्षा परिषद को सम्बोधित किया है.

यूएन के विशेष दूत गेयर पैडरसन ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेन्सिन्ग के ज़रिये जानकारी देते हुए बताया कि पश्चिमी अलेप्पो में एक यूएन समर्थित अस्पताल पर हमला हुआ है. 

Here is a look at ten years of conflict in Syria, through the lenses of its photographers. #WithSyria pic.twitter.com/nQPSq0FY1W— UN Humanitarian (@UNOCHA) April 28, 2021

इसके अलावा, सीरिया-तुर्की की सीमा के पास भी हमले हुए हैं जहाँ यूएन एजेंसियाँ सीमा-पार मानवीय राहत अभियानों का संचालन करती हैं. 
यह अस्पताल विस्थापितों के लिये बनाए गए शिविर के नज़दीक था, जहाँ घनी आबादी बसती है.  
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे ज़्यादा संख्या में पुरुषों की मौतें हो रही हैं, महिलाओं को अपने घर की बागडोर सम्भालनी पड़ रही है.   
विशेष दूत ने बताया कि एक साल में पहली बार, सीरियाई महिलाओं के सलाहकार बोर्ड की बैठक हुई है.
उनकी आकाँक्षा, देश में नए उत्साह से राजनैतिक प्रक्रिया की शुरुआत, स्थाई शान्ति, और एक नए संविधान को देखना है जिसमें सभी के अधिकारों व आज़ादियों की गारण्टी दी गई हो. 
गेयर पैडरसन के मुताबिक देश के पश्चिमोत्तर में झड़पों में तेज़ी आई है, दक्षिण-पश्चिम में हालात लगातार अस्थिर बने हुए हैं, मध्य सीरिया और पूर्वोत्तर में इस्लामिक स्टेट (दाएश) के आतंकी हमले हो रहे हैं. 
इसके अलावा, अनेक अन्य शहरों में टकराव बढ़ने से हालात बदहाल हो रहे हैं.
आर्थिक बदहाली 
विशेष दूत ने सीरिया में विकट हालात से सुरक्षा परिषद को अवगत कराते हुए कहा कि भोजन की क़ीमतें ऐतिहासिक, ऊँचे स्तर पर पहुँच गई हैं, महंगाई बेलगाम है और लाखों लोग खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं. 
उन्होंने कहा कि सीरिया में सामाजिक ताने-बाने को भी ठेस पहुँची है. 
इसके मद्देनज़र उन्होंने महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की उस अपील को दोहराया है, जिसमें सीरिया पर प्रतिबन्धों से बचने की बात कही गई है ताकि सीरियाई नागरिकों के लिये भोजन, अहम स्वास्थ्य सामग्री और कोविड-19 के लिये मेडिकल सहायता सुनिश्चित की जा सके. 
यूएन दूत के मुताबुक बन्दियों की रिहाई के मुद्दे पर वास्तविक प्रगति का अभाव है, जिसकी गति बेहद धीमी है.
गेयर पैडरसन ने मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए ज़्यादा सृजनात्मक और व्यापक अन्तरराष्ट्रीय कूटनीति का आहावन किया है ताकि क़दम-दर-क़दम प्रगति को हासिल किया जा सके. 
उन्होंने सीरिया के नेतृत्व और स्वामित्व में संवैधानिक समिति के मुद्दे पर कहा कि इसके लिये एक ऐसी राजनैतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है जिसमें सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 का ख़याल रखा जाए. 
विशाल चुनौतियाँ
इस बीच, मानवीय मामलों में समन्वय के लिये संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी मार्क लोकॉक ने सीरिया में कुछ अहम मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित किया. 
उन्होंने कहा कि देश में कोविड-19 से हालात चुनौतीपूर्ण हैं, संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, विशेष रूप से शरणार्थी शिविरों में. 
संयुक्त राष्ट्र, राहत प्रयासों के तहत निजी बचाव उपकरणों व सामग्री को प्रदान कर रहा है, स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और टीकाकरण मुहिम को आगे बढ़ाने के लिये भी प्रयास हो रहे हैं. 
पिछले सप्ताह ही, यूएन के नेतृत्व वाली कोवैक्स पहल के तहत सीरिया में वैक्सीन की ख़ुराकें वितरित की गई हैं.
देश में आर्थिक संकट के बीच कुछ इलाक़ों में गुज़र-बसर करना कठिन हो रहा है. भोजन की क़ीमतें ऊँचे स्तर पर हैं और खाद्य सुरक्षा के हालात बिगड़ रहे हैं. ईंधन की क़िल्लत की वजह से मानवीय राहत अभियानों पर भी असर पड़ा है. 
आपात राहत समन्वयक मार्क लोकॉक ने हाल ही में चार मानवीय राहतकर्मियों की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि राहतकर्मियों की रक्षा की जानी होगी. 
साथ ही मानवीय राहत को पहुँचाने के लिये रास्तों को खुला रखा जाना होगा, जिसके लिये सीमा-पार से राहत सामग्री पहुँचाने के लिये अनुमति मिलना महत्वपूर्ण है. 
उन्होंने ध्यान दिलाया कि हर महीने, सीमा-पार अभियान के ज़रिये24 लाख लोगों को भोजन, दवाएँ और अन्य अहम सामग्री की आपूर्ति की जाती है. इस जीवनरक्षक रेखा को बरक़रार रखना होगा. 
यूएन अधिकारी के मुताबिक संगठन द्वारा संचालित राहत प्रयासों के लिये धनराशि की आवश्यकता है. 
30 मार्च को पाँचवे ब्रसेल्स सम्मेलन में, 4.4 अरब डॉलर की सहायता का संकल्प लिया गया था. उन्हों इससे यूएन को हर महीने 77 लाख लोगों तक मानवीय राहत पहुँचाने में मदद मिली है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वर्ष एक करोड़ 23 लाख लोगों तक सहायता पहुँचाने के लिये अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होगी. 
 , सीरिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेयर पैडरसन ने चेतावनी जारी की है कि पिछले एक वर्ष में अपेक्षाकृत शान्ति के बावजूद, यह महीना दर्शाता है कि हालात कितनी तेज़ी से ख़राब हो सकते हैं. यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीरिया में हिंसा, आतंकवाद, विस्थापन, अस्थिरता, निराश्रयता और कोविड-19 की पृष्ठभूमि में बुधवार को सुरक्षा परिषद को सम्बोधित किया है.

