सुपरमॉडल नतालिया वोदियानोवा – महिला स्वास्थ्य व सशक्तिकरण के लिये नई पैरोकार

यौन एवँ प्रजनन स्वास्थ्य मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी (UNFPA) ने सुपरमॉडल और सामाजिक सरोकारों से जुड़ीं, नतालिया वोदियानोवा को अपनी नई सदभावना दूत नियुक्त किया है. यूएन जनसंख्या कोष ने कहा है कि नतालिया की मदद से महिलाओं व लड़कियों को सशक्त बनाने और माहवारी से जुड़ी वर्जनाओं का मुक़ाबला करने का प्रयास किया जाएगा.  

नतालिया वोदियानोवा, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के लिये अपनी नई भूमिका में, माहवारी को सांस्कृतिक रूप से फिर से परिभाषित करने का प्रयास करेंगी. एक सामान्य शारीरिक क्रिया के तौर पर. 
सामान्यतः किसी एक दिन में, 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग में 80 करोड़ से ज़्यादा महिलाओं व लड़कियों को माहवारी होती है.

Today, we’re very excited to announce that supermodel and philanthropist @NataSupernova has been appointed as a @UNFPA Goodwill Ambassador 🧡Learn more and join us in welcoming her to the @UN family: https://t.co/6B9I2X2tb5 #StandUp4HumanRights pic.twitter.com/PuDYRiRDfy— UNFPA (@UNFPA) February 24, 2021

यूएन एजेंसी का कहना है कि अनेक देशों में, माहवारी चक्र से जुड़ी वर्जनाओं की वजह से लड़कियों को कठिन हालात में रहने के लिये मजबूर होना पड़ता है, जोकि जोखिम से भरा भी हो सकता है. 
उन्हें सार्वजनिक जीवन से बाहर रखा जाता है, और अवसरों, स्वच्छता, बुनियादी स्वास्थ्य ज़रूरतों को नकार दिया जाता है. 
नतालिया वोदियानोवा ने क्षोभ जताते हुए कहा, “लम्बे समय तक, माहवारी और महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति समाज का रवैया, कलंक और वर्जनाओं से निर्धारित हुआ है.”
उनके अनुसार, इन हालात में महिलाओं की सबसे बुनियादी ज़रूरतें और अधिकार कमज़ोर हुए हैं. 
यूएन एजेंसी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में आगाह किया है कि अतीत में इस मुद्दे पर उतना ध्यान केन्द्रित नहीं किया जा सका है, जितनी ज़रूरत है.  
लेकिन हाल के वर्षों में हालात में बदलाव आ रहा है, और मुद्दा यूएन एजेंसी के लिये निर्धारित दायित्वों के केन्द्र में है. 
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की कार्यकारी निदेशक नतालिया कानेम ने ज़ोर देकर कहा कि अब तक हुई क्षति पर ध्यान आकृष्ट करने की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा कि यह एक त्रासदीपूर्ण विडम्बना है कि माहवारी जैसी सार्वभौमिक क्रिया की वजह से भी लड़कियाँ इतना अलग-थलग महसूस कर सकती हैं. 
“माहवारी के इर्द-गिर्द वर्जनाओं को तोड़ने में हम सभी की भूमिका है.” 
अतीत में भी प्रयासरत
कार्यकारी निदेशक ने एक समर्थ और संकल्पित पैरोकार के साथ साझेदारी क़ायम किये जाने पर ख़ुशी जताई और ध्यान दिलाया कि समाज तभी समृद्ध होते हैं जब लड़कियाँ आत्मविश्वास से पूर्ण, सशक्त होती हैं और अपने निर्णय स्वयँ लेती हैं. 
नतालिया वोदियानोवा, पिछले तीन वर्षों स , यूएन एजेंसी के साथ जुड़ी रही हैं. 
उदाहरणस्वरूप, सिलसिलेवार ‘लैट्स टॉक’ (Let’s Talk) नामक कार्यक्रमों के ज़रिये दुनिया भर में शर्मिन्दगी, बहिष्करण और भेदभाव से निपटने के लिये नीति-निर्धारकों, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र को संगठित करने के प्रयास किये गए. इन चुनौतियों का सामना लड़कियों व महिलाओं को अक्सर करना पड़ता है. 
फ़ैशन, राजनीति, खेलकूद, टैक्नॉलॉजी और मीडिया से जुड़ी हस्तियाँ, महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के इरादे से तुर्की, केनया, स्विट्ज़रलैण्ड, बेलारूस और भारत में एकत्र हुईं.  
नतालिया वोदियानोवा का पालन-पोषण रूस में, अकेले उनकी माँ ने किया. उनकी एक बहन भी है, जिन्हें सेरेब्रल पाल्सी और ऑटिज़्म है. 
नतालिया वोदियानोवा मानवाधिकारों, विशेष रूप से प्रजनन अधिकारों व विकलागँ व्यक्तियों के अधिकारों, के लिये जोशीली पैरोकार रही हैं.
यूएन एजेंसी ने कहा है कि नतालिया वोदियानोवा की भूमिका एक अहम अन्तरराष्ट्रीय आवाज़ के रूप में टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति की रफ़्तार तेज़ करने में होगी., यौन एवँ प्रजनन स्वास्थ्य मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी (UNFPA) ने सुपरमॉडल और सामाजिक सरोकारों से जुड़ीं, नतालिया वोदियानोवा को अपनी नई सदभावना दूत नियुक्त किया है. यूएन जनसंख्या कोष ने कहा है कि नतालिया की मदद से महिलाओं व लड़कियों को सशक्त बनाने और माहवारी से जुड़ी वर्जनाओं का मुक़ाबला करने का प्रयास किया जाएगा.  

