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01 राजमहल (एसटी), 02 दुमका (एसटी) एवं 03 गोड्डा लोकसभा क्षेत्र: विश्लेषण एवं संभावना

01 राजमहल (एसटी), 02 दुमका (एसटी) एवं 03 गोड्डा लोकसभा क्षेत्र: विश्लेषण एवं संभावना
May 11
11:12 2019

01 राजमहल (एसटी) लोकसभा क्षेत्र में महागठबंधन के उम्मीदवार विजय हांसदा की जीत निश्चित मानी जा रही है

इनसाईट ऑनलाईन न्यूज

01 राजमहल (एसटी) लोकसभा क्षेत्र में 19 मई को मतदाता अपनी राय मत पेटियों में भरेंगे। इस लोकसभा क्षेत्र से मुख्य प्रतिद्वंद्वी गठबंधन से झामुमो के उम्मीदवार निवर्तमान सांसद विजय कुमार हांॅसदा और भाजपा के उम्मीदवार हेमलाल मुर्मू चुनाव मैदान में हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार यहां सीधा मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार हेमलाल मुर्मू एवं गठबंधन से झामुमो के उम्मीदवार निवर्तमान सांसद विजय कुमार हाॅंसदा में ही सीमित रहेगा और 2014 में भी सीधा मुकाबला इन्हीं दोनों उम्मीदवारों के बीच था।

गठबंधन से झाुममो के उम्मीदवार निवर्तमान सांसद विजय कुमार हाॅंसदा ने 2014 में भाजपा के उम्मीदवार हेमलाल मुर्मू को मोदी लहर के बावजूद लगभग 40,000 मतों से पराजित किया था। 2014 का आकलन किया जाय, तो भाजपा के उम्मीदवार को 338170 मत प्राप्त हुए थे। आज की तिथि में आजसू भाजपा के गठबंधन का हिस्सा है, जिसमें 6761 मत प्राप्त हुए थे और इनदोनों मतों का जोड़ 344931 होता है। गठबंधन के झाुममो के उम्मीदवार विजय कुमार हाॅंसदा को 379507 मत प्राप्त हुए थे और आज गठबंधन में नये साथी के रूप में झाविमो भी शामिल है, जिसे 2014 में 97374 मत प्राप्त हुए थे और इनदोनों मतों का जोड़ 476881 होता है।

2014 में राजमहल लोकसभा क्षेत्र के मतों के आंकड़े को यदि 2019 में संभावित रखकर जोड़ा जाये, तो भाजपा 338170 और आजसू 6761 के मतों को मिलाकर कुल 344931 मत बनते हैं। उसी तरह झामुमो 379507 एवं झाविमो 97374 के मतों को मिलाकर कुल 476881 मत बनते हैं। अगर इस आंकड़े को आधार मानकर देखा जाये, तो भाजपा लगभग 1 लाख 30 हजार मतों से पिछड़ जायेगी।

राजमहल लोकसभा आदिवासी बहुल क्षेत्र है और मतों के क्रम में अल्पसंख्यक समुदाय, जिसमंे मुसलिम और इसाई मतों का वर्चस्व है। इस चुनाव में झाविमो, जिसका क्षेत्र में मतदाताओं के बीच अच्छा आधार है, वो भी गठबंधन के साथ होने के कारण गठबंधन के उम्मीदवार विजय कुमार हांसदा की विजय को सुनिश्चित करता है।

सारे समीकरण में गठबंधन से झामुमो के उम्मीदवार विजय कुमार हांसदा से भाजपा के उम्मीदवार हेमलाल मुर्मू काफी पिछड़ते नजर आ रहे हंै। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजपुत, भूमिहार, ब्राहमण, वैश्य समाज के सूंड़ी, तेली तथा पिछड़े वर्ग से कुड़मी, कुशवाहा का बड़ा वोट बैंक भाजपा के साथ है। वहीं गठबंधन को एकमुश्त अल्पसंख्यकों और आदिवासियों के बड़े हिस्से का मत प्राप्त होगा।

चुनाव प्रचार चरम पर है। गिरते-उठते समीकरण एवं झुकाव पल-पल की कहानी लिख रहे हैं और मतदाताओं में भी उत्साह है। एक तरफ भाजपा के हेमलाल मुर्मू तो दूसरी तरफ महागठबंधन से झामुमो के विजय कुमार हाॅंसदा अपनी-अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

