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उच्चतम न्यायालय पहुंचा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ मामला

नयी दिल्ली, 17 फरवरी : राजधानी में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित कर समन्वय और सामूहिक रूप से काम करने का केंद्र समेत सभी राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है।

याचिका में केंद्र सरकार और राज्यों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा 2014 में ‘कार्यक्रमों और सामूहिक समारोह स्थलों पर भीड़ का प्रबंधन’ शीर्षक से तैयार की गई रिपोर्ट के कार्यान्वयन और विचार के लिए निर्देश देने की मांग की गयी है।

याचिकाकर्ता विशाल तिवारी ने अदालत से अनुरोध किया कि वह भारतीय रेलवे को रेलवे स्टेशनों और प्लेटफार्मों पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए गलियारों को चौड़ा करना, बड़े ओवरब्रिज और प्लेटफार्मों का निर्माण करने के उपाय करने का निर्देश दे। याचिका में रेलवे को रैंप और एस्केलेटर के माध्यम से प्लेटफार्मों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने तथा व्यस्त समय के दौरान आगमन या प्रस्थान प्लेटफार्मों में किसी भी तरह के बदलाव से सख्ती से बचने का निर्देश देने की गुहार लगाई गई है।

अधिवक्ता ने अपनी याचिका में कहा, “यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए बैरियर, रस्सियों और भीड़ नियंत्रण द्वारों का उपयोग करना आवश्यक है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध स्थान के अनुसार यात्रियों की संख्या से अधिक टिकट वितरित नहीं करना चाहिए।”

श्री तिवारी ने केंद्र सरकार और रेलवे को 15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ की घटना पर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देने की भी मांग की, जिसमें 18 लोगों की जान चली (रेलवे के अनुसार) गई थी।

उन्होंने कहा, “भगदड़ की घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन जब हम सीसीटीवी कैमरे जैसी तकनीक से पूरी तरह लैस हैं, हमारे पास पर्याप्त बल, मानव शक्ति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है और हम पहले की तुलना में आर्थिक रूप से भी मजबूत हैं, तब ऐसी भगदड़ नहीं होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा, “यह महज एक घटना नहीं है, बल्कि एक विफलता और लापरवाही है, जिसकी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने हताहतों और लापता लोगों का वास्तविक आंकड़ा जारी नहीं किया है, जो शायद उसकी लापरवाही और विफलता को छिपाने के लिए किया गया हो।

उन्होंने कहा कि सरकार पर वास्तविक आंकड़ों का खुलासा करने और मृतकों तथा लापता लोगों के लिए काउंटर और हेल्पलाइन नंबर स्थापित करने की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि उनके रिश्तेदार और परिवार के सदस्य उनकी स्थिति के बारे में पूछताछ कर सकें।

याचिकाकर्ता ने आग्रह किया कि रेल मंत्रालय को कॉरिडोर को चौड़ा करने, बड़े ओवरब्रिज और प्लेटफॉर्म बनाने जैसे कदम उठाने चाहिए, जिससे भीड़भाड़ कम हो सके और भगदड़ का खतरा कम हो।

श्री तिवारी ने यह भी प्रार्थना की कि रैम्प और एस्केलेटर के माध्यम से प्लेटफार्मों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने से कुछ उच्च वर्ग के लोगों को भी सुविधा मिल सकती है। अतिविशिष्ट व्यक्तियों के लिए सरकार सर्वोत्तम सुविधा और सुरक्षा प्रदान कर सकती है, लेकिन आम नागरिकों को हमेशा उनके भाग्य और नियति पर छोड़ दिया जाता है।

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