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12-लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र: प्रथम संक्षिप्त विश्लेषण एवं संभावना

12-लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र: प्रथम संक्षिप्त विश्लेषण एवं संभावना
April 23
09:28 2019

लोहरदगा लोकसभा सीट: भाजपा और गठबंधन, निर्दलीय के बीच फंसे

इनसाईट ऑनलाइन  न्यूज डेस्क

लोहरदगा लोकसभा में 29 अप्रैल  को मतदाता अपनी राय मत पेटियों में भरेंगे। इस लोकसभा क्षेत्र से मुख्य प्रतिद्वंद्वी गठबंधन से कांग्रेस  के उम्मीदवार श्री सुखदेव भगत और भाजपा उम्मीदवार श्री सुदर्शन भगत एवं मुख्यतः कांग्रेस से मांडर क्षेत्र के विधायक रहे श्री देव कुमार धान चुनाव मैदान में हैं।

राजनीतिक जानकारों के द्वारा संभावना व्यक्त की जा रही है कि सीधा मुकाबला गठबंधन एवं भाजपा के बीच में ही सीमित रहेगा। लेकिन श्री देव कुमार धान का भी जो झारखण्ड पार्टी (होरो) से उम्मीदवार हैं, कम आंकना राजनीतिक भूल होगी।

आज की तिथि में जहां भाजपा एवं गठबंधन दोनों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है वहां श्री देव कुमार धान भी पीछे नहीं हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में श्री देव कुमार धान मांडर विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़े थे और 40 हजार मत प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रहे थे।

12-लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र: प्रथम संक्षिप्त विश्लेषण एवं संभावना

2014 के आम चुनाव, जिसमें भाजपा की तीव्र मोदी लहर चल रही थी, उसका आंकड़ा देखा जाय, तो भाजपा के सुदर्शन भगत 2,26,666 मत प्राप्त कर गठबंधन के कांग्रेसी उम्मीदवार श्री रामेश्वर उरांव से मात्र 6489 मतों से विजयी हुये थे।

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जहां कि गठबंधन के कांग्रेसी उम्मीदवार को रामेश्वर उरांव को 220177 मत प्राप्त हुये थे। वहीं 2014 में छात्र नेता श्री चमरा लिंडा को लगभग 118000 मत प्राप्त हुये थे। इन मतों का आज की तिथि में यदि पार्टी के पक्ष में विश्लेषण किया जाये तो ये मत भाजपा एवं कांग्रेस दोनों से सेंध मार कर प्राप्त किये गये थे।

 

वर्तमान में 2014 के आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण किया जाये तो स्पष्ट है कि श्री देव कुमार धान को विधानसभा में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में प्राप्त 40 हजार मत वस्तुतः कांग्रेस के खाते से कट कर ही उन्हें मिले थे। यह स्थिति रही तो भाजपा के लिए इस बार अनुकूल स्थिति होगी।

लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक वोट काफी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यदि सारे अल्संख्यक मत एकमुस्त कांग्रेस के पक्ष में जाते हैं तो भाजपा को पिछड़ने से कोई नहीं रोक सकता।
सरना धर्मकोड पिछले कई वर्षों से लोहरदगा क्षेत्र में चर्चित रहा है एवं इस धर्मकोड को लागू करने के लिए आंदोलन के द्वारा अग्रिम नेता के रूप में श्री देव कुमार धान की पहचान है।

12-लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र: प्रथम संक्षिप्त विश्लेषण एवं संभावना

लोहरदगा सरना धर्मावलंबी बहुल क्षेत्र माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि सरना धर्मावलंबी का झुकाव जिसके पक्ष में होगा अल्पसंख्यक मतों का लाभ उसे ही मिलेगा। यदि यह परिस्थिति बनती है तो श्री देव कुमार धान को किसी मायने में कम आंका जाना भूल होगी। वहीं यह सर्वविदित है कि उस क्षेत्र में वैश्य समाज की विभिन्न प्रजातियों जैसे तेली समाज, सूड़ी समाज का झुकाव सदा से भाजपा के पक्ष में ही रहा है।

वर्षों पूर्व लोहरदगा संसदीय क्षेत्र में प्रधानमंत्री के रूप में कांग्र्रेस नेता श्रीमती इंदिरा गांधी के बाद अभी 24 अप्रैल को वर्तमान भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी पहुंच रहे हैं। फिर भी इससे 2014 में मिले मतों में इजाफा होने की संभावना नहीं बनती है। चंूकि 2014 में चमरा लिंडा के मत ज्यादातर कांग्रेस एवं भाजपा विरोधी थे तो इन मतों का सीधा लाभ श्री देव कुमार धान को मिलता दिखाई दे रहा है।

जहां एक ओर भाजपा-कैडर के साथ-साथ भाजपा से संबंधित आरएसएस, सरस्वती शिशु मंदिर, एकल विद्यालय एवं वनवासी कल्याण केंद्र जैसी संस्थाएं सरना आदिवासियों के बीच विविध सेवा कार्य में सक्रिय हैं वहीं अल्पसंख्यक समाज भी पीछे नहीं है और विभिन्न ईसाई मिशनरियां भी काफी लंबे अरसे से स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं तथा अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज में भी शिक्षा के क्षेत्र में सक्रियता बढ़ी है। इन्हीें कारणों से क्षेत्र में मतों का स्पष्ट ध्रुवीकरण होता दिखाई देता है।

कांग्रेस कैडर के मामले में भाजपा से काफी पीछे दिखाई देती है। चुनाव दिल्ली की गद्दी के लिए है। देश में वर्तमान स्थिति में विभिन्न कारणों से मतों का ध्रुवीकरण हुआ है पर आदिवासी क्षेत्रों में ऐसे धु्रवीकरण का प्रभाव सीमित क्षेत्रों में हो सकता है। यदि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आगमन के बाद संपूर्ण ध्रुवीकरण हुआ तो समीकरण में बाकी पार्टियां एवं उम्मीदवार पिछड़ते नजर आयेंगे।

चुनाव प्रचार चरम पर है। गिरते-उठते समीकरण एवं झुकाव पल-पल की कहानी लिख रहे हैं और मतदाताओं में भी उत्साह है। एक तरफ गठबंधन के उम्मीदवार सुखदेव भगत हैं, दूसरी ओर भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगत हैं जबकि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में झारखंड पार्टी से श्री देव कुमार धान अपनी-अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

यह insightonlinenews.in का प्रारम्भिक आकलन है। अगला आकलन मतदान की तिथि जैसे-जैसे बढ़ेगी, insightonlinenews.in आपको प्रस्तुत करता जायेगा।

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