HindiJharkhand NewsNewsPolitics

 ईडी ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के पीएस सहित 21 ठिकानों पर दी दबिश

रांची, 04 अप्रैल । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आयुष्मान घोटाले मामले में रांची सहित कुल 21 ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी ने शुक्रवार की सुबह करीब सात बजे आयुष्मान घोटाले से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की। इसमें राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री निजी सचिव ओम प्रकाश सिंह के जमशेदपुर स्थित आवास पर शामिल है लेकिन पूर्व स्वास्थ्य मंत्री का निजी सचिव ईडी के हाथ नहीं लगा। वह छापेमारी से पहले घर से बाहर निकला था। ईडी अधिकारियों के साथ संपर्क होने के बाद उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया। ओम प्रकाश पर घोटाले में शामिल लोगों के साथ करीबी संपर्क रखने का आरोप है। ईडी बन्ना गुप्ता के निजी सचिव के इस घोटाले की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देख रही है।

वहीं, राजधानी रांची में ईडी के अधिकारियों ने जिन जगहों पर दबिश दी उनमें अशोक नगर, पीपी कंपाउंड, एदलहातू, बरियातू, लालपुर और चिरौंदी शामिल है। इसके अलावा ईडी ने जमशेदपुर और बोकारो सहित राज्य के कुल 17 ठिकानों पर छापेमारी की। साथ ही ईडी ने पश्चिम बंगाल के दो और उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली के एक-एक ठिकानों पर छापेमारी की है।

छापेमारी के दौरान ईडी की टीम ने कई सरकारी अधिकारियों के आवासों को खंगाला। इसमें झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी(झसास) के एडिशनल एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अभिषेक श्रीवास्तव, सीनियर कंसल्टेंट वैभव राय के आलावा सेफवे टीपीए और इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारियों के ठिकाने शामिल हैं। ईडी ने पूर्व एडिशनल डायरेक्टर को नियुक्तियों को आसान बनाने और अवैध लेनदेन को बढ़ावा देने में शामिल पाया है।

ईडी सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि छापेमारी के दौरान कुल 20 लाख रुपये कैश और निवेश से संबंधित कई दस्तावेज जब्त किये गये हैं।

ईडी ने प्रारंभिक जांच में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के फर्जी दावों का भुगतान कराने में सीनियर कंसल्टेंट वैभव राय की संलिप्तता पायी है। ईडी ने नीरज कंसल्टेंट कंपनी से जुड़े लोगों को भी छापेमारी के दायरे में शमिल किया है। इसके अलावा फर्जी दावों के भुगतान में थर्ड पार्टी असेसमेंट(टीपीए) का काम करने वाली कंपनी सेफवे टीपीए के कर्मचारियों दयाशंकर चौधरी के अलावा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी कर्मचारी मनीष के ठिकानों को छापेमारी की दायरे में शामिल किया गया है।

दयाशंकर चौधरी ने अपना एक अस्पताल भी खोल रखा है। झारखंड में थर्ड पार्टी असेसमेंट का काम सेफवे इंश्योरेंस ब्रोकर प्राइवेट लिमिटेड की सेफवे टीपीए नामक कंपनी करती है। सेफवे प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक इंद्रजोत सिंह को सरकारी बीमा योजना में गड़बड़ी करने के आरोप में अहमदाबाद सीबीआई कोर्ट पांच साल की सजा सुना चुकी है। झारखंड में भी सेफवे टीपीए के एक कर्मचारी ने अस्पतालों के किये जाने वाले भुगतान में 10 प्रतिशत की दर से कमीशन लेने का वीडियो पिछले दिनों वायरल हुआ था।

ईडी ने हजारीबाग के सनसाइन हॉस्पिटल पर भी छापा मारा है। इस अस्पताल पर भी मुर्दों का इलाज करने का आरोप लगा था और अस्पताल को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि बाद में इसे फिर से अस्पताल चलाने की अनुमति दे दी गयी थी। इस अस्पताल में भर्ती एक मरीज की मौत हो गयी थी। लेकिन आयुष्मान के पोर्टल पर उसका इलाज चल रहा था। जांच के दौरान मरीज के नंबर पर फोन कर उसकी स्थिति की जानकारी ली। इसमें इस बात की जानकारी मिली कि मरीज की मौत तीन दिन पहले हो चुकी है और उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। इस घटना के बाद सरकार के स्तर से अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गयी थी। हालांकि बाद में इसे बंद कर दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ओर से संसद में आयुष्मान योजना पर रिपोर्ट पेश करने के बाद ईडी ने स्वास्थ्य विभाग से योजना में हुई गड़बड़ी और की गयी कार्रवाई से संबंधित जानकारी मांगी थी।

जवाब में राज्य सरकार ने ईडी को पत्र भेज कर आयुष्मान योजना में हुई गड़बड़ी और की गयी कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट भेजी थी। साथ ही गड़बड़ी के सिलसिले में दर्ज की गयी प्राथमिकी की जानकारी दी थी।

ईडी ने इन प्राथमिकियों के आधार पर इस प्राथमिकी को आर्थिक अपराध सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) के तौर पर दर्ज की थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *