सीरिया: 10 साल के दौरान, औसतन हर आठ घण्टे में एक बच्चा हताहत

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि सीरिया में, 10 वर्ष से चल रहे गृहयुद्ध के कारण, देश के लगभग 90 प्रतिशत बच्चों को मदद की ज़रूरत है, क्योंकि हिंसा, आर्थिक मुसीबतों और कोविड-19 महामारी ने, परिवारों को गहरी मायूसी के कगार पर धकेल दिया है. एजेंसी के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के दौरान, गृहयुद्ध में, औसतन हर आठ घण्टे में, एक बच्चा हताहत हुआ है.

सीरिया में यूनिसेफ़ के प्रतिनिधि बो विक्टर नायलूण्ड ने शुक्रवार को जिनीवा में शुक्रवार को पत्रकारों जानकारी देते हुए बताया, “सीरिया में, वर्ष 2020 के दौरान तीन प्रकार के संकटों, जोकि वर्ष 2021 में भी जारी हैं, उनके कारण, देश में बच्चों की स्थिति को और ज़्यादा बिगाड़ दिया है.”

After a decade of war, these are the four fronts where things are getting worse for children in Syria.https://t.co/YmqVQh1Zs9— UNICEF (@UNICEF) March 12, 2021

“तो, ज़मीनी हक़ीक़त के लिये इसके क्या मायने हैं? इसका मतलब है कि तीन में से दो परिवार, अपनी ज़रूरतें पूरी करने लायक नहीं बचे हैं.”
यूनीसेफ़ के अनुसार, कोविड-19 महामारी ने बच्चों और उनके परिवारों पर, बेतहाशा अतिरिक्त बोझ डाल दिया है.
सामाजिक ताना-बाना बिखरा
सीरिया में यूनिसेफ़ के प्रतिनिधि बो विक्टर नायलूण्ड ने कहा, “ज़ाहिर है कि कोविड-19 महामारी ने अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है लेकिन समाज का ताना-बाना भी बिखेर दिया है.
इन स्थितियों के मिले-जुले कारणों से, लड़कों और लड़कियों के लिये जोखिम, बहुत बढ़ा दिया है और इन हालात से निपटने के लिये से लड़के और लड़कियाँ नकारात्मक असर वाले तरीक़े अपना रहे हैं.” 
उन्होंने कहा, “इसके मायने ये हैं कि हमने बाल विवाहों में बढ़ोत्तरी देखी है और पहले से कहीं ज़्यादा बच्चों को कामकाज करने के लिये मजबूर होना पड़ा है, ऐसे हालात का सामना करने वाले कुछ बच्चों की उम्र तो सात वर्ष भी थी.”
यूएन बाल एजेंसी के आँकड़ों के अनुसार, सीरिया में, भोजन की एक औसत टोकरी की क़ीमत, पिछले वर्ष के दौरान, 230 प्रतिशत तक बढ़ी है, और देश में, पाँच वर्ष से कम उम्र के, लगभग पाँच लाख बच्चे, लम्बे कुपोषण के कारण, नाटेपन का शिकार हैं. 
यूनीसेफ़ के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सीरिया में पिछले, 10 वर्षों के दौरान, लगभग पाँच लाख बच्चे पैदा हुए हैं, इनके अतिरिक्त, लगभग एक लाख बच्चे उन परिवारों में पैदा हुए हैं जो, सीरिया के बाहर, पड़ोसी देशों में शरणार्थी के रूप में रहने को मजबूर हैं. और ये ऐसे लाखों बच्चे हैं जिन्होंने मौत, विस्थापन और विनाश के सिवाय, कुछ और नहीं देखा है.”
बच्चों को चूँकि, हिंसा, सदमा और गहन दबाव की स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिये मनो-सामाजिक पीड़ा के लक्षण वाले बच्चों की संख्या में, वर्ष 2020 के दौरान, दोगुना बढ़ोत्तरी ही है. 
हताहतों की संख्या का ग़लत अनुमान
यूनीसेफ़ प्रतिनिधि ने कहा, “सीरिया में, वर्ष 2011 से लेकर अब तक, 12 हज़ार बच्चों के हताहत होने की पुष्टि हुई है. ये आँक़ड़ा, पिछले 10 वर्षों के दौरान, हर आठ घण्टे में एक बच्चों की मौत के बराबर है.”
“जैसाकि हम सब जानते हैं कि ये वो बच्चे हैं जिनके हताहत होने की पुष्टि संयुक्त राष्ट्र कर पाने में सक्षम हो सका है, हताहत बच्चों की वास्तविक संख्या इससे कहीं ज़्यादा होने की सम्भावना है.  
पुष्ट आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 से 2020 के बीच, पाँच हज़ार 700 से ज़्यादा बच्चों की भर्ती, लड़ाई में हिस्सा लेने के लिये की गई, जिनमें से कुछ बच्चों की आयु तो सात वर्ष तक भी थी.
उसी अवधि के दौरान, लगभग एक हज़ार 300 शैक्षिक व चिकित्सा सेवा सुविधाएँ, हमलों की चपेट में आईं, और चपेट में आने वालों में, वहाँ काम करने वाले लोग भी शामिल थे.
प्रतिनिधि ने कहा, “सीरिया में, शिक्षा क्षेत्र, वहाँ के इतिहास में, सबसे बड़े संकट के दौर से गुज़र रहा है. लगभग 35 लाख बच्चे स्कूलों से बाहर हैं, जिनमें 40 प्रतिशत लड़कियाँ हैं.”
“ये बहुत ध्यान देने की बात है कि इस स्थिति का मतलब इन बच्चों के लिये अभी क्या है, इनके समुदायों के लिये क्या है और आने वाले वर्षों में, पूरे देश के लिये, इसका क्या असर होगा.”
सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े में स्थिति बहुत चिन्ताजनक है जहाँ, लाखों बच्चे विस्थापित हैं. वहाँ बहुत से परिवारों को, हिंसा से बचने के लिये, बार-बार विस्थापित होना पड़ा है, कुछ परिवारों को तो, सुरक्षा की तलाश में, सात बार विस्थापित होना पड़ा है. ये परिवार टैण्टों, आश्रयस्थलों और ध्वस्त या निर्माणाधीन इमारतों में रहने को मजबूर हैं.
बच्चों का एकीकरण
यूनीसेफ़ प्रतिनिधि ने पत्रकारों को याद दिलाते हुए कहा कि सशस्त्र गुटों के साथ सम्बन्ध बच्चों को, स्थानीय समुदायों में, पुनः शामिल करने के लिये प्रयास करने होंगे, विशेष रूप में, पूर्वोत्तर इलाक़े में. 
विदेशी नागरिकों के बच्चों को भी, उनके मूल देशों को, सुरक्षित तरीक़े से भेजना होगा.
यूएन बाल एजेंसी ने युद्धरत पक्षों को भी याद दिलाया है कि मानवीय सहायता उपलब्ध कराने वाले संगठनों को, सीरिया में बच्चों तक, मदद पहुँचाने के लिये, धन की तुरन्त आवश्यकता है. 
यूनीसेफ़ ने, इस उद्देश्य के लिये, वर्ष 2021 के दौरान, सीरिया व पड़ोसी देशों में, मानवीय सहायता उपलब्ध कराने एक अरब 40 करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने की अपील जारी की है., संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि सीरिया में, 10 वर्ष से चल रहे गृहयुद्ध के कारण, देश के लगभग 90 प्रतिशत बच्चों को मदद की ज़रूरत है, क्योंकि हिंसा, आर्थिक मुसीबतों और कोविड-19 महामारी ने, परिवारों को गहरी मायूसी के कगार पर धकेल दिया है. एजेंसी के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के दौरान, गृहयुद्ध में, औसतन हर आठ घण्टे में, एक बच्चा हताहत हुआ है.