यूएन के विशेष दूत गेयर पैडरसन ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेन्सिन्ग के ज़रिये जानकारी देते हुए बताया कि पश्चिमी अलेप्पो में एक यूएन समर्थित अस्पताल पर हमला हुआ है. 

इसके अलावा, सीरिया-तुर्की की सीमा के पास भी हमले हुए हैं जहाँ यूएन एजेंसियाँ सीमा-पार मानवीय राहत अभियानों का संचालन करती हैं. 

यह अस्पताल विस्थापितों के लिये बनाए गए शिविर के नज़दीक था, जहाँ घनी आबादी बसती है.  

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे ज़्यादा संख्या में पुरुषों की मौतें हो रही हैं, महिलाओं को अपने घर की बागडोर सम्भालनी पड़ रही है.   

विशेष दूत ने बताया कि एक साल में पहली बार, सीरियाई महिलाओं के सलाहकार बोर्ड की बैठक हुई है.

उनकी आकाँक्षा, देश में नए उत्साह से राजनैतिक प्रक्रिया की शुरुआत, स्थाई शान्ति, और एक नए संविधान को देखना है जिसमें सभी के अधिकारों व आज़ादियों की गारण्टी दी गई हो. 

गेयर पैडरसन के मुताबिक देश के पश्चिमोत्तर में झड़पों में तेज़ी आई है, दक्षिण-पश्चिम में हालात लगातार अस्थिर बने हुए हैं, मध्य सीरिया और पूर्वोत्तर में इस्लामिक स्टेट (दाएश) के आतंकी हमले हो रहे हैं. 

इसके अलावा, अनेक अन्य शहरों में टकराव बढ़ने से हालात बदहाल हो रहे हैं.

