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09 जमशेदपुर, 10 सिंहभूम, 06 गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र: विश्लेषण एवं संभावना

09 जमशेदपुर, 10 सिंहभूम, 06 गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र: विश्लेषण एवं संभावना
May 02
09:16 2019

जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा की स्थिति मजबूत

इनसाइट ऑनलाइन डेस्क

09 जमशेदपुर लोकसभा में 12 मई को मतदाता अपनी राय मत पेटियों में भरेंगे। इस लोकसभा क्षेत्र से मुख्य प्रतिद्वंद्वी गठबंधन से जेएमएम के उम्मीदवार चंपई सोरेन जो वर्तमान में सरायकेला विधानसभा केे विधायक हैं और भाजपा उम्मीदवार निवर्तमान सांसद विद्युत वरन महतो चुनाव मैदान में हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार संभावना व्यक्त की जा रही है कि सीधा मुकाबला गठबंधन एवं भाजपा के बीच में ही सीमित रहेगा।

आज की तिथि में जहां भाजपा एवं गठबंधन दोनों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है वहीं 2014 का आंकड़ा देखा जाये तो भाजपा के विद्युत वरन महतो ने मोदी लहर का लाभ लेते हुये 464153 मत प्राप्त किये थे और जेवीएम के उम्मीदवार डाॅ.अजय कुमार जो वर्तमान में झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं ें 364277 मत प्राप्त कर दूसरे स्थान पर थे। 2014 का गठबंधन कांग्रेस, जेएमएम और आरजेडी में हुआ था। जेवीएम गठबंधन से बाहर थी।

कांग्रेस, जेएमएम और आरजेडी गठबंधन से जेएमएम के साझा उम्मीदवार निरूप महंती को तीसरा स्थान मिला था तथा उन्हें 138109 मत प्राप्त हुये थे। वहीं 2019 लोकसभा चुनाव में आरजेडी, कांग्रेस, जेएमएम गठबंधन में जेवीएम भी शामिल है। 2014 के आंकड़ों के अनुसार इन दोनों मतों को जोड़ दिया जाये तो भाजपा लगभग 38 हजार मतों से पीछे हो जायेगी और प्रतिशत मतों में भी 03 प्रतिशत से पिछड़ जायेगी।

09 जमशेदपुर, 10 सिंहभूम, 06 गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र: विश्लेषण एवं संभावना

2014 में जेएमएम ने उड़िया समाज से आये निरूप महंती को उम्मीदवार बनाया था। जबकि 2019 में गठबंधन से चंपई सोरेन जो आदिवासी समाज से आते हैं को गठबंधन का उम्मीदवार बनाया है। वहीं 2011 के उपचुनाव में कुर्मी समाज के स्थानीय नेता जेएमएम के उम्मीदवार थे। 2011 और 2014 में जेएमएम को लगभग 13 से 15 प्रतिशत मत प्राप्त हुये थे।

2014 में दूसरे स्थान पर रहे जेवीएम के डाॅ. अजय कुमार ने यह सीट समझौते के तहत जेएमएम के लिए छोड़ दी। जबकि आंकड़े बताते हैं कि मात्र 01 लाख मतों से ही अजय कुमार पीछे थे और वहीं जेएमएम के उम्मीदवार लगभग 03 लाख 25 हजार मतों से भाजपा से पीछे थे।

अब ये संदेहास्पद स्थिति बन गई है कि डाॅ. अजय कुमार ने जो वर्तमान में कांग्रेस अध्यक्ष हंै अपनी इस सीट को जेएमएम को आखिर समझौते में क्यों दी। राजनीतिक विशेषज्ञ कहते हैं कि डाॅ. अजय कुमार को आभास हो गया था कि हाल के दिनों में गठबंधन में शामिल दलों की जमीन जमशेदपुर लोकसभा चुनाव क्षेत्र में काफी खिसक गई है और इसी भय से यह सीट जेएमएम के पाले में छोड़ दी, ऐसी आम धारणा है।

09 जमशेदपुर, 10 सिंहभूम, 06 गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र: विश्लेषण एवं संभावना

जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा अथवा झामुमो इन्हीं दो दलों का विभिन्न चुनावों में वर्चस्व रहा है। उतार-चढाव की लड़ाई में कभी भाजपा कभी झामुमो ने जीत हासिल की है। एक बार डाॅ. अजय कुमार ने जेवीएम के टिकट पर उपचुनाव 2011 में जीता था। जमशेदपुर लोकसभा से मात्र एक बार आदिवासी नेता भाजपा के अर्जुन मुंडा को विजय प्राप्त हुई थी। जबकि अधिकतर कुड़मी समाज के नेताओं के हिस्से में यह सीट आती रही है।