सीरिया में यूनिसेफ़ के प्रतिनिधि बो विक्टर नायलूण्ड ने शुक्रवार को जिनीवा में शुक्रवार को पत्रकारों जानकारी देते हुए बताया, “सीरिया में, वर्ष 2020 के दौरान तीन प्रकार के संकटों, जोकि वर्ष 2021 में भी जारी हैं, उनके कारण, देश में बच्चों की स्थिति को और ज़्यादा बिगाड़ दिया है.”

“तो, ज़मीनी हक़ीक़त के लिये इसके क्या मायने हैं? इसका मतलब है कि तीन में से दो परिवार, अपनी ज़रूरतें पूरी करने लायक नहीं बचे हैं.”

यूनीसेफ़ के अनुसार, कोविड-19 महामारी ने बच्चों और उनके परिवारों पर, बेतहाशा अतिरिक्त बोझ डाल दिया है.

सामाजिक ताना-बाना बिखरा

सीरिया में यूनिसेफ़ के प्रतिनिधि बो विक्टर नायलूण्ड ने कहा, “ज़ाहिर है कि कोविड-19 महामारी ने अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है लेकिन समाज का ताना-बाना भी बिखेर दिया है.

इन स्थितियों के मिले-जुले कारणों से, लड़कों और लड़कियों के लिये जोखिम, बहुत बढ़ा दिया है और इन हालात से निपटने के लिये से लड़के और लड़कियाँ नकारात्मक असर वाले तरीक़े अपना रहे हैं.” 

उन्होंने कहा, “इसके मायने ये हैं कि हमने बाल विवाहों में बढ़ोत्तरी देखी है और पहले से कहीं ज़्यादा बच्चों को कामकाज करने के लिये मजबूर होना पड़ा है, ऐसे हालात का सामना करने वाले कुछ बच्चों की उम्र तो सात वर्ष भी थी.”