वर्तमान स्थिति परिस्थिति एवं सारे मतों का समीकरण महागठबंधन कांग्रेस, झामुमो, झाविमो एवं राजद, भाजपा-आजसू गठबंधन के संभावित मतों से 2019 के चुनावी मैदान में बहुत आगे नजर आ रहा है। मसलन महागठबंधन के उम्मीदवार विजय कुमार हाॅंसदा की जीत निश्चित मानी जा रही है।

02 दुमका (एसटी) लोकसभा क्षेत्र में महागठबंधन के उम्मीदवार शिबु सोरेन की जीत निश्चित

02 दुमका (एसटी) लोकसभा क्षेत्र में 19 मई को मतदाता अपनी राय मत पेटियों में भरेंगे। इस लोकसभा क्षेत्र से मुख्य प्रतिद्वंद्वी गठबंधन से झामुमो के उम्मीदवार निवर्तमान सांसद शिबु सोरेन और भाजपा के उम्मीदवार सुनील सोरेन चुनाव मैदान में हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार यहां त्रिकोणीय मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार सुनील सोरेन, गठबंधन से झामुमो के उम्मीदवार निवर्तमान सांसद शिबु सोरेन और झाविमो के उम्मीदवार बाबुलाल मराण्डी के बीच 2014 में था।

गठबंधन से झाुममो के उम्मीदवार निवर्तमान सांसद शिबु सोरेन ने 2014 में भाजपा के उम्मीदवार सुनील सोरेन को मोदी लहर के बावजूद लगभग 40,000 मतों से पराजित किया था। 2014 का आकलन किया जाय, तो भाजपा के उम्मीदवार को 296785 मत प्राप्त हुए थे। गठबंधन के झाुममो के उम्मीदवार शिबु सोरेन को 335815 मत प्राप्त हुए थे और आज गठबंधन में नये साथी के रूप में झाविमो भी शामिल है, जिसे 2014 में 158122 मत प्राप्त हुए थे और इनदोनों मतों का जोड़ 493937 होता है।

दुमका लोकसभा आदिवासी बहुल क्षेत्र है और मतों के क्रम में अल्पसंख्यक समुदाय,  जिसमें मुसलिम और इसाई मतों का भी वर्चस्व है। इस चुनाव में झाविमो, जिसका क्षेत्र में मतदाताओं के बीच अच्छा आधार है, वो भी गठबंधन के साथ होने के कारण गठबंधन के उम्मीदवार शिबु सोरेन की विजय को सुनिश्चित माना जा रहा है।

सारे समीकरण में गठबंधन से झामुमो के उम्मीदवार शिबु सोरेन से भाजपा के उम्मीदवार सुनील सोरेन काफी पिछड़ते नजर आ रहे हैं। शिबु सोरेन संताल परगना में आदिवासियों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं तथा ये उनकी परम्परागत सीट है। सिर्फ एक बार इस सीट से उनकी हार हुई थी और उस सीट से उन्हें हराने वाले उनके विरोधी बाबुलाल मराण्डी, जिनकी भी संताल समाज में मजबूत पकड़ है और आज वो भी शिबु सोरेन के साथ हैं। ऐसी परिस्थिति में कोई भी लहर शिबु सोरेन को चुनाव में विजयी होने से नहीं रोक पायेगी।

चुनाव प्रचार चरम पर है। गिरते-उठते समीकरण एवं झुकाव पल-पल की कहानी लिख रहे हैं और मतदाताओं में भी उत्साह है। एक तरफ भाजपा के सुनील सोरेन तो दूसरी तरफ महागठबंधन से झामुमो के शिबु सोरेन अपनी-अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

वर्तमान स्थिति परिस्थिति एवं सारे मतों का समीकरण महागठबंधन कांग्रेस, झामुमो, झाविमो एवं राजद, भाजपा-आजसू गठबंधन के संभावित मतों से 2019 के चुनावी मैदान में बहुत आगे नजर आ रहा है। मसलन महागठबंधन के उम्मीदवार शिबु सोरेन की जीत निश्चित है।

03 गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में महागठबंधन के उम्मीदवार प्रदीप यादव की स्थिति मजबूत

03 गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में 19 मई को मतदाता अपनी राय मत पेटियों में भरेंगे। इस लोकसभा क्षेत्र से मुख्य प्रतिद्वंद्वी गठबंधन से झाविमो के उम्मीदवार प्रदीप यादव और भाजपा के निवर्तमान सांसद निशिकांत दूबे चुनाव मैदान में हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार यहां सीधा मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार निशिकांत दूबे एवं गठबंधन से झाविमो के उम्मीदवार प्रदीप यादव में ही सीमित रहेगा।