जमशेदपुर लोकसभा में आदिवासियों की संख्या लगभग 04 लाख एवं कुड़मी-महतो की संख्या लगभग 03 लाख 50 हजार आंकी जाती है। कुड़मी समाज के ही हिस्से में यह सीट लगभग जाती रही है। क्योंकि इस समाज के मतदाता बहुत जागरूक हैं और मतदान में अपनी अच्छी भागीदारी निभाते हैं। आदिवासियों के मत आदिवासी उम्मीदवार और भाजपा के बीच हमेशा विभाजित होते रहे हंै साथ ही साथ उनके मतदान का प्रतिशत कुड़मी समाज के मतदान से काफी पीछे रहता हैं जिसका सीधा लाभ 2019 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार विद्युत वरन महतो के पक्ष में जाता दिखता है।

भाजपा के विद्युत वरन महतो कुरमी समाज से आते हैं और वर्तमान में भाजपा के पक्ष में शहरी और कई इलाकों में भारी रूझान है, उसका लाभ भी भाजपा उम्मीदवार को मिलेगा। जमशेदपुर शहरी क्षेत्र में आदिवासियों की संख्या बहुत कम है और वहां के अधिकतर मतदाता भाजपा के पक्ष में मतदान करते हैं। जमशेदपुर में भारी संख्या में सिख, बंगाली एवं उड़िया समुदाय के मतदाता हैं और ये अधिकतर भाजपा में पक्ष में ही जाते हैं।

चुनाव दिल्ली की गद्दी के लिए है। देश में वर्तमान स्थिति में विभिन्न कारणों से मतों का ध्रुवीकरण भी हुआ है जिसका सीधा प्रभाव जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र में भी है।

चुनाव प्रचार चरम पर है। गिरते-उठते समीकरण एवं झुकाव पल-पल की कहानी लिख रहे हैं और मतदाताओं में भी उत्साह है। एक तरफ भाजपा के विद्युत वरन महतो दूसरी तरफ जेएमएम के चंपई सोरेन अपनी-अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

सारी स्थिति-परिस्थिति एवं मतों का समीकरण भाजपा के पक्ष में है और भाजपा के संभावित मतों से 2019 के चुनावी मैदान में गठबंधन की सारी पार्टियों के मत पिछड़ते नजर आ रहे हैं।

Raymond

सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र में भाजपा और गठबंधन के बीच बहुत कम अंतर से हो सकता है फैसला

10 सिंहभूम (एसटी) लोकसभा क्षेत्र में 12 मई को मतदाता अपनी राय मत पेटियों में भरेंगे। इस लोकसभा क्षेत्र से मुख्य प्रतिद्वंद्वी गठबंधन से कांग्रेस की उम्मीदवार श्रीमती गीता कोड़ा और भाजपा के उम्मीदवार निवर्तमान सांसद लक्ष्मण गिलुआ चुनाव मैदान में हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यहां सीधा मुकाबला गठबंधन एवं भाजपा के बीच में ही सीमित रहेगा।

आज की तिथि में जहां भाजपा एवं गठबंधन दोनों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं 2014, का आंकड़ा देखा जाये तो भाजपा के लक्ष्मण गिलुआ ने जब मोदी लहर का लाभ लेते हुये 303131 मत प्राप्त किये थे और गठबंधन से कांग्रेस की उम्मीदवार गीता कोड़ा को 215607 मत प्राप्त हुये थे।

गीता कोड़ा अपने पति पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा द्वारा स्थापित पार्टी जय भारत समता पार्टी के नाम पर 2014 के चुनाव में मैदान में थीं तथा उस पार्टी का विलय कांग्रेस में होने के बाद अभी 2019 में गीता कोड़ा गठबंधन की कांग्रेस उम्मीदवार हैं। 2014 में गीता कोड़ा लभगग 87 हजार मतों से चुनाव में हारी थीें।
झारखंड की यह सीट बहुत रोचक और प्रतिष्ठित मानी जा रही है ।