यूएन बाल एजेंसी के आँकड़ों के अनुसार, सीरिया में, भोजन की एक औसत टोकरी की क़ीमत, पिछले वर्ष के दौरान, 230 प्रतिशत तक बढ़ी है, और देश में, पाँच वर्ष से कम उम्र के, लगभग पाँच लाख बच्चे, लम्बे कुपोषण के कारण, नाटेपन का शिकार हैं. 

यूनीसेफ़ के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सीरिया में पिछले, 10 वर्षों के दौरान, लगभग पाँच लाख बच्चे पैदा हुए हैं, इनके अतिरिक्त, लगभग एक लाख बच्चे उन परिवारों में पैदा हुए हैं जो, सीरिया के बाहर, पड़ोसी देशों में शरणार्थी के रूप में रहने को मजबूर हैं. और ये ऐसे लाखों बच्चे हैं जिन्होंने मौत, विस्थापन और विनाश के सिवाय, कुछ और नहीं देखा है.”

बच्चों को चूँकि, हिंसा, सदमा और गहन दबाव की स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिये मनो-सामाजिक पीड़ा के लक्षण वाले बच्चों की संख्या में, वर्ष 2020 के दौरान, दोगुना बढ़ोत्तरी ही है. 

हताहतों की संख्या का ग़लत अनुमान

यूनीसेफ़ प्रतिनिधि ने कहा, “सीरिया में, वर्ष 2011 से लेकर अब तक, 12 हज़ार बच्चों के हताहत होने की पुष्टि हुई है. ये आँक़ड़ा, पिछले 10 वर्षों के दौरान, हर आठ घण्टे में एक बच्चों की मौत के बराबर है.”

“जैसाकि हम सब जानते हैं कि ये वो बच्चे हैं जिनके हताहत होने की पुष्टि संयुक्त राष्ट्र कर पाने में सक्षम हो सका है, हताहत बच्चों की वास्तविक संख्या इससे कहीं ज़्यादा होने की सम्भावना है.  

पुष्ट आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 से 2020 के बीच, पाँच हज़ार 700 से ज़्यादा बच्चों की भर्ती, लड़ाई में हिस्सा लेने के लिये की गई, जिनमें से कुछ बच्चों की आयु तो सात वर्ष तक भी थी.

उसी अवधि के दौरान, लगभग एक हज़ार 300 शैक्षिक व चिकित्सा सेवा सुविधाएँ, हमलों की चपेट में आईं, और चपेट में आने वालों में, वहाँ काम करने वाले लोग भी शामिल थे.

प्रतिनिधि ने कहा, “सीरिया में, शिक्षा क्षेत्र, वहाँ के इतिहास में, सबसे बड़े संकट के दौर से गुज़र रहा है. लगभग 35 लाख बच्चे स्कूलों से बाहर हैं, जिनमें 40 प्रतिशत लड़कियाँ हैं.”

“ये बहुत ध्यान देने की बात है कि इस स्थिति का मतलब इन बच्चों के लिये अभी क्या है, इनके समुदायों के लिये क्या है और आने वाले वर्षों में, पूरे देश के लिये, इसका क्या असर होगा.”

सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े में स्थिति बहुत चिन्ताजनक है जहाँ, लाखों बच्चे विस्थापित हैं. वहाँ बहुत से परिवारों को, हिंसा से बचने के लिये, बार-बार विस्थापित होना पड़ा है, कुछ परिवारों को तो, सुरक्षा की तलाश में, सात बार विस्थापित होना पड़ा है. ये परिवार टैण्टों, आश्रयस्थलों और ध्वस्त या निर्माणाधीन इमारतों में रहने को मजबूर हैं.

बच्चों का एकीकरण

यूनीसेफ़ प्रतिनिधि ने पत्रकारों को याद दिलाते हुए कहा कि सशस्त्र गुटों के साथ सम्बन्ध बच्चों को, स्थानीय समुदायों में, पुनः शामिल करने के लिये प्रयास करने होंगे, विशेष रूप में, पूर्वोत्तर इलाक़े में. 

विदेशी नागरिकों के बच्चों को भी, उनके मूल देशों को, सुरक्षित तरीक़े से भेजना होगा.

यूएन बाल एजेंसी ने युद्धरत पक्षों को भी याद दिलाया है कि मानवीय सहायता उपलब्ध कराने वाले संगठनों को, सीरिया में बच्चों तक, मदद पहुँचाने के लिये, धन की तुरन्त आवश्यकता है. 

यूनीसेफ़ ने, इस उद्देश्य के लिये, वर्ष 2021 के दौरान, सीरिया व पड़ोसी देशों में, मानवीय सहायता उपलब्ध कराने एक अरब 40 करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने की अपील जारी की है.

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