आर्थिक बदहाली 

विशेष दूत ने सीरिया में विकट हालात से सुरक्षा परिषद को अवगत कराते हुए कहा कि भोजन की क़ीमतें ऐतिहासिक, ऊँचे स्तर पर पहुँच गई हैं, महंगाई बेलगाम है और लाखों लोग खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं. 

उन्होंने कहा कि सीरिया में सामाजिक ताने-बाने को भी ठेस पहुँची है. 

इसके मद्देनज़र उन्होंने महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की उस अपील को दोहराया है, जिसमें सीरिया पर प्रतिबन्धों से बचने की बात कही गई है ताकि सीरियाई नागरिकों के लिये भोजन, अहम स्वास्थ्य सामग्री और कोविड-19 के लिये मेडिकल सहायता सुनिश्चित की जा सके. 

यूएन दूत के मुताबुक बन्दियों की रिहाई के मुद्दे पर वास्तविक प्रगति का अभाव है, जिसकी गति बेहद धीमी है.

गेयर पैडरसन ने मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए ज़्यादा सृजनात्मक और व्यापक अन्तरराष्ट्रीय कूटनीति का आहावन किया है ताकि क़दम-दर-क़दम प्रगति को हासिल किया जा सके. 

उन्होंने सीरिया के नेतृत्व और स्वामित्व में संवैधानिक समिति के मुद्दे पर कहा कि इसके लिये एक ऐसी राजनैतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है जिसमें सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 का ख़याल रखा जाए. 

विशाल चुनौतियाँ

इस बीच, मानवीय मामलों में समन्वय के लिये संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी मार्क लोकॉक ने सीरिया में कुछ अहम मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित किया. 

उन्होंने कहा कि देश में कोविड-19 से हालात चुनौतीपूर्ण हैं, संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, विशेष रूप से शरणार्थी शिविरों में. 

संयुक्त राष्ट्र, राहत प्रयासों के तहत निजी बचाव उपकरणों व सामग्री को प्रदान कर रहा है, स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और टीकाकरण मुहिम को आगे बढ़ाने के लिये भी प्रयास हो रहे हैं. 

पिछले सप्ताह ही, यूएन के नेतृत्व वाली कोवैक्स पहल के तहत सीरिया में वैक्सीन की ख़ुराकें वितरित की गई हैं.

देश में आर्थिक संकट के बीच कुछ इलाक़ों में गुज़र-बसर करना कठिन हो रहा है. भोजन की क़ीमतें ऊँचे स्तर पर हैं और खाद्य सुरक्षा के हालात बिगड़ रहे हैं. ईंधन की क़िल्लत की वजह से मानवीय राहत अभियानों पर भी असर पड़ा है. 

आपात राहत समन्वयक मार्क लोकॉक ने हाल ही में चार मानवीय राहतकर्मियों की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि राहतकर्मियों की रक्षा की जानी होगी. 

साथ ही मानवीय राहत को पहुँचाने के लिये रास्तों को खुला रखा जाना होगा, जिसके लिये सीमा-पार से राहत सामग्री पहुँचाने के लिये अनुमति मिलना महत्वपूर्ण है. 

उन्होंने ध्यान दिलाया कि हर महीने, सीमा-पार अभियान के ज़रिये24 लाख लोगों को भोजन, दवाएँ और अन्य अहम सामग्री की आपूर्ति की जाती है. इस जीवनरक्षक रेखा को बरक़रार रखना होगा. 

यूएन अधिकारी के मुताबिक संगठन द्वारा संचालित राहत प्रयासों के लिये धनराशि की आवश्यकता है. 

30 मार्च को पाँचवे ब्रसेल्स सम्मेलन में, 4.4 अरब डॉलर की सहायता का संकल्प लिया गया था. उन्हों इससे यूएन को हर महीने 77 लाख लोगों तक मानवीय राहत पहुँचाने में मदद मिली है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वर्ष एक करोड़ 23 लाख लोगों तक सहायता पहुँचाने के लिये अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होगी. 
 

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