नतालिया वोदियानोवा, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के लिये अपनी नई भूमिका में, माहवारी को सांस्कृतिक रूप से फिर से परिभाषित करने का प्रयास करेंगी. एक सामान्य शारीरिक क्रिया के तौर पर. 

सामान्यतः किसी एक दिन में, 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग में 80 करोड़ से ज़्यादा महिलाओं व लड़कियों को माहवारी होती है.

यूएन एजेंसी का कहना है कि अनेक देशों में, माहवारी चक्र से जुड़ी वर्जनाओं की वजह से लड़कियों को कठिन हालात में रहने के लिये मजबूर होना पड़ता है, जोकि जोखिम से भरा भी हो सकता है. 

उन्हें सार्वजनिक जीवन से बाहर रखा जाता है, और अवसरों, स्वच्छता, बुनियादी स्वास्थ्य ज़रूरतों को नकार दिया जाता है. 

नतालिया वोदियानोवा ने क्षोभ जताते हुए कहा, “लम्बे समय तक, माहवारी और महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति समाज का रवैया, कलंक और वर्जनाओं से निर्धारित हुआ है.”

उनके अनुसार, इन हालात में महिलाओं की सबसे बुनियादी ज़रूरतें और अधिकार कमज़ोर हुए हैं. 

यूएन एजेंसी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में आगाह किया है कि अतीत में इस मुद्दे पर उतना ध्यान केन्द्रित नहीं किया जा सका है, जितनी ज़रूरत है.  

लेकिन हाल के वर्षों में हालात में बदलाव आ रहा है, और मुद्दा यूएन एजेंसी के लिये निर्धारित दायित्वों के केन्द्र में है. 

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की कार्यकारी निदेशक नतालिया कानेम ने ज़ोर देकर कहा कि अब तक हुई क्षति पर ध्यान आकृष्ट करने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा कि यह एक त्रासदीपूर्ण विडम्बना है कि माहवारी जैसी सार्वभौमिक क्रिया की वजह से भी लड़कियाँ इतना अलग-थलग महसूस कर सकती हैं. 

“माहवारी के इर्द-गिर्द वर्जनाओं को तोड़ने में हम सभी की भूमिका है.” 

अतीत में भी प्रयासरत

कार्यकारी निदेशक ने एक समर्थ और संकल्पित पैरोकार के साथ साझेदारी क़ायम किये जाने पर ख़ुशी जताई और ध्यान दिलाया कि समाज तभी समृद्ध होते हैं जब लड़कियाँ आत्मविश्वास से पूर्ण, सशक्त होती हैं और अपने निर्णय स्वयँ लेती हैं. 

नतालिया वोदियानोवा, पिछले तीन वर्षों स , यूएन एजेंसी के साथ जुड़ी रही हैं. 

उदाहरणस्वरूप, सिलसिलेवार ‘लैट्स टॉक’ (Let’s Talk) नामक कार्यक्रमों के ज़रिये दुनिया भर में शर्मिन्दगी, बहिष्करण और भेदभाव से निपटने के लिये नीति-निर्धारकों, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र को संगठित करने के प्रयास किये गए. इन चुनौतियों का सामना लड़कियों व महिलाओं को अक्सर करना पड़ता है. 

फ़ैशन, राजनीति, खेलकूद, टैक्नॉलॉजी और मीडिया से जुड़ी हस्तियाँ, महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के इरादे से तुर्की, केनया, स्विट्ज़रलैण्ड, बेलारूस और भारत में एकत्र हुईं.  

नतालिया वोदियानोवा का पालन-पोषण रूस में, अकेले उनकी माँ ने किया. उनकी एक बहन भी है, जिन्हें सेरेब्रल पाल्सी और ऑटिज़्म है. 

नतालिया वोदियानोवा मानवाधिकारों, विशेष रूप से प्रजनन अधिकारों व विकलागँ व्यक्तियों के अधिकारों, के लिये जोशीली पैरोकार रही हैं.

यूएन एजेंसी ने कहा है कि नतालिया वोदियानोवा की भूमिका एक अहम अन्तरराष्ट्रीय आवाज़ के रूप में टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति की रफ़्तार तेज़ करने में होगी.

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