भाजपा के उम्मीदवार निशिकांत दूबे 2009 और 2014 में भी सांसद रहे हैं और यह उनका निरंतर कार्य क्षेत्र रहा है। वहीं कांग्रेस के फुरकान अंसारी भी 2004 में भाजपा के उम्मीदवार को पराजित कर विजयी हुए थे। सन् 2000 से 2004 तक प्रदीप यादव भाजपा के सांसद थे और ये वहां से भाजपा से लगातार सांसद रहेे जगदम्बी प्रसाद यादव के निधन के बाद उपचुनाव मंे विजयी हुए थे।

2014 का आंकड़ा देखा जाये तो भाजपा के निशिकांत दूबे ने मोदी लहर का लाभ लेते हुये 380500 मत प्राप्त किये थे वहीं दूसरे स्थान पर रही कांग्रेस के फुरकान अंसारी ने 319818 मत प्राप्त किये थे और वह लगभग 60 हजार मतों से पराजित हुए थे। वहीं जेवीएम के उम्मीदवार प्रदीप यादव को 193506 मत प्राप्त हुये थे। 2019 के चुनाव के गठबंधन में कांग्रेस, झामुमो, राजद और जेवीएम शामिल है। इस गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार श्री प्रदीप यादव बनाये गये हैं।

2014 में गोड्डा लोकसभा क्षेत्र के मतों के आंकड़े को यदि 2019 में संभावित रखकर जोड़ा जाये, तो भाजपा 380500, जदयू 14034 और आजसू 10998 के मतों को मिलाकर कुल 405532 मत बनते हैं। उसी तरह कांग्रेस 319818, झाविमो 193506 के मतों को मिलाकर कुल 513324 मत बनते हैं। अगर इस आंकड़े को आधार मानकर देखा जाये, तो भाजपा लगभग 1 लाख मतों से पिछड़ जायेगी।

गोड्डा लोकसभा अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र है और मतों के क्रम में ब्राह्मण जाति के बाद यादव जाति का वर्चस्व है। कांगे्रस के उम्मीदवार फुरकान अंसारी को लगभग 3 लाख 20 हजार मत प्राप्त हुए थे और वे भाजपा से मात्र 60 हजार मतों से पिछड़ गए थे। इस चुनाव में वह झाविमो के उम्मीदवार प्रदीप यादव के साथ हैं। गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक और यादव के मतों का झुकाव गठबंधन की ओर है, वहीं ब्राह्मण और वैश्य पिछड़ी जातियों का झुकाव भाजपा की तरफ है। आदिवासी मतदाताओं के मत भी चुनाव को प्रभावित करते हैं और उनका झुकाव संताल परगना की लगभग सभी सीटों पर झामुमो की तरफ रहता है।

जातीय समीकरण में गठबंधन से झाविमो के उम्मीदवार प्रदीप यादव से भाजपा के उम्मीदवार निशिकांत दूबे काफी पिछड़ते नजर आ रहे हंै। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजपुत, भूमिहार, ब्राहमण, वैश्य समाज के सूंड़ी, तेली तथा पिछड़े वर्ग से कुड़मी, कुशवाहा का बड़ा वोट बैंक भाजपा के साथ है। वहीं गठबंधन को एकमुश्त अल्पसंख्यकों एवं यादवों का मत प्राप्त होने की संभावना है और उसके साथ आदिवासी मतदाता भी जुड़े हैं।

चुनाव प्रचार चरम पर है। गिरते-उठते समीकरण एवं झुकाव पल-पल की कहानी लिख रहे हैं और मतदाताओं में भी उत्साह है। एक तरफ भाजपा के निशिकांत दूबे तो दूसरी तरफ महागठबंधन से झाविमो के प्रदीप यादव अपनी-अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

वर्तमान स्थिति परिस्थिति एवं सारे मतों का समीकरण महागठबंधन कांग्रेस, झामुमो, झाविमो एवं राजद, भाजपा-आजसू गठबंधन के संभावित मतों से 2019 के चुनावी मैदान में बहुत आगे नजर आ रहा है। मसलन महागठबंधन के उम्मीदवार प्रदीप यादव का पलड़ा भारी है।

 

यह INSIGHTONLINENEWS.IN का आकलन है। 23 मई की तरीख इस आंकलन की गवाह बनेगी।

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