09 जमशेदपुर, 10 सिंहभूम, 06 गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र: विश्लेषण एवं संभावना
2014 के आंकड़ों को देखा जाये तो वर्तमान में गठबंधन में शामिल जेवीएम और कांग्रेस को लगभग 01 लाख 50 हजार मत प्राप्त हुये थे और यदि इन मतों को 2014 में गीता कोड़ा के प्राप्त मतों में जोड़ा जाये तो गीता कोड़ा 2014 के आंकड़ों के अनुसार भाजपा से 60 हजार मतों से आगे निकल जाती है।

वर्तमान स्थिति में मोदी विरोधी पार्टियां, झारखंड दिशोम पार्टी, आॅल इंडिया फारवर्ड ब्लाॅक भी इस बार मैदान में नहीं हैं और इन दोनों को भी 2014 में लगभग 40 हजार मत प्राप्त हुये थे।

धन-बल और समाजिक राजनीतिक प्रभाव में दोनों प्रत्याशियों को कोई कमी नहीं है। एक के पास धन-बल के साथ गठबंधन का भी बल है साथ ही, मोदी विरोधी दलों का भी मत है जिसे उसे अपने पक्ष में करना है। तो, दूसरी ओर भाजपा सीे मजबूत पार्टी के पक्ष में आरएसएस, सरस्वती शिशु मंदिर, एकल विद्यालयों तथा अन्य हिंदूवादी संगठनों में कार्यरत संस्थाओं का पूर्ण समर्पण के साथ समर्थन उसके पक्ष में बना रहेगा।

यदि मतों का प्रतिशत 2014 की तरह ही रहा तो निश्चित रूप से गठबंधन की कांग्रेस उम्मीदवार गीता कोड़ा भाजपा उम्मीदवार लक्ष्मण गिलुआ पर बहुत भारी साबित होंगी, ऐसा राजनीतिक पर्वेक्षकों का मानना है और इनसाईट आॅनलाईन न्यूज का भी आकलन है।

मतदान के पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र के मुख्यालय चाईबासा में होना है। नरेंद्र मोदी की सभा से अगर 2014 के मुकाबले मतों में 02 प्रतिशत की भी भाजपा को बढोत्तरी होती है तो पलड़ा भाजपा के पक्ष में झुकेगा।

सिंहभूम लोकसभा चुनाव क्षेत्र में आदिवासी ‘हो‘ समाज बहुल क्षेत्र है और परस्पर मुकाबला कर रहे दोनों ही उम्मीदवार हो समाज से आते हैं। चुनाव दिल्ली की गद्दी के लिए है। देश में वर्तमान स्थिति में विभिन्न कारणों से मतों का धु्रवीकरण भी हुआ है जिसका सीधा प्रभाव सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र में भी है।

चुनाव प्रचार चरम पर है। गिरते-उठते समीकरण एवं झुकाव पल-पल की कहानी लिख रहे हैं और मतदाताओं में भी उत्साह है। एक तरफ भाजपा के लक्ष्मण गिलुआ दूसरी तरफ गठबंधन से कांग्रेस की गीता कोड़ा अपनी-अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

वर्तमान स्थिति परिस्थिति में मतों का समीकरण गठबंधन के पक्ष में है और गठबंधन के संभावित मतों से 2019 के चुनावी मैदान में भाजपा बहुत कम अंतर से पिछड़ती नजर आ रही है। नरेंद्र मोदी की सभा के बाद यदि मतों में बदलाव होता है तो पाला भाजपा के पक्ष में जायेगा। अब देखना यह है कि उंट किस करवट बैठता है। इस संसदीय क्षेत्र में 1257462 मतदाता अपना सांसद चुनेंगे।

गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र में आजसू-भाजपा गठबंधन का पलड़ा भारी

06 गिरिडीह लोकसभा में 12 मई को मतदाता अपनी राय मत पेटियों में भरेंगे। इस लोकसभा क्षेत्र से मुख्य प्रतिद्वंद्वी गठबंधन से जेएमएम के उम्मीदवार जगन्नाथ महतो और भाजपा-आजसू गठबंधन के उम्मीदवार आजसू के चंद्रप्रकाश चैधरी चुनाव मैदान में हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यहां सीधा मुकाबला जेएमएम के उम्मीदवार जगन्नाथ महतो एवं आजसू के चंद्रप्रकाश चैधरी बीच में ही सीमित रहेगा।

2014 सहित लगातार 5 बार गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे भाजपा के रवींद्र पाण्डेय की यह सीट भाजपा ने आजसू से समझौते के तहत आजसू की झोली में डाल दी। राजनीतिक क्षेत्रों में भाजपा की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली इस सीट को छोड़ देना भाजपा संगठन के समर्पित कैडर एवं रवीद्र पाण्डेय के निजी प्रभाव के कैडर में भारी असंतोष पूरे लोकसभा क्षेत्र में देखने को मिलता है।

