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07 धनबाद: लोकसभा क्षेत्र : विश्लेषण एवं संभावना

07 धनबाद: लोकसभा क्षेत्र : विश्लेषण एवं संभावना
May 03
10:32 2019

धनबाद लोकसभा: हैट्रिक की ओर बढ़ती नजर आ रही है भाजपा

इनसाईट ऑनलाइन न्यूज

07 धनबाद लोकसभा चुनाव क्षेत्र में 12 मई को मतदाता अपनी राय मत पेटियों में भरेंगे। इस लोकसभा क्षेत्र से मुख्य प्रतिद्वंद्वी गठबंधन से कांग्रेस के उम्मीदवार कीर्ति आजाद और भाजपा के निवर्तमान पशुपतिनाथ सिंह चुनाव मैदान में हैं। वह  पीएन सिंह से पुकारे जाते हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार यहां सीधा मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार पशुपतिनाथ सिंह एवं कांग्रेस के कीर्ति आजाद बीच में ही सीमित रहेगा।
भाजपा के उम्मीदवार पशुपतिनाथ सिंह 2009 और 2014 में भी सांसद रहे हैं और यह उनका निरंतर कार्य क्षेत्र रहा है। जानकार सूत्र बताते हैं कि भाजपा से पीएन सिंह जमीन से जुड़े रहे हैं और जिलास्तरीय तथा प्रखंड स्तरीय चुनावों में भाग लेकर विजय प्राप्त करते रहे हैं।

कांग्रेस के उम्मीदवार कीर्ति आजाद कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के पुत्र हैं और लगातार भाजपा के टिकट पर दरभंगा लोकसभा सीट जो बिहार में है से तीन बार सांसद रहे हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मतभेद के कारण इन्हें टिकट नहीं मिलने की आशंका होते ही एकाएक अपने आप को धर्मनिरपेक्ष घोषित करते हुये कांग्रेस में शामिल हो गये। कांग्रेस ने तत्काल झारख्ंाड के धनबाद से उन्हें लोकसभा का उम्मीदवार घोषित कर दिया। विडंबना यह है कि कांग्रेस, आरजेडी समझौते में दरभंगा की सीट आरजेडी के पाले में चली गई और आरजेडी के लालू प्रसाद यादव के करीबी अब्दुलबारी सिद्धिकी वहां से लोक सभा के उम्मीदवार घोषित हो गये।

07 धनबाद: लोकसभा क्षेत्र : विश्लेषण एवं संभावना

ज्ञातव्य हो कि 1999 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने आरजेडी के साथ गठबंधन में बक्सर सीट गंवाई थी और वहां से निवर्तमान सांसद और पूर्व मंत्री केके तिवरी को रांची से उम्मीदवार घोषित कर दिया था।

केके तिवारी को भारी मतों से हार का मुंह देखना पड़ा और बाहरी होने की वजह से रांची के जनमानस ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। धनबाद में कांग्रेस ने सीख नहीं लेकर एक बार फिर वही प्रक्रिया अपनाई जिससे कमोबेस आज की तिथि में धनबाद में वही स्थिति बनी हुई है।

2014 का आंकड़ा देखा जाये तो भाजपा के पी एन सिंह ने मोदी लहर का लाभ लेते हुये 543491 मत प्राप्त किये थे वहीं आरजेडी, जेएमएम-कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार अजय कुमार दुबे ने 250537 मत प्राप्त किये थे और वह लगभग 03 लाख मतों से हारे थे। वहीं जेवीएम के उम्मीदवार को 90926 मत प्राप्त हुये थे। 2019 के चुनाव में कांग्रेस गठबंधन में जेवीएम भी शामिल है और यदि इन मतों को जोड़ दिया जाये तो 341463 मत बनते हैं।

वहीं आजसू जो भाजपा गठबंधन का हिस्सा है को 21277 मत प्राप्त हुये थे। यदि भाजपा में इनको जोड़ लिया जाये तो 2014 में कुल मत 564768 बनते हैं। आज के परिपेक्ष में यदि 2014 के आधार को लिया जाये तो कांग्रेस लगभग 2 लाख 25 हजार मतों से पिछड़ जाती है। 2009 के भी आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस का वोट बैंक कभी भी 2 लाख 50 हजार से ऊपर नहीं रहा है।

2009 में भी कांग्रेस को 2 लाख 24 मत प्राप्त हुये थे और वो दूसरे नंबर पर थी। चुनाव में इस बार एमसीसी का उम्मीदवार खड़ा नहीं है इसके मतों में यदि कांग्रेस सेंध मार पाती है तो निश्चित ही चुनाव में मुकाबला दिखाई देगा।

कांग्रेस धनबाद लोकसभा चुनाव में ब्राहमण उम्मीदवार पर दांव लगाती रही है। चूंकि ब्राहमण के मतों की संख्या काफी है। वहीं धनबाद में अल्पसंख्यक मत भी पर्याप्त हैं। अगर जातीय समीकरण में कांग्रेस के पक्ष में ब्राहमण और अल्पसंख्यक आते हैं तथा आदिवासी मतदाता जिनका झुकाव जेएमएम की तरफ रहता है तब कांग्रेस काफी मजबूत स्थिति में रहेगी।

07 धनबाद: लोकसभा क्षेत्र : विश्लेषण एवं संभावना

देखना यह है कि कांग्रेस से नाराज पूर्व में संसदीय चुनाव लड़े अजय कुमार दुबे अथवा सांसद रहे चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे ब्राहमण समाज के कान्यकुंज वर्ग से प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर इनके मतों का भी लाभ कांग्रेस के ब्राहमण समाज के मैथिल वर्ग के उम्मीदवार कीर्ति आजाद को मिलेगा कि नहीं। ब्राहमण समाज का वोट कांग्रेस को मिलता रहा है लेकिन अभी की अपेक्षा जनक स्थिति में वह अपेन घर भाजपा में वापस जा सकते हैं।

जातीय समीकरण में भाजपा से कांग्रेस पिछड़ती नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजपुत, भूमिहार, ब्राहमण (कान्यकुब्ज) वैश्य समाज के सूंड़ी, तेली तथा पिछड़े वर्ग से कुड़मी, कुशवाहा का बड़ा वोट बैंक भाजपा के साथ है। वहीं कांग्रेस मैथिल ब्राहमणों एवं अल्पसंख्यकों में सिमट कर रह गई है। शहरी ईलाके में अधिकतर मतदाता भाजपा का ही समर्थन करते हैं।

चुनाव प्रचार चरम पर है। गिरते-उठते समीकरण एवं झुकाव पल-पल की कहानी लिख रहे हैं और मतदाताओं में भी उत्साह है। एक तरफ भाजपा के पीएन सिंह तो दूसरी तरफ कांग्रेस के कीर्ति आजाद अपनी-अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

वर्तमान स्थिति परिस्थिति एवं सारे मतों का समीकरण भाजपा-आजसू गठबंधन का कांग्रेस‘-जेएमएम गठबंधन के संभावित मतों से 2019 के चुनावी मैदान में आगे नजर आ रहा है। मसलन भाजपा के उम्मीदवार पीएन सिंह शायद लगातार तीसरी बार सफलता होने की ओर बढ़ रहे हैं।

यह Insightonlinenews.in का आकलन है। 23 मई की तरीख इस आंकलन की गवाह बनेगी।

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