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420 महिला समूह के माध्यम से खरीदा जा रहा लघु वनोपज

420 महिला समूह के माध्यम से खरीदा जा रहा लघु वनोपज
February 17
08:27 2020
  • दंतेवाड़ा में बनेगा वृहद लघु वनोपज प्रोसेसिंग हब

जगदलपुर,17 फरवरी । लघु वनोपज के ग्रामीण संग्रहणकर्ताओं से 420 महिला स्वसहायता समूह के माध्यम से निर्धारित समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था तथा 23 वन धन केंद्र के माध्यम से प्रसंस्करण किया जा रहा है। जगदलपुर जिले में 138 महिला स्व सहायता समूह ग्रामस्तर पर सक्रियता के साथ अपना कार्य कर रही है। वहीं 49 महिला स्व सहायता समूह हाट बाजार स्तर पर वनोपज का क्रय कर रही है। तथा 10 वन धन केंद्र के माध्यम से प्रसंस्करण किया जा रहा है।

दंतेवाड़ा जिले में 34 ग्राम स्तर की स्व सहायता समूह तथा 14 हाट बाजार स्तर के स्व सहायता समूह एवं 5 वन धन केंद्र कार्यरत है। वहीं सुकमा जिले में 64 ग्राम स्तर के स्व सहायता समूह 26 हाट बाजार स्तर की के स्व सहायता समूह एवं 4 वन धन केंद्र कार्यरत है। बीजापुर जिले में 64 ग्राम स्तर के स्व सहायता समूह 31 हाट बाजार स्तर के स्व सहायता समूह एवं 4 वन धन केंद्र कार्यरत हैं।

बस्तर संभाग में वनाच्छादित क्षेत्र होने से यहां बहुतायत से लघु वनोपज का उत्पादन स्थानीय ग्रामीण संग्रहण कर्ताओं के द्वारा किया जाता है। जिसके तहत बस्तर संभाग में पाई जाने वाली लघु वनोपज का समर्थन मूल्य निर्धारित कर ग्राम स्तर पर हाट बाजार के स्तर पर एवं वन धन केंद्र के स्तर पर महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से किया जा रहा है। लघु वनोपज केप्रसंस्करण के बाद विक्रय से प्राप्त लाभांश को लघु वनोपज संग्रहण कर्ताओं के मध्य वितरित किए जाने की व्यवस्था भी की गई है, इससे लघु वनोपज संग्रहण कर्ताओं को तेंदूपत्ता संग्रहण कर्ताओं की तरह अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। लघु वनोपज के अच्छी कीमत संग्राहक को प्राप्त हो सके इसके लिए दंतेवाड़ा में बृहद लघु वनोपज प्रोसेसिंग हब विकसित किए जाने की योजना पर कार्य शुरू हो गया है।

इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक शाहिद खान ने बताया कि बस्तर के वनों से प्राप्त होने वाले लघु वनोपज के 22 प्रजातियों का शासन के द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। इससे नीचे किसी भी संग्राहक से वनोपज नहीं खरीदा जाएगा।संग्राहकों से लघु वनोपज खरीदने की ग्राम स्तर से लेकर वन धन केंद्र तक व्यवस्था की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण लघु वनोपज संग्रहण कर्ताओं को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाना है। जिससे ग्रामीण संग्रहण कर्ता उत्साहित होकर लघु वनोपज के संग्रहण में अपना योगदान दे सकें। तथा वनों से ग्रामीणों की आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

(ह‍ि.स.)

अब 06 फरवरी को होगी महिलाओं के धार्मिक मामले पर सुनवाई

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