आज की तिथि में जहां आजसू एवं जेएमएम दोनों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं 2014 का आंकड़ा देखा जाये तो भाजपा के रवींद्र पाण्डेय ने मोदी लहर का लाभ लेते हुये 391913 मत प्राप्त किये थे वहीं जेएमएम एवं कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार जगन्नाथ महतो ने 351600 मत प्राप्त किये थे और वह लगभग 40 हजार मतों से पिछड़ गये थे।

09 जमशेदपुर, 10 सिंहभूम, 06 गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र: विश्लेषण एवं संभावना

वहीं जेवीएम के उम्मीदवार को 57380 मत प्राप्त हुये थे। 2019 के चुनाव में जेएमएम और जेवीएम में गठबंधन है और यदि इन मतों को जोड़ दिया जाये तो 408980 मत बनते हैं। वहीं जदयू के जलेश्वर महतो को 40010 मत प्राप्त हुये थे और आजसू के उम्मीदवार को 55531 मत प्राप्त हुये थे।

जदयू का कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है और जदयू का बिहार और झारखंड स्तर पर भाजपा से गठबंधन है। वहीं आजसू का उम्मीदवार गठबंधन का उम्मीदवार है। यदि इन दोनों के मत 2014 के प्राप्त मतों में शामिल किये जाये तो 487454 मत आंकड़ें में आते है फिर भी गठबंधन से जेएमएम के उम्मीदवार लगभग 78 मतों से पिछड़ते नजर आते हैं।

यदि मतों का आंकड़ा 2014 की तरह ही रहा जिसकी संभावना राजनीतिक विश्लेषक करते हैं तो निश्चित रूप से आजसू के भाजपा गठबध्ंान वाले उम्मीदवार चंद्रप्रकाश चैधरी गठबंधन के जेएमएम उम्मीदवार जगन्नथ महतो पर बहुत भारी साबित होंगे।

2014 में पिछड़ी जाति के कुड़मी समाज एवं कुशवाहा समाज के लोगों ने एकमुस्त मत जेएमएम के उम्मीदवार जगन्नथ महतो को दिये थे जो कुड़मी समाज से आते हैं। गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र में कुड़मी समाज के बाद कुशवाहा समाज की संख्या भी मतों के मामले में काफी है। इस बार यदि कुड़मी समाज के मत जगन्नथ महतो को मिलते हैं तो कुशवाहा समाज के मत चंद्रप्रकाश चैधरी को मिलेंगे।

कुशवाहा समाज के मत चंद्रप्रकाश चैधरी को मिलने के बाद जगन्नाथ महतो के पिछले आकड़ों और वर्तमान आकड़ों में काफी गिरावट आयेगी। भाजपा कैडर एवं पूर्व में रहे सांसद के प्रभाव वाले कैडर की नाराजगी भी कुछ मतों को प्रभावित कर सकती है।

सूत्र बताते हैं कि हाल में प्रधानमंत्री मोदी की जमुआ में संपन्न सभा के बाद इसमें कमी आई है और ये नाराज चल रहे कैडर बहुत ज्यादा मतों का नुकसान नहीं कर पायेंगे। पूर्व के विश्लेषण इस बात की गवाही देते हैं कि गिरिडीह तथा अन्य विधानसभा अथवा लोकसभा चुनावों में कांग्रेस अपने सहयोगी गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में अपने मत स्थानांतरित नहीं कर पाती है।

चुनाव प्रचार चरम पर है। गिरते-उठते समीकरण एवं झुकाव पल-पल की कहानी लिख रहे हैं और मतदाताओं में भी उत्साह है। एक तरफ आजसू के चंद्रप्रकाश चैधरी दूसरी तरफ जेएमएम के जगन्नथ महतो अपनी-अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

वर्तमान स्थिति परिस्थिति एवं सारे मतों का समीकरण भाजपा-आजसू गठबंधन का कांग्रेस‘-जेएमएम गठबंधन के संभावित मतों से 2019 के चुनावी मैदान में आगे नजर आ रहा है। मसलन आजसू के उम्मीदवार चंद्रप्रकाश चैधरी का पलड़ा भारी है।

यह Insightonlinenews.in का आकलन है। 23 मई की तरीख इस आंकलन की गवाह बनेगी